अमेरिका यूक्रेन को दे रहा है पेट्रियट मिसाइल, रूस ने दी ये चेतावनी

अमेरिका यूक्रेन को एक ऐसा हथियार देने वाला है जो रूस के ख़िलाफ़ उसके युद्ध में उसे नई धार दे देगा. ऐसी ख़बरें हैं कि अमेरिका गुरुवार को ही इसका ऐलान करने वाला है.

इसके अलावा अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि अमेरिका यूक्रेन और भी कई हाई-टेक हथियार भेजने की तैयारी में है.

इनमें सटीक स्मार्ट बम भी शामिल हैं जो अचूक निशाना लगाते हैं. रूस ने अमेरिका की इन कोशिशों पर सख़्त आपत्ति दर्ज की है. रूस ने कहा है कि यूक्रेन को मिलने वाले पैट्रियट मिसाइल समेत किसी भी किस्म के विदेशी हथियार युद्ध में उनके निशाने पर रहेंगे.

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जख़ारोवा ने गुरुवार को कहा है कि पश्चिमी देशों का यूक्रेन को दिया हर हथियार रूस का वैध टार्गेट होगा.

अपनी साप्ताहिक प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा, "हम उन लोगों को याद दिलाना चाहते हैं कि यूक्रेन के सप्लाई किए गए हथियारों को हम टार्गेट करेंगे. हम ये कई बार दोहरा चुके हैं."

उन्होंने कहा, "अमेरिका नेटो सदस्यों पर यूक्रेन को हथियार भेजने के लिए दवाब डालता जा रहा है. 30 नवंबर को बुख़ारेस्ट में हुई बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि अब तक नेटो ने यूक्रेन को 40 बिलियन डॉलर के हथियार भेजे हैं. ये वर्ष 2022 में फ़्रांस के रक्षा बजट के बराबर है."

अमेरिका में रूस के दूतावास ने भी कहा है कि ये एक उकसाने वाली कार्रवाई है जिसके अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं.

दूतावास ने अपने बयान में लिखा, "लगातार हथियारों की सप्लाई से ज़ेलेंस्की को आम लोगों के ख़िलाफ़ जुर्म करने की और ताक़त मिल रही है. पेट्रियट मिसाइल के सप्लाई के बग़ैर भी अमेरिका यूक्रेन के युद्ध में धंसता जा रहा है. अमेरिकी मिलिट्री स्पेशलिस्ट वहां पहुंच रहे हैं. अमेरिका से भाड़े के सैनिक भी यूक्रेन में लड़ रहे हैं."

रूस का कहना है कि अमेरिकी रणनीति सिर्फ़ रूस-अमेरिका संबंधों को ही नुकसान नहीं पहुंचा रही है बल्कि ये अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को भी ख़तरे में डाल रही है.

दूतावास ने अपनी बयान में कहा, "यूक्रेन युद्ध के लंबा खींचने और तीव्र होने की ज़िम्मेदारी अमेरिकी की है."

क्या है पेट्रियट मिसाइल?

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि ये मिसाइल यूक्रेन को रूस के ख़िलाफ़ जंग में मज़बूती देगी.

पेट्रियट ज़मीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. PATRIOT (फ़ेज़्ड ऐरे ट्रैकिंग रडार टू इंटरसेप्ट ऑन टार्गेट) दुनिया का सबसे बेहतरीन मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम है. ये मिसाइल ध्वनि की आवाज़ से पांच गुना अधिक गति से चलती हैं.

कुछ सेंकड के भीतर ही ये मिसाइल सुपरसॉनिक स्पीड पकड़ लेती है. आम भाषा में बोलें तो ये दुश्मन की मिसाइल को ऐसे हिट करती है जैसे मानो बंदूक से चली गोली दूसरी गोली से जा टकराए.

अमेरिका अब तक ये मिसाइल सिस्टम नीदरलैंड्स, पोलैंड, जर्मनी, जापान, इसराइल, सऊदी अरब, कुवैत, ताइवान, ग्रीस, स्पेन, यूएई, क़तर, रोमानिया और स्वीडन को बेच चुका है.

पेट्रियट मिसाइल सबसे पहले 1991 के गल्फ़ वॉर के बाद चर्चा में आई थी. इस मिसाइल ने खाड़ी की पहली जंग में सद्दाम हुसैन की स्कड मिसाइलों को धूल चटा दी थी. दूसरे इराक़ युद्ध में भी इनका इस्तेमाल हो चुका है.

साल 2014 में इसराइल ने तो इस मिसाइल से सीरिया के सुख़ोई लड़ाकू विमान को मार गिराया था.

ये इस बात का सबूत है कि इस मिसाइल यूक्रेन को कितनी बड़ी ताक़त मिलने वाली है. इसके ज़रिए अब यूक्रेन रूस के सुखोई जैसे हाई-टेट लड़ाकू विमानों को भी निशाना बना सकता है.

अमेरिका के इस क़दम से एक बात तो साफ़ है, ये निश्चित तौर पर युद्ध की दिशा बदल सकता है.

क्या पड़ेगा असर?

यूक्रेन को लगता है कि रूस के विरुद्ध युद्ध में उसे ख़तरा ज़मीन से नहीं आसमान से होने वाले हमलों से है. रूस हाल के दिनों में यूक्रेन के बुनियादी ढांचे पर आसमानी हमले करते रहा है.

बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील कहते हैं, "रूस ने यूक्रेन के बिजलीघरों को निशाना बनाकर लाखों लोगों के घरों में, सर्दी के इस मौसम में बिजली और पानी की सप्लाई बंद कर दी है."

हाल के महीनों में यूक्रेन को दूसरे देशों से कई एडवांस हथियार भी मिले हैं.

जोनाथन बील बताते हैं, "यूक्रेन को नासाम (NASAM) और आइरिस-टी सिस्टम्स मिले हैं. लेकिन यूक्रेन को और हथियार चाहिए. उसे ख़ासकर एयर डिफ़ेंस सिस्टम की दरकार है. इसके सहारे वो अपने शहरों की बिजलीघरों को को रूसी हमलों से बचा सकता है. साथ ही युद्ध की फ़्रंटलाइन पर वो रूस पर भारी पड़ सकता है. इस समय रूस ये दोनों ही काम नहीं कर पा रहा है."

यूक्रेन पहले ही अमेरिका से पेट्रियट मिसाइलें मांगता रहा है. लेकिन ईरान द्वारा रूस को लंबी रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल देने के ख़तरे ने हालात बदल दिए हैं.

लेकिन यूक्रेन को बहुत अधिक मिसाइलें नहीं मिल पाएंगी. ये सिस्टम दुनियाभर में डिमांड में है और बहुत महंगा भी है. इसकी देखभाल और इसे ऑपरेट करने में भी काफ़ी ट्रेनिंग की ज़रुरत होती है.

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