इब्राहिम रईसी के हेलिकॉप्टर क्रैश से जुड़े वो सवाल, जिनके जवाब मिलना बाकी हैं

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- Author, नीदा संज
- पदनाम, पत्रकार
ईरान की दूसरी सबसे अहम शख़्सियत यानी पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का हेलिकॉप्टर लगभग 16 घंटे तक लापता कैसे रहा? और हेलिकॉप्टर या उसका मलबा कहां है? ईरान की सुरक्षा एजेंसियां 16 घंटे तक इसका पता क्यों नहीं लगा सकी थीं?
पूर्व राष्ट्रपति रईसी के हेलिकॉप्टर के क्रैश होने के कुछ दिनों बाद भी इन सवालों का जवाब साफ़ तौर पर नहीं मिल रहा है. इतना ही नहीं इस बारे में सामने आने वाले बयानों और तस्वीरों ने इस मामले में उलझनों और सवालों को और बढ़ा दिया है.
क्या हेलिकॉप्टर तकनीकी ख़राबी की वजह से गिरा? क्या अचानक कॉकपिट के अंदर कोई ऐसी अप्रत्याशित घटना हुई जो इस हादसे का सबब बनी? क्या मौसम ऐसा था, यानी घना कोहरा और बादल इस हादसे की वजह थे?
क्या यह हेलिकॉप्टर हवा में ही जल चुका था या ज़मीन पर हार्ड लैंडिंग के दौरान या उसके बाद जला? क्या यह कोई सोची समझी साज़िश थी? हेलिकॉप्टर के लापता होने और उसके मलबे का पता लगने के बीच 16 घंटों में क्या होता रहा?
हम इनमें से किसी भी सवाल का जवाब साफ़-साफ़ नहीं जानते, क्योंकि जवाब के लिए विशेषज्ञों की स्वतंत्र पड़ताल की ज़रूरत है जो ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति के कारण असंभव है.
जनवरी 2020 में होने वाले प्रसिद्ध अमेरिकी खिलाड़ी कोबी ब्रायंट के हेलिकॉप्टर हादसे का उदाहरण ले लें. नेशनल एविएशन सेफ़्टी कमेटी की जांच की पूरी रिपोर्ट एक साल से भी अधिक समय के बाद फ़रवरी 2021 में प्रकाशित की गई थी. लेकिन इस दौरान मनगढ़ंत, विरोधाभासी और झूठ पर आधारित जानकारियों ने कई आशंकाओं को जन्म दिया.
राष्ट्रपति रईसी के हेलिकॉप्टर हादसे की पहली रिपोर्ट में ईरान के जनरल हेडक्वार्टर ने ‘ऊंचाई पर पहाड़ी के साथ टकराव’ के बाद आग लगने के अलावा सभी दूसरी संभावनाओं से इनकार किया है.
इस रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि हेलिकॉप्टर निर्धारित रास्ते पर उड़ान भर रहा था और हादसे से डेढ़ मिनट पहले तक यह कॉन्वॉय में मौजूद दो दूसरे हेलिकॉप्टरों के साथ संपर्क में था.
जनरल हेडक्वार्टर का कहना है, "हेलिकॉप्टर की बॉडी पर गोलियों या उस जैसी चीज़ों का कोई निशान नहीं देखा गया. कंट्रोल टावर के साथ हेलिकॉप्टर के होने वाले संपर्क में भी किसी संदिग्ध बातचीत का पता नहीं चला है."
बीबीसी फ़ारसी ने इस बारे में महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जानने के लिए इस क्षेत्र के कुछ विशेषज्ञों से बात की है.
इन विशेषज्ञों में फ़्लोरिडा के एंबुरी रीडल स्कूल ऑफ़ एविएशन में एरोनॉटिकल साइंसेज़ डिपार्टमेंट से जुड़े असिस्टेंट प्रोफ़ेसर रेमंड शूमाकर, ईरानी सैनिक हेलिकॉप्टर के पूर्व पायलट मसूद सिद्दीक़ियान, अफ़्रीका में विशेष उड़ानों के डायरेक्टर नवेद ग़दीरी और वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट के सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ फ़रज़ीन नदीमी शामिल हैं.
इन सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हेलिकॉप्टर हादसे के बारे में जो जानकारी अभी तक मिली है उसके आधार पर निश्चित तौर पर कुछ कहना मुश्किल है.
उन्होंने कहा कि बाद में सामने आने वाले नए सबूत नए जवाब दे सकते हैं या और गंभीर सवाल खड़े कर सकते हैं.
क्या पहाड़ से टकराना बनी वजह?

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ईरान की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार आम राय यही है कि यह हेलिकॉप्टर उड़ान के दौरान एक पहाड़ से टकरा गया जिसके बाद राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और ईरान के विदेश मंत्री समेत हेलिकॉप्टर पर सवार सभी लोग मारे गए.
दक्षिण अफ़्रीका में ट्रेनिंग लिए हुए मास्टर पायलट और अमेरिका के शहर सान डियागो से संबंध रखने वाले नवेद ग़दीरी ने हादसे के बाद ईरानी राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर की तस्वीरों की तुलना ऐसे ही एक हादसे से की है जिसमें जहाज़ की नोक या दुम पहाड़ से टकराई हो. इसके बाद वह ढलान पर 20 मीटर तक घिसटता चला गया था. लेकिन पहाड़ की बाहरी सतह पर इस हादसे का क्या असर हुआ है, इसके बारे में अभी अस्पष्टता है जिसे स्वतंत्र जांच से ही दूर किया जा सकता है.
20 साल तक ईरानी हेलिकॉप्टर के पायलट रहने वाले मसूद सिद्दीक़ियान पूछते हैं, "अगर यह तेज़ रफ़्तार के साथ पहाड़ के ऊपरी हिस्से से टकराया तो यह कम ऊंचाई पर पीछे क्यों चला गया और हेलिकॉप्टर की दुम ऊंचाई पर कैसे रह गई?"
"या अगर यह किसी पहाड़ से टकराकर और पायलटों के कंट्रोल से बाहर होकर अनियंत्रित हुआ और चारों तरफ़ घूमने लगा तो उसकी दुम ठीक-ठाक हालत में कैसे मिली?"
वह कहते हैं, "हेलिकॉप्टर हवाई जहाज़ की तरह नहीं होता और उस पर लगे मज़बूत रोटर ब्लेड (पंखा) की वजह से स्वाभाविक तौर पर आसपास मौजूद पेड़ों को नुक़सान पहुंचाना चाहिए था."
एक और विश्लेषण में वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट के रक्षा मामलों के विशेषज्ञ फ़रज़ीन नदीमी का कहना है, "मेरी राय में हेलिकॉप्टर सीधे पहाड़ से टकरा गया जबकि पायलट को या तो पता नहीं था कि वह पहाड़ से टकरा रहा है या उसने पहाड़ को सामने देखकर हेलिकॉप्टर को ऊपर उठाने और पहाड़ पर से गुज़रने की कोशिश की जिसमें वह कामयाब नहीं हो सका."
वे कहते हैं, "या फिर पायलट ने स्थिति देखते हुए हेलिकॉप्टर की नाक को नीचे की तरफ़ रखते हुए पहाड़ से टकरा दिया जिसके बाद यह तेज़ी से नीचे की तरफ़ मुड़ गया और उसकी बॉडी पलट गई. इस तरह हेलिकॉप्टर की दुम ऊपर रही और फिर केबिन में आग लग गई."

उनका कहना है कि एक प्रत्यक्षदर्शी का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि हेलिकॉप्टर पहाड़ से टकराकर नीचे गिर गया था.
फ़रज़ीन नदीमी उस चश्मदीद के बयान के बारे में बता रहे थे जो एक खान में काम करते हैं. उनका बयान अख़बारों में हेलिकॉप्टर हादसे के एक गवाह के तौर पर छपा था.
एक और संभावना यह है कि जब हेलिकॉप्टर पहाड़ से टकराया तो उसका इंजन और पंखे बंद हो गए, लेकिन यह साफ़ नहीं है कि अगर ऐसा हुआ तो इसकी वजह क्या थी?
हेलीकॉप्टर क्यों जल गया?

