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रूस के साथ नहीं अब अलग दिन क्रिसमस मनाएगा यूक्रेन, क्या है वजह
- Author, जेम्स वॉटरहाउस
- पदनाम, बीबीसी के यूक्रेन संवाददाता
यूक्रेन साल 1917 के बाद पहली बार 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाने जा रहा है. पहले यहां सात जनवरी को क्रिसमस मनाया जाता था. ऐसा उस जूलियन कैलेंडर के आधार पर किया जाता था, जिसे रूस भी इस्तेमाल करता है.
क्रिसमस 25 दिसंबर को मनाना सिर्फ़ एक त्योहार के दिन में बदलाव नहीं है, बल्कि ये सांस्कृतिक बदलाव के लिए यूक्रेन की ओर से उठाए गए उन क़दमों का हिस्सा है, जिनके तहत वह अपने यहां रूस के प्रभाव को ख़त्म करना चाहता है.
पश्चिमी ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपनाना यूक्रेन का ख़ुद को यूरोप के साथ लाने की कोशिशों का भी हिस्सा है.
जंग हो या शांति, क्रिसमस हर साल आता है. कीएव के बाहर एक छोटे से क़स्बे क्लावदिएवो-तारासोव में सजावटी सामान की फैक्ट्री है.
एक समय इस फ़ैक्ट्री समेत कुल तीन फ़ैक्ट्रियां हुआ करती थीं, जहां बनने वाला सामान पूरे सोवियत संघ में जाता था.
1978 से यहां काम कर रहीं लिओकादिया कहती हैं, “पहले यहां बहुत लोग काम करते थे, मगर अब नहीं.”
वह अपने डेस्क पर लगी गैस की भट्ठी पर शीशे को गेंद के आकार में फुला रही हैं. सर्दियों के इस मौसम में यह भट्ठी ठंड से भी बचा रही है.
जंग के प्रतीकों वाली सजावट
पहले ही धीरे-धीरे इस फ़ैक्ट्री का उत्पादन कम हो गया था. फिर जब साल 2022 में यूक्रेनी सैनिकों ने हमला करके एक महीने तक यहां कब्ज़ा बनाए रखा तो काम पूरी तरह से ठप हो गया.
हेन्या नाम की एक अन्य कारीगर बताती हैं, “जब सड़कों पर टैंक दौड़ रहे थे तो बहुत डर लग रहा था. हम बाहर नहीं निकल रहे थे. कोई ख़बर नहीं थी. बाक़ी दुनिया से कट गए थे. बहुत ही डरावने हालात थे.”
अब, पहले के मुक़ाबले एक तिहाई कामगार ही काम पर लौटे हैं, लेकिन सजावटी सामान बनाने का काम चालू है. बहुत ही सावधानी से सजावटी चीज़ें तैयार करके देशभर में भेजी जा रही हैं.
जो यूक्रेनी इस बार रूस के कब्ज़े में क्रिसमस मनाएंगे, उनके लिए हेन्या की क्या कामना है?
वह कहती हैं, “आपको विश्वास रखना होगा, उम्मीद रखनी होगी और आपको मुक्ति ज़रूर मिलेगी.”
'जल्दी जीत मिलेगी'
हेन्या का काम थोड़ा कलात्मक है. वो और उनके सहकर्मियों को शीशे की हर गेंद पर हाथ से पेंटिंग करनी होती है.
इनके बनाए सामान में आपको सेना की थीम वाली कई चीज़ें मिलेंगी. जैसे कि छोटे से सैनिक, मिग फ़ाइटर जेट और यहां तक कि रूसी टैंक को ख़ींचता एक यूक्रेनी ट्रैक्टर. इन सभी को क्रिसमट ट्री पर टांगने के लिए बनाया गया है.
"मुझे लगता है कि जो कोई इस तरह की गेंद को देखेगा तो उसे उम्मीद जगेगी कि जल्द हमारे देश को विजय मिलेगी."
तमीला ऐसी बुलंद आवाज़ में ये सब कहती हैं, जैसी बुलंदी यहां अब यूक्रेन में कम ही सुनाई देती है.
मज़बूत होती यूक्रेनी पहचान
यूक्रेन और रूस के बीच गहरे सांस्कृतिक रिश्ते हैं और वे आगे भी एक-दूसरे के पड़ोसी रहने वाले हैं. लेकिन यूक्रेन की पहचान को रूस की आक्रामकता से बढ़ावा ही मिल रहा है.
रूस की जैसी आक्रामकता बूचा क़स्बे ने देखी थी, शायद ही कहीं और वैसी आक्रामकता देखने को मिली होगी. ये क़स्बा इस सजावटी सामान की फैक्ट्री से चंद किलोमीटर दूर है.
जब रूसी सैनिक पिछले साल कीएव की ओर बढ़ रहे थे, तब उनपर 500 से ज़्यादा आम नागरिकों को मारने के आरोप लगे थे. ये इस जंग में अब तक के सबसे भीषण अत्याचार के आरोप हैं.
मारे गए इन लोगों में से कुछ के नाम सैंट एंड्रूज़ चर्च के सामने बने स्मारक पर लिखे हैं.
सर्दियों में निकली धूप में चमकते सुनहरे गुंबदों के बीच कुछ हिस्से ऐसे दिखते हैं, जहां पर कुछ-कुछ घास उगी हुई है.
ये वही जगह है, जहां पर रूस के कब्ज़े के दौरान बनाई गई सामूहिक कब्र मिली थी. रूसी गए थे, तभी मारे गए लोगों के शवों को यहां से निकाला जा सका था.
रूस को क्षमा कर पाएंगे यूक्रेनी?
सैंट एंड्रूज़ चर्च के तहखाने में मोमबत्तियों की रोशनी के बीच बैठे फ़ादर एंद्री कहते हैं, “दुर्भाग्य से दुनिया के कई लोगों को लगता है कि यूक्रेन का संबंध रूस से है, लेकिन मुझे लगता है कि हम यूरोप के ज़्यादा क़रीब हैं.”
वह कहते हैं, “हमने कैलेंडर इसलिए नहीं बदला कि हम रूस से दूर जा रहे हैं. बल्कि हम यूरोप के साथ वापस जा रहे हैं, जहां से हम वास्तव में हैं.”
मैंने पूछा कि रूस तो हमेशा यूक्रेन का पड़ोसी रहेगा, तो क्या आप कभी भूल पाएंगे कि उसके हमले ने आपकी जन्मभूमि की क्या हालत कर दी है.
वह कहते हैं, “ईश्वर पापी को माफ़ कर देते हैं, लेकिन सिर्फ़ उनको, जो पश्चाताप करें. हमें नहीं लगता कि वे अपने पापों या गलतियों के लिए पश्चाताप कर रहे हैं. ऐसे में क्षमा के बारे में बात करना जल्दबाज़ी होगी.”
यूक्रेन के लिए रूस का पश्चाताप तभी शुरू होगा, जब वह आक्रमण रोकेगा. लेकिन ऐसा होने के कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे.
(हैना कोर्नुअर, विकी रिडेल और एनास्टाशिया लेवचेंको की अतिरिक्त रिपोर्टिंग)
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