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मॉस्को हमला: चश्मदीदों ने बताया- 'हमलावर भीड़ पर मशीनगन से गोलियां चला रहे थे...'
शुक्रवार शाम को बंदूकधारी रूस में मॉस्को के क्रॉकस सिटी हॉल में घुस गए और उन्होंने मशीनगनों से गोलीबारी शुरू कर दी.
म्यूजिक कॉन्सर्ट के लिए यह हॉल, मॉस्को के सबसे बड़ी जगहों में से एक है, जहां एक बार में करीब छह हजार लोग शामिल हो सकते हैं.
शाम को हॉल में हजारों लोग थे, जो पिकनिक ग्रुप के कॉन्सर्ट में हिस्सा लेने आए थे.
कॉन्सर्ट की सभी टिकटें बिक चुकी थीं.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 133 हो गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं. मरने वालों में बच्चे भी शामिल हैं. बीबीसी ने उन लोगों से बात की है, जिन्होंने हॉल में गोलीबारी को देखा और वे वहां से भागने में कामयाब रहे.
'हमें लगा पटाखे चल रहे हैं...'
क्रॉकस हॉल में कॉन्सर्ट रात को आठ बजे शुरू होना था, लेकिन कुछ ही मिनट पहले बंदूकधारियों ने हमला कर दिया. इस वक्त तक ज्यादातर दर्शक हॉल में अपनी जगह ले चुके थे.
मॉस्को की रहने वालीं सोफ़ियो क्विरिकाशविली अपने पति के साथ कॉन्सर्ट के लिए आई थीं.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "हम वीआईपी एरिया की छठी लाइन में बैठे थे. कुछ संगीत बज रहा था और स्क्रीन पर आगे आने वाले कार्यक्रम के पोस्टर दिखाए जा रहे थे. दूसरी घंटी बजी और हॉल आधे से ज्यादा भर गया."
गोलीबारी के समय हॉल में मौजूद फोटोग्राफर डेव प्रिमोव बताते हैं, "हम ऊपर बालकनी में थे. कॉन्सर्ट शुरू होने में करीब दस मिनट बाकी थे, बहुत सारे लोग पहले ही आ चुके थे. इस वक्त तक हॉल करीब 70 प्रतिशत तक भरा हुआ था."
इसी तरह इवा भी उन लोगों में से एक हैं, जो हमले के वक्त क्रॉकस सिटी हॉल में थीं. वे उस डांस ग्रुप की सहायक हैं, जिन्हें रात आठ बजे मंच पर जाना था.
इवा बताती हैं, "बाहर जाने से पांच मिनट पहले हम मंच के पीछे जाने की तैयारी करने लगे. मैं मंच के पीछे ड्रेसिंग रूम में थी."
जो लोग पहले से ही हॉल में मौजूद थे, वे यह नहीं देख पाए कि कैसे अज्ञात बंदूकधारियों ने एंट्री ली और गोलीबारी शुरू कर दी. लोगों को पहले तो यह समझ ही नहीं आया कि हो क्या रहा है?
सोफ़ियो क्विरिकाशविली बताती हैं, "मैंने हॉल में एक बार अपनी नजर घुमाई, फिर दूसरी बार देखा और आखिर में तीसरी बार मुझे समझ आया कि हॉल में चारों तरह लोग अलग-अलग दिशाओं में भाग रहे हैं."
ऐसा ही कुछ फोटोग्राफर डेव प्रिवोव बताते हैं, "हमें आवाजें सुनाई दीं, हमें लगा कि ये पटाखे हैं. मेरा दोस्त भी उस वक्त हॉल में मेरे साथ था. उसने भी इन आवाजों को शुरू में पटाखों की आवाज की तरह ही लिया. लेकिन थोड़ी ही देर में हमने देखा कि नीचे मंच के पास लोग एक लाइन में चल रहे हैं, यह मुझे उस वक्त समझ नहीं आया था."
सुरक्षाकर्मियों की सूझबूझ से बची जान
इवा कहती हैं, "मैं सिनेमा में काम करती हूं, इसलिए मुझे गोलियों से डर नहीं लगता. शुरू में मुझे कुछ समझ नहीं आया. हम लोग ड्रेसिंग रूम में थे. हमने देखा की लोगों की भीड़ भाग रही है. हमने शोर सुना और हम लोगों ने भी अपनी जैकेट उठाई और भीड़ के साथ सड़क की तरफ भागने लगे."
सोफिको बताती हैं कि जब हमला हुआ तो उनके पति ने सबसे पहले उन्हें उठाया और कहा, "भागो, मैं तुम्हें बाद में मिलूंगा."
वे बताती हैं, "हम भागे नहीं. हम शांति से पहले मंच के पीछे गए और फिर सर्विस गलियारे की मदद से सड़क पर पहुंचे. भीड़ में से किसी ने चिल्लाकर कहा कि कोई पागल गोली चला रहा है."
उनके मुताबिक क्रॉकस सिटी हॉल के सुरक्षा कर्मचारियों ने अनाउंसमेंट की कि सभी लोग मंच की तरफ जाएं.
वे बताती हैं, "बहुत सारे लोग हमारे साथ भागे, लेकिन ये वो भीड़ थी, जो अब तक घबराई नहीं थी. मंच के पीछे गलियारे में मैंने अपने पति का इंतजार किया, जिसके बाद हम सड़क पर खड़ी अपनी कार की तरफ भागने लगे."
इवा का यह भी कहना है कि सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत प्रभाव से सभी एग्जिट गेट खोल दिए थे.
