शेख़ हसीना के हटने के बाद बांग्लादेश के साथ बढ़ती चीन की नज़दीकियां

इमेज स्रोत, ANI
- Author, देबबानी मजुमदार और पद्मजा वेंकटरमन
- पदनाम, बीबीसी मॉनीटरिंग
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और चीन के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं. चीनी राजदूत याओ वेन ने 'हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत' पर ज़ोर देते हुए 'ग़रीबी मुक्त और लोकतांत्रिक संपन्न बांग्लादेश के निर्माण' में सहयोग का आश्वासन दिया है.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की अगुवाई मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं जिन्होंने व्यापक विरोध प्रदर्शनों के कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना सरकार के पतन के बाद 8 अगस्त को सत्ता की बागडोर संभाली थी.
पश्चिमी देशों ने शेख़ हसीना सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की आलोचना की थी. चीन ने हसीना के सत्ता छोड़ने के एक दिन बाद सिर्फ 'सामाजिक स्थिरता को बहाल' करने के बारे में बयान दिया.

चीन की कूटनीतिक सक्रियता
चीन के राजदूत याओ बांग्लादेश में बीजिंग के कूटनीतिक पहलकदमी की अगुवाई कर रहे हैं. हसीना को सत्ता से बाहर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले छात्र नेताओं और राजनीतिक पार्टियों के साथ वो मीटिंग कर रहे हैं.
इसी सिलसिले में उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से संपर्क साधा और 'अंतर पार्टी सहयोग और संवाद' को बढ़ाने का वायदा किया.
दो सितम्बर को बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी पार्टी नेताओं के साथ मीटिंग में याओ ने उसे एक "अनुशासित पार्टी" बताया था.
जमात ने भी 'आपसी संवाद जारी रखने' की उम्मीद जताई. दिलचस्प है कि जमात को हसीना सरकार ने प्रतिबंधित कर रखा था.
ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, 'मार्च 2010 से ही किसी देश के किसी राजनयिक ने जमात के कार्यालय का दौरा नहीं किया था.'
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन को हसीना की 'अवामी लीग का क़रीबी सहयोगी' माना जाता था, अब वो उन कुछ देशों की क़तार में शामिल हो गया है जो अंतरिम सरकार के साथ सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं.
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सितम्बर से अब तक याओ ने अंतरिम सरकार के कई सलाहकारों और जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफ़ीकुर रहमान से मुलाक़ात की है.
विश्लेषकों का कहना है कि "सघन कूटनीति" का मतलब है कि "घरेलू राजनीति में बदलावों के बावजूद द्विपक्षीय संबंधों के स्थिर" बने रहने की संभावना है.
पांच सितम्बर को चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, "अंतरिम सरकार, राजनीतिक दलों और बांग्लादेश के अन्य क्षेत्रों के साथ संवाद और सहयोग को हम मज़बूत करना चाहते हैं."
25 सितम्बर को यूनुस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात की थी.
चीन के विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि वांग ने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश जल्द ही स्थिरता के सही रास्ते पर लौट आएगा.
एक्स पर डाले गए एक पोस्ट में कहा गया, "अपने पारम्परिक रिश्तों को आगे ले जाने के लिए चीन बांग्लादेश के साथ मिलकर काम करने को तैयार है."
बांग्लादेश के बीडीन्यूज़24 के अनुसार, इस बीच यूनुस ने "संबंधों में नया अध्याय शुरू करने" का स्वागत किया और "दोनों देशों की कंपनियों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने" की मांग की.
एक चीनी वेबसाइट गुआंचा ने वीचैट पर दूतावास के एक पोस्ट के हवाले से रिपोर्ट किया कि, 10 अक्तूबर को याओ ने बांगालादेश के छात्र आंदोलन के नेताओं से मुलाक़ात की और उनके "साहस और समझदारी" की तारीफ़ की.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, "छात्रों ने सच्चे और भरोसेमंद चीन की शुक्रिया अदा किया और पारम्परिक दोस्ती के विकास में सकारात्मक योगदान करने की बात कही." छात्रों के साथ संबंध बढ़ाने के तौर पर चीन की एक मेडिकल टीम ने ढाका के अस्पतालों का दौरा किया और 160 मरीजों को देखा. इसके बारे में याओ ने कहा, "प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए लोगों के इलाज के प्रति, यह दोनों सरकारों की प्राथमिकता को दर्शाता है."
चीन के राजनयिक कर्मचारियों ने 25 अगस्त से तीन सितम्बर के बीच बांग्लादेश के बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया और राशन वितरित किया.
यह टीम 11,000 लोगों से मिली और प्रधान सलाहकार रिलीफ़ फंड में 20,000 डॉलर का योगदान किया, जबकि रेड क्रॉस सोसाइटी के बांग्लादेश रेड क्रिसेंट सोसाइटी को एक लाख डॉलर का चंदा दिया.
व्यापारिक संबंधों में मज़बूती

