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पुतिन ने कहा- उत्तर कोरिया के साथ सैन्य सहयोग संभव है
- Author, टेसा वॉन्ग
- पदनाम, एशिया डिजिटल रिपोर्टर, बीबीसी न्यूज़
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले हैं. कहा जा रहा था कि इस मुलाक़ात में दोनों देश हथियारों की ख़रीद के किसी समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं.
रूस के सरकारी मीडिया के मुताबिक रूस की पूर्व में स्थित वास्तोचनी स्पेस सेंटर में हुई मुलाक़ात के बाद किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया के लिए अपनी ट्रेन यात्रा शुरू कर ली है.
वार्ता के बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने संकेत दिए कि दोनों नेताओं के बीच सैन्य सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई है. रूस ने ये भी संकेत दिए हैं कि वो उत्तर कोरिया को सैटेलाइट बनाने में मदद करेगा.
दोनों देशों ने अमेरिका को उस दावों को खारिज किया है जिसमें कहा गया था कि रूस और उत्तर कोरिया हथियारों की डील करेंगे ताकि यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद की जा सके.
बताया जा रहा है कि उत्तर कोरिया के तानाशाह ने सैटेलाइट बनाने में मदद के अलावा अपने देश के लिए खाद्यान्न की मदद भी मांगी है. रूस और उत्तर कोरिया के शीर्ष नेतृत्व के बीच ये मुलाकात ऐसे वक्त में हो रही है जब दोनों ही देशों के पश्चिम के साथ संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर हैं.
क्या बोले पुतिन
दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रिश्तों की दुहाई देते हुए पुतिन ने कहा कि दो नए दोस्तों के बजाय एक पुराना दोस्त ही बेहतर होता है.
ये पूछे जाने पर कि क्या रूस सैटेलाइट बनाने में उत्तर कोरिया की मदद करेगा, पुतिन ने कहा, "इसीलिए तो हम इस स्पेस सेंटर पर आए हैं."
इससे पहले उत्तर कोरिया इस वर्ष दो बार जासूसी उपग्रह लॉन्च करने की विफल कोशिश कर चुका है. उत्तर कोरिया निगरानी के लिए ऐसे सैटेलाइट लॉन्च करने पर अपनी प्रतबिद्धता जताता रहा है.
उधर, आज की मीटिंग के दौरान किम जोंग-उन यूक्रेन के युद्ध पर रूस का साथ देते दिखे.
बैठक में किम ने पुतिन को बताया, "रूस अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए एक पवित्र युद्ध लड़ रहा है. हम हमेशा राष्ट्रपति पुतिन और रूसी नेतृत्व का साथ देंगे. हम एक साथ साम्राज्यवाद से लड़ेंगे."
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव
मंगलवार को अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने दोहराया था कि दोनों देशों के बीच हथियारों की ख़रीद पर कोई भी समझौता संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन होगा.
उन्होंने कहा था, "अगर ऐसा हुआ तो हम इसके ख़िलाफ़ क़दम उठाने से नहीं चूकेंगे."
रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय क्रेमलिन ने भी कहा था कि उत्तर कोरिया और उनके हित अधिक अहम हैं और वे अमेरिका की चेतावनियों की परवाह नहीं करते.
लेकिन रूस भी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों पर हस्ताक्षर कर चुका है इसलिए पुतिन बुधवार को थोड़े सावधान रहे और कहा कि सैन्य सहयोग की कुछ सीमाएं हैं.
वर्ष 2019 के बाद ये किम जोंग-उन का पहला विदेशी दौरा है. पिछली बार भी किम रूस ही पहुँचे थे.
रूसी प्रतिनिधिमंडल
इस यात्रा के दौरान सबको उम्मीद थी कि दोनों देशों के नेताओं की मुलाक़ात व्लादिवॉस्टॉक में होगी क्योंकि पुतिन वहां एक आर्थिक सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुँचे थे.
लेकिन ट्रेन ने रूस के पूर्व में स्थित एक स्पेस सेंटर का रुख़ किया.
पुतिन ने कहा है कि उत्तर कोरिया के नेता अपनी वापसी की यात्रा के दौरान कई शहरों में रुककर कारखानों वगैरह का दौरा भी करेंगे.
इस वर्ष जुलाई में एक रूसी प्रतिनिधिमंडल उत्तर कोरिया की यात्रा पर गया था. वहां रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु को इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल दिखाई गई थी.
जानकारों का कहना है कि रूस उत्तर कोरिया के साथ हथियारों की डील करना चाहता है क्योंकि दोनों देशों के 'वेपन सिस्टम' एक जैसे हैं.
ताक़तवर मिसाइलें
रूस की रुचि तोपखाने के गोलों में है. रूसी मिलिट्री के जानकार वेलेरी अकिमेनको मानते हैं कि रूसी सेना आर्टिलरी को फौज का सबसे मजबूत हिस्सा मानते हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉर्थ कोरियन स्टडीज़ में प्रोफ़ेसर किम डोंग-युप कहते हैं कि उत्तर कोरिया तोपखाने के गोलों के अलावा कारतूस और पुरानी मिसाइलें तक बेचने के लिए तैयार है.
यंग उक एशियन इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज़ में रिसर्च फ़ेलो हैं. वे कहते हैं कि उत्तर कोरिया केएन-25 जैसी अपनी नई और ताक़तवर मिसाइलें भी रूस को दे सकता है.
कुछ जानकारों का ये भी कहना है कि उत्तर कोरिया ने 1953 के बाद कोई युद्ध नहीं लड़ा है. इस कारण उसके पास हथियारों का बड़ा जख़ीरा है.
लेकिन ये भी सही है कि उत्तर कोरिया बहुत अधिक हथियार रूस के हवाले नहीं करना चाहेगा. उनका कहना है कि कोरियाई हथियार थोड़े वक्त के लिए ही रूस के मददगार साबित हो सकते हैं.
नेटो अलायंस
सोल की एक यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर लीफ़-एरिक इस्ली कहती हैं, "जो भी हो लेकिन किसी भी हाल में कोई भी देश अपने सबसे अहम हथियारों का सौदा नहीं करेगा."
लेकिन इस मीटिंग से बड़ा सवाल ये उठा है कि क्या रूस और उत्तर कोरिया पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध कारगर हैं या नहीं.
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के एमडी रोरी डेनियल्स कहते हैं, "अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने इन दोनों देशों को एक दूसरे के पास धकेल दिया है और अब ये बिना किसी ख़ौफ़ के कोई भी डील कर सकते हैं."
लेकिन इवा स्टेट यूनिवर्सिटी की पार्क वॉन-गोन कहती हैं कि हथियारों के लेन-देन पर उत्तर कोरिया को भी ख़तरा है.
उनका कहना है कि अगर ये साबित हुआ कोरियाई हथियार यूक्रेन में इस्तेमाल हुए तो सारा नेटो अलायंस उसके ख़िलाफ़ हो जाएगा.
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