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मॉस्को हमला: इस्लामिक स्टेट ने रूस को निशाने पर क्यों लिया?
शुक्रवार को रूस की राजधानी मॉस्को के कॉन्सर्ट हॉल पर हमला हुआ. ये पिछले कई सालों में रूस पर हुए सबसे भीषण हमलों में से एक था. बंदूकधारियों ने यहां घुस कर 139 लोगों को मार डाला था.
ये घटना रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पांचवीं बार सत्ता संभालने के कुछ ही दिन बाद हुई.
इस्लामिक स्टेट ने कहा है कि उसके चार सदस्यों ने इस हमले को अंजाम दिया था.
आइए इस हमले के बारे में विस्तार से जानते हैं और ये भी कि आख़िर इस्लामिक स्टेट ने रूस को निशाना क्यों बनाया.
क्रॉकस सिटी हॉल में हमला कैसे हुआ?
क्रॉकस सिटी हॉल मॉस्को के बाहरी इलाके में है और क्रेमलिन से 20 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है. यहां रॉक ग्रुप पिकनिक की ओर से शुक्रवार 2 मार्च को कन्सर्ट का आयोजन होना था.
लेकिन रात आठ बजे के बाद यहां कॉन्सर्ट हॉल के प्रवेश द्वार के बाद की खुली जगह में बंदूकधारी घुस आए और अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी.
इस घटना के वीडियो में दिख रहा है कि कम से कम चार लोग हॉल में घुसने से पहले अंधाधुंध गोलियां बरसा रहे हैं. उस वक़्त ऑडिटोरियम में मौजूद एक महिला ने कहा कि वो और कंसर्ट देखने आए कुछ और लोग को जैसे ही लगा कि गोलियां चल रही हैं वे स्टेज की ओर भागे.
उन्होंने रूसी टीवी को बताया,''मैंने एक शख़्स को बगल में हथियार लटकाए देखा. मैंने देखा कि तड़ातड़ गोलियां चल रही हैं. मैं लाउडस्पीकर के पीछे रेंगते हुए बचने की कोशिश में थीं.''
कुछ ही वक़्त में आग की लपटों ने हॉल की बाहरी दीवार को अपने आगोश में ले लिया. आग से हॉल की दो ऊपरी मंजिलों में लगे शीशे टूट गए.''
रूस के जांच कमेटी ने बताया,''आतंकवादियों ने हॉल की इमारतों में आग लगाने के लिए ज्वलनशील द्रव का इस्तेमाल किया था. इसी इमारत में बड़ी तादाद में लोग जमा थे. इसके अंदर कई लोग घायल भी हुए हैं. हालांकि पिकनिक बैंड के सदस्यों को कोई नुकसान नहीं हुआ.''
हमले ने किसे शिकार बनाया?
छह हजार से ज्यादा रूसी इस कंसर्ट को देखने के लिए रिटेल और कॉन्सर्ट कॉम्प्लेक्स में पहुंचे थे. लेकिन कॉन्सर्ट पर हमले के बाद मंगलवार की सुबह तक कम से 139 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है.
मरने वालों की जो सूची सबसे पहले जारी की गई उसके मुताबिक़ सबसे उम्रदराज मृतक अपनी उम्र के सातवें दशक में थीं. मरने वालों में तीन बच्चे भी शामिल थे.
हमलावर कौन थे?
ऐसा लगता है कि जिन लोगों ने हमला किया था वो यहां से बच कर निकलने में कामयाब रहे थे. रूसी सांसद एलेक्जेंडर खिनश्तिनका कहना था कि हमलावर कार से भाग निकले.
उनके मुताबिक़ पुलिस ने उनकी गाड़ी को रोकने की कोशिश की थी. पुलिस ने उन्हें मॉस्को से 340 किलोमीटर की दूरी पर रोकने की कोशिश की थी.
उन लोगों ने दो लोगों को गिरफ़्तार किया जबकि दूसरे लोग भागने में कामयाब रहे.
गोलीबारी की शुरुआती रिपोर्टों के बाद रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस ने बताया था कि 11 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. इनमें से चार तो इससे सीधे जुड़े हुए थे.
चार संदिग्धों को रविवार को मॉस्को की अदालत में पेश किया गया.
उन पर आतंकवाद का आरोप लगाया गया था. रूसी न्यूज़ एजेंसी तास ने बताया के ये सभी लोग ताज़िकिस्तान के थे.
रूसी सुरक्षा बलों नो तस्वीरें लीक की थी उनके मुताबिक़ कोर्ट में पेश किए गए चारों लोगों के शरीर पर चोट के निशान थे. ऐसा लग रहा था उनसे काफी बेरहमी से पूछताछ की गई है. कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि कम से कम एक शख्स़ को तो बिजली का करंट लगाया गया है. जबकि दूसरे का कान काट दिया गया था.