इमेज स्रोत, ANI
ढाका के एक अख़बार द डेली स्टार में राजदूत आयो वेन ने एक अक्तूबर को लिखा कि अंतरिम सरकार के दौरान चीनी कंपनियों ने 8.5 करोड़ डॉलर का निवेश किया, यह बांग्लादेश के भविष्य के विकास के प्रति चीन के भरोसे को दिखाता है.
उन्होंने ये भी लिखा कि दिसम्बर से बांग्लादेश का आयात 100 प्रतिशत टैक्स से टैक्स फ़्री हो जाएगा. उन्होंने 4 लाख डॉलर के बाढ़ राहत पैकेज का भी ज़िक्र किया और कहा कि बेल्ड एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत चीन ने सात रेलवे, 12 हाईवे, 21 पुल और 31 बिजली और ऊर्जा परियोजनाओं का निर्माण किया है.
सितम्बर से चीन और चटगांव पोर्ट के बीच नए सीधे समुद्री रूट पर संचालन शुरू हो गया है और जियांग्शी और ढाका के बीच एक निर्धारित एयर कार्गो रूट को भी खोल दिया गया है. अपने कपड़ा उद्योग के 70% कच्चा माल के लिए बांग्लादेश चीन पर निर्भर है और 2022-23 में द्विपक्षीय व्यापार 24 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें आयात का बजट 22.9 अरब डॉलर है.
डेली स्टार के मुताबिक़, चीनी कर्ज़ों के भारी ब्याज़ दरों पर चिंता के बीच अंतरिम सरकार ने 14 अक्तूबर को चीन के अगुवाई वाले रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) से मदद लेने का पहला कदम उठा लिया है. इससे बांग्लादेश के निर्यात में 3.26 अरब डॉलर और एफ़डीआई में 3.36% की वृद्धि होगी.
सैन्य रिश्ते
ढाका ट्रिब्यून अख़बार के मुताबिक़, एक ऐतिहासिक दौरे में 12 अक्तूबर को चीन के नेवी फ़्लीट क्वी जिगुआंग और जिंग गैंगशान का चटगांव दौरा हुआ. चीनी दूतावास ने कहा कि दोनों देशों के नेवी अधिकारियों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग की मजबूती में गहरा विश्वास ज़ाहिर किया.
अख़बार ने आगे लिखा कि, बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने 14 अक्तूबर को रक्षा सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया और सशस्त्र बलो, प्रोथोम, के अधुनिकीकरण में चीन की मदद मांगी और याओ ने "गहरे सहयोग के लिए ऐतिहासिक मौके" को रेखांकित किया.
चीन के मीडिया में क्या है चर्चा

इमेज स्रोत, Getty Images
गुआंचा में सात अक्तूबर को छपे लेख में कहा गया कि न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ यूनुस की मुलाक़ात में "बांग्लादेश को बदलने की ज़बरदस्ती प्रक्रिया शुरू करने की अमेरिकी मंशा के ख़िलाफ़" चेतावनी दी गई.
13 अक्तूबर को ग्लोबल टाइम्स के चीनी और अंग्रेज़ी संस्करणों में, चीनी नेवी फ़्लीट के दौरे को लेकर भारतीय मीडिया के कवरेज की आलोचना की गई थी और एक विद्वान का हवाला देते हुए कहा गया था कि "भारतीय मीडिया की अटकलें और चीन और बांग्लादेश के बीच सामान्य सैन्य आदान-प्रदान के प्रति सतर्क रवैया लाभ हानि के नज़रिए को दिखाता है."
आरसीईपी में शामिल होने के बांग्लादेश की पहल पर 17 अक्तूबर को ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि भारत इसमें रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहा है क्योंकि बांग्लादेश कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) को लेकर संवाद शुरू करने पर सहमत हो गया था. इसमें आगे कहा गया है कि बांग्लादेश को खुली आज़ादी होनी चाहिए कि वो किसके साथ जाएगा.
आरसीईपी में बांग्लादेश के शामिल होने पर ग्लोबल टाइम्स की एक और रिपोर्ट में कहा गया कि, "हालांकि भारत एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझीदार है, बांग्लादेश को अपने व्यापारिक परिदृश्य में विविधता लाना ज़रूरी है."
भारतीय मीडिया क्या कह रहा है?

इमेज स्रोत, Getty Images
अंग्रेजी वेबसाइट न्यूज़18 ने कहा है कि जमात के साथ याओ की मीटिंग को भारत सरकार के सूत्रों ने अजीब बताया है, जबकि फ़र्स्टपोस्ट का कहना है कि टक्षेत्रीय समीकरण में यह ऐसा बदलाव है जिसे भारत नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता.'
द शिलांग टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'अंतरिम सरकार को आरसीईपी में आने के लिए मनाकर चीन एक क़दम आगे निकल गया है.' जबकि डेक्कन हेराल्ड अख़बार के एक लेख में कहा गया है कि चीन का 6 अरब डॉलर का कर्ज, ढाका में किसी भी सरकार पर बीजिंग के असर को बहुत अधिक बढ़त देता है.
हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, "एक तरफ़ बांग्लादेश में अदानी ग्रुप समेत भारतीय व्यवसाय लंबित भुगतानों का हिसाब करने की मांग की है तो दूसरी तरफ़ॉ मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार इन सौदों की समीक्षा करने जा रही है."
द इंडियन एक्सप्रेस के एक लेख में कहा गया है कि यूनुस का अमेरिकी दौरा, पश्चिमी देशों का भरोसा जीतने के मकसद से किया गया था.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ और वांग यी के बीच मुलाक़ात का संदर्भ देते हुए अख़बार ने आगे कहा है, "दिल्ली को संकेत पढ़ने होंगे...उसे नई सच्चाई के साथ परिपक्व और व्यावहारिक तरीक़े से निपटना होगा."
चीनी नेवी फ़्लीट के दौरे को लेकर मनी कंट्रोल ने लिखा है, "चीन अपने प्रभाव को बांग्लादेश में फैलाने की कोशिश कर सकता है, ख़ासकर ऐसे में जब नई दिल्ली के साथ हसीना की ऐतिहासिक नजदीकी के चलते नई सरकार भारत विरोधी संकेत दे रही है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















