उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही की तस्वीरें

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उत्तराखण्ड के चमोली ज़िले में ग्लेशियर टूटने के बाद हुई त्रासदी से प्रभावित लोगों के लिए प्रशासन का बचाव कार्य जारी है.

आईटीबीपी, एनडीआरएफ़, एसडीआरएफ़ और भारतीय सेना मिलकर इस बचाव कार्य में लगे हुए हैं.

बताया गया है कि आईटीबीपी के जवानों ने तपोवन के पास एक टनल में फंसे सभी 16 मज़दूरों को सुरक्षित निकाल लिया है.

सुरंग से ज़िंदा निकाले गए मज़दूर

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इमेज कैप्शन, सुरंग से ज़िंदा निकाले गए मज़दूर
आईटीबीपी के मुताबिक राहत कार्य में 250 से अधिक जवान लगे हैं

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ज़िंदा बचाए गए मज़दूर

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इस बीच उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यालय की ओर से ऐसे संकेत दिये गए हैं कि 'एक बड़ी आपदा टल गई है और स्थिति अब प्रशासन के नियंत्रण में है.'

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस बीच ट्विटर पर कर्णप्रयाग का एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसके साथ उन्होंने लिखा, "कर्णप्रयाग में आज 3 बजकर 10 मिनट पर नदी में पानी के बहाव की स्थिति से साफ़ है कि बाढ़ की सम्भावना बहुत कम है. हमारा विशेष ध्यान सुरंगों में फँसे श्रमिकों को बचाने पर है और हम सभी प्रयास कर रहे हैं."

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इमेज कैप्शन, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि 'सुबह क़रीब दस बजे ऋषिगंगा के ऊपर एक ग्लेशियर फटा, जिससे ऋषिगंगा में उफान आया. इसका असर 13.2 मेगावाट के ऋषिगंगा प्रोजेक्ट पर पड़ा. ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में काम कर रहे क़रीब 15 से 20 मज़दूर लापता हैं.'
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इमेज कैप्शन, आईटीबीपी ने बताया है कि 'रैणी गांव के पास एक ब्रिज टूट जाने से बॉर्डर से सटी भारत की कई चौकियों से संपर्क बाधित हो गया है.'
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इमेज कैप्शन, इस आपदा में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट लगभग पूरी तरह बह चुका है जबकि तपोवन बांध को भी ख़ासा नुक़सान पहुँचा है.
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इमेज कैप्शन, सीएम कार्यालय के मुताबिक़, 'ऋषिगंगा प्रोजेक्ट का जो मलबा था, वो आगे धौलीगंगा में बढ़ा जिससे तपोवन में एनटीपीसी के प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुँचा. इसके अलावा तपोवन में 520 मेगावाट के तपोवन विष्णुगाढ़ प्रोजेक्ट को भी आंशिक क्षति पहुँची है. यहाँ काम कर रहे 47 मज़दूर लापता हैं.'
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इमेज कैप्शन, भारतीय सेना ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी दी.
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इमेज कैप्शन, भारतीय सेना के अधिकारियों ने बताया कि सेना के चार कॉलम, दो मेडिकल टीम और एक इंजीनियरिंग टास्क फ़ोर्स रैणी गांव भेजे गये. बताया गया कि सेना के हेलीकॉप्टर भी लगातार स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि विष्णुप्रयाग में धौलीगंगा का मलबा अलकनन्दा में मिल गया, लेकिन आगे बढ़ते हुए अलकनन्दा का बहाव सामान्य होता गया. अलकनन्दा पर कॉफ़र डैम को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा है और आगे अलकनन्दा पर किसी तरह के नुक़सान की भी ख़बर नहीं है.
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इमेज कैप्शन, उन्होंने कहा कि 'अभी पानी की जो तीव्रता है, वो चमोली तक पहुँचते-पहुँचते काफ़ी कम हो गई है. इस हादसे के बाद नदी किनारे जो भी गतिविधियां होती हैं, उन्हें तत्काल रोक दिया गया है. श्रीनगर में जो बाँध है, उसे पानी छोड़ने के आदेश दिये गए हैं.'
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इमेज कैप्शन, आईटीबीपी के प्रवक्ता ने उत्तराखण्ड की घटना पर बात करते हुए कहा कि 'तपोवन में एनटीपीसी की साइट पर काम कर रहे लगभग 150 मज़दूर लापता हैं, जिनकी संभवत: मौत हो गई है. हमारी टीम को अब तक तीन शव मिले हैं.'
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इमेज कैप्शन, उत्तरखण्ड के डीजीपी अशोक कुमार के मुताबिक, 'पानी और मलबा जो नीचे डाउनस्ट्रीम में आया, वहां सभी को अलर्ट करके इलाक़ा खाली करा लिया गया है. ये मलबा और पानी श्रीनगर के बांध में पहुंच कर स्थिर हो गया है और अब आगे के इलाक़े के लिए कोई ख़तरा नहीं है.'
मज़दूर

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इमेज कैप्शन, नदी किनारे चल रहीं योजनाओं में काम कर रहे मज़दूरों को सभी साइट्स से दूर कर दिया गया है.

सीएम रावत ने सहायता केंद्र के नंबर जारी किये हैं. उन्होंने लिखा है कि 'अगर आप प्रभावित क्षेत्र में फंसे हैं, आपको किसी तरह की मदद की ज़रूरत है, तो कृपया आपदा परिचालन केंद्र के नम्बर 1070 या 9557444486 पर संपर्क करें. कृपया घटना के बारे में पुराने वीडियो से अफ़वाह ना फैलाएं.'

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