पुतिन से बग़ावत करने वाले वागनर ग्रुप के चीफ़ प्रिगोज़िन की विमान 'हादसे' में कथित मौत का पूरा मामला जानिए

रूसी प्राइवेट आर्मी के चीफ येवगेनी प्रिगोज़िन का एक निजी विमान रूसी शहर तेवेर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. इसमें सवार सभी दस लोग मारे गए हैं.

रूस की फेडरल ट्रांसपोर्ट एजेंसी ने विमान हादसे में मरने वालों की सूची में येवगेनी प्रिगोज़िन का भी नाम शामिल किया है.

प्रिगोजिन के अलावा वागनर ग्रुप के सह-संस्थापक दमित्री अतकीन, पांच अन्य यात्रियों और चालक दल के तीन सदस्यों के नाम भी मरने वालों की सूची में दर्ज है.

हालांकि अभी ये साफ़ नहीं हो पाया है कि विमान को मार गिराया गया या फिर इसमें हवा में ही विस्फोट हो गया.

इस साल जून में येवगेनी प्रिगोज़िन ने रूस के ख़िलाफ़ 'बगावत' का थोड़ी देर के लिए नेतृत्व किया था. लेकिन बाद में रूस की सरकार से समझौते के बाद उनके ख़िलाफ़ सभी आरोप वापस ले गए थे.

इसके बाद वो बेलारूस चले गए थे. हालांकि इसके बाद से ही ये कयास लगने लगे थे कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उन्हें माफ़ नहीं करेंगे.

किस विमान में सवार थे प्रिगोज़िन

रूसी शहर तेवेर में येवगेनी प्रिगोज़िन का जो निजी विमान गिरा है, उसे एम्ब्रेयर लीगेसी जेट बताया जा रहा है. इस पर आरए-02795 लिखा है.

जानी-मानी फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइट रडार 24 में यह नहीं दिख रहा है कि ये विमान कहाँ से उड़ा था.

बुधवार को शुरू में ये मॉस्को के नजदीक उड़ता दिख रहा था. वहां ये विमान 29 हज़ार फिट की ऊंचाई पर था, लेकिन ट्रैकिंग वेबसाइट में इसके बाद ग़ायब दिखने लगा. इसके बाद इसके गिरने के संकेत मिलने लगे क्योंकि इसकी ऊंचाई शून्य फिट दिख रही थी.

विमान ऑटोलक्स ट्रांसपोर्ट में रजिस्टर्ड था. अमेरिकी सरकार का कहना है कि विमान येवगेनी प्रिगोज़िन का ही था.

विमान के फ्लाइट रिकॉर्ड का काफ़ी कम हिस्सा फ्लाइटरडार24 के ज़रिये मिला है.

लेकिन हाल के दिनों में इस विमान ने मॉस्को से और सेंट पीटर्सबर्ग के बीच कई उड़ानें भरी थीं और बेलारूस में स्थानीय मीडिया ने इसकी तस्वीरें भी ली थीं. समझा जाता है कि वागनर ग्रुप ने अपना ठिकाना अब यहीं बना लिया है.

वागनर ग्रुप से जुड़े टेलिग्राम चैनल ने मौत की पुष्टि की

वागनर ग्रुप से जुड़े टेलिग्राम चैनल 'ग्रे ज़ोन' ने कहा है कि येवगेनी प्रिगोज़िन की मौत हो चुकी है.

'ग्रे ज़ोन' ने कहा है, "येवगेनी प्रिगोज़िन ने रूस के ख़िलाफ़ गद्दारी की थी, लिहाजा उन्हें मार डाला गया."

यूक्रेन ने क्या कहा?

यूक्रेन ने कहा है कि वागनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोज़िन ने अपने डेथ वॉरंट पर खुद ही दस्तखत कर लिए थे.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की के सलाहकार मिखाइलो पोदोल्याक ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस बारे में पोस्ट लिखा है.

वह कहते हैं, "युद्ध का कोहरा छंटने का इंतज़ार करना होगा, लेकिन ये साफ़ है कि प्रिगोज़िन ने उसी पल अपने लिए स्पेशल डेथ वॉरंट पर दस्तखत कर दिए थे, जब उन्होंने लुकाशेंको की विचित्र 'गारंटियों' और पुतिन के सम्मान से भरे शब्दों पर भरोसा कर लिया था.