उन्होंने कहा, "हमले के वक्त सुरक्षाकर्मियों ने लोगों को पेशेवर तरीके से निर्देशित किया और यह अपील की कोई घबराए ना. मैं बस भीड़ के साथ चल रही थी."
वहीं जो लोग ऊपर बालकनी में बैठे थे, उनके पास इतना समय नहीं था कि वे भागकर मंच के पास आएं और पीछे बने गलियारे की मदद से सड़क तक पहुंच जाएं. उन्होंने बाहर निकलने के लिए दूसरे रास्ता का इस्तेमाल किया.
बालकनी में मौजूद डेव प्रिवोव कहते हैं, "पटाखों की आवाजें पहले से तेज और करीब से सुनाई देनी लगी थीं, जिसके बाद हॉल में भगदड़ मच गई, लोग जहां-तहां भागने लगे. लोग भागते वक्त एक दूसरे से टकरा रहे थे क्योंकि उन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था."
उसी वक्त मंच के बाईं तरफ कॉन्सर्ट हॉल में गोलीबारी शुरू हो गई और डेव प्रिवोव ने देखा कि हमलावर हॉल में प्रवेश कर रहे हैं. डेव प्रिवोव और उनके दोस्त मंच से दूर बालकनी में बैठे थे.
उन्होंने बताया कि हमलावरों ने भूरे रंग के कपड़े पहन रखे थे और वे लोगों की भीड़ पर मशीनगन से गोलियां चला रहे थे.
'रेंगते हुए बाहर आए...'
डेव प्रिवोव कहते हैं, "वे हॉल में एंट्री हेट से मंच की तरफ बढ़े और लोगों को हॉल के केंद्र में ले आए."
उन्होंने बताया, "हर किसी ने फर्श पर लेटना शुरू कर दिया. हम गलियारे में एक दूसरे के ऊपर लेटने लगे. हमने भीड़ को आगे बढ़ने के लिए निर्देश देना शुरू किया."
"इसी वक्त हमें यह भी लग रहा था कि हमलावर किसी भी दरवाजे से मशीनगन लेकर हमारे पास आ सकते हैं. ऐसे में हमने ऊपर की तरफ बने सबसे नजदीक के एग्जिट गेट तक पहुंचने की कोशिश की. रेंगते-रेंगते हम लोग हॉल से बाहर की तरफ आए."
डेव का कहना है, "वे क्रॉकस मॉल के टेक्निकल हिस्से की तरफ भागे, जो बालकनी की तरफ था. लोग घबरा रहे थे. कुछ लोग रो भी रहे थे. कुछ लोग अपने रिश्तेदारों को फोन कर रहे थे. कुछ लोग लिफ्ट का इंतजार कर रहे थे, जो बंद पड़ी थी. मोटे तौर पर हम सब एक बड़े अंधेरे कमरे में थे."
हालांकि कुछ चश्मदीदों ने सुरक्षा कर्मचारियों के काम के बारे में भी बाकी है, जिन्होंने तुरंत लोगों को हॉल से बाहर निकालने के लिए सभी रास्ते खोल दिए थे.
'ऐसा लगा कोई एक्शन फिल्म चल रही है'
डेव प्रिवोव कहते हैं, "क्रॉकस हॉल के सामने के हिस्से से गुजरते हुए मैंने देखा कि लोग भाग रहे थे और खिड़कियों पर हाथ मार रहे थे, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि बाहर कैसे निकलना है, इसकी वजह यह भी थी कि सभी अन्य दरवाजे बंद थे."
जब डेव बाहर निकले तो क्रॉकस हॉल में आग लगी हुई थी. वे कहते हैं, "हम बाहर आए, हॉल में आग पहले से ही लग चुकी थी. हमें धुएं और जलने की गंध आ रही थी."
वहीं सोफिको और उनके पति सड़क पर खड़ी अपनी कार की तरफ भागे.
वे बताती हैं, "हमें समझ नहीं आया कि कोई कहीं पर गोलीबारी कर रहा है और यह भी कि वे कई लोग हैं. हमने जल्दी से हॉल को छोड़ दिया और ज़िवोपिसनी ब्रिज पहुंचकर हमने इस बारे पहली खबर देखी और अपने मां को फोन किया."
इवा और उनके साथ काम करने वाले शॉपिंग सेंटर से पावशिन्स्की ब्रिज की तरफ भागे.
वे कहती हैं, "जब मैं पुल के ऊपर थी, तो इमारत में आग लग गई थी. जो लोग पुल तक आने में कामयाब रहे उन्होंने बाद में धमाके की बात भी कही, लेकिन मुझे नहीं पता कि आग का असली कारण क्या था."
स्थानीय समयानुसार दोपहर एक बजे स्थानीय प्रशासन को क्रॉकस हॉल में आग लगने की जानकारी मिली.
स्थानीय निवासी एकाटेरिना ने बीबीसी को बताया, "मैं क्रॉकस से एक किलोमीटर दूर रहती हूं. हेलीकॉप्टर लगातार मॉस्को नदी की तरफ जा रहे थे और वहां से पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे."
एलेक्सी (बदला हुआ नाम) कहते हैं, "मुझे ऐसा लग रहा है कि किसी एक्शन फिल्म का हिस्सा हूं. खिड़की के बाहर सायरन की आवाजें, उड़ते हेलीकॉप्टर और कभी-कभी विस्फोटों की आवाजें सुनाई दे रही थीं."
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