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पुतिन ने ‘तबाही' मचाने वाले जनरल को दी यूक्रेन की कमान
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बीते शनिवार अपने एक अहम सैन्य अधिकारी को यूक्रेन युद्ध की कमान सौंपी है. रूसी सरकार ने बताया है कि सर्गेई सुवोविकीन को 'विशेष सैन्य अभियान के क्षेत्र में संयुक्त सैन्य टुकड़ियों का कमांडर' बनाया गया है.
बता दें कि रूस यूक्रेन युद्ध को शुरुआत से ही एक युद्ध न कह कर, विशेष सैन्य अभियान कहता आया है. क्राइमिया को रूस से जोड़ने वाले पुल पर ट्रक बम धमाके के कुछ घंटों बाद लिए गए इस फ़ैसले से रूस ने इस युद्ध को लेकर अपनी रणनीति से जुड़ा अहम संकेत दिया है.
इस बम धमाके में पुल को गंभीर नुकसान पहुंचा था. इसके साथ ही सात फ़्यूल टैंकों में आग लग गयी थी. हालांकि, यूक्रेन ने इस हमले के लिए किसी तरह की ज़िम्मेदारी नहीं ली.
रूस ने की जवाबी कार्रवाई
पुल पर धमाका होने के लगभग 48 घंटे बाद ही रूस ने सोमवार को यूक्रेन की राजधानी किएव पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन मिसाइल हमलों को उस "आतंकी गतिविधि" की प्रतिक्रिया करार दिया है जिसके लिए उन्होंने ज़ेलेंस्की सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया था.
पूर्वी यूरोप में बीबीसी संवाददाता सारा रेंसफोर्ड के मुताबिक़, ये हमला पुतिन की ओर से उनके अपने ही कैंप में मौजूद आक्रामक तत्वों के लिए भी था जो युद्ध में रूसी नुकसान होने की वजह से असहज थे. और लगातार कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे थे.
रूसी अधिकारी और टीवी एंकर जो कुछ दिन पहले तक निराश और हताश नज़र आ रहे थे, वे इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर ख़ुशी का इज़हार करते दिख रहे हैं. वहीं, यूक्रेन सोमवार को हुए इन धमाकों में मारे गए लोगों के शोक में डूबा हुआ है.
कौन हैं सर्गेई सुवोविकीन
साइबेरिया में जन्में 56 वर्षीय सर्गेई सुवोविकीन अपने दोस्तों के बीच 'जनरल आर्मेगाडन' यानी तबाही लाने वाले जनरल के रूप में विख्यात हैं.
रूसी सेना में उनका करियर बहुत तेजी से आगे बढ़ा है. अफ़ग़ानिस्तान से लेकर चेचेन्या, ताजिकिस्तान और सीरिया जैसे भीषण युद्धों में उनकी क्रूरता और बर्बरता दुनिया ने देखी है. रूस उन्हें एक सख़्त सैन्य नेता मानता है.
रूसी न्यूज़ एजेंसी टास के मुताबिक़, चेचेन्या के युद्ध में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि "एक मृत सैनिक के बदले तीन चरमपंथियों" को मारा जाएगा.
साल 2017 के अगस्त में रूसी सेना के जनरल बनने से पहले उनके हाथ में सीरियाई युद्ध की कमान थी.
न्यूज़ एजेंसी टास के मुताबिक़, सर्गेई सुर्वोविकीन ने साल 2017 में सीरिया में मौजूद सैन्य टुकड़ियों का नेतृत्व करते हुए ज़्यादातर क्षेत्र पर क़ब्ज़ा कर लिया जिसमें मुख्य परिवहन मार्ग और तेल क्षेत्र आदि शामिल हैं.
साल 2017 के सितंबर में उन्हें रूसी एयरोस्पेस फ़ोर्स का कमांडर इन चीफ़ घोषित किया गया जिसके आधार पर वह सीरियाई शहर अलेप्पो को तबाह करने वाले हवाई हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराए गए.