पोदोल्याक लिखते हैं, "तख्तापलट की कोशिश के दो महीने बाद प्रिगोज़िन और वागनर का न दिखना पुतिन की ओर से 2024 के चुनावों से पहले रूस के अभिजात वर्ग के लिए एक संकेत है. 'सावधान! वफ़ादारी न दिखाना मौत के बराबर है."

पुतिन के ख़िलाफ़ असफल 'बग़ावत'

वागनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोज़िन ने 24 जून, 2023 को रूस के राष्ट्रपति पुतिन के ख़िलाफ़ बग़ावत की घोषणा की थी.

रूस के भाड़े कै सैनिकों के समूह के प्रमुख प्रिगोज़िन ने तब कहा था कि वो ‘रूस के सैन्य नेतृत्व को उखाड़कर ही दम लेंगे.

तब वागनर ग्रुप के लड़ाके यूक्रेन की सीमा पार करके रूस के रोस्तोव-ऑन-डोन में शहर में घुस आए थे और सेना के उस मुख्यालय को अपने कब्ज़े में ले लिया था, जहां से यूक्रेन युद्ध का संचालन हो रहा है.

रोस्तोव शहर पर कब्जा करने के बाद प्रिगोज़िन ने कहा था कि अगर रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू और जनरल वालेरी गारासिमोव अगर उनसे मिलने नहीं पहुंचते हैं तो वो मॉस्को की तरफ़ बढ़ जाएंगे. उनका कहना था कि उनके रास्ते में जो भी आएगा उनके लड़ाके उसे तबाह कर देंगे.

प्रिगोज़िन ने तब इसे सैन्य तख़्तापलट की जगह इंसाफ़ की लड़ाई बताया था और कहा था, “राष्ट्रपति कार्यालय, सरकार, पुलिस और रूसी गार्ड पहले की ही तरह काम करते रहेंगे. ये सैन्य तख़्तापलट नहीं है बल्कि इंसाफ़ की लड़ाई है. हमारी गतिविधियां सैनिकों के रास्ते में कोई दख़ल नहीं देंगी.”

तब रूसी राष्ट्रपति ने वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वे सशस्त्र विद्रोह कर रूस को धोखा दे रहे हैं और इसे ‘देश की पीठ में छुरा घोंपने’ वाली कार्रवाई बताया था.

रूसी सेना और प्रिगोज़िन के बीच इस बात को लेकर विवाद था कि सेना उनके ग्रुप के लड़ाकों को ज़रूरी मात्रा में हथियार और गोलाबारूद नहीं पहुंचा पा रही है.

लेकिन रात होते-होते उन्होंने मॉस्को की तरफ कूच करने के अपने फैसले को वापस ले लिया था.

इस असफल बगावत के बाद परिइस बगावत के बाद प्रिगोज़िन रूस छोड़कर चले गए थे.

येवगेनी प्रिगोज़िन को जानिए

वे व्लादिमीर पुतिन के गृहनगर सेंट पीटर्सबर्ग से हैं. उन्हें साल 1979 में पहली बार चोरी के आरोप में ढाई साल की सजा सुनाई गई थी. उस समय उनकी उम्र महज 18 साल थी.

दो साल बाद प्रिगोज़िन को डकैती और चोरी के आरोप में 13 साल की सजा मिली, जिसमें से 9 साल उन्होंने जेल में बिताए.

जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग में हॉट डॉग बेचने का काम शुरू किया. बिजनेस अच्छा चला तो कुछ ही सालों में उन्होंने शहर में महंगे रेस्तरां खोल दिए.

यही वो समय था जब वो सेंट पीटर्सबर्ग और फिर रूस के ताकतवर लोगों के संपर्क में आए.

प्रिगोज़िन ने एक नाव को रेस्तरां की तरह बनाया हुआ था, जिसका नाम उन्होंने न्यू आइलैंड रखा था. यह रेस्तरां नेवा नदी में किसी नाव की तरह चलता था. व्लादिमीर पुतिन को यह रेस्तरां इतना पसंद था कि उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद भी यहां जाना नहीं छोड़ा.

