महिला टी-20 वर्ल्ड कप में क्या हरमनप्रीत की टीम कर पाएगी पूरा सपना?

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार,बीबीसी हिंदी के लिए
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में तीन अक्तूबर से शुरू हो रहे आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप में क्या भारतीय महिला क्रिकेट टीम अब तक चली आ रही ख़िताबी दूरी ख़त्म कर पाएगी?
इस ख़िताबी जंग के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी दिग्गज टीमों को फतह करना होगा.
भारतीय टीम पिछले वर्ल्ड कप (2023) में सेमी फ़ाइनल में हुई हार से उबरने का प्रयास करेगी.
भारत 2020 वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में हुई हार को भुलाकर इस बार खिताब जीतने का सपना साकार करने का प्रयास करेगी.

हरमनप्रीत को है जीत का भरोसा

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भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा, ''हमारी टीम का सपना इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतना है. हमें भरोसा है कि हममें ऐसा करने की क्षमता है. हम ऑस्ट्रेलिया में 2020 में हुए टी-20 विश्व कप के फ़ाइनल तक पहुँचे थे. पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में फ़ाइनल में पहुँचने से मामूली अंतर से पिछड़ गए थे. यह दर्शाता है कि हममें इस सबसे बड़े मंच पर सफल होने की क्षमता है."
हरमनप्रीत ने कहा, ''ऑस्ट्रेलिया टीम अच्छी है. इसमें कोई शक नहीं है. पर हम उन्हें किसी भी समय और कहीं भी हराने की क्षमता रखते हैं.''
भारतीय खिलाड़ी जेमिमा कहती हैं, ''हमने अच्छी तैयारी करने के साथ कड़ी मेहनत की है. अब अपनी योजनाओं को लागू करने का समय आ गया है.''
भारत है ऑस्ट्रेलिया के साथ ग्रुप 'ए' में

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भारत का ग्रुप ख़ासा टक्कर वाला है और उसे पिछली तीन बार की चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया की टीम के साथ ग्रुप ए में रखा गया है. इस ग्रुप की अन्य टीमें हैं- न्यूज़ीलैंड, पाकिस्तान और श्रीलंका.
ग्रुप बी में इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज़, दक्षिण अफ़्रीका, बांग्लादेश और स्कॉटलैंड को रखा गया है.
टूर्नामेंट के फ़ॉर्मेट के हिसाब से ग्रुप की टीमें राउंड रॉबिन आधार पर एक-दूसरे से खेलेंगी. हर ग्रुप में पहले दो स्थानों पर रहने वाली टीमें सेमी फ़ाइनल में स्थान बनाएंगी.
सेमी फ़ाइनल 17 और 18 अक्तूबर को और फ़ाइनल 20 अक्तूबर को खेला जाएगा.
न्यूज़ीलैंड से खेलकर भारत शुरू करेगा अभियान

भारतीय टीम चार अक्तूबर को न्यूज़ीलैंड के साथ खेलकर अपने अभियान की शुरुआत करेगी.
भारत छह अक्तूबर को पाकिस्तान से, 9 अक्तूबर को श्रीलंका से और 13 अक्तूबर को ऑस्ट्रेलिया से खेलेगा.
भारत को सेमी फ़ाइनल में स्थान बनाने के लिए ग्रुप में कम से कम तीन मैच जीतने होंगे. लेकिन उनकी इस राह में न्यूज़ीलैंड की टीम कड़ी टक्कर देने का माद्दा रखती है.
न्यूज़ीलैंड का टी-20 वर्ल्ड कप का रिकॉर्ड अच्छा है. दोनों देशों के बीच 13 अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच खेले गए हैं, जिनमें से न्यूज़ीलैंड ने 9 और भारत ने चार ही जीते हैं.
भारत ने पिछले कुछ समय में ख़ासी तरक्की की है और वह न्यूज़ीलैंड को ही नहीं, बल्कि किसी भी टीम को हरा सकती है.
भारत को ग्रुप में श्रीलंका से भी कड़ी चुनौती मिल सकती है.
यह सही है कि भारत का टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में श्रीलंका के ख़िलाफ़ रिकॉर्ड बहुत अच्छा है. दोनों के बीच 23 मैच खेले गए हैं, जिनमें से 18 भारत ने और पाँच मैच श्रीलंका ने जीते हैं.
भारतीय टीम चमारी अटापट्टू की टीम श्रीलंका को हल्के में नहीं ले सकती है, क्योंकि वह इसी साल हुए महिला एशिया कप के फ़ाइनल में श्रीलंका से हार चुकी है.
इसलिए भारत को श्रीलंका को हराने के लिए अपना बेस्ट देना होगा.
पाकिस्तान को भले ही भारत की परंपरागत प्रतिद्वंद्वी माना जाता है, लेकिन ये टीम कभी बहुत बड़ी चुनौती नहीं बन सकी है.
लेकिन पाकिस्तान की कप्तान फ़ातिमा सना ने भारत से मुक़ाबले के दौरान इस बार आक्रामक अंदाज़ में खेलने का वादा किया है. इसलिए पाकिस्तान की चुनौती को भी हल्के से नहीं लिया जा सकता है.
ऑस्ट्रेलिया की टीम है ख़िताब की प्रमुख दावेदार