इसके महीने भर बाद पुतिन ने सीरिया में बेहतरीन काम करने के लिए सर्गेई को 'रूसी संघ के हीरो' अवॉर्ड से सम्मानित किया था.
सुर्वोविकीन के कारनामों में साल 1991 के तख़्तापलट के दौरान लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों की हत्याएं भी शामिल हैं.
टास के मुताबिक़, इन हत्याओं के लिए उन्हें क्रूर करार देकर गिरफ़्तार किया गया था. लेकिन रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने उनकी रिहाई के आदेश दिए थे.
यूक्रेन पर फोकस
बीबीसी के सुरक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डरनर के मुताबिक़, सुर्वोविकीन पहले ही यूक्रेन के 'दक्षिण' में सैन्य टुकड़ियों का नेतृत्व कर रहे हैं. ऐसे में अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि इस नियुक्ति से क्या बदल जाएगा.
यूक्रेन में रूस एक असली सेना का मुक़ाबला कर रहा है जिसे नेटो देशों ने हथियार और ट्रेनिंग दी है. और इस युद्ध में रूसी सेना लगातार ज़मीन और इज़्ज़त खोती जा रही है.
रूस ने इस मोर्चे पर अपने कई जनरलों को खो दिया है और कई सैन्य अधिकारियों को उनकी नाकामी के चलते बर्ख़ास्त कर दिया गया है.
वहीं, रूस में ऐसे कई तत्व हैं जो यूक्रेन को झुकाने के लिए कड़े और आक्रामक कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.
क्राइमिया को रूस से जोड़ने वाले पुल पर धमाका होने के बाद इस युद्ध को लेकर रूसी निराशा अपने चरम पर पहुंच गयी है.
सारा रेंसफोर्ड कहती हैं कि यूक्रेन में सेना की कमान सुर्वोविकीन के हाथों में देना आक्रामक तत्वों को पुतिन की ओर से जवाब दिया जाना है.
वे काफ़ी वक़्त से यूक्रेनी शहरों के बुनियादी ढांचों पर हमला करने की मांग कर रहे थे. यही नहीं, ऐसे तत्व मांग कर रहे हैं कि अगर यूक्रेनी सेना को युद्ध के मैदान में हराया न जा सके तो यूक्रेनी जनता को सर्दियों में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया जाए.
दुष्प्रचार करने वालों के रूप में चर्चित व्लादिमीर सोलोव्योव ने कहा है कि रूस के लिए ये बेहतर था लोग उससे डरें, बजाए इसके कि वे उसका मजाक उड़ाएं.
सोलोव्योव ने एक सवाल ये भी पूछा है कि "आख़िर हम लड़ना कब शुरू करेंगे?"
मॉस्को स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एवं सोशल साइंसेज़ से जुड़े ग्रेगरी युदिन ने सोमवार को ताबड़तोड़ हमलों को मजबूरी का सौदा करार दिया है जिनका मकसद पुतिन की आंतरिक समस्याएं का हल निकालना था.
युदिन ने ट्विटर पर लिखा है कि ऐसा लगता है, रूसी राष्ट्रपति ने उस आक्रामक विचार को स्वीकार कर लिया है कि आपको अपने विरोधी को हराने के लिए उसके मन में मौत का भय जगाना होगा.
कभी रूसी सरकार का उदारवादी चेहरा माने जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने चेतावनी दी है कि ये हमला सिर्फ़ पहली किश्त हैं और आने वाले दिनों में और हमले किए जा सकते हैं.
फ्रैंक गार्डनर मानते हैं, "ये स्पष्ट है कि उनकी सेना अलग-अलग मोर्चों पर बिखरी हुई हैं. अगर सुर्वोविकीन इस युद्ध को नया आकार देने की कोशिश करेंगे तो वह एक जगह पर ध्यान केंद्रित करके बहुत ज़्यादा ताकत झोंक देंगे."
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