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यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस के बाक़ी पड़ोसी देशों को क्या है डर?
- Author, कात्या एडलर
- पदनाम, यूरोप एडिटर, बीबीसी
अग्रिम पंक्ति के लिए सॉना...यह पैसे जुटाने के लिए बनाया गया कोई नारा नहीं है. एक ऐसा नारा जो यूक्रेन में युद्ध के लिए सुनने की उम्मीद करते हैं.
आप समझ सकते हैं कि यूक्रेन अपने सहयोगियों से लंबी दूरी की मिसाइलों और एफ-16 लड़ाकू विमानों की मांग कर रहा है. लेकिन सौना?
एस्टोनियाई फिल्म निर्माता और मानवतावादी कार्यकर्ता इल्मर राग ने लगातार यूक्रेन की यात्राएं की हैं. वो यूक्रेन के सैकड़ों सैनिकों के लिए मोबाइल सौना यूनिट बना रहे हैं. इसके लिए उन्होंने क्राउड फंडिंग की है.
इस सौना में सैनिकों के लिए शॉवर और वॉशिंग मशीन की सुविधा है. उन्हें रूसी गोलाबारी से बचाने के लिए सावधानीपूर्वक छिपाया जा सकता है.
यदि आप ऐसे किसी कस्टमाइज्ड सॉना की तलाश में हैं, तो किसी एस्टोनियाई से पूछना ठीक रहेगा. वहां सॉना संस्कृति बहुत बड़ी है.
एस्टोनियाई सैनिक मोबाइल सॉना के बिना बहुत कम ही यात्रा करते हैं. यह उनके अफगानिस्तान और लेबनान के मिशन में भी शामिल था.
यह करीब 100 साल पुरानी सैन्य परंपरा है. यह वोल्शेविकों के साथ एस्टोनिया की लड़ाई के दौरान शुरू हुई थी. उस दौरान वहां की राष्ट्रीय रेलवे ने लड़ाई के मोर्चे के पास एक सॉना ट्रेन लगाई थी, जिससे हफ्तों से खाई में रह रहे सैनिक नहा-धो सकें.
रागा कहते हैं कि उन्होंने यूक्रेनी सैनिकों के बारे में सुना है, जो कई दिनों या यहां तक कि हफ्तों तक बिना अपने जूते धोए या उतारे रहते हैं. इसका वर्णन करते हुए बखमुत के पास एक फ्रंट-लाइन कमांडर ने मुझे फेसटाइम पर बताया था कि 'एस्टोनियाई सॉना स्वर्ग से भेजी सौगात है'
रूस के पड़ोसी कर रहे हैं यूक्रेन की मदद
रूस के पड़ोसी देशों में से कई यूरोपीय संघ और नेटो के सदस्य हैं, वहां के कई लोग यूक्रेन की मदद के लिए आगे आ रहे हैं.
एस्टोनिया और उसके बाल्टिक पड़ोसी देश लातविया और लिथुआनिया पर सोवियत संघ ने द्वितीय विश्व युद्ध के तुरंत बाद कब्जा कर लिया था. यह कब्जा दशकों तक रहा. उनका कहना है कि वे रूसी आक्रमण पर यूक्रेन के दर्द को महसूस करते हैं.
इन देशों ने अमेरिका और ब्रिटेन सहित किसी भी अन्य देश की तुलना में अपनी अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में अधिक मदद दी है. जब दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं की बात आती है तो केवल नॉर्वे ही उनसे आगे नजर आता है.
जर्मनी का प्रतिष्ठित कील इंस्टीट्यूट युद्ध की शुरुआत से ही यूक्रेन को मिली सभी तरह की मदद पर नजर रख रहा है.
इस संगठन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक लिथुआनिया के ड्रिफ्टिंग के राष्ट्रीय चैंपियन गेडिमिनस इवानौस्कस, रूस के हमले के पहले दिन से ही नागरिकों को निकालने में मदद करने के लिए यूक्रेन चले गए थे.