अदालत में तीसरा हमलावर जब कोर्ट में सवालों का जवाब दे रहा था तो उसकी गर्दन में एक प्लास्टिक बैग लिपटा था. चौथा शख्स बेहोशी में लग रहा था. उसे व्हील चेयर में लाया गया था. जब इस तरह की यातनाओं के बारे में पूछा गया तो क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
हमला क्यों हुआ?
इस्लामिक स्टेट ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि हमले में उसका हाथ है. शनिवार को उसने एक तस्वीर जारी की. कहा गया कि यही लोग हमलावर हैं. सारे नकाब पहने हुए थे.
इसके बाद संगठन ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें हमले को दिखाया गया था. बीबीसी ने पाया कि ये वीडियो असली है. इसमें दिख रहा है कि बंदूकधारी कई लोगों पर गोलियां चला रहे हैं.
दो हफ्ते पहले अमेरिका ने चेतावनी दी की थी मॉस्को में उन जगहों पर हमला हो सकता है जहां भारी तादाद में लोग जुटते हैं. लेकिन रूसी अधिकारियों का कहना था कि इसमें खास ब्योरे का जिक्र नहीं था. क्रेमलिन का कहना था कि जांच पूरी होने तक हालात पर टिप्पणी करना ठीक नहीं है.
हमले के तीन दिन बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा,''हम जानते हैं कि इस अपराध को अतिवादी इस्लामी तत्वों ने अंजाम दिया है. ये हमला ऐसी विचारधारा को मानने वाले लोगों ने किया है, जिसके ख़िलाफ़ खुद इस्लामी दुनिया में सदियों से एक लड़ाई चल रही है.''
अमेरिका ने अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और ईरान में मुस्लिम खिलाफ़त स्थापित करने कोशिश कर रहे इस्लामिक स्टेट खोरासोनोर यानी आईएस-के पर इल्जाम लगाया है.
पुतिन ने पहले कहा था कि हमलावरों को उस समय पकड़ा गया जब वे यूक्रेन भागने की फिराक में थे.
पुतिन ने कहा,''यूक्रेन की ओर से उन्हें भागने के लिए रास्ता मुहैया करा दिया गया था.''
यूक्रेन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. उसने कहा कि ये आरोप बेहद लचर और बेहूदा है.
बीबीसी वेरिफाई आईएस के वीडियो में दिख रहे दो हमलावरों के ब्योरे को मिलाने में सफल रहा है. आईएस ने वीडियो के स्टिल फोटो भी मुहैया कराए थे, जिनमें कथित हमलावरों को दिखाया गया था.
आईएस रूस को निशाना क्यों बनाना चाहता है
बीबीसी मॉनटरिंग में जिहादी मीडिया विशेषज्ञ मीना अल-लामी का विश्लेषण
इस्लामिक स्टेट समूह का दावा है कि पिछले काफी वर्षों में रूस पर किया गया सबसे घातक हमला है. खास कर ऐसे देश पर जो अपनी कड़ी व्यवस्था पर काफी गर्व करता है. ये हमला ऐसी जगह पर हुआ जहां आईएस की कोई अहम मौजूदगी नहीं है.
हमला पुतिन के पांचवीं बार राष्ट्रपति चुने जाने के ठीक कुछ दिन बाद हुआ. आईएस समर्थक इस पर इंटरनेट पर काफी खुश दिखे. उनका कहना था कि ये पुतिन की जीत पर जिहादी ग्रुप की ओर से उन्हें दिया गया गिफ्ट है.
पेरिस के बाताक्लान हमले की याद
इस हमले से नवंबर 2015 में पेरिस के बाताक्लान के कॉन्सर्ट हॉल पर आईएस के हमले की याद ताजा कर दी है. इस हमले में 90 लोग मारे गए थे. दोनों जगह पर कंसर्ट होने वाला था.
दोनों हमलों में कई बंदूकधारी कार्यक्रम स्थल में घुस आए और गोलियां चलाईं. मॉस्को हमला संभवतः बाताक्लान हमले की तर्ज पर ही किया गया था. हालांकि हमले का तरीका कुछ अपग्रेड था. जैसे कि आग लगाने के लिए बमों का इस्तेमाल. उसने ज्यादा तबाही की और ज्यादा मौतें हुईं.
2015 में पेरिस हमलों के बाद आईएस की ओर से जारी एक वीडियो में एक चेचेन लड़ाके ने रूस को धमकी देते हुए कहा था कि उसे भी पेरिस जैसे हमलों से गुजरना होगा.
मॉस्को पर हुए ये हमला हाल में आईएस के कुछ हमलों से मिलता जुलता है. इनमें ईरान के दक्षिणी शहर करमान में तीन जनवरी को हुई बमबारी शामिल है.
इस हमले को दो आत्मघाती हमलावरों ने अंजाम दिया था. हालांकि इसके लिए मॉस्को हमले जैसी सफाई की जरूरत नहीं थी. लेकिन मौतों के मामले में ये हमला कम नहीं था. इसमें लगभग 100 लोग मारे गए थे.
रूस की तरह भी आईएस की भी ईरान में कोई ज्ञात मौजूदगी नहीं थी और न ही सक्रिय शाखा.
