You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पुतिन को चुनौती देने वाले येवगेनी प्रिगोज़िन क्या तलवार की धार पर जी रहे थे
- Author, फ्रैंक गार्डनर
- पदनाम, बीबीसी रक्षा संवाददाता
रूस की प्राइवेट आर्मी वागनर आर्मी के मुखिया येवगेनी प्रिगोज़िन ने अब से ठीक दो महीने पहले बग़ावती तेवरों के साथ मॉस्को पर चढ़ाई की थी.
इसके बाद से रूसी विश्लेषक उनकी व्याख्या तलवार की धार पर जीने वाले शख़्स के रूप में कर रहे थे.
अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स ने हाल ही में प्रिगोज़िन के भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि "अगर मैं प्रिगोज़िन होता तो मैं अपने खाने का परीक्षण करने वाले को नौकरी से नहीं निकालता."
अगर कभी ये साबित हो पाया कि येवगेनी प्रिगोज़िन को लेकर जा रहे विमान का बीच आसमान में दुर्घटनाग्रस्त होना रूसी सरकार की ओर से लिया गया निर्मम बदला है तो ये रूसी इतिहास में सबसे बड़ा ‘विशेष सैन्य अभियान’ है.
वागनर आर्मी की कमान संभालने और रूसी सत्ता के शिखर पर बैठे लोगों के क़रीब आने से पहले येवगेनी प्रिगोज़िन की ज़िंदगी का सफर बेहद दिलचस्प रहा है.
जेल से गिरते प्लेन तक येवगेनी
साल 1979 में मात्र 18 साल की उम्र में पहली बार चोरी करने के मामले में सज़ा पाने वाले येवगेनी ने अपनी ज़िंदगी का लगभग एक दशक सलाखों के पीछे गुज़ारा.
साल 1990 में जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने बाबर्ची से लेकर हॉट डॉग बेचने से लेकर तमाम दूसरे व्यवसायों में हाथ आजमाया. इस दौरान वह धीरे-धीरे बदलते रूस और उसकी सत्ता के क़रीब पहुंच रहे लोगों के क़रीब आए.
प्रिगोज़िन को पसंद करने वाले में सिर्फ़ वागनर आर्मी के लड़ाके ही शामिल नहीं थे. अब से ठीक दो महीने पहले येवगेनी प्रिगोज़िन अपनी एक दिवसीय बग़ावत के साथ रूसी शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन पहुंचे थे. इस मौके पर इस शहर में रहने वाले लोगों ने जिस तरह उनका इस्तक़बाल किया था, उसके गवाह कई लोग बने थे.
लेकिन रूसी सत्ता के केंद्र मॉस्को में उनके पास दुश्मनी की कमी नहीं थी. उनके सबसे ज़्यादा दुश्मन रूसी सेना में थे जिनकी वह सार्वजनिक तौर पर कई बार आलोचना कर चुके थे.
लेकिन 23 जून को मॉस्को पर चढ़ाई करके पुतिन के लिए परेशानी का सबब बनना संभवत: उनकी जानलेवा ग़लती रही.
क्रेमलिन को किया नाराज़
हालांकि, प्रिगोज़िन ने इस मौके पर पुतिन का नाम नहीं लिया था. लेकिन उन्होंने रूस की ओर से फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला करने के लिए दी गई आधिकारिक वजहों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करके क्रेमलिन को बुरी तरह नाराज़ कर दिया.
रूस में क्रेमलिन वो किलेनुमां जगह है जहां रूसी राष्ट्रपति निवास करते हैं. दुनिया भर में रूसी सत्ता के केंद्र का ज़िक्र करने के लिए क्रेमलिन शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.
उन्होंने रूसी जनता से कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है और उनके बेटे यूक्रेन युद्ध में ख़राब नेतृत्व की वजह से मारे जा रहे हैं.
ये एक तीख़ी आलोचना थी जिसके बाद पुतिन का वीडियो संदेश आया जो कड़वाहट से भरा हुआ था.
उन्होंने मॉस्को पर प्रिगोज़िन के मार्च को विश्वासघात और पीठ में छुरा घोंपने की संज्ञा दी.
माफ़ नहीं करते पुतिन
व्लादिमीर पुतिन गद्दारों और खुद को चुनौती देने वालों को माफ़ नहीं करते.
पाला बदलने वाले रूस के पूर्व ख़ुफिया अधिकारी अलेक्जेंडर लितविनेंको पर साल 2006 में रेडियोएक्टिव पदार्थ पोलोनियम – 210 से हमला किया गया था जिसके बाद उनकी लंदन के अस्पताल में धीमी मौत हुई.
इस मामले की जांच में सामने आया कि उनका हत्यारा इस ख़तरनाक पदार्थ (पोलोनियम-210) को रूस से लेकर आया था. और ये सिर्फ रूस की सरकारी लैब से ही जुटाया जा सकता था.
रूस ने इस मामले में अपनी किसी तरह संलिप्तता से इनकार किया. हालांकि, इस मामले से जुड़े दो संदिग्धों को हैंडओवर करने से मना कर दिया.
सोवियत संघ के दौर वाली ख़ुफ़िया एजेंसी केजीबी के पूर्व अधिकारी सर्गेइ स्क्रिपल पर हमले की घटना भी कुछ ऐसी है. वह भी रूस का साथ छोड़कर ब्रिटेन आकर बसे थे.