जब वो मुझे वहां की पीड़ा के बारे में बता रहे थे तो उनकी आंखों में आंसू थे. मदद करने की उनकी इच्छा, अंतरराष्ट्रीय सहायता प्रयासों की धीमी गति से पैदा हुई निराशा और मोटर से चलने वाली चीजों में उनकी दिलचस्पी ने उन्हें दर्जनों वाहनों के लिए क्राउड-फंडिंग करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने ग्रामीण लिथुआनिया में किराए के गैरेज में इन्हें तैयार किया. इनमें से कुछ को उन्होंने यूक्रेन की सेना के लिए चार पहिया एंबुलेंस के रूप में तैयार किया.
यूक्रेन की इंटरनेशनल ब्रिगेड
यूक्रेन की इंटरनेशनल ब्रिगेड में शामिल निशानेबाज मिंडौगास लिटुविंकास के पास युद्ध के प्रयासों में मदद करने की प्रेरणा कुछ और है. उनको लगता है कि यूक्रेन में लड़ाई लड़कर वो दरअसल अपने ही देश की रक्षा कर रहे हैं.
यूक्रेन की फ्रंट लाइन पर एक और दौरे के लिए अपना सामान पैक करते हुए उन्होंने मुझसे जोरदार ढंग से कहा, "हमें अब (रूस को) रोकना होगा.'' लिटुविंकास को लगता है कि अगर व्लादिमीर पुतिन अंततः यूक्रेन के खिलाफ सफल हो जाते हैं तो बाल्टिक देश उनका अगला निशाना हो सकते हैं.
लिथुआनिया पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन नैटो में शामिल रूस के पड़ोसी देशों में से एक है. वो पिछले काफी समय से क्रेमलिन की विस्तारवादी योजनाओं और पश्चिम को कमजोर और अस्थिर करने की व्लादिमीर पुतिन के इरादों के बारे में चेतावनी दे रहा है.
कितनी लंबी है फिनलैंड की रूस से लगती सीमा?
फिनलैंड की रूस के साथ करीब 800 मील (1300 किमी) लंबी सीमा है. उसने अपने पड़ोसी रूस के विरोध की डर से नेटो में शामिल होने से हमेशा इनकार किया है. लेकिन जब वहां के लोगों ने संप्रभु यूक्रेन में रूसी सैनिकों को मार्च करते देखा तो उन्होंने अपना मन पूरी तरह से बदल लिया. यह फिनलैंड के लिए एक बड़ा बदलाव था. उसने युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद स्वीडन के साथ नेटो में शामिल होने के लिए आवेदन कर दिया.
हथियारों का प्रशिक्षण लेने के लिए आवेदन करने वाले फिनलैंड के लोगों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है. युवाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है. इसके बाद उन्हें जीवन भर के लिए आरक्षित रखा जाता है. लोग मुझसे कहते हैं कि फिनलैंड पर उसके रूसी पड़ोसी द्वारा डाला गया बड़ा साया अब और अधिक खतरनाक लगता है.
इस युद्ध ने फिनलैंड के व्यवसायों पर बड़ा प्रभाव डाला है. युद्ध शुरू होने से पहले यहां रूसी पर्यटको से होने वाला कारोबार करीब 630 मिलियन डॉलर प्रति वर्ष का था. लेकिन रूस या उसके सहयोगी बेलारूस की सीमा से लगे अधिकांश यूरोपीय संघ के देशों की तरह, फिनलैंड ने रूसी नागरिकों के लिए यात्रा वीजा निलंबित कर दिया है.
बर्फ से ढके लैपलैंड में मेरी मुलाकात स्की रिसॉर्ट के मालिक विले अहो से उनके लकड़ी के बंगले पर हुई. वहां से रूसी पहाड़ों का नजारा दिखाई देता है.
उन्होंने मुझे बताया कि पिछले कुछ सालों में व्यक्तिगत तौर पर उन्होंने रूसी मेहमानों से बहुत अच्छी दोस्ती गांठी है. लेकिन वो अब नहीं चाहते हैं कि वे वापस आएं. वो चाहते हैं कि आम रूसी, खासकर दूसरे देशों में रहने वाले युद्ध के खिलाफ अधिक जोर से बोलें.
यूक्रेन के बारे में चर्चा करते समय वे भावुक हो गए. उनका कहना था कि हममें से कोई भी युद्ध से अलग होने या उससे उदासीन होने का जोखिम नहीं उठा सकता, क्योंकि युद्ध खूनी रूप से आगे बढ़ रहा है.