आईसीसी महिला टी-20 वर्ल्ड कप की 2009 में शुरुआत होने के बाद से ऑस्ट्रेलिया ने इसमें जो अपनी बादशाहत स्थापित की है, उसे तोड़ना इस बार भी किसी टीम के लिए बहुत आसान रहने वाला नहीं है.
अब तक इस वर्ल्ड कप का आठ बार आयोजन हुआ है, जिनमें से छह बार ऑस्ट्रेलिया की टीम चैम्पियन बनी है.
यही नहीं पिछली तीन बार से वह ख़िताब जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित करती रही है.
ऑस्ट्रेलिया के अलावा सिर्फ़ इंग्लैंड साल 2009 में और वेस्ट इंडीज़ 2016 में चैम्पियन बन सकी है.
मेग लेनिंग की कमी क्या खलेगी

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ऑस्ट्रेलिया की महिला टीम को सफल बनाने में मेग लेनिंग की भूमिका अहम रही है.
लेकिन उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की वजह से अब यह ज़िम्मेदारी एलिसा हिली पर आई है.
ऑस्ट्रेलिया टीम की बल्लेबाज़ी में गहराई और गेंदबाज़ी में पैनापन होने की वजह से उनके चैम्पियन बनने की संभावनाएँ अभी भी सबसे ज़्यादा हैं.
लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत और दक्षिण अफ़्रीका ने अपने प्रदर्शन में बहुत सुधार किया है.
वहीं इंग्लैंड टीम पहले ही मज़बूत रही है, इसलिए अपना दिन होने पर कोई भी उलटफेर देखने को मिल सकता है.
स्पिनरों की भूमिका अहम

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यूएई में अक्सर स्पिन गेंदबाज़ों का जलवा देखने को मिलता है. भारत की सफलता में राधा यादव, श्रेयांका पाटिल और आशा शोभना की भूमिका प्रमुख हो सकती है.
लेकिन यूएई में इस समय तक ठंड का मौसम शुरू हो चुका होगा, इसलिए टीमों को ओस की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है.
इस तरह की स्थिति में तेज़ गेंदबाज़ अहम भूमिका निभा सकते हैं.
यूएई में यह चैम्पियनशिप आख़िरी समय में आयोजित की जा रही है. असल में इसका आयोजन बांग्लादेश में होना था.
लेकिन वहाँ जुलाई-अगस्त में चले सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन चलने की वजह से आईसीसी को इसे किसी अन्य स्थान पर आयोजित करने का फ़ैसला किया.
आईसीसी पहले चाहता था कि भारत इसका आयोजन करे, लेकिन भारत को अगले साल 50 ओवरों वाले महिला वर्ल्ड कप का आयोजन करना है, इसलिए उसने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया.
श्रीलंका में यह बारिश वाला मौसम होता है, इसलिए इसका आयोजन यूएई में कराने का फ़ैसला किया गया.
यह पहला महिला वर्ल्ड कप है, जिसका किसी तटस्थ स्थान पर आयोजन हो रहा है, क्योंकि भाग लेने वाली टीमों का फ़ैसला पहले ही हो चुका था, इसलिए यूएई इसमें भाग नहीं ले रही है.
पहली बार पुरुषों के बराबर इनामी राशि

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आईसीसी ने इस बार महिला टी-20 वर्ल्ड कप में पुरुषों के बराबर इनामी राशि रखने का फ़ैसला किया है.
इस कारण इसमें पिछली बार के मुक़ाबले 225 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है.
इस बार विजेता को 23.4 लाख डॉलर मिलेंगे. वहीं उपविजेता टीम को 11.7 लाख डॉलर मिलेंगे.
इस बार कुल इनामी राशि 79 लाख, 58 हज़ार डॉलर रखी गई है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित












