बांग्लादेश में शेख़ हसीना की जीत भारत के साथ रिश्तों को और कितना मज़बूत बनाएगी?

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, दीपक मंडल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बांग्लादेश की मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने लगातार चौथी बार आम चुनाव जीत लिया है. बांग्लादेश के चुनाव आयोग के मुताबिक़ अवामी लीग को 50 फ़ीसदी से अधिक वोट मिले हैं.

रविवार (7 जनवरी 2024) को बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए वोटिंग शुरू होते ही अवामी लीग की जीत तय हो गई थी.

वोटिंग को सिर्फ़ औपचारिकता माना जा रहा था क्योंकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी समेत सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने चुनावों का बहिष्कार किया था.

बांग्लादेश में लोकतंत्र को कुचले जाने और मानवाधिकारों के हनन के आरोपों के बीच इस चुनाव पर दुनियाभर की नज़रें थीं लेकिन भारत के लिए शेख़ हसीना की जीत ख़ास मायने रखती है.

राजनीतिक विश्लेषक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक शैली में समानता तलाशते हैं.

कार्ड

उनका मानना है कि शेख़ हसीना और नरेंद्र मोदी दोनों मज़बूत छवियों वाले नेता हैं. दोनों की अपनी-अपनी पार्टियों पर काफी अच्छी पकड़ है.

अपने-अपने देशों में मोदी और हसीना ने अर्थव्यवस्था को अच्छी रफ़्तार दी है.

नरेंद्र मोदी की तरह ही शेख़ हसीना की विदेश नीति भी दुनिया की बड़ी ताक़तों के बीच बैलैंस बनाने वाली मानी जाती है.

मोदी के 'न्यू इंडिया' की तरह ही शेख़ हसीना भी 'नया बांग्लादेश' का नारा बुलंद करती हैं.

भारत और बांग्लादेश 4100 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं और दोनों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते हैं.

इसलिए स्थिर, समृद्ध और दोस्ताना रुख़ वाला बांग्लादेश भारत के हित में है.

विश्लेषकों का कहना है कि भारत शेख़ हसीना की सरकार के साथ मज़बूती से खड़ा दिखा है. दक्षिण एशिया में बांग्लादेश इसका सबसे करीबी और मज़बूत सहयोगी है.

मोदी सरकार में बांग्लादेश को तवज्जो

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

भारत की मोदी सरकार की विदेश नीति में बांग्लादेश को काफी प्राथमिकता दी जा रही है. भारत ने पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश की विकास परियोजनाओं को खुलकर आर्थिक मदद दी है.

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में साउथ एशियन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर संजय भारद्वाज भारत और शेख़ हसीना के नेतृत्व वाले बांग्लादेश के मज़बूत संबंधों की बुनियाद का ज़िक्र करते हुए कहते हैं, ''अवामी लीग ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया है. बंगाली राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और समाजवाद बांग्लादेश के बुनियादी मूल्य हैं. भारत के मूल्य हैं- समावेशी राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और लोकतंत्र. इस तरह देखें तो दोनों के मूल्य में समानता है. मूल्यों की यही समानता भारत और बांग्लादेश को करीब ला रही है.''

विपक्षी दलों की सरकारों के मुकाबले अवामी लीग की शेख़ हसीना सरकार के साथ भारत सरकार के मज़बूत संबंधों की क्या वजह है?

कोट कार्ड

इस सवाल पर संजय भारद्वाज कहते हैं, ''बांग्लादेश में प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का गठन एक सैनिक शासन ने किया था. 1978 में ज़िया उर रहमान की ओर से गठित इस पार्टी की बुनियाद इस्लाम में हैं. इसे पुराने मुस्लिम लीग के समर्थकों का समर्थन मिलता रहा है. ये पाकिस्तान जैसी नीतियों में विश्वास करती है. इस पार्टी ने जो अपना सामाजिक आधार तैयार किया है वो सेना के समर्थन और भारत विरोध की बुनियाद पर टिका है. देखा गया है कि जब ये पार्टी सत्ता में रहती है तो भारत की तुलना में चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से संबंध मज़बूत करने पर ध्यान देती है.''

वहीं इसकी तुलना में 1971 से 1975 और फिर 1996 और 2009 से लेकर 2024 के दौरान अवामी लीग की सरकार में भारत और बांग्लादेश के बीच कई समझौते हुए.

इनमें गंगा नदी समझौते से लेकर दोनों देशों के बीच लैंड बॉर्डर और बस सर्विस शुरू करने जैसे अहम समझौते शामिल हैं.

इस दौरान भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार भी बना. बांग्लादेश भी एशिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना.

बांग्लादेश का विपक्ष और भारत

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की नेता ख़ालिदा ज़िया की सरकार में बांग्लादेश में भारत विरोधियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं. (फाइल फोटो)
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

2009 से पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार में भारत विरोधी रुख़ देखने को मिला था.

भारत विरोधी कई बड़े चरमपंथियों में बांग्लादेश को पनाह दी गई थी. कहा जाता है कि इस पार्टी के संबंध पाकिस्तान की आईएसआई से भी रहे थे.

इसकी वजह से बांग्लादेश में कट्टर इस्लामी संगठनों को बढ़ावा मिला. इससे पड़ोस में एक बड़ा भारत विरोधी माहौल बन गया जो इसके लिए सिरदर्द साबित हो रहा था.

