यूक्रेन युद्धः 2024 में इस जंग के तीन नतीजे हो सकते हैं

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यूक्रेन में जंग तीसरे साल में प्रवेश करने जा रही है. पिछले कुछ महीनों में दोनों मुल्कों के अग्रिम मोर्चे में शायद ही कुछ प्रगति हुई है लेकिन क्या 2024 में यह जंग नया रुख़ अख़्तियार करेगी?

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले वसंत में उनके देश का जवाबी हमला उम्मीद पर ख़रा नहीं उतरा. रूस अभी भी रूस के 18 फीसदी हिस्से पर काबिज़ है.

हमने तीन सैन्य विश्लेषकों से बात की कि अगले 12 महीने में कैसे चीजें बदल सकती हैं.

जंग खिंचेगी लेकिन अनंत काल तक नहीं

बारबारा ज़ैनशेटा, डिपार्टमेंट ऑफ़ वॉर स्टडीज़, किंग्स कॉलेज, लंदन

यूक्रेन में जंग जल्द ख़त्म की उम्मीद बहुत कम है. पिछले साल के मुकाबले, इस समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सैन्य से अधिक राजनीतिक रूप से अधिक मज़बूत हुए हैं.

जंग के मैदान में हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं. यूक्रेन का सर्दियों में हालिया जवाबी हमला लगता है कि ठप पड़ गया है. लेकिन रूस को भी कोई सफलता नहीं मिली है.

इसके अलावा इस जंग का नतीजा युद्ध के केंद्र से मीलों दूर वॉशिंगटन और ब्रसेल्स के राजनीतिक फैसलों पर अधिक निर्भर करता है.

पश्चिमी देशों ने साल 2022 में एकजुटता का जो प्रदर्शन किया था, वो 2023 तक जारी था लेकिन अब इसमें कमी आनी शुरू हो गई है.

अमेरिकी सैन्य मदद का पैकेज कांग्रेस में रोक लिया गया है, जिसे राष्ट्रपति बाइडेन ने सही ही, वॉशिंगटन में ‘तुच्छ राजनीति’ क़रार दिया है. और यूरोपीय संघ की आर्थिक मदद भी हंगरी के बेतुके रवैये पर निर्भर है.

पश्चिमी देशों की राजधानियों में असमंजस की स्थिति ने पुतिन को साहसी बना दिय है. उनके हालिया सार्वजनिक उपस्थिति और अड़ियल बयान दिखाते हैं कि जहां तक उनकी बात है, रूस अभी लंबे समय तक इसमें शामिल रहेगा.

तो सवाल है कि क्या पुतिन का विरोध जारी रखने के लिए पश्चिम के पास इतनी ताक़त और सहनशक्ति है?

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यूक्रेन और मोलदोवा के साथ सदस्यता पर वार्ता शुरू करने का यूरोपीय संघ के फैसले की अहमियत सांकेतिक से अधिक नहीं है.

इसका परोक्ष मतलब है कीएव के लिए समर्थन का जारी रहना, क्योंकि रूस की पूर्व जीत के साथ तो यूक्रेन का यूरोपी संघ में शामिल होना नामुमकिन है.

वॉशिंगटन में इसकी मौजूदा नीतियों में पूरी तरह बदलाव की संभावना कम ही है.

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की रेटिंग बढ़ रही है, इससे ये आशंका जताई जा रही है कि अमेरिकी मदद को बड़ा झटका लगेगा. हालांकि तमाम बयानबाज़ियों के बावजूद 2016 में ट्रंप नैटो से अमेरिका को अलग नहीं कर सके थे. यही वजह है कि वो अमेरिका की 75 साल पुरानी ट्रांसअटलांटिक साझेदारी को एकतरफ़ा नहीं पलट पाएंगे.

लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि पश्चिमी खेमे में आई हालिया दरार का कोई मतलब नहीं है.

पश्चिम के लिए, और इसलिए यूक्रेन के लिए भी, 2024 अधिक मुश्किल होगा.

बिना जवाबदेही वाली तानाशाहियों के मुकाबले लोकतांत्रिक देशों में लंबे समय तक जंग के लिए समर्थन हमेशा से ही जटिल रहता है.

हालांकि ऐसा लगता है कि यह जंग 2024 के पूरे साल तक खिंचेगी लेकिन यह अनंत काल तक नहीं खिंच सकती.

पश्चिम की हिचकिचाहट रूस को ताकत दे रही है और किसी तख़्तापलट या स्वास्ध्य संबंधी मुददे की गैरमौजूदगी में अभी पुतिन का अवसान नहीं होने जा रहा है. केवल एक ही सूरत बचती है कि दोनों पक्ष समझौता करें, जिसको लेकर अभी कोई भी पक्ष तैयार नहीं है.

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अगला एक साल स्थिति को मज़बूत करने का वक़्त

माइकल क्लार्क, रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट के पूर्व डायरेक्टर जनरल

साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले ने यूरोपीय महाद्वीप को एक बड़ी जंग में घसीट लिया. 2023 में जंग ने जो मोड़ लिया वो ‘औद्योगिक काल के युद्ध कौशल’ की वापसी का भी मुजाहिरा था.

औद्योगिक काल का युद्ध अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्से या पूरी अर्थव्यवस्था को ही प्राथमिकता के आधार पर युद्ध के साजो सामान के उत्पादन की ओर निर्दिष्ट करता है. साल 2021 से अबतक रूस का रक्षा बजट तिगुना हो गया है और अगले साल के सरकारी खर्चे का 30 प्रतिशत युद्ध संबंधी योजनाओं में खर्च होगा.

