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मैक्रों के बयान के बाद पुतिन की चेतावनी को क्यों माना जा रहा है ख़तरनाक
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और नेटो के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है.
पुतिन ने कहा है कि अगर नेटो ने यूक्रेन की मदद के लिए सेना भेजी तो परमाणु युद्ध का ख़तरा बढ़ सकता है.
रूसी राष्ट्रपति ने अपने सालाना संबोधन में कहा कि पिछले कुछ समय से यूक्रेन में नेटो की सेना भेजने की बात हो रही है.
उन्होंने कहा, ''इससे पहले जिसने भी हमारे देश में सेना भेजी है, उसका हश्र हमें याद है. अब अगर किसी ने ऐसा किया तो हाल और बुरा होगा.''
पुतिन ने कहा, ''अमेरिका और यूरोप को ये समझ लेना चाहिए कि हमारे पास भी ऐसे हथियार हैं, जो उनके ठिकानों को निशाना बना सकते हैं. इससे एक ऐसा संघर्ष छिड़ सकता है, जिसमें परमाणु युद्ध का वास्तविक जोखिम पैदा हो सकता है. इससे सभ्यताओं के भी ख़त्म का ख़तरा भी हो सकता है.''
पुतिन ने उन रणनीतिक हथियारों को भी जानकारी दी जो रूस के सेना में शामिल किए जाने हैं. इनमें सरमत इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल भी है, न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम है.
पुतिन की चेतावनी
दरअसल, पुतिन की ओर से परमाणु युद्ध के जोखिम की चेतावनी एक सप्ताह पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने यूक्रेन में सेना भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया था. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति और जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ शॉल्त्स इससे सहमत नहीं है.
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तीसरे साल में प्रवेश कर गया है. यूक्रेन भले ही रूस की सेना से लड़ रहा है लेकिन उसके सामने हथियारों का संकट खड़ा हो गया है.
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेंलेस्की ने हाल में कहा था कि अब तक यूक्रेन के 31 हज़ार सैनिकों की मौत हो चुकी है और उसके पास हथियारों की कमी हो गई है.
ज़ेलेंस्की ने पश्चिमी देशों हथियारों की सप्लाई बढ़ाने को कहा है.
दूसरी ओर रूसी सेना यूक्रेन में लगातार आगे बढ़ रही है. ऐसे में यूक्रेन के सामने युद्ध में टिके रहना मुश्किल होता जा रहा है.
पुतिन ने कहा है कि अगर पश्चिम यूक्रेन में अपने सैनिकों को भेजता है तो यह रूस और नेटो के बीच सीधा युद्ध होगा. इमैनुएल मैक्रों का यह कहना कि यूक्रेन में नेटो के सैनिकों को भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है को नासमझ भरे बयान के रूप में देखा जा रहा है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू में फॉरन एडिटर स्टैनली जॉनी ने मैक्रों के बयान को पागलपन भरा कहा है. स्टैनली जॉनी ने लिखा है, ''यह पागलपन भरा बयान है. लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि फ़्रांस को लगता है कि नेटो से आर्थिक और सैन्य मदद के बावजूद यूक्रेन रूस से जंग नहीं जीत सकता है.''
इस बीच, यूक्रेन को अमेरिका की ओर से मिलने वाली 60 अरब डॉलर की सैन्य सहायता भी राजनीतिक विवाद की वजह से उसकी संसद में अटक गई है.
इधर, यूरोप ने रूस के हमलावर तेवरों में बढ़ोतरी को देखते हुए हथियारों का उत्पादन बढ़ा दिया है.
यूक्रेन की सेना में इस बात को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है कि गर्मियों के आते ही रूसी सेना उसकी रक्षा पंक्ति को भेद कर और बढ़त बना सकती है.
अगर उसे हथियार और गोला-बारूद की सप्लाई नहीं हुई तो हालात और ख़राब हो सकते हैं. यूक्रेन के लिए युद्ध का मोर्चा और निराशाजनक दिख रहा है.
नेटो क्या है?
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन यानी नेटो दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में बना था. इसे बनाने वाले अमेरिका, कनाडा और अन्य पश्चिमी देश थे. इसे इन्होंने सोवियत यूनियन से सुरक्षा के लिए बनाया था. तब दुनिया दो ध्रुवीय थी. एक महाशक्ति अमेरिका था और दूसरी सोवियत यूनियन.
शुरुआत में नेटो के 12 सदस्य देश थे. नेटो ने बनने के बाद घोषणा की थी कि उत्तरी अमेरिका या यूरोप के इन देशों में से किसी एक पर हमला होता है तो उसे संगठन में शामिल सभी देश अपने ऊपर हमला मानेंगे. नेटो में शामिल हर देश एक दूसरे की मदद करेगा.
लेकिन दिसंबर 1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद कई चीज़ें बदलीं. नेटो जिस मक़सद से बना था, उसकी एक बड़ी वजह सोवियत यूनियन बिखर चुका था. दुनिया एक ध्रुवीय हो चुकी थी. अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बचा था. सोवियत यूनियन के बिखरने के बाद रूस बना और रूस आर्थिक रूप से टूट चुका था.
रूस एक महाशक्ति के तौर पर बिखरने के ग़म और ग़ुस्से से ख़ुद को संभाल रहा था. कहा जाता है कि अमेरिका चाहता तो रूस को भी अपने खेमे में ले सकता था लेकिन वो शीत युद्ध वाली मानसिकता से मुक्त नहीं हुआ और रूस को भी यूएसएसआर की तरह ही देखता रहा.जॉर्ज रॉबर्टसन ब्रिटेन के पूर्व रक्षा मंत्री हैं और वह 1999 से 2003 के बीच नेटो के महासचिव थे. उन्होंने पिछले साल नवंबर महीने में कहा था कि पुतिन रूस को शुरुआत में नेटो में शामिल करना चाहते थे लेकिन वह इसमें शामिल होने की सामान्य प्रक्रिया को नहीं अपनाना चाहते थे.