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ईरान सशस्त्र बलों के जनरल हेडक्वार्टर की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया है कि पहाड़ से टकराने के बाद हेलिकॉप्टर में आग लग गई थी.
अतीत में इस तरह की घटनाओं के उदाहरण मिलते हैं जब हादसे के बाद हेलिकॉप्टर के केबिन में आग लगी हो.
ईरानी सैनिक हेलिकॉप्टरों के पूर्व पायलट मसूद सिद्दीक़ियान का कहना, "अगर हादसे के बाद लगने वाली आग इतनी ज़बरदस्त थी कि कॉकपिट में अधिकतर यात्री और विशेष तौर पर पायलट गंभीर रूप से जल गए तो इस स्थिति में घटनास्थल से सामने आने वाली कुछ तस्वीरों में कुछ चीज़ें सही हालत में क्यों दिखीं?"
वे कहते हैं, "हेलिकॉप्टर के कुछ दूसरे हिस्से जलने के बाद काले क्यों नहीं हुए.”
क्या ऊंचाई पर होने वाला धमाका हादसे की वजह हो सकता है?
इस बात का फ़िलहाल कोई सबूत नहीं है कि हेलिकॉप्टर में उड़ान के दौरान कोई धमाका हुआ.
लेकिन मसूद सिद्दीक़ियान का कहना है, "कॉकपिट में कंट्रोल्ड धमाके या किसी छोटे धमाके की संभावना को सिरे से नकारा नहीं जा सकता. शायद एक ऐसा धमाका जिसने पायलटों से हेलिकॉप्टर का कंट्रोल छीन लिया हो."
सिद्दीक़ियान का कहना है, "कॉकपिट का पूरी तरह नष्ट होना और बाक़ी यात्रियों से अधिक पायलटों की लाशों का जलना और कुछ मीटर की दूरी से मिलने वाली हेलिकॉप्टर की दुम… हो सकता है इन सब की वजह केबिन में नियंत्रित धमाका हो. लेकिन यह केवल एक अनुमान है और इसको साबित करने के लिए और सबूतों की ज़रूरत होगी."
क्या मौसम के बारे में कोई चेतावनी जारी की गई थी?

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पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के कार्यालय के प्रमुख ग़ुलाम हुसैन इस्माइली कॉन्वॉय में मौजूद दो हेलिकॉप्टरों में से एक पर सवार थे. उन्होंने ईरानी टीवी पर हादसे के बाद दिए गए अपने पहले इंटरव्यू में कहा था कि आसमान साफ़ था मगर फिर बादल सामने आ गए.
ईरान के मौसम विभाग के अनुसार उस दिन तेज़ हवा, तूफ़ान या घने बादलों का कोई पूर्वानुमान नहीं था.
लेकिन हादसे के दिन की सैटेलाइट तस्वीरों से उस इलाक़े में बादलों के होने की पुष्टि होती है और बीबीसी वेरीफ़ाई की टीम ने भी पुष्टि की है कि जिस इलाक़े से उड़ान शुरू हुई थी वहां मौसम बेहतर था और धीरे-धीरे जैसे ही यह हेलिकॉप्टर संगन खदान के इलाक़े के पास पहुंचे, बादल घने होने शुरू हो गए.
आसमान पर बादलों और घाटी में घने कोहरे के साथ-साथ अधिकारियों में इस बात पर गंभीर मतभेद पाया जाता है कि मौसम उड़ान के लिए सुरक्षित था या नहीं.
इब्राहिम रईसी के कार्यालय के प्रमुख का कहना था कि उड़ान के लिए मौसम ख़राब नहीं था और उन्हें कोई चेतावनी नहीं मिली थी, लेकिन मौसम विभाग के जनसंपर्क निदेशक अब्दुल रसूल हसनपुर ने इंसाफ़ न्यूज़ को बताया कि हादसे के दिन राष्ट्रपति और उनके साथियों को ले जाने वाले हेलिकॉप्टर को ऑरेंज वार्निंग दी गई थी.
ईरान की मौसम प्रणाली में ऑरेंज वार्निंग, मध्यम दर्जे की चेतावनी है जिसका मतलब यह है कि ख़राब मौसम से नुक़सान हो सकता है.
मौसम विभाग की रिपोर्ट पर विवाद नया नहीं है. फ़रवरी 2018 में ईरान के शहर तेहरान से ख़ुर्रमाबाद जाने वाली ईरान और टूर फ़्लाइट 956 के क्रैश होने के मामले में भी यही समस्या सामने आई थी.
शरीफ़ यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और उस समय सिविल एविएशन इंडस्ट्री की फ़ैकल्टी के प्रमुख मोहम्मद बाक़र मलाइक ने अपनी पड़ताल में यह बताया था कि देश के मौसम विभाग ने ग़लती से एक रात पहले के मौसम की रिपोर्ट और बादलों की स्थिति एविएशन ऑर्गनाइज़ेशन को भेजी थी.
उनका कहना था कि अधिकारियों ने मौसम विभाग की इस ग़लती को छोटा बताते हुए हादसे की वजह पायलट की ग़लती को बताया था.
बादल छाए रहना हेलिकॉप्टर के लिए कितना ख़तरनाक?
आसमान में बादल छाए रहने के दौरान उड़ान भरना उतना ख़तरनाक नहीं है लेकिन अगर बादल किसी पहाड़ के पास हों या पायलट के लिए आगे देखने में रुकावट बन रहे हों तो यह ख़तरनाक हो सकते हैं.
रेमंड शूमाकर ख़ुद एक पायलट हैं और एंबुरी रीडल में एरोनॉटिकल साइंसेज़ के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं. रेमंड अमेरिका की सबसे बड़ी पायलट ट्रेनिंग यूनिवर्सिटियों में से एक के साथ जुड़े हुए हैं. वह किसी भी पहाड़ के पास बादल और धुंध होने को पायलटों के लिए सबसे ख़तरनाक जगह समझते हैं.
वह कहते हैं, "बिना किसी पूर्व सूचना और योजना के बादलों में घिरे पहाड़ों के क़रीब जाने वाले पायलट के पास इस स्थिति से निकलने और मौसम के हिसाब से सुरक्षित स्थिति तक पहुंचाने के लिए केवल 56 सेकंड का समय होता है. दूसरी स्थिति में इसका नतीजा ख़तरनाक हो सकता है."

शूमाकर ने हाल के हादसे के बारे में सीधे टिप्पणी करने से परहेज़ किया है.
इस बारे में छपे आंकड़ों के अनुसार ऊंचाई पर बादलों के अलावा दूसरी स्थितियां भी पायलट के काम को मुश्किल बना सकती हैं. पहाड़ों में मौसम का कोई बड़ा बदलाव, विभिन्न दिशाओं से चलने वाली हवाओं और भारी कार्गो और क्रू समेत यात्री या भारी सामान भी हेलिकॉप्टर की उड़ान को प्रभावित करते हैं.
वे कहते हैं, “यह वह कारक हैं जिन पर उड़ान की शुरुआत में ध्यान देना चाहिए. इनको नज़रअंदाज़ करने से कई हवाई हादसे हो चुके हैं."
उनके अनुसार टेकऑफ़ के समय हेलिकॉप्टर का अधिक से अधिक वज़न 5080 किलोग्राम रह सकता है, इससे ज़्यादा नहीं होना चाहिए. लेकिन हवा की रफ़्तार, तापमान और ऊंचाई वह कारक हैं जो 5080 किलोग्राम के मापदंड को घटा या बढ़ा सकते हैं.
लेकिन ऐसा नहीं लगता कि आठ यात्रियों और पेट्रोल की टंकी पूरी तरह भरी होने के बावजूद इब्राहिम रईसी के हेलिकॉप्टर का वज़न निर्धारित सीमा से अधिक था.
अभी तक यह निश्चित तौर पर साबित नहीं हो सका है कि यह हादसा बादलों की वजह से हुआ. हालांकि यह हेलिकॉप्टर क्रैश होने के ठोस कारणों में केवल एक कारण हो सकता है
हेलिकॉप्टर निर्धारित ऊंचाई पर क्यों नहीं था?

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इब्राहिम रईसी के कार्यालय के प्रमुख के स्पष्टीकरण के अनुसार ऐसा लगता है कि कम से कम जब बादलों से सामना हुआ तो राष्ट्रपति के कॉन्वॉय में शामिल हेलिकॉप्टर न्यूनतम निर्धारित ऊंचाई पर नहीं थे.
उड़ान के आम नियमों और विशेष तौर पर यूरोपीय यूनियन एविएशन सेफ़्टी एजेंसी के नियमों के अनुसार (जिसे ईरान भी मानता है) हेलिकॉप्टर को अपने निर्धारित रास्ते पर मौजूद किसी भी सबसे ऊंची जगह से लगभग 350 मीटर ऊपर उड़ान भरनी चाहिए.
जैसा कि ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ़ के बयान में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति रईसी की उड़ान का रास्ता बदला नहीं गया था, तो पायलट जानता था कि वह कितनी ऊंचाई पर उड़ान भरने वाला है और उसके रास्ते में क्या रुकावटें और कौन सी ऊंची जगहें होंगी.
इसका मतलब यह है कि उड़ान की शुरुआत से ही पायलटों को यह जानकारी रही होगी कि उड़ान के दौरान ज़मीन की सबसे ऊंची जगह की ऊंचाई कितनी है. ऐसी स्थिति में जब वह अपने सामने पांच किलोमीटर से अधिक नहीं देख सकते थे तो उनके हेलिकॉप्टर की ऊंचाई उस सबसे ऊंची जगह से कम से कम 350 मीटर ऊपर होनी चाहिए.
ऐसे में मौसम का पूर्वानुमान और हालात के साथ साथ ऑल्टीमीटर और हिसाब रखने के दूसरे तरीक़े भी बहुत अहम हो जाते हैं.
अनुमान लगाया जा सकता है कि हेलिकॉप्टर के दूसरे पायलट ने, जो इस यात्रा के कमांडर भी थे, कुछ कारणों से उड़ान को नीचे रखने का फ़ैसला किया हो. इन कारणों में उन अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रियों की सुरक्षा का मामला एक कारण हो सकता है.
इसके अलावा हेलिकॉप्टरों की क्षमता या घाटी में बादलों की मौजूदगी के बारे में सही जानकारी ना होना भी उड़ान को नीचे रखने का कारण हो सकता है.
उनके अनुसार, "कॉन्वॉय में शामिल हेलिकॉप्टर नंबर एक ने, जिसमें एंटीना और मौसम संबंधी रडार लगा होता है, पहाड़ पर घने बादलों के बारे में इब्राहिम रईसी को ले जाने वाले हेलिकॉप्टर नंबर दो को सूचना दी होगी, शायद ऐसा हुआ हो लेकिन हम इसके बारे में नहीं जानते."
क्या पायलट ने ऊंचाई का हिसाब लगाने में चूक की?

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मसूद सिद्दिक़ियान और नवेद ग़दीरी दोनों ही पायलट की तरफ़ से ग़लती या कोताही बरतने की संभावना को पूरी तरह रद्द नहीं करते.
सिद्दिक़ियान कहते हैं, "मैं हमेशा मानवीय भूल को विभिन्न कारणों से पचास फ़ीसद हवाई हादसे की वजह समझता हूं. बहुत मुमकिन है कि पायलट को ठीक उस वक़्त दिल का दौरा पड़ गया हो और उस स्थिति में दूसरा पायलट उड़ान जारी रखने की बजाय उस पायलट पर ध्यान देने लगा हो, लेकिन एक वीआईपी फ़्लाइट, जिसमें दो पायलट और तकनीकी स्टाफ़ का एक सदस्य मौजूद हो, उसमें यह बहुत अजीब बात है कि वह ऊंचाई, बादलों और पहाड़ों से अवगत न हों."
विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरे मामले में पायलट की ग़लती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
क्या हेलिकॉप्टर के पुर्जे ख़राब हो गए थे?
सिद्दिक़ियान के अनुसार ऑल्टीमीटर में आई अचानक ख़राबी अप्रत्याशित कारणों में से एक हो सकती है जिसपर विचार किया जा सकता है.
वह कहते हैं, "ऑल्टीमीटर पहली चीज़ है जिसे एक पायलट चेक करता है और उड़ान के बिल्कुल शुरू में ही उसे पता चल जाता है कि यह ठीक से कम कर रहा है या नहीं. इस बात की संभावना बहुत कम है कि उड़ान के बीच में ऑल्टीमीटर फ़ेल हो जाए."
लेकिन यह मुमकिन है कि किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से किसी पुर्ज़े में कोई परेशानी आ गई हो. पायलट सिद्दिक़ियान सवाल करते हैं कि अगर कोई तकनीकी समस्या है और पुर्ज़े ख़राब हैं तो पायलट ने आख़िरी लम्हे तक इमरजेंसी का एलान क्यों नहीं किया और ‘मेडे’ (मेरी मदद करें) क्यों नहीं पुकारा.
सिद्दिक़ियान के अनुसार बहुत ख़राब हालात में भी पायलट दो या तीन सेकंड में एक बटन दबाकर इमरजेंसी का एलान कर सकता है.
उदाहरण के लिए रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से तेहरान के ऊपर यूक्रेन के जहाज़ पर पहली गोली चलाने के बाद पायलट ने वॉच टावर के साथ बातचीत में चेतावनी दी थी कि कोई घटना हुई है और वह निर्धारित रास्ते से दाईं ओर मुड़ रहा है.
सशस्त्र बलों के हेडक्वार्टर की रिपोर्ट के अनुसार इब्राहिम रईसी के हेलिकॉप्टर के गिरने से पहले "ख़तरे या ख़राब हालात के बारे में कंट्रोल टावर से कोई बातचीत नहीं हुई."
अब तक किए गए दावों के अनुसार रईसी के हेलिकॉप्टर के पायलट और दूसरे दो हेलिकॉप्टरों के बीच आख़िरी संपर्क लापता होने से एक मिनट पहले हुआ था और इसमें किसी ख़तरे की चेतावनी नहीं दी गई थी.
इस कॉन्वॉय में शामिल दो हेलिकॉप्टरों पर सवार लोगों का कहना है कि राष्ट्रपति रईसी का हेलिकॉप्टर अचानक लापता हो गया.
विशेषज्ञों के अनुसार यह भी हो सकता है कि किसी ख़तरे की चेतावनी दी गई हो लेकिन ईरानी अधिकारियों की ओर से मीडिया को इस बारे में कुछ नहीं बताया गया.
क्या हेलिकॉप्टर का पुराना होना और ईरान पर लगे प्रतिबंध हादसे की वजह हैं?

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सिद्दिक़ियान कहते हैं कि हेलिकॉप्टर के पुराने होने का मतलब यह नहीं कि वह उड़ान के लिए असुरक्षित हो गया हो. उनके अनुसार किसी भी हेलिकॉप्टर की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती.
वह कहते हैं कि हेलिकॉप्टर की हर 50 घंटे की उड़ान के बाद उसका मुआयना किया जाता है और 100 घंटे बाद हेलिकॉप्टर का इंजन खोलकर उसके सभी हिस्से चेक किए जाते हैं.
सिद्दिक़ियान के अनुसार रईसी बेल 212 हेलिकॉप्टर में सफ़र कर रहे थे. वह कहते हैं कि यह देखना होगा कि राष्ट्रपति रईसी के उस हेलिकॉप्टर को सुरक्षित रखने के प्रोटोकॉल का पालन हो रहा था या नहीं.
सिद्दिक़ियान समझते हैं कि अगर वह हेलिकॉप्टर असुरक्षित था तो उसकी एक ही वजह हो सकती है और वह ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध हैं.
ध्यान रहे कि ईरान पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण यह देश हेलिकॉप्टर के ख़राब पार्ट्स की जगह नए पार्ट्स भी विदेश से नहीं मंगवा सकता.
सिद्दिक़ियान का भी यह कहना है कि चूंकि ईरान पर प्रतिबंध लगाए गए हैं तो हो सकता है कि ईरानी अधिकारी एक हेलिकॉप्टर को ठीक करने के लिए उसमें दूसरे हेलिकॉप्टरों के पार्ट्स इस्तेमाल करते हों.
लