भारत-कनाडा तनाव में अमेरिका पर्दे के पीछे क्या कुछ कर रहा है?- प्रेस रिव्यू

मोदी, बाइडन और ट्रूडो

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खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में भिड़े भारत और कनाडा की सुलह करवाने की अमेरिका कोशिश करता नज़र आ रहा है.

द इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले पर रिपोर्ट की है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा और भारत के बीच पर्दे के पीछे से बातचीत करने की संभावनाओं की अमेरिका के ज़रिए तलाश की जा रही है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को न्यूयॉर्क में कहा था, ''दुनिया अभी भी डबल स्टैंडर्ड यानी दोहरे मापदंड से चल रही है. जो देश प्रभावशाली हैं वे स्थिति में बदलाव का विरोध कर रहे हैं और ऐतिहासिक रूप से शक्तिशाली देश इन क्षमताओं का इस्तेमाल हथियारों की तरह कर रहे हैं.''

जयशंकर ने कहा, "मुझे लगता है कि बदलाव के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति से ज़्यादा राजनीतिक दबाव है."

जयशंकर ने कहा, ''बाज़ार के नाम पर और आज़ादी के नाम पर बहुत कुछ किया जा रहा है.''

जयशंकर के इस बयान को कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो से जोड़कर देखा गया. ट्रूडो कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को अभिव्यक्ति की आज़ादी के तौर पर पेश करते रहे हैं.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने लिखा है कि न्यूयॉर्क में जयशंकर अमेरिकी अधिकारियों और मंत्रियों से मिलेंगे.

अख़बार लिखता है कि भारत और अमेरिका के बीच इस हफ़्ते खुलकर बात हो सकती है.

कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी अपने समकक्ष से संपर्क में हैं.

कनाडा और अमेरिका संबंध

अमेरिकी अधिकारी सुलह करवाने की कोशिश में हैं?

18 जून को हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हत्या कर दी गई थी.

18 सितंबर को कनाडा की संसद में पीएम जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि निज्जर की हत्या के पीछे भारत का हाथ हो सकता है.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में लिखा है कि इस आरोप के बाद कम से कम पांच वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी और डिप्लोमैट्स ने सार्वजिनक तौर पर बयान दिए हैं और इसमें कनाडा-भारत दोनों के लिए संदेश देने की कोशिश की गई.

इन बयानों के ज़रिए भारत सहयोग करने के लिए कहा गया. वहीं कनाडा से किसी भी नतीजे पर पहुंचने की जल्दी नहीं मचाने के लिए कहा गया.

दोनों देशों में शुरू हुए विवाद पर अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन, स्ट्रैटिजिक कम्युनिकेशन के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल कॉर्डिनेटर जॉन किर्बी, भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी और कनाडा में अमेरिकी राजदूत डेविड कोहेन बयान दे चुके हैं.

कनाडा और अमेरिका दोनों एक-दूसरे के सहयोगी देश हैं.

बाइडन

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अमेरिका ने भारत-कनाडा तनाव पर कब क्या कहा?

द इंडियन एक्सप्रेस ने भारत-कनाडा विवाद शुरू होने के बाद से एक पूरी टाइमलाइन समझाई है.

इस टाइमलाइन में अख़बार ने बताया है कि कब किस अमेरिकी अधिकारी ने क्या कुछ कहा?

9 सितंबर

  • जॉन किर्बी ने सीबीएस न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा, ''कनाडा के लगाए आरोप गंभीर हैं और हमें मालूम है कि कनाडा इसकी जांच कर रहा है. हम उस जांच से आगे निकलकर कुछ नहीं कहना चाहते. हम भारत से अपील करते हैं कि जांच में सहयोग करे. ये एक ऐसा आरोप है, जिसके बारे में हम चाहते हैं कि इससे पारदर्शी तरीक़े से निपटा जाए. कनाडा के नागरिकों को भी जवाब मिले. ऐसे में हम अपने सहयोगियों से संपर्क में रहने वाले हैं. हम चाहते हैं कि जांच बिना रुकावट आगे बढ़े और तथ्य सामने आ सकें.''

20 सितंबर

  • भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने ट्रूडो के आरोपों को परेशान करने वाला बताते हुए अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों, संप्रभुता के सिद्धांतों की अहमियत की बात की. वो बोले, ''ये ऐसे आरोप हैं, जिससे कोई भी परेशान हो सकता है. लेकिन एक सक्रिय आपराधिक जांच से मुझे उम्मीद है कि दोषियों को सज़ा मिलेगी. हम जानकारियों के आदान-प्रदान और जांच में सहयोग देंगे.

21 सितंबर

  • जैक सुलिवन ने कहा, ''निज्जर की हत्या में भारत पर लगाए आरोप की जांच को लेकर कनाडा की कोशिशों का अमेरिका समर्थन करता है. किसी देश को कोई विशेष छूट नहीं मिलेगी. हम भारत से भी इस मुद्दे पर सपंर्क में हैं.'' कनाडा के आरोपों के सबूत पर जब जैक से सवाल पूछा गया तो वो बोले- वो प्रक्रिया चलने दीजिए, जैसा कि मैंने पहले कहा था कि हम कनाडा सरकार के साथ संपर्क में हैं और आगे भी रहेंगे.