यह यूक्रेन जंग को अधिक लंबा और अधिक दर्दनाक बना देगा, जोकि यूरोप ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कभी नहीं झेला.

आने वाले दिनों में पता चलेगा कि रूस और इसके सप्लायर उत्तर कोरिया और ईरान, और यूक्रेन और इसके समर्थक पश्चिमी देश ‘औद्योगिक काल के युद्ध कौशल’ को जारी रखने में कितने समर्थ या तैयार होते हैं.

यह कहना ग़लत होगा कि यूक्रेन में मोर्चे पर गतिरोध की स्थिति बन गई है, बल्कि दोनों पक्ष एक दूसरे को रोकने में समर्थ हैं.

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पूरे डोनबास क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए रूसी सेना एक बार फिर पूरे मोर्चे पर दबाव बना सकती है. दूसरी ओर यूक्रेन पश्चिमी काला सागर और बोसफोरस के अपने अहम व्यापारिक कॉरिडोर पर फिर से कब्ज़े को पुख़्ता करने की कोशिश करेगा.

कीएव रूसी घुसपैठियों के ख़िलाफ़ और औचक सैन्य हमले कर सकता है ताकि कुछ इलाक़ों में बढ़त हासिल की जा सके.

ऐसा लगता है कि 2024 दोनों के लिए ही अपनी अपनी पकड़ मज़बूत करने का साल होगा.

2025 की गर्मियों से पहले किसी भी रणनीतिक हमले के लिए रूस के पास हथियार और प्रशिक्षित सैनिकों की की काफी कमी है.

जबकि यूक्रेन को अगले साल तक युद्ध चलाने और अपने इलाक़ों को आज़ाद कराने वाले जवाबी हमलों की तैयारी के लिए पश्चिमी सैन्य मदद की ज़रूरत होगी.

औद्योगिक काल वाले जंग समाजों के बीच संघर्ष का नतीजा होते हैं. जंग के मैदान में क्या होता है, अंततः यह उस संघर्ष का ही एक लक्षण होता है.

2024 में इस जंग का परिणाम आवदीव्का, टोकमैक, क्राममैटोर्स्क या मोर्चे पर तबाह होने वाले किसी भी क्षेत्र की बजाय मॉस्को, कीएव, वॉशिंगटन, ब्रसेल्स, बीजिंग, तेहरान और प्योंग में तय होगा.

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यूक्रेन क्राइमिया में दबाव बढ़ाएगा

बेन होज़ेस, पूर्व कमांडिंग जनरल, यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी यूरोप,

रूस में, यूक्रेन को निर्णायक रूप से हराने और किसी उलटफेर की क्षमता नहीं है और वो कब्ज़ाए गए इलाक़ों पर अपने नियंत्रण को बनाए रखेगा और समय का इस्तेमाल वो अपनी रक्षापंक्ति मज़बूत करने में लगाएगा जबकि इस दौरान वो ये उम्मीद करेगा कि यूक्रेन को लेकर पश्चिम का समर्थन कम होता जाए.

लेकिन यूक्रेन रुकेगा नहीं. वो अपने वज़ूदग की लड़ाई लड़ रहा है और उसे पता है कि अगर वो रुका तो रूस क्या करेगा. अमेरिका में घटते समर्थन को देखते हुए कई यूरोपीय देश यूक्रेन को सैन्य मदद बढ़ाने पर बातचीत कर रहे हैं.

हालांकि मेरा मानना है कि नए साल में अमेरिका सैन्य मदद का पैकेज देने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाल लेगा, जो दिसम्बर में कांग्रेस की वजह से अटक गया था.

इसलिए मेरा मानना है कि यूक्रेन आने वाले महीनों में चार चीज़ें कर सकता है-

  • नए जवाबी हमले के लिए ज़रूरी नए सैनिकों से अपनी यूनिटो को सुसज्जित कर सकता है, जो लंबे युद्ध के कारण खस्ताहाल में हैं.
  • यूक्रेन में नई भर्तियों को शुरू किया जा सकता है, जिससे पर्याप्त सैनिक हों.
  • हथियारें और गोला बारूद के उत्पादन को बढ़ा सकता है.
  • जैमिंग, इंटरसेप्टिंग और लोकेटिंग- रूस के अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध कौशल के मुकाबले अपनी क्षमता को बढ़ा सकता है.
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अगली गर्मियों तक यूक्रेन को अमेरिका के एफ16 लड़ाकू विमान मिल जाएंगे. उसे उम्मीद है कि वो रूसी लड़ाकू विमानों का मुकाबला कर पाएगा और अपनी वायु सीमा की सुरक्षा मजबूत कर पाएगा.

यूक्रेन के लिए क्राइमिया रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण है, जिस पर रूस का कब्ज़ा है.

यूक्रेन सेवेस्तोपोल में रूसी नेवी, वहां मौजूद कुछ चंद सैन्य हवाई अड्डे और उनके आपूर्ति अड्डों पर हमले बढ़ाएगा.

यह रणनीति काम भी कर रही है. ब्रिटेन द्वारी दी गई महज तीन स्टॉर्म शैडो क्रूज़ मिसाइलों से ही यूक्रेन ने सेवास्तोपोल से एक तिहाई नौसेना को हटाने के लिए रूस को मज़बूर किया है.

हालांकि यूक्रेन के पास असीमित संसाधन नहीं हैं, ख़ासकर तोप के गोला बारूद और सटीक मार करने वाले हथियार.

लेकिन रूसी सैनिक भी बुरी हालत में हैं. जंग इच्छाशक्ति के साथ साथ आपूर्ति की भी परीक्षा है. रूस का आपूर्ति तंत्र कमज़ोर है और यूक्रेन की ओर से लगातार दबाव में है.

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