कमला हैरिस अगर डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार बनीं तो क्या डोनाल्ड ट्रंप को हरा पाएंगी?

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- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, उत्तरी अमेरिका
उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के लिए राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनने का रास्ता साफ दिख रहा है. लेकिन नवंबर में होने वाले चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हराना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
राष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस का पार्टी की उम्मीदवार बनना, एक तरफ़ जहां डेमोक्रेट्स में नई जान फूंकेगा, तो वहीं कुछ कमज़ोरियों को भी उजागर करेगा जो बाइडन के रेस में रहते कम चिंता का विषय थीं.
हाल के चुनावी सर्वेक्षणों में कमला हैरिस, पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप से थोड़ा पीछे दिखीं. उनकी स्थिति बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी राष्ट्रपति बाइडन की हालत उम्मीदवारी वापस लेने से पहले थी. सर्वेक्षण के अनुमानित आंकड़ों और ज़मीनी आंकड़ों में उतार-चढ़ाव की संभावना हमेशा बनी रहती है.
राष्ट्रपति बाइडन की फिटनेस और प्रचार अभियान को बनाए रखने की क्षमता पर तीन सप्ताह से अधिक की माथापच्ची के बाद डेमोक्रेट्स फिलहाल उत्साहित हैं.

कमला हैरिस की ताक़त

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सदन की पूर्व अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी समेत अन्य सभी प्रमुख संभावित प्रतिद्वंद्वियों ने पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर कमला हैरिस के नॉमिनेशन का समर्थन किया है. नैन्सी पेलोसी डेमोक्रेटिक राजनीति में सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं.
फिलहाल कुल मिलाकर तमाम हालात अमेरिका में नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में एक कड़े मुकाबले की बन रही हैं.
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर नापसंदगी और प्रमुख स्विंग राज्यों में मध्यमार्गी मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ-साथ पिछले कुछ समय से निराशा की तरफ बढ़ रहे अपने डेमोक्रेटिक वोट बेस को सक्रिय करना उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के लिए चुनौती के साथ अवसर के समान होगा.
ट्रंप समर्थकों के उत्साह की बराबरी के लिए अपने समर्थकों को सक्रिय करना डेमोक्रेट्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा. इस बार चुनाव अभियान के लिए सबसे ज्यादा चंदा डेमोक्रेट्स को मिला है.
बाइडन की घोषणा के बाद से 24 घंटे में 8 करोड़ डॉलर से भी अधिक की धन राशि डोनेशन से जुटाई गई, जो इस चुनाव में अब तक किसी भी उम्मीदवार के लिए एक दिन में सबसे ज़्यादा डोनेशन है.
बाइडन-हैरिस के चुनाव प्रचार के लिए जमा किए गए डोनेशन वाले फंड से मिलने वाले करीब 10 करोड़ डॉलर से कमला हैरिस के चुनावी प्रचार अभियान को एक मजबूत वित्तीय आधार मिलेगा.
अगर कमला हैरिस उम्मीदवार बनती हैं तो वो ट्रंप की राष्ट्रपति बाइडन के उम्र को मुद्दा बनाकर घेरने की कोशिश को नाकाम कर देंगी.
पिछले कई महीनों से चुनाव अभियान में ट्रंप, बाइडन पर उनकी ज्यादा उम्र होने की वज़ह से कमज़ोर और आसानी से भ्रमित की बात कहकर निशाना बना रहे हैं.
चार सप्ताह पहले प्रेसिडेंशियल डिबेट में राष्ट्रपति बाइडन के खराब प्रदर्शन के बाद इस तरह की चर्चाएं और तेज़ हो गई थी.
78 वर्षीय ट्रंप के मुकाबले, 59 साल उपराष्ट्रपति कमला हैरिस अधिक ऊर्जावान प्रचारक होंगी और अपनी पार्टी के लिए अनुकूल माहौल बनाने में सक्षम होंगी.
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की उम्र को मुद्दा बनाकर कमला हैरिस माहौल अपने पक्ष में भी कर सकती हैं क्योंकि अगर ट्रंप जीतते हैं तो वो अब तक चुने जाने वाले राष्ट्रपतियों में सबसे उम्रदराज होंगे.
कमला हैरिस ब्लैक वोटर्स का समर्थन भी अपने पक्ष में करने में सक्षम हो सकती हैं.
हाल के सर्वेक्षण के मुताबिक, ब्लैक वोटर्स बाइडन से छिटक रहे थे.
बराक ओबामा के साल 2008 और 2012 के विजयी गठबंधन की तरह अगर कमला हैरिस ने भी इस बार के चुनाव में ब्लैक मतदाताओं, अल्पसंख्यकों और युवा मतदाताओं को एक साथ कर लिया तो ट्रंप के ख़िलाफ़ वो मजबूत स्थिति में हो सकती हैं.
विशेषकर कुछ स्विंग राज्यों में जो इस बार चुनाव का रुख तय करेंगे. एक अभियोजक के रूप में कमला हैरिस की पृष्ठभूमि भी उनकी छवि को चमका सकती है.
साल 2020 के चुनाव अभियान में वामपंथियों द्वारा दिया गया नारा - ‘कमला इज़ ए कॉप’ इस बार कमला हैरिस को चुनावों में ट्रम्प के खिलाफ प्रचार में मदद पहुंचा सकता है.
उपराष्ट्रपति कमला हैरिस गर्भपात के मुद्दे पर भी बाइडन सरकार की तरफ से पॉइंट पर्सन रही हैं.
गर्भपात का मुद्दा हाल के चुनावों में डेमोक्रेटिक वोट बेस को मोटिवेट करने वाला सबसे प्रभावशाली मुद्दों में से एक साबित हुआ.
डेमोक्रेटिक कैंपेन कमेटी के प्रमुख और न्यूयॉर्क के पूर्व कांग्रेसी स्टीव इसराइल ने बीबीसी के अमेरिकास्ट पॉडकास्ट को बताया, "मुझे लगता है कि वह देशभर में उपनगरीय महिलाओं को याद दिलाती हैं, खासकर उन युद्ध के मैदानों में, कि प्रजनन अधिकारों के साथ क्या दांव पर लगा है."

