रूस और यूक्रेन का मैदान-ए-जंग पुतिन के इन समर्थकों के लिए बना चोखा धंधा

    • Author, ग्रिगोर अटनेशियन
    • पदनाम, बीबीसी ग्लोबल डिसइनफार्मेशन टीम

बीबीसी ने पता लगाया है कि रूस के युद्ध समर्थक इंफ्लुएंसर सोशल मीडिया पर युद्ध की कवरेज पर विज्ञापन दिखाकर जमकर पैसा कमा रहे हैं.

ये इंफ्लुएंसर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ड्रोन हमले के वीभत्स वीडियो के अलावा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के बारे में झूठे दावे के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी से लेकर फैशन तक के विज्ञापन दिखाते हैं.

रूस में युद्ध समर्थकों को 'जेड' के रूप में पेश किया जाता है. ऐसे में इन इंफ्लुएंसरों को 'जेड ब्लॉगर' के नाम से जाना जाता है. ये रूस की सेना से जुड़े हुए हैं.

ये इंफ्लुएंसर युद्ध क्षेत्र के वीडियो पोस्ट करते हैं. इनमें वो सेना में भर्ती होने आए युवाओं से बातचीत करते हैं.

यूक्रेन पर फरवरी 2022 में हुए रूसी हमले के बाद इन युद्ध समर्थक ब्लॉगरों ने टेलीग्राम पर लाखों फॉलोवर जुटाए हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर पर पाबंदी लगा दी थी. इसके बाद से रूसी नागरिक बड़े पैमाने पर टेलीग्राम का इस्तेमाल करते हैं.

कितना चार्ज करते हैं युद्ध समर्थक ब्लॉगर

टेलीग्राम यूजर्स की संख्या अचानक बढ़ने से उनके विज्ञापन बाजार में तेजी आई है. वॉर इंफ्लुएंसर ने इसका फायदा उठाया है. वे उन कंपनियों के विज्ञापन दिखाने लगे हैं, जो युवाओं में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती हैं.

ये इंफ्लुएंसर इन विज्ञापनों को दिखाने के लिए कितना चार्ज करते हैं, यह पता लगाने के लिए बीबीसी ग्लोबल डिसइनफॉर्मेशन टीम ने खुद को होटल मालिक बताते हुए उनसे संपर्क किया.

बीबीसी की टीम ने उन्हें बताया कि वे उनके चैनल पर अपना विज्ञापन दिखाना चाहते हैं. हमने कई प्रमुख इंफ्लुएंसर से संपर्क साधा. अलेक्जेंडर कोट्स उनमें से एक थे.

वो पहले एक सरकार समर्थक अखबार में संवाददाता थे. अब वे वॉर इंफ्लुएंसर बन गए हैं. उनके निजी टेलीग्राम चैनल पर छह लाख से अधिक फॉलोवर्स हैं.

रूस की प्राइवेट आर्मी

वहीं, सेमयॉन पेगोव, 'वॉर गोंजो' के रूप में जाने जाते हैं. शायद वो सबसे प्रभावशाली ज़ेड ब्लॉगर हैं. उनके 13 लाख से अधिक फॉलोवर हैं.

अलेक्जेंडर कोट्स ने कहा कि उनके चैनल पर एक पोस्ट की 48 से 70 हजार रूबल्स (500-726 डॉलर) तक की लागत आएगी. यह कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि वह विज्ञापन उनके टेलीग्राम फीड के टॉप पर कितनी देर तक रहता है.

वहीं, सेमयॉन पेगोव ने एक पोस्ट का चार्ज बताया 1765 डॉलर. ये वॉर इंफ्लुएंसर कम से कम एक विज्ञापन प्रतिदिन अपने चैनल पर दिखाते हैं.

आम रूसी लोग हर महीने औसतन 675 डॉलर (66 हज़ार रूबल) कमा लेते हैं, ये ब्लॉगर उसके आस-पास या थोड़ी कम रकम रोज़ का कमा लेते हैं.

रूस की प्राइवेट आर्मी वागनर ग्रुप से जुड़े चैनल के एक एडवर्टाइजिंग एजेंट से हमने संपर्क किया. उन्होंने हमें ग्रे ज़ोन नाम के एक टेलीग्राम चैनल पर विज्ञापन के प्रति विज्ञापन 311 डॉलर के बराबर का रेट बताया. इस चैनल का वागनर के अलावा छह लाख फॉलोवर्स हैं.

किनके भरोसे चल रहा है रूस का प्रोपेगैंडा

अलेक्जेंडर सिमोनोव 'रिया फैन' नाम की एक बेवसाइट के संवाददाता हैं. इसकी स्थापना वागनर ग्रुप के प्रमुख रहे येवगेनी प्रिगोज़िन ने की थी.

इनके चैनल पर विज्ञापन दिखाने की दर 218 अमेरिकी डॉलर प्रति पोस्ट बताई गई. रिया फैन के एक और संवाददाता अलेक्जेंडर यार्मेचुक के फॉलोवरों की संख्या सीमित है, इसलिए उनके चैनल पर प्रति पोस्ट की कीमत 103 डॉलर है.

कुछ ज़ेड ब्लॉगरों के पास सरकारी नियंत्रण वाले मीडिया में युद्ध कवरेज का अच्छा अनुभव है.

वहीं, मरयाना नाउमोवा के पास कोई प्रोफ़ेशनल ट्रेनिंग नहीं है. वो भारोत्तोलक रह चुकी हैं. उन्होंने वागनर ग्रुप के एक बेस पर रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण लिया. अब वो नेशनल टीवी पर अपना शो होस्ट करती हैं.