पुतिन अपने विदेशी मेहमानों को भी कई बार इस रेस्तरां पर ले जाते थे. माना जाता है कि यहीं पर उनकी मुलाकात और दोस्ती येवगेनी प्रिगोज़िन से हुई.

प्रिगोज़िन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब पुतिन, जापानी प्रधानमंत्री योशिरो मोरी के साथ रेस्तरां में आए थे तो उनकी मुलाकात हुई थी. यह साल 2000 का समय था.

तीन साल बाद राष्ट्रपति पुतिन ने अपना जन्मदिन न्यू आइलैंड पर ही मनाया. कुछ सालों के बाद प्रिगोज़िन की कंपनी कॉनकॉर्ड को क्रेमलिन में भोजन आपूर्ति का ठेका मिला और उसके बाद उन्हें पुतिन का शेफ बुलाया जाने लगा.

इसके बाद उन्होंने सैन्य और सरकारी स्कूलों में भी खानपान से संबंधी सरकारी ठेके हासिल किए.

2010 के दशक तक, कई पत्रकारीय इंवेस्टीगेशन में प्रिगोज़िन को सेंट पीटर्सबर्ग के एक कथित ट्रोल फ़ैक्ट्री से संबद्ध बताया गया था. इस ट्रोल फ़ैक्ट्री का काम रूस के राजनीतिक विपक्ष को बदनाम करने और पुतिन शासन की तारीफ़ वाले कंटेंट तैयार करना और इस दिशा में कैंपेन चलाना था.

2016 में, अमेरिकी विशेष सरकारी वकील रॉबर्ट म्यूलर की एक जांच के अनुसार, ट्रोल फ़ैक्ट्री अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप करने के लिए रूस के प्रयास का हिस्सा थी. हालांकि प्रिगोझिन ने ट्रोल फ़ैक्ट्री से किसी तरह के जुड़ाव से इनकार किया है.

वागनर ग्रुप की शुरुआत

साल 2014 में पहली बार वागनर ग्रुप के बारे में जानकारी सामने आई और पता लगा कि यह पूर्वी डोनबास क्षेत्र में यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेना की मदद कर रहा है. इसके लड़ाके बाद में सीरिया और कई अफ़्रीकी देशों में दिखाई दिए.

साल 2019 में जब सीरिया में रूसी लड़ाकों के बारे में राष्ट्रपति पुतिन से पूछा गया था. उस वक़्त पुतिन ने कहा था कि वहां कुछ प्राइवेट सिक्युरिटी कंपनियां वहां काम कर रही हैं, लेकिन इनका रूसी सरकार से कोई लेना देना नहीं है.

पुतिन ने इसी तरह के बयान साल 2020 में लीबिया में रूसी लड़ाकों के बारे में पूछे जाने पर भी दिया था.

लेकिन जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो ये सब बदल गया. जब रूसी सेना यूक्रेन में जल्द अपना लक्ष्य हासिल करने में असफल रही तो येवगिनी प्रिगोझिन, रूसी सेना की आलोचना करने लगे और वागनर ग्रुप से अपने संबंध पर खुल कर बोलने लगे.

आख़िरकार उन्होंने सितम्बर, 2022 में स्वीकार किया कि उन्होंने ही 2014 में इस संगठन की स्थापना की थी.

यूक्रेन में जंग से पहले वागनर ग्रुप में शामिल होने वाले अधिकांश लोग एक छोटे कस्बे से थे, जहां अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी ढूंढने की संभावना सीमित थी.वागनर के लिए काम करने के लिए 1500 डॉलर (क़रीब 1.22 लाख रुपये) मिलते हैं और अगर किसी लड़ाके को जंग में भेजा जाता है तो 2,000 डॉलर (1.6 लाख रुपये) तक मिल जाते हैं.

वागनर के लड़ाके सीरिया में राष्ट्रपति असद के साथ कंधे से कंधा मिलकर लड़े. उन्होंने लीबिया में संयुक्त राष्ट्र की समर्थित सरकार के ख़िलाफ़ जनरल हफ़्तार की मदद के लिए जंग में हिस्सा लिया.

एक अनुमान के अनुसार, 2014 से 2021 के बीच वागनर ग्रुप में 15,000 लोग शामिल हुए.

यूक्रेन के बखमुत पर रूस के कब्जा करने में वागनर ग्रुप का बड़ा हाथ है.

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