वो कहते हैं, ''अगर रूस जीतता है और पुतिन अपनी शक्ति बढ़ाते हैं तो मैं अंतिम खेल के बारे में सोच भी नहीं सकता. अगला कौन होगा? फिनलैंड, पोलैंड, एस्टोनिया, लिथुआनिया? वे यूक्रेन में अपने आप नहीं रुकेंगे. लेकिन यह सब यूक्रेन में रुकना चाहिए."
रूसी राष्ट्रपति न केवल पारंपरिक युद्ध के पक्षधर हैं. बल्कि पश्चिम के खिलाफ साइबर हमलों या दुष्प्रचार अभियान के लिए अक्सर रूस को दोष दिया जाता है.
लेकिन अहो ने जिन देशों का नाम लिया है, उनमें से किसी पर भी हमला करना व्लादिमीर पुतिन के लिए एक बहुत बड़ा जुआ होगा.
परमाणुशक्ति संपन्न अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस सहित अन्य सभी नेटो सदस्य उनकी सहायता के लिए आ सकते हैं. लेकिन इसकी कोई ठोस गारंटी नहीं है.
इसलिए हर देश पर यह निर्भर करेगा कि वह कैसे प्रतिक्रिया देना तय करता है.
रूस की सीमा से लगे देशों, जैसे लातविया में बड़ी रूसी आबादी रहती है, वे घबराए हुए हैं.
लातविया का दूसरा शहर, डौगावपिल्स, बेलारूस से 25 किमी (16 मील) और रूस से 120 किमी की दूरी पर स्थित है. वहां रहने वाले 10 में से आठ लोग अपने घर पर लातवियाई नहीं, बल्कि रूसी भाषा बोलते हैं.
अधिकांश लोगों की शिक्षा लातविया के रूसी भाषी स्कूलों में हुई है. उन्हें परंपरागत रूप से रूसी टीवी, रेडियो या समाचार वेबसाइटों से समाचार मिलते हैं.
मेरा ध्यान इस शहर में यूक्रेनी झंडों की अनुपस्थिति पर गया. लातविया के बाकी के हिस्से में आप अक्सर यूक्रेनी झंडों को स्कूलों, टाउन हॉल और दुकान के सामने एकजुटता के संकेत के रूप में लहराते हुए देख सकते हैं.
हालांकि लातवियाई रूसी किसी भी तरह से पुतिन समर्थक नहीं हैं. जिन लोगों से मैं सड़क पर मिला, वे युद्ध पर चर्चा नहीं करना चाहते थे. मैंने जब उनसे पूछा कि क्या वे रूस को आक्रामक और यूक्रेन को पीड़ित के रूप में देखते हैं तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया.
लातविया को चिंता है कि व्लादिमीर पुतिन उसके यहां के रूसियों को बचाने का प्रयास कर सकते हैं.
यह उन बहानों में से एक था जो उन्होंने 2014 में रूसी सीमा के पास यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर रूसी सशस्त्र समूहों द्वारा कब्जा करने के लिए दिया था.
अपने यहां रहने वाले रूसियों को रूसी प्रचार से अलग-थलग करने के प्रयास में लातविया की सरकार ने रूसी टीवी चैनलों पर पाबंदी लगा दी है.
उसने रूसी भाषा की स्कूली शिक्षा को भी बंद कर दिया है. इसके अलावा सोवियत काल के बचे हुए स्मारकों को तोड़ दिया गया है. लेकिन आलोचक इसको लेकर चिंतित हैं.
उन्हें लगता है कि इससे रूसियों के पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाने का खतरा है. यहां तक कि वे इससे व्लादिमीर पुतिन के समर्थक भी हो सकते हैं.
रूस के पड़ोस में रहने वाले लोगों से मिलने के लिए मैंने 1500 मील की यात्रा की. पोलैंड के दक्षिण से लेकर नॉर्वे के उत्तरी सिरे तक, मुझे सबसे पहले जिस बात ने चौंकाया वह यह थी कि यूक्रेन में युद्ध का प्रभाव अग्रिम पंक्ति से कितना व्यापक, गहरा और व्यक्तिगत है.
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