लेकिन हसीना सरकार के आते ही दोनों देशों के रिश्तों में नाटकीय सुधार हुए. हसीना सरकार ने पूर्वोत्तर में भारत विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद की.

उनकी सरकार ने भारत में चरमपंथी वारदातों को अंजाम देकर बांग्लादेश में पनाह लेने वालों पर शिकंजा कसा. इससे पूर्वोत्तर में भारत को राहत मिली.

संजय भारद्वाज कहते हैं, ''भारत जिस तरह से अपने पूर्वोत्तर हिस्से को और अधिक कनेक्ट करने की कोशिश कर रहा था उसमें शेख़ हसीना की सरकार ने अहम भूमिका निभाई. शेख़ हसीना के मनमोहन सिंह, प्रणब मुखर्जी, सोनिया गांधी और ममता बनर्जी से अच्छे संबंध रहे हैं. और जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आए तो उनके साथ भी संबंध अच्छे बने. हसीना ने संतुलित विदेश नीति सिर्फ भारत के साथ ही नहीं चीन, जापान और रूस के साथ भी अपनाई. लेकिन भारत के साथ बांग्लादेश के सबसे नज़दीक और मज़बूत संबंध देखने को मिले.''

बढ़ता कारोबार बना मज़बूत रिश्तों की बुनियाद

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, भारत-बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग के लिए बड़ा बाज़ार बनकर उभरा है. (फाइल फोटो)

बांग्लादेश भारत के लिए एक बड़ा बाज़ार बनकर उभरा है. साल 2022-23 में बांग्लादेश भारत का पांचवां सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार बन गया.

अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स और चीन के बाद भारत का सबसे ज़्यादा निर्यात बांग्लादेश को हो रहा था. भारत के 12.2 अरब डॉलर के निर्यात में बांग्लादेश के निर्यात बाज़ार की हिस्सेदारी बढ़ कर 2.7 फीसदी पर पहुंच गई.

हसीना सरकार भारत के पूर्वोत्तर और अपने देश के बीच ज़मीनी और समुद्री मार्ग की कनेक्टिविटी को बढ़ावा दे रही है.

बांग्लादेश दक्षिण एशिया और पूर्वी एशियाई देशों से भारत के आर्थिक जुड़ाव में अहम भूमिका निभा सकता है.

भारत चाहता है कि बांग्लादेश बंगाल की खाड़ी से होकर दक्षिण और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ इसके आर्थिक जुड़ाव का आधार बने.

ये भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का अहम आधार है. ढाका में बिम्सटेक का सचिवालय है जो म्यांमार और थाईलैंड जैसे पूर्वी देश को जोड़ता है. हाल के दिनों में भारत के दोस्त जापान ने भी बांग्लादेश में काफी निवेश किया है. इसमें भारत की भी भूमिका मानी जा रही है.

अमेरिका, बांग्लादेश और भारत

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

पिछले कुछ अरसे के दौरान अमेरिका और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव चर्चा में रहे हैं.

अमेरिका और ब्रिटेन से बांग्लादेश के तनावपूर्ण रिश्तों के ऐतिहासिक कारण रहे हैं. क्योंकि वो 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे. लिहाज़ा शेख़ हसीना सरकार का दोनों देशों के प्रति रुख थोड़ा अविश्वास भरा है.

अमेरिका बांग्लादेश की हसीना सरकार पर अधिनायकवादी रवैये का आरोप लगाता रहा है. जबकि वो पाकिस्तान में लोकतंत्र के हालात पर बात नहीं करता.

जो बाइडन सरकार में दोनों देशों के बीच रिश्ते थोड़े सुधरे थे लेकिन हाल के दिनों में अमेरिका मानवाधिकार के मुद्दे पर बांग्लादेश को घेरता रहा है.

हालांकि पिछले दिनों अमेरिका बांग्लादेश से रिश्ते सुधारने की कोशिश करता दिखा है. दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में हसीना ने बाइडन और उनके वरिष्ठ सलाहकारों से मुलाकात की थी.

इंडियन एक्सप्रेस में सी राजा मोहन लिखते हैं, ''ऐसा लगता है कि बाइडन प्रशासन ने बांग्लादेश में भारत के हितों को अहमियत देना शुरू किया है और उसके साथ रिश्तों की तल्खी को कम करने के लिए तैयार है.''

संजय भारद्वाज कहते हैं, ''बांग्लादेश अगर अमेरिका के रणनीतिक हितों में फिट बैठता है और उसका सहयोग करता है तो उसे इस बात का फर्क नहीं पड़ता कि लोकतंत्र, मानवाधिकार और दूसरे मुद्दों पर बांग्लादेश का क्या रुख है. अमेरिका चाहता है कि दक्षिणी एशिया और दक्षिण पूर्वी एशियाई देश उसकी इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी में सहयोग करे. ताकि चीन का मुकाबला किया जा सके.''

वो कहते हैं, ''भारत क्वाड का सदस्य है. वो अमेरिका की इंडो पैसिफिक स्ट्रैटेजी का भी सहयोगी है. इसलिए भारत भी चाहता है कि अमेरिका और बांग्लादेश के बीच भी हितों का आदान-प्रदान हो. ये भारत के भी हित में है कि अमेरिका और बांग्लादेश के रिश्ते अच्छे रहे. बांग्लादेश भी अमेरिका से रिश्ते सुधारना चाहेगा क्योंकि ये बांग्लादेश के कपड़ों का बहुत बड़ा बाज़ार है.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)