कमला हैरिस का राष्ट्रपति बनना क्या भारत के हक़ में होगा?

कमला हैरिस

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ऋषि सुनक जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने तो इसे लेकर भारतीय ख़ुश थे. ऋषि सुनक ब्रिटेन के पहले हिंदू प्रधानमंत्री थे.

सुनक के पीएम बनने से उम्मीद जताई जा रही थी कि भारत से संबंधों में मज़बूती देखने को मिलेगी.

मगर सुनक के कार्यकाल के दौरान मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए पर कोई बात नहीं बन सकी.

इसके अलावा ग्रेजुएट वीज़ा स्कीम, ब्रिटेन जाने की पात्रता की सैलरी सीमा बढ़ाने जैसे सुनक के कई फ़ैसले भारतीयों के हक़ में नहीं माने गए.

ठीक इसी तरह भारतीय पहचान से जुड़ीं कमला हैरिस जब अमेरिका की उपराष्ट्रपति बनीं तो भारत में काफ़ी चर्चा हुई. मंदिरों में पूजा की गई, रंगोली बनाकर कमला को शुभकामनाएं दी गईं.

फिर जून 2021 में पीएम मोदी जब अमेरिका के दौरे पर गए तो कमला हैरिस को भारत आने का न्योता दिया. मगर वो उपराष्ट्रपति बनने के बाद एक बार भी भारत नहीं आईं. जानकारों का कहना है कि कमला के उपराष्ट्रपति बनने से भारत-अमेरिका संबंधों पर ख़ास असर नहीं हुआ.

अब जो बाइडन के राष्ट्रपति की रेस से बाहर होने के बाद कमला हैरिस को डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी मिलती दिख रही है.

कमला हैरिस राष्ट्रपति बनने की दौड़ में शामिल होने से एक बार फिर चर्चा में हैं और डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के निशाने पर हैं.

कमला हैरिस की जो भारतीय पहचान अक्सर चर्चा में आ जाती है, उस पर उनका क्या रुख़ रहा है?

कमला हैरिस ने अतीत में भारत को लेकर क्या कहा और अगर कमला जीतती हैं तो क्या अमेरिका भारत संबंधों पर कोई असर होगा?

साल 2021में अमेरिकी दौरे के दौरान कमला हैरिस के साथ पीएम मोदी

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जब पीएम मोदी ने कमला हैरिस की अमेरिका में की तारीफ़

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जून 2021 में पीएम मोदी और कमला हैरिस की वाइट हाउस से आई तस्वीरें तब सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चा में रही थीं.

पीएम मोदी और कमला हैरिस के हावभाव की लोगों ने अलग-अलग तरीक़े से व्याख्या की.

इसके बाद जब जून 2023 में पीएम मोदी अमेरिका के दौरे पर गए तो वहां वो कमला हैरिस की तारीफ़ करते दिखे.

अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने अपने पीछे बैठीं कमला हैरिस के बारे में कहा था, ''अमेरिका में लाखों ऐसे लोग हैं, जिनकी जड़ें भारत में हैं. कई लोग गर्व के साथ इस हाउस में बैठते हैं. एक मेरे पीछे बैठी हैं...''

इसके बाद अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य खड़े होकर ताली बजाते हुए पीएम मोदी की इस बात का अभिवादन करते दिखे.

पीएम मोदी ने कहा, ''जब इतिहास रचा गया तो मुझे बताया गया कि समोसा कॉकस अब सदन के स्वाद में मिल गया है. मैं उम्मीद करता हूं कि ये बढ़े और ये भारतीय व्यंजनों की विविधताएं यहां लाए.''

समोसा कॉकस भारतीय मूल के सांसदों और प्रतिनिधियों के समूह के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला शब्द है.

पीएम मोदी ने कमला हैरिस की जिन जड़ों की बात की, उस कारण अब वो निशाने पर भी हैं.

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अमेरिकी कांग्रेस में कमला हैरिस और पीएम मोदी

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कमला हैरिस निशाने पर क्यों आईं

2024 के राष्ट्रपति चुनाव से जो बाइडन के हटने के बाद उन्होंने कमला हैरिस की उम्मीदवारी का समर्थन किया है. बाइडन के समर्थन से कमला की दावेदारी लगभग पक्की हो गई है.

मगर इसी के साथ वो निशाने पर भी आई हैं.

कमला हैरिस अमेरिका की पहली महिला और ब्लैक उपराष्ट्रपति बनी थीं.

अब राष्ट्रपति पद की दौड़ में आईं कमला को नस्लभेदी टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा है.

डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के ग्लेन ग्रोथमैन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा- मेरा मानना है कि बहुत सारे डेमोक्रेट्स को ये लगता है कि नस्लीय पृष्ठभूमि के कारण कमला हैरिस को चुनना पड़ेगा.

रिपब्लिकन पार्टी के टिम बर्चेट्ट ने सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कमला हैरिस को 'डीईआई' यानी विविधिता, समानता और समावेशी के तहत हुई नियुक्ति बताया.

टिम ने दावा किया, ''बाइडन ने कहा कि वो एक ब्लैक महिला को उपराष्ट्रपति बनाना चाहते थे.''

हालांकि 2020 में बाइडन ने डिबेट या किसी इंटरव्यू में ब्लैक महिला की बजाय महिला उपराष्ट्रपति को चुने जाने की बात कही थी.

अब सवाल ये है कि कमला हैरिस अपनी भारतीय पहचान पर क्या बोलती रही हैं?

कमला हैरिस अपनी छोटी बहन माया और मां श्यामला गोपालन हैरिस के साथ.

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अफ़्रीकी अमेरिकी नेता कमला अपनी भारतीय पहचान पर क्या बोलीं

ऋषि सुनक के परिवार का ताल्लुक भारत से था. मगर वो अपनी भारतीय पहचान की बजाय हिंदू पहचान के बारे में खुलकर बोलते रहे हैं.

इससे इतर कमला हैरिस अपनी भारतीय पहचान का ज़िक्र ज़्यादातर मां पर बात करने के दौरान ही करती आई हैं.

साल 2023 में कमला हैरिस ने ट्वीट किया था, "19 की उम्र में मेरी मां श्यामला अमेरिका अकेली आ गई थीं. वो एक शक्ति थीं - एक वैज्ञानिक, सिविल राइट एक्टिविस्ट मां थीं, जिन्होंने अपनी दोनों बेटियों में गर्व के भाव भरे."

कमला हैरिस का जन्म कैलिफोर्निया के ऑकलैंड में हुआ. कमला के माता-पिता भी बाहर से अमेरिका आए थे.

कमला की मां का जन्म भारत में हुआ और पिता जमैका में पैदा हुए थे. कमला की मां ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी.

जब कमला पांच साल की थीं, तभी उनके माता-पिता अलग हो गए.

कमला को मां श्यामला गोपालन हैरिस ने पाला. श्यामला जब भारत आतीं तो कमला साथ होती थीं.

अपने नाम का मतलब कमला ने अपनी आत्मकथा 'द ट्रुथ वी टोल्ड' में समझाया था.

कमला ने लिखा था, "मेरे नाम का मतलब है कमल का फूल. भारतीय संस्कृति में इसकी काफ़ी अहमियत है. कमल का पौधा पानी के नीचे होता है. फूल पानी के सतह से ऊपर खिलता है. जड़ें नदी तल से मज़बूती से जुड़ी होती हैं."

जमैका, भारत और अमेरिका. ऐसे में कई पहचान से जुड़े सवालों पर कमला का कहना था कि वो एक अमेरिकी कहलाना ही पसंद करती हैं.

हालांकि 2020 में चुनाव प्रचार के दौरान कमला एक वीडियो में भारतीय खाना बनाती और दक्षिण भारत पर बात करती दिखी थीं.

कमला ने कहा था कि वो ख़ूब सारा चावल, दही, आलू की रसदार सब्जी, दाल और इडली खाते हुए बड़ी हुई हैं.

जब कमला ने 2014 में वकील डगलस एम्पहॉफ से शादी की थी तो इसमें भारतीय और यहूदी परंपरा दोनों निभाई गई.

कमला हैरिस के नाना और नानी भारत के दक्षिणी शहर चेन्नई से 300 और वाशिंगटन डीसी से 14000 किलो मीटर दूर एक छोटे से थुलासेंद्रापुरम गाँव से हैं.

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इमेज कैप्शन, चेन्नई से 300 किलोमीटर दूर थुलासेंद्रापुरम गाँव में कमला हैरिस की मां का जन्म हुआ था. ये तस्वीर 23 जुलाई 2024 की है, जब वहां कमला हैरिस के राष्ट्रपति पद की रेस में आने का जश्न मनाया जा रहा था.

भारत से जुड़े मुद्दों पर कमला का रुख़

कमला हैरिस भारतीय पहचान पर बोलती रही हैं. वो भारत से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखती रही हैं.

उपराष्ट्रपति बनने से पहले भी कमला हैरिस का बड़ा सार्वजनिक जीवन रहा है.

कमला का करियर अलमेडा काउंटी में डिस्ट्रिक एटॉर्नी के दफ़्तर से शुरू हुआ था. कमला साल 2003 में सैन फ़्रैंसिस्को की डिस्ट्रिक एटॉर्नी बनीं.

बाद में वो कैलिफ़ोर्निया की पहली ब्लैक एटॉर्नी जनरल के पद पर बैठीं.

इस नियुक्ति के बाद कमला का कद धीरे-धीरे डेमोक्रेटिक पार्टी में बढ़ता गया. साल 2017 में कैलिफ़ोर्निया से सीनेटर चुनी गईं.

साल 2019 में जब भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाया तो हैरिस ने इसका विरोध किया था.

हैरिस ने कहा था, ''हम कश्मीरियों को ये याद दिलाना चाहते हैं कि वो अकेले नहीं हैं. हम हालात पर नज़र बनाए हुए हैं.''