22 सितंबर

  • कनाडा में अमेरिकी राजदूत डेविड कोहेन ने कहा, ''फ़ाइव आइज़ देशों की मुहैया करवाई इंटेलिजेंस के आधार पर ही ट्रूडो ने भारत को लेकर दावा किया.'' फ़ाइव आइज़ देशों में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं. ये देश एक-दूसरे से ख़ुफ़िया जानकारी साझा करते हैं.
  • अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा, ''हम कनाडा से बेहद क़रीबी से बात कर रहे हैं. हम सिर्फ़ बात नहीं कर रहे बल्कि कॉर्डिनेट भी कर रहे हैं. ये महत्वपूर्ण है कि कनाडा की जांच आगे बढ़े और ये भी अहम है कि भारत कनाडा के साथ इस जांच में काम करे. हम जवाबदेही चाहते हैं और ये ज़रूरी है कि जांच पूरी हो और नतीजे तक पहुंचे.''
जस्टिन ट्रूडो

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दोस्तों से जुटाई कनाडा की जानकारियों पर भारत का रुख़

कनाडा को निज्जर पर मिली जानकारी मित्र देशों से मिलने की जब ख़बरें आईं तो इस पर भारत में हैरानी नहीं हुई.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार लिखता है कि भारत सरकार ट्रूडो के खालिस्तान समर्थक समूहों पर बरती जा रही नरमी पर सख़्त ही रहना चाहता है.

हालांकि भारत ये भी समझता है कि दोनों देशों के संबंध कितने ख़ास हैं. ख़ासकर दोनों देशों के बीच होने वाला व्यापार और स्टूडेंट्स का कनाडा जाकर पढ़ाई जाना. दोनों देशों को कृषि भी जोड़ती है.

ट्रूडो ने देश की संसद से भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि ये जानकारी भारत के साथ साझा की गई थी और उससे गंभीरता से इस मुद्दे से निपटने के लिए कहा था.

भारत ने इन आरोपों को ख़ारिज किया था. साथ ही भारत ने कनाडा में खालिस्तान समर्थकों को पनाह देने का आरोप लगाया था. भारत ने कहा था कि निज्जर की हत्या से जुड़ी कोई जानकारी भारत ने साझा नहीं की.

भारत ने कहा था कि अगर कोई विशेष जानकारी मुहैया करवाई गई तो भारत उसको देखेगा.

कनाडा

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कनाडा से भारत का तनाव: फ़ायदा किसे होगा?

द इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, कनाडा से भारत के तनाव का एक फ़ायदा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन को हो सकता है.

अख़बार ने पहले पन्ने पर इसे जगह दी है.

अख़बार लिखता है कि जो भारतीय स्टूडेंट्स अब तक कनाडा पढ़ाई के लिए जाने की सोचते थे, वो अब विकल्प के तौर पर अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया पर विचार कर रहे हैं.

रिपोर्ट में लिखा है कि अगर कनाडा से तनाव नहीं सुलझा तो इसका फायदा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन को होगा.

अखबार ने कई शैक्षणिक संस्थानों से बात करके ये रिपोर्ट की है. इस संस्थानों ने बताया कि स्टूडेंट्स अब दूसरे देशों में पढ़ाई के लिए जाने पर विचार कर रहे हैं. इसमें पहले नंबर पर अमेरिका है.

विदेश में भारतीय स्टूडेंट्स: तथ्यों पर एक नज़र

  • द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2022 में क़रीब दो लाख 26 हज़ार स्टूडेंट्स पढ़ाने करने के लिए कनाडा गए थे.
  • द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2022 में क़रीब दो लाख स्टूडेंट्स अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे.
  • द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2022 में क़रीब एक लाख स्टूडेंट्स पढ़ाई के लिए अमेरिका गए थे.
  • पीआईबी के मुताबिक़, साल 2022-23 में क़रीब 92 हज़ार भारतीय स्टूडेंट्स को ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के लिए वीज़ा मिला.
  • 2022 में क़रीब सात लाख 70 हज़ार स्टूडेंट्स ने पढ़ाई के लिए विदेश का रुख किया था.
राहुल गांधी

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विधानसभा चुनावों को लेकर राहुल गांधी ने क्या कहा?

द हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के जीतने की उम्मीद जताई है.

दिल्ली में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम से विधानसभा चुनावों को लेकर सवाल किया गया.

इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा, ''अभी के हिसाब से हम शायद तेलंगाना जीत रहे हैं. हम मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पक्का जीत रहे हैं. राजस्थान में मामला क़रीब का है और मुझे लगता है कि हम जीतने में सफल रहेंगे. अभी तो यही लग रहा है. बीजेपी के अंदर भी यही बात चल रही है.''

राहुल बोले- कर्नाटक में हमने एक ज़रूरी सबक सीखा. बीजेपी ध्यान हटाकर चुनाव लड़ती है ताकि मुद्दों पर ध्यान ना दिया जा सके और हम अपना नैरेटिव तय ना कर पाएं.

जोशीमठ के दरकते मकान
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जोशीमठ: हाई कोर्ट की सख़्ती के बाद सामने आई रिपोर्ट में क्या है?

द टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने पर जोशीमठ में ज़मीन खिसकने के मामले से जुड़ी एक रिपोर्ट की है.

इस रिपोर्ट में लिखा है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट में कहा गया है कि जोशीमठ में नया निर्माण रोक दिया जाए और इसे नो कंस्ट्रक्शन ज़ोन घोषित किया जाए.

कुछ दिन पहले ही नैनीताल हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक ना किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे.

इस रिपोर्ट को वैज्ञानिकों ने बनाया था. जिसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी इसके आधार पर 139 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की थी.

इस साल की शुरुआत में जोशीमठ में सैकड़ों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था.

पर्यावरणविद् लंबे समय में पहाड़ों में ज़रूरत से ज़्यादा निर्माण किए जाने का विरोध करते रहे हैं.

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