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कमला हैरिस की कमज़ोरियाँ

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कमला हैरिस की तमाम ताकतों के बावजूद कुछ डेमोक्रेटस शुरू में बाइडन को राष्ट्रपति की रेस से हटाने के पक्ष में नहीं थे.
गर्भपात के विषय पर डेमोक्रेट्स समर्थकों में उत्साह पैदा करने के बावजूद, उपराष्ट्रपति के रूप में हैरिस का रिकॉर्ड मिला जुला रहा है.
प्रशासन के शुरुआती दौर में, कमला हैरिस को अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर इमिग्रेशन संकट के मूल कारणों का समाधान करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी.
एनबीसी न्यूज एंकर लेस्टर होल्ट के साथ जून 2021 के एक इंटरव्यू समेत कई गलत कदमों और बयानों ने कमला हैरिस की छवि को नुकसान पहुंचाया.
रिपब्लिकन पहले से ही राष्ट्रपति के "बॉर्डर ज़ार" के रूप में कमला हैरिस की निंदा कर रहे हैं.
साथ ही सर्वेक्षणों में बाइडन प्रशासन की अलोकप्रिय इमिग्रेशन नीतियों का चेहरा बनाकर कमला हैरिस पर निशाना साधने की कोशिश कर रहे हैं.
स्टीव इसराइल ने कहा, "उन युद्धक्षेत्रों में डेमोक्रेट्स के लिए इमिग्रेशन एक सॉफ्ट स्पॉट जैसा है. उन उपनगरों में रहने वाले मतदाताओं के लिए एक बहुत ही प्रमुख मुद्दा है. वहाँ के लोगों का मानना है कि इमिग्रेशन सिस्टम पर्याप्त रूप से कारगर नहीं है.''
अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की एक कमज़ोरी, उम्मीदवार के रूप में उनका उतार-चढ़ाव भरा ट्रैक रिकॉर्ड भी है.
साल 2020 में डेमोक्रेटिक प्रेसिडेंशियल नॉमिनेशन की दौड़ में उन्हें बड़ी असफलता का सामना करना पड़ा.
हालांकि कमला हैरिस ने शुरुआत में बढ़त तो बना ली थी, लेकिन उसके बाद उनके असफल साक्षात्कारों, स्पष्ट रूप से परिभाषित विज़न की कमी और खराब चुनाव प्रचार अभियान के कारण कमला हैरिस को शुरुआती चुनावी प्रक्रिया में ही बाहर होना पड़ा था.
हैरिस के पास अपनी छाप छोड़ने का मौका

हैरिस के लिए शायद सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वो बाइडन की तरह राष्ट्रपति नहीं हैं.
इस कारण से कमला हैरिस खुद को बाइडन के कुछ अधिक अलोकप्रिय फैसलों से अलग रख सकती हैं.
माना जा रहा है कि रिपब्लिकन, राष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस के खिलाफ उनका 'बहुत अप्रमाणित' और 'बहुत जोखिम भरा' होना साबित करने की पुरजोर कोशिश करते हुए ट्रंप को ही एकमात्र प्रामाणिक उम्मीदवार के रूप में पेश करने की कोशिश करेंगे.
हालांकि आने वाले दिनों में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के पास अमेरिकी जनता पर पहली बार अपनी एक नई छाप छोड़ने का मौका है.
अगर वो इसमें फेल हो जाती हैं तो पार्टी में संघर्ष की शुरुआत हो सकती है, जो अगस्त में पार्टी के नेशनल कन्वेंशन में एक नए नेता के चुनाव के बाद ख़त्म होगा.
जिस तरह से पिछले चार हफ़्तों में व्हाइट हाउस की रेस में तेजी से बदलाव हुए हैं, उस स्थिति में कमला हैरिस को अब यही साबित करना है कि वह ट्रंप को टक्कर दे सकती हैं.


















