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व्लादिमीर पुतिन फिर लेंगे रूस के राष्ट्रपति पद की शपथ, क्या कुछ बदलेगा?
- Author, स्टीव रोज़नबर्ग
- पदनाम, संपादक, बीबीसी रूसी सेवा
व्लादिमीर पुतिन रूस के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में शायद आंखें मूंद कर भी चल सकते हैं.
ये पाँचवीं बार है जब पुतिन इस पैलेस से सेंट ऐंड्रयू थ्रॉन हॉल की ओर जाएंगे. यहां वह रूस के राष्ट्रपति के तौर पर छह साल के कार्यकाल के लिए एक बार फिर से शपथ लेंगे.
ये रास्ता उनके लिए जाना-पहचाना हो सकता है लेकिन साल 2000 में जब पहली बार वह इस पर चले, तब से लेकर अब तक काफ़ी कुछ बदल चुका है.
उस समय राष्ट्रपति पुतिन ने "लोकतंत्र लाने और इसे बनाए रखने" और "रूस की रखवाली" करने की प्रतिज्ञा ली थी.
24 साल बाद, रूस के नेता यूक्रेन के ख़िलाफ़ जंग में हैं, वो जंग जिससे रूस को भारी नुक़सान पहुंचा है.
घरेलू मोर्चे पर लोकतंत्र विकसित करने की बजाय राष्ट्रपति पुतिन ने इसे कम करना शुरू कर दिया है.
आलोचकों को जेल भेजा जा रहा है, पुतिन की सत्ता पर किसी भी तरह का अंकुश हटाया जा रहा है.
क़रीब 25 साल का शासन
फ़ियोना हिल व्हाइट हाउस की पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. वो कहती हैं, "पुतिन अब ख़ुद को महान मानने लगे हैं, एक रूसी सम्राट की तरह."
उन्होंने कहा, "अगर हम पुतिन के पहले दो कार्यकाल को देखें तो मुझे लगता है कि हम उनके पक्ष में आकलन कर पाएंगे. उन्होंने राजनीतिक तौर पर रूस को स्थिरता दी और उसे फिर से संपन्न देश बनाया. रूस की अर्थव्यवस्था और पूरी प्रणाली, किसी भी पिछली सरकार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रही थी."
"यूक्रेन में जंग, 10 साल पहले क्राइमिया पर कब्ज़ा करने से ये विकास का चक्र नाटकीय तरीके से बदला. अब पुतिन ने खुद को प्रगतिवादी शासक की बजाय एक साम्राज्यवादी नेता में बदल लिया."
यहां ये ध्यान देना ज़रूरी है कि जब से व्लादिमीर पुतिन पहली बार सत्ता में आए, तब से अमेरिका ने पाँच अलग-अलग राष्ट्रपति और ब्रिटेन ने सात प्रधानमंत्री देखे हैं.
रूस पर करीब 25 साल तक शासन के बाद पुतिन ने निश्चित तौर पर अपनी छाप छोड़ी है. अतीत में, लोग बमुश्किल 'ब्रेज़नेविज़्म', 'गोर्बाचेविज़्म' या 'येल्तिसिनिज़्म' के बारे में बात करते थे. लेकिन अब पुतिनवाद अहम है.
कार्नेगी यूरेशिया रशिया सेंटर के सीनियर फेलो आंद्रे कोलेसनिकोव कहते हैं, "हमारे पास इतिहास में एक और वाद है- स्टालिनवाद."
"मैं कहना चाहूंगा कि पुतिनवाद स्टालिनवाद का ही एक और रूप है. वह स्टालिन (सोवियत के पूर्व शासक) की तरह ही बर्ताव करते हैं. स्टालिन के समय की तरह ही इन्होंने भी अपने पास सारी शक्तियां रखी हैं. वह राजनीतिक दमन को प्राथमिकता देते हैं और स्टालिन की तरह ही वह अपनी आख़िरी सांस तक ख़ुद को सत्ता में बनाए रखना चाहते हैं."