बीबीसी ने प्रमुख वॉर ब्लॉगरों का इंटरव्यू करने की कोशिश की. लेकिन अलेक्जेंडर कोट्स के अलावा कोई भी बात करने के लिए तैयार नहीं हुआ. रूस के कब्ज़े वाले शहर बखमूत से बात करते हुए उन्होंने खुद को सूचनाओं के युद्ध में एक रिपोर्टर बताया.

रूस में आख़िर चल क्या रहा है?

उनको इस बात का एहसास है कि रूसी प्रोपेगैंडा उनके जैसे लोगों पर ही निर्भर है.

उन्होंने बताया, "रक्षा मंत्रालय अक्सर हमारी बात सुनता है और सूचनाओं के आदान-प्रदान का एक जरिया भी है. यह सब पर्दे के पीछे है और मैं इसे कर रहा हूं."

ज़ेड ब्लॉगर का बढ़ता बाज़ार एक्सक्लूसिव वीडियो के प्रसारण की वजह से लगातार बढ़ रहा है. इन वीडियो की वजह से उनके फ़ॉलोवर्स में इजाफा हो रहा है.

इन फॉलोवर्स में घरेलू युद्ध समर्थकों के अलावा पश्चिमी और यूक्रेनी विश्लेषक शामिल हैं, जो यह समझना चाहते हैं कि रूस में आख़िर चल क्या रहा है.

हालांकि इन युद्ध समर्थकों द्वारा पोस्ट किए गए कुछ वीडियो फेक भी होते हैं.

पिछले साल मार्च में प्रमुख इंफ्लुएंसरों ने एक डैशकैम वीडियो पोस्ट किया था. इस वीडियो में दो यूक्रेनी सैनिकों को एक कार रोकते हुए दिखाया गया था.

कार में एक महिला और एक छोटा बच्चा सवार थे. रूसी बोलने की वजह से बंदूकधारी महिला को सूअर कहकर संबोधित कहते हुए उसे धमकाते हैं.

यूक्रेन में डैशकैम पर पाबंदी

जेड ब्लॉगरों का कहना था कि यह वीडियो इस बात का आदर्श उदाहरण है कि यूक्रेनी अपने नागरिकों के साथ किस तरह का व्यवहार कर रहे हैं.

लेकिन जब हमने वीडियो में दिख रही जगह के बारे में पता लगाया तो वह डॉनेस्ट्क के पास का एक इलाका मक्किवाका निकला. यूक्रेन के इस इलाके पर 2014 से ही रूस समर्थक प्रॉक्सी बलों का कब्जा है.

किसी यूक्रेनी वर्दीधारी सैनिक का इस जगह से काम कर पाना नामुमकिन है. वहीं यूक्रेन में डैशकैम का इस्तेमाल ग़ैरक़ानूनी है.

रूसी हमले के बाद सैनिकों की आवाजाही को गुप्त बनाए रखने के लिए यह पाबंदी लगाई गई थी. इस गाड़ी पर बना क्रॉस का निशान भी यूक्रेनी सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले क्रॉस से अलग था.

ये सारी बातें उस वीडियो के फेक होने की बात को साबित करते हैं. यह रूसी युवाओं में युद्ध का समर्थन बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए गए फेक वीडियो में से एक है. यह इस बात का सबूत है कि वो इसमें सफल हो रहे हैं.

वहीं एक दूसरे वीडियो में युद्ध के लिए तैयार एक व्यक्ति कहता है कि वो वासडेन ट्राटस्की नाम के एक प्रमुख ब्लॉगर के वीडियो देखने के बाद एक भर्ती केंद्र पर पहुंच गया था. अप्रैल, 2023 में प्रसंशकों के साथ बैठक के दौरान ट्राटस्की की हत्या कर दी गई थी.

रूस में तेजी से बढ़ता टेलीग्राम का बाज़ार

यूक्रेन के साथ युद्ध में स्वयंसेवक के रूप में काम करने वाले एक रूसी व्यक्ति ने एक ब्लॉगर का नाम लेते हुए कहा कि 'वॉर गोंजो' की रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने ऐसा किया.

उन्होंने कहा कि वो टेलीग्राम पर सभी सैन्य समाचारों और विश्लेषणों को फॉलो करते हैं.

पुतिन समर्थक ब्लॉगरों की बढ़ोतरी के सवाल पर टेलीग्राम का कहना था कि यह अंतिम प्लेटफ़ॉर्म था, जहां से रूसी नागरिक मेडुजा और बीबीसी जैसी स्वतंत्र मीडिया या राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के भाषणों तक अपनी पहुंच बना सकते हैं.

टेलीग्राम के एक प्रवक्ता ने कहा कि सभी पक्षों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाता है.

उनका कहना था कि टेलीग्राम ने अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों का सम्मान करते हुए जहां कानूनी रूप से यह वैध था, वहां रूस के सरकारी मीडिया पर पाबंदी लगाई है.

युद्ध का मैदान

युद्ध के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने ज़ेड ब्लॉगरों के प्रयासों की तारीफ की.

उन्होंने अलेक्जेंडर कोट्स को राष्ट्रपति की मानवाधिकार काउंसिल में नामित किया तो सेमयान पेगोव और अन्य ब्लॉगरों को लामबंदी करने वाले एक ग्रुप में शामिल किया.

इस साल जून में उन्होंने युद्ध समर्थक इंफ्लुएंसरों और सरकारी मीडिया के संवाददाताओं को बातचीत के लिए क्रेमलिन में आमंत्रित किया था.

यह बातचीत दो घंटे तक चली थी.

उन्होंने जेड ब्लॉगरों से कहा कि लड़ाई में सूचना का क्षेत्र एक युद्ध का मैदान है. यह युद्ध का एक महत्वपूर्ण मैदान है. मैं आपकी मदद पर भरोसा करता हूं.

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