ईरान और रूस दोनों जगह हमलों के लिए आईएस की किसी क्षेत्रीय शाखा ने कोई दावा नहीं किया था.
हमले के बाद इन्हें गिरफ्त़ार किया गया
व्लादिमीर पुतिन ने अपने एक संबोधन में कहा कि कुल 11 लोगों को पकड़ा गया है.
उन्होंने कहा,'' एफएसपी और दूसरी कानूनी एजेंसियां हमलावरों को पहचानने और आतंकवादियों के सहयोगियों के अड्डों का पता करने की कोशिश कर रही हैं.’’
रूस समर्थक टिप्पणीकार मार्गरिटा सिमोनेन ने बताया है कि गैंग का लीडर का 32 साल का दलेरदजोन मिर्जोयेव है. उसके साथ 30 साल का सैयदाकरम राकाबालिजोदा, 25 साल का समसिदीन फरीदुनी और 19 साल के मुहम्मदसोबिर फेज़ोव है. इन सभी को अदालत में पेश किया गया. ये सभी ताज़िक नागरिक हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक़ मिर्जोयेव कुछ महीने पहले काम के सिलसिले में रूसी शहर नोवोसिब्रिस्क आया था. उनके एक दूर के रिश्तेदार ने रूसी मीडिया को बताया कि मिर्जोयेव की पत्नी और चार बच्चे हैं.
उनके मुताबिक, मिर्जोयेव ने शुरू में रात में घर में रहता था और दिन में टैक्सी चलाता था. लेकिन नवंबर में एक दोस्त के साथ रहने लगा और फिर '' कहीं गायब हो गया.''
उन्होंने कहा, '' मिर्जोयेव के व्यवहार में कुछ भी असामान्य नहीं दिख रहा था. वो अपने साथ कोई धार्मिक किताब भी नहीं लाया था. बेशक पूरा परिवार जानता है कि हुआ क्या है. मेरे लिए तो अब वो मेरा कोई रिश्तेदार नहीं है. मुझे नहीं पता कि वह ये सब कैसे कर गया.
फ़रीदुनी मार्च की शुरुआत में मॉस्को पहुंचा. उसने क्रास्नोगोर्स्क शहर में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया. और पोदोलोस्क में एक लकड़ी की छत बनाने वाली फैक्ट्री में काम करने लगा.
चारों में सबसे छोटा फेजोव इवानिवो शहर में एक सैलून में काम कर रहा था.
हालांकि अधिकारियों ने पहले मिर्जोयेव को "नेता" बताया था. लेकिन ग्रुप के के अन्य लोगों की कथित भूमिकाओं के बारे में सबूत हैं.
सुरक्षा बलों का नजदीकी शॉट टेलीग्राम चैनल का कहना है कि फेज़ोव और फरीदुनी हमले से पहले दो सप्ताह में कम से कम पांच बार क्रॉकस गए थे. रिपोर्टों के मुताबिक़ इन लोगों ने पहले हमले की संभावना पर विचार किया था लेकिन हॉल को एक अपग्रेड प्रोग्राम के तहत हमले का शिकार बनाने के लिए चुना था.
कॉन्सर्ट के एक कर्मचारी ने शॉट को बताया कि फरीदुनी सात मार्च को हॉल के चारों ओर मंडरा रहा था और कई बार पूछ रहा था सब कुछ कहां है. उसी दिन क्रॉकस में काम करने वाले एक फोटोग्राफर ने फरीदुनी की तस्वीर खींची.
जांच के दौरान फरीदुनी ने बताया कि वह तुर्की से रूस आया था. लेकिन अभी ये पता नहीं कि फरीदुनी की बात कहां तक सच है.
तुर्की के एक सुरक्षा अधिकारी ने मंगलवार को कहा था कि कॉन्सर्ट हॉल हमले के दो संदिग्धों ने ‘स्वतंत्र रूप से’ रूस की यात्रा की थी क्योंकि उनके ख़िलाफ कोई गिरफ्तारी वारंट नहीं था.
तुर्की के गृह मंत्री ने कहा कि मॉस्को हमले के बाद आतंकवाद से निपटने के लिए रूस के साथ सहयोग बढ़ाने के उनके देश के वादे के तहत की गई छापेमारी में आईएस से जुड़े होने के संदेह में 147 लोगों को हिरासत में लिया गया था.
दूसरे हमलावर कौन हैं?
शुरुआत में जब हमलावरों की कथित पहचान के बारे में पता नहीं था तभी बाज़ा टेलीग्राम चैनल पर चार संदिग्धों के बारे में सुराग सामने सामने आए थे. कथित तौर पर ये वे सुराग थे जो सेंट्रल फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट के सभी पुलिस विभागों को मिले थे. हालांकि बीबीसी इस दावे की सचाई की पुष्टि नहीं कर सकता.
बाद में पता चला कि तस्वीरों में दिख रहे लोग क्रोकस पर हमले में कहीं से भी शामिल नहीं थे. हमले के समय उनमें से दो तो रूस के बाहर थे.
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