You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
म्यांमार: तख्तापलट का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई
सोमवार को पूरे म्यांमार में मज़दूर देशव्यापी हड़ताल पर चले गए हैं. म्यांमार में चुनी गई नेता आंग सान सू ची की रिहाई और देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए तीसरे दिन भी विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है.
सोमवार को विरोध-प्रदर्शनों में भाग ले रहे हज़ारों लोग यंगून और मांडले शहर में इकट्ठा हो गए. दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए म्यांमार की राजधानी नेपीडव में प्रशासन ने पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों को तैनात कर दिया गया है.
एक दशक से भी ज़्यादा वक्त में पहली बार म्यांमार में इतने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए हैं.
चंद दिन पहले ही म्यांमार में सेना ने तख्तापलट कर दिया है. सेना ने तख्तापलट के पीछे वजह बताई है कि पिछले चुनाव फर्जी थे, हालांकि, सेना ने इसका कोई सबूत नहीं दिया है.
इसके साथ ही सेना ने एक साल के लिए म्यांमार में आपातकाल लगा दिया है. सेना ने सत्ता कमांडर-इन-चीफ़ मिन ऑन्ग ह्लाइंग को सौंप दी है.
दूसरी ओर, आंग सान सू ची और उनकी पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के वरिष्ठ नेताओं और राष्ट्रपति विन मिन को उनके घरों में ही नज़रबंद कर दिया गया है.
'हम काम पर नहीं जा रहे'
सोमवार की सुबह तक हज़ारों लोग नेपीडाव में इकट्ठा हो चुके थे. बीबीसी बर्मी भाषा सेवा के मुताबिक़, दूसरे शहरों में भी बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर उतर आए हैं.
इन प्रदर्शनकारियों में शिक्षक, वकील, बैंक अधिकारी और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं. करीब एक हज़ार शिक्षकों ने यंगून के एक कस्बे से सुले पैगोडा की तरफ मार्च निकाला है.
ये भी पढ़ें - म्यांमार तख़्तापलट से भारत को नुक़सान होगा या फायदा?
चुनावों में धांधली के नाम पर सेना ने सत्ता हथियाई
विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेने और काम पर न जाने के लिए लोगों से ऑनलाइन भी अपील की जा रही है.
कपड़े की एक फैक्टरी में काम करने वाले 28 साल के निन ताजिन ने न्यूज एजेंसी एएफ़पी को बताया, "आज काम का दिन है, लेकिन हम काम पर नहीं जाएंगे भले ही हमारी तनख्वाह क्यों न काट ली जाए."
नेपीडाव में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया है और इसमें कुछ लोगों के घायल होने की भी ख़बर है.
इंटरनेट पर आए इस घटना के एक वीडियो में ऐसा दिख रहा है कि भीगने के बाद प्रदर्शनकारी अपनी आंखें मल रहे हैं और एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं.
इसके अलावा कहीं से हिंसा की ख़बरें नहीं आई हैं. अन्य वीडियोज़ में बड़ी तादाद में लोग हाथों में तख्तियां लिए और नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं.
बीते हफ्ते, म्यांमार की सेना ने सत्ता का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था. इससे पहले आम चुनाव हुए थे जिसमें एनएलडी पार्टी को भारी बहुमत मिला था.
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि नवंबर में हुए चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है. सैन्यबलों ने विपक्ष की दोबारा वोटिंग की मांग का समर्थन किया था.
वहीं चुनाव आयोग ने कहा है कि इन दावों को साबित करने के लिए कोई साक्ष्य मौजूद नहीं हैं.
म्यांमार में तख्तापलट ऐसे वक्त पर हुआ है जब संसद का नया सत्र शुरू होने ही वाला था.
सेना ने अहम मंत्रालयों में मंत्रियों को हटाया
सेना ने वित्त, स्वास्थ्य, गृह और विदेश समेत सभी अहम मंत्रालयों में मंत्रियों को हटाकर अपने लोग नियुक्त कर दिए हैं.
साथ ही फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसी सोशल साइट्स को भी बंद कर दिया गया है. हालांकि शनिवार और रविवार को हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को रोक पाने में सेना नाक़ाम रही है.
म्यांमार में 2007 में हुई भगवा क्रांति (सैफ्रन रिवॉल्यूशन) के बाद से यह पहला व्यापक विरोध-प्रदर्शन है. उस वक्त हज़ारों बौद्ध भिक्षु सैन्य शासन के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आए थे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)