अचानक मौतों का सिलसिला
साल 2018 में रूसी सेना के ख़ुफ़िया विभाग जीआरयू के अधिकारियों ने ब्रिटेन के सलिसबरी स्थित स्क्रिपल के घर के दरवाज़े पर नर्व एजेंट नोविचोक लगाया था. लेकिन स्क्रिपल और उनकी बेटी इस हमले में बाल-बाल बच गयीं.
लेकिन ये घातक रसायन जिस परफ्यूम की बोतल में लाया गया था, उसे ज़मीन पर कहीं फेंक दिया गया. और डॉन स्ट्रुगेस नामक महिला ने इसे उठाकर अपने कलाई पर लगा लिया जिससे उनकी मौत हो गयी.
रूस में सरकार के आलोचकों से लेकर व्यावसायियों तक ऐसे लोगों की फेहरस्ति लंबी है जिनकी मौत अचानक हुई है. कुछ मामलों में लोगों की मौत “ऊंची खिड़कियों से गिरने की वजह” से हुई.
राष्ट्रपति पुतिन के धुर आलोचक अलेक्सि नवेलनी कथित रूप से राजनीति से प्रेरित आरोपों के चलते एक रूसी जेल में सज़ा काट रहे हैं.
नवेलनी पर भी एक फ़्लाइट के दौरान नोविचोक नर्व एजेंट से हमला किया गया था. लेकिन उनकी जान बच गयी.
कैसे बनाई वागनर आर्मी
लेकिन प्रिगोज़िन का मामला अलग था. इसी वजह से उनका इस तरह मरना रूसी लोगों के लिए विवाद खड़ा कर गया है. ये वो शख़्स था जो क्रेमलिन के लिए बेहद उपयोगी था और कई लोगों के बीच राष्ट्रीय नायक की तरह देखा जाता था.
प्रिगोज़िन की वागनर आर्मी की स्थापना साल 2014 में हुई थी जिसमें रूसी स्पेशल फोर्सेज़ समेत दूसरी सैन्य टुकड़ियों के पूर्व सैनिकों को शामिल किया गया था.
यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में काफ़ी सक्रिय रही वागनर आर्मी ने बखमुत से यूक्रेनी सैनिकों को खदेड़ कर दुश्मनों के दिल में भय पैदा करने वाला रुतबा हासिल किया जो रूसी सेना को हासिल नहीं है.
प्रिगोज़िन ने रूसी जेलों में घूम-घूमकर वागनर आर्मी को मजबूत किया. इस प्रक्रिया में उन्होंने हज़ारों सज़ायाफ़्ता कैदियों से लेकर बलात्कारियों और हत्यारों को अपने गुट में शामिल किया.
इन्हें पूर्वी यूक्रेन में कैनन फॉडर के रूप में इस्तेमाल किया गया. क्योंकि यहां सैन्य कमांडरों ने इन लड़ाकों को अग्रिम मोर्चे पर भेजा ताकि दुश्मन का मनोबल कम किया जा सके.
वागनर आर्मी ने सीरिया में भी काम किया है. लेकिन अफ़्रीका में इस ग्रुप ने क्रेमलिन के लिए रणनीतिक सफलताएं हासिल की हैं. यहां उन्होंने एक निर्मम लेकिन प्रभावशाली व्यापारिक मॉडल विकसित किया है जो अलोकतांत्रिक सरकारों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है.
वागनर आर्मी इन सरकारों को वीआईपी लोगों को सुरक्षा प्रदान करने से लेकर चुनावों को प्रभावित करने, आलोचकों को शांत करने जैसी सेवाएं दे रही है.
इनके बदले में उसे कई अफ़्रीकी देशों में सोना समेत दूसरे खनिजों को निकालने के अधिकार मिल रहे हैं. इस बिज़नेस मॉडल के तहत पैसा वापस मॉस्को जाता है और इस धंधे में शामिल सभी लोग लाभांवित हैं. बस इन देशों की मूल जनता को छोड़कर.
वागनर गुट पर मानवाधिकार उल्लंघन के कई आरोप लगे हैं. इनमें माली और सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में आम लोगों के नरसंहार जैसे मामले शामिल हैं.
इसके बावजूद वे विशाल अफ़्रीकी भूभाग से फ्रेंच समेत दूसरी पश्चिमी सैन्य ताक़तों को खदेड़ने में सफल हुए हैं.
पिछले हफ़्ते एक टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में प्रिगोज़िन नज़र आए. ये वीडियो संभवत: माली में वागनर आर्मी के मुख्यालय पर रिकॉर्ड किया गया था.
इसमें प्रिगोज़िन अफ़्रीका में वागनर आर्मी की गतिविधियां बढ़ाने की बात कहते हुए अफ़्रीकी लोगों को आज़ाद करने का ज़िक्र कर रहे थे.
इस सबके बावजूद मॉस्को, विशेष रूप से रूसी सेना के ख़ुफिया विभाग में कुछ लोग उन्हें एक दायित्व और पुतिन के शासन और उनके आसपास बने तंत्र के लिए संभावित ख़तरे के रूप में देखते हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)