जॉर्ज रॉबर्टसन ने कहा था, ''पुतिन समृद्ध, स्थिर और संपन्न पश्चिम का हिस्सा बनना चाहते थे.''
पुतिन 2000 में रूस के राष्ट्रपति बने थे. जॉर्ज रॉबर्टसन ने पुतिन से शुरुआती मुलाक़ात को याद करते हुए बताया है, ''पुतिन ने कहा- आप हमें नेटो में शामिल होने के लिए कब आमंत्रित करने जा रहे हैं? मैंने जवाब में कहा- हम नेटो में शामिल होने के लिए लोगों को बुलाते नहीं हैं. जो इसमें शामिल होना चाहते हैं, वे आवेदन करते हैं. इसके जवाब में पुतिन ने कहा- मैं उन देशों में नहीं हूँ कि इसमें शामिल होने के लिए आवेदन करूं.''
अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिका ने पुतिन की इस चेतावनी को ग़ैर ज़िम्मेदाराना क़रार दिया है. हालांकि उसने कहा है कि पुतिन जैसा कह रह रहे हैं, वैसा कोई बड़ा जोखिम नहीं है.
अमेरिकी विदेश विभाग प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, ''ये पहली बार नहीं है, जब पुतिन ने इस तरह का ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान दिया है. परमाणु हथियार संपन्न किसी देश के प्रमुख को इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए.''
उन्होंने कहा, ''इससे पहले हम रूस को सीधे और निजी तौर पर बता चुके हैं कि परमाणु हथियार इस्तेमाल के क्या नतीजे हो सकते हैं.''
मिलर ने कहा, ''हमारे पास ऐसा कोई संकेत नहीं है, जिससे ये पता चलता हो कि रूस परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है.
पुतिन ने और क्या कहा?
पुतिन का वार्षिक संबोधन दो घंटे छह मिनट तक चला. एक तरह से इसके ज़रिये उन्होंने अपना चुनावी घोषणा पत्र लोगों के सामने रखा है. रूस में 15 से 17 मार्च तक राष्ट्रपति चुनाव होने हैं.
पुतिन की जीत उनकी चौथाई सदी के शासन को और छह साल तक बढ़ा देगा.
71 साल के पुतिन रूस जोसेफ स्टालिन से लेकर अब तक सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेता बन गए हैं. उन्होंने 2020 में संविधान में बदलाव करके 2036 तक राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ़ कर लिया है. उस समय तक वो 83 साल के हो जाएंगे.
पुतिन ने यूक्रेन के साथ युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि हर कोई जीत हासिल करने में अपनी भूमिका अदा कर रहा है.
उन्होंने कहा कि 2022 में युद्ध छेड़ने के दौरान की प्रतिबद्धता बरकरार रखी है.
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से रूस को कितना नुकसान
रूस ने यूक्रेन पर 24 फ़रवरी 2022 को हमला किया था. युद्ध के तीसरे साल में प्रवेश करते ही अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर नए प्रतिबंधों को एलान कर दिया था.
पहले दौर के प्रतिबंधों से ऐसा लग रहा था कि रूस की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी. लेकिन उसने चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों को सस्ता तेल बेचना शुरू कर दिया. इसके अलावा युद्ध की वजह से बढ़ाए गए खर्च ने रूसी अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रखने में मदद की है.
हालांकि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से रूस के केंद्रीय बैंक के यूरोप और अमेरिका में 300 डॉलर की संपत्ति जब्त की जा चुकी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने 500 रूसी व्यवसायों पर पाबंदी लगाने की घोषणा की है.
पाबंदियों की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि वे रूस की युद्ध मशीनरी को निशाना बनाएंगे. करीब 100 फर्मों या व्यक्तियों पर निर्यात पाबंदी लगाई जाएगी. इसका मकसद रूस की हथियार बनाने की क्षमता को कमजोर करना है.
राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि इन पाबंदियों के दायरे में एलेक्सी नवेलनी की कैद में हुई मौत से जुड़े लोगों को भी लाया जाएगा.
वहीं ब्रिटेन ने जेल में बंद छह बॉसों की संपत्ति जब्त कर ली है. उनके ब्रिटेन की यात्रा करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है.
इसके अलावा ब्रिटेन ने रूसी धातुओं, हीरे और ऊर्जा निर्यात पर भी नई पाबंदियां लगाई हैं.
यूरोपीय संघ ने 200 संगठनों और लोगों पर पांबदी लगाने की घोषणा की है. संघ का कहना है कि ये लोग रूस को हथियार दिलाने या यूक्रेनी बच्चों को उनके घरों से ले जाने में उसकी मदद कर रहे हैं.
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान जैसे देशों ने रूस पर 16,500 से अधिक पाबंदियां लगाई हैं.
इन पाबंदियों का मुख्य लक्ष्य रूस का पैसा रहा है.
करीब 350 अरब डॉलर मूल्य के रूसी विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज कर दिया गया है. यह उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब आधा है.
यूरोपीय संघ का कहना है कि रूसी बैंकों की करीब 70 फीसदी संपत्ति भी जब्त की गई है. वहीं उसके कुछ बैंकों को वित्तीय संस्थानों की हाई-स्पीड मैसेजिंग सेवा 'स्विफ्ट' से बाहर कर दिया गया है.
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