हालांकि जब हैरिस उपराष्ट्रपति बनीं तो उनका रुख़ अलग दिखा. कमला ने कोविड ने निपटने और भारत के वैश्विक शक्ति के तौर पर उभरने को लेकर पीएम मोदी की तारीफ़ की.

एशिया निक्केई की एक रिपोर्ट की मानें तो जानकारों का कहना है कि भारतीय अमेरिकी समुदाय से जुड़ने के लिए कमला ने कम ही कोशिशें की हैं.

2021 में पीएम मोदी के दौरे के बाद लॉस एजिलिस टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया था, ''हैरिस ने मोदी से कहा कि दुनिया में लोकतंत्र पर ख़तरा बढ़ा है. ऐसे में ज़रूरी है कि हम अपने देशों में सिद्धांतों और संस्थाओं की रक्षा करें. मैं अपने ख़ुद और भारतीय लोगों के लोकतंत्र के प्रति समर्पण से ये बात जानती हूं.''

हैरिस के इस बयान को पीएम मोदी के लिए संकेत और शांति से मानवाधिकार का मुद्दा भारत के सामने उठाने के तौर पर देखा गया.

कमला हैरिस और पीएम मोदी

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अगर कमला को सफलता मिली तो भारत के लिए मायने?

कमला हैरिस के राष्ट्रपति पद की दौड़ में आने के बाद से भारत में शांत प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं.

कुछ जानकारों का कहना है कि अगर कमला हैरिस जीतती हैं तो इससे भारत-अमेरिका के संबंधों में बदलाव देखने को नहीं मिलेगा.

हैरिस जीतीं तो भारत-अमेरिका संबंधों के मुक़ाबले इसका अमेरिकी राजनीति पर ज़्यादा असर होगा.

समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट में साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर माइकल कुगलमेन ने कहा, ''कमला हैरिस अपनी भारतीय पहचान को आगे नहीं रखती हैं. वो अपनी जमैका की पहचान पर ज़ोर देती रही हैं.''

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैप्पीमन जैकब ने एपी से कहा, ''जब भारतीय कमला हैरिस की ओर देखते हैं तो किसी भारतीय मूल के शख्स की बजाय अमेरिकी अधिकारी को देख रहे होते हैं. उप-राष्ट्रपति रहने के दौरान भारत-अमेरिका के संबंधों पर वैसा असर नहीं हुआ, जैसी उम्मीद जताई जा रही थी.''

जैकब कहते हैं- ये भारत के लिए रिएलिटी चेक है कि अंत में ये सब बातें मायने नहीं रखतीं.

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक़, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हर्ष पंत ने कहा, ''अगर कमला राष्ट्रपति बनीं तो संबंध वैसे ही बने रहेंगे जैसे पहले थे. भारत सरकार के बाइडन प्रशासन से सही संबंध रहे हैं और कमला हैरिस भी उसका हिस्सा रही हैं.''

डोनाल्ड ट्रंप पर हाल ही में जब हमला हुआ तो दिल्ली में कुछ लोगों ने उनके लिए पूजा की

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अगर ट्रंप जीते तो भारत पर क्या असर?

डोनाल्ड ट्रंप की जीत के लिए भारत में कुछ कुछ यज्ञ और हवन करते भी दिखे हैं. ऐसे ही हवन 2020 चुनाव के दौरान भी भारत में हुए थे.

हाल ही में ट्रंप पर जब हमला हुआ और गोली उनके कान को छूकर निकली तो प्रतिक्रिया भारतीय पीएम मोदी ने भी दी.

हालांकि ये बात अलग है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ही भारत को निशाने पर लेना शुरू कर दिया है.

हाल ही में ट्रंप ने कहा कि भारत हार्ले डेविडसन बाइक बेचने पर काफी टैक्स लगाता है और इसके लिए वो भारत को नहीं, अमेरिका को ही ज़िम्मेदार मानते हैं.

जानकारों का कहना है कि अगर ट्रंप जीतते हैं तो भारत के लिए कई चुनौतियां आ सकती हैं.

पत्रकार शशांक मट्टू ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ट्रंप अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बेहतर करने, प्रदूषण के मामले में भारत की मदद ना करने जैसे कई फैसले ले सकते हैं. ट्रंप के पहले कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध अच्छे रहे थे. मगर अगर ट्रंप को दूसरा कार्यकाल मिला तो ये दोनों देशों के लिए अप्रत्याशित यात्रा रहेगी.

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय जड़ें अहम हो गई हैं.

एक तरफ ट्रंप के उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जेडी वेंस हैं, जिनकी पत्नी ऊषा भारतीय मूल की हैं. दूसरी तरफ़ अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति बनने की दौड़ में आईं कमला हैरिस हैं.

रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों तरफ भारतीय कनेक्शन है. इसी कारण कुछ भारतीयों ने अपने-अपने हिसाब से अपना पाला चुन लिया है.

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