पश्चिमी देशों के लिए चुनौती ये है कि वे लगातार निरंकुश हो रहे रूसी नेता से कैसे निपटे, जो रूस को वापस महान बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है, जो आधुनिक समय का ऐसा सम्राट है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं.
फ़ियोना हिल का मानना है, "परमाणु हथियार के मामले में हम बहुत कुछ कर सकते हैं. जब रूस ने यूक्रेन में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की धमकी दी तब चीन, भारत, जापान जैसे देश असाधारण रूप से घबरा गए थे. हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक फ़्रेमवर्क बनाकर रूस को रोक सकते हैं, जिससे इस तरह से परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़ी अटकलबाज़ी बंद हो."
"ये ऐसा ढांचा होगा जिसमें व्लादिमीर पुतिन जैसे कई मायनों में गैर-ईमानदार नेता से निपटने का तरीका हो. हमें और प्रतिबंधों वाला माहौल बनाना होगा, जहां ऐसे किसी काम की मंज़ूरी न हो, जैसा वह (पुतिन) करने का इरादा रखते हैं."
क्या रूस में कुछ बदलेगा?
आधिकारिक तौर पर व्लादिमीर पुतिन ने इस साल मार्च में हुए राष्ट्रपति चुनावों में 87 फ़ीसदी से अधिक वोट हासिल किए. हालांकि, उनके सामने इस चुनाव में कोई बड़ी चुनौती नहीं था. इस चुनाव को व्यापक तौर पर गैर-पारदर्शी और गैर-निष्पक्ष माना गया.
तो जोसेफ़ स्टालिन के बाद सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति रहने वाले नेता के बारे में रूस के लोगों का क्या मानना है?
ये पता लगाने के लिए मैं मॉस्को से करीब 110 किलोमीटर दूर काशिरा तक गया. यहां एक अपार्टमेंट के एक हिस्से पर पुतिन का एक बड़ा सा पोट्रेट बना है.
काशिरा में इस बड़े से पुतिन की सब पर नज़र है.
सड़क किनारे फूल बेचने वाली एक पेंशनभोगी महिला वेलेंटीना कहती हैं, "मुझे वह (पुतिन) पसंद हैं."
"पुतिन के पास अच्छे विचार हैं और वह लोगों के लिए बहुत कुछ करते हैं. सच है कि हमारी पेंशन ज़्यादा नहीं हैं लेकिन वह सबकुछ एक चुटकी में तो ठीक नहीं कर सकते न."
मैंने यहां टोकते हुए कहा, "वह करीब 25 सालों से सत्ता में हैं."
वेलेंटीना ने जवाब दिया, "लेकिन हम नहीं जानते कि अगला कौन आएगा (अगर पुतिन गए तो)."
दीवार पर पेंट की गई पुतिन की तस्वीर के पास से गुज़रते हुए विक्टोरिया कहती हैं, "रूस में हम सबसे एक तरीक़े से ही सोचने की उम्मीद की जाती है."
"अगर मैं पुतिन के ख़िलाफ़ कुछ कहती हूं तो मेरे पति कहेंगे कि तुम पुतिन की एक बार और आलोचना करो और मैं तुम्हें तलाक़ दे दूंगा! वह पुतिन को लेकर पागल हैं. वह कहते हैं कि अगर पुतिन न होते तो ज़िंदगी 1990 के दशक जितनी ही मुश्किल होती."
मैंने वहां से गुज़रने वाले एक और शख्स अलेक्ज़ेंडर से जब पूछा कि वह राष्ट्रपति को लेकर क्या सोचते हैं तो उन्होंने जवाब दिया, "मेरा अभी अपनी राय ज़ाहिर करना ख़तरनाक हो सकता है. नो कमेंट."
मैंने जिन लोगों से बात की उनमें से अधिकतर ने ये कहा कि वे पुतिन की पेंटिंग पर ध्यान दिए बग़ैर वहां से गुज़रते हैं क्योंकि वे इसके आदी हो चुके हैं.
ठीक वैसे ही जैसे वे इस बात के भी आदी हो चुके हैं कि रूस को केवल एक शख्स चला रहा है और क्रेमलिन में कोई बदलाव आने की संभावना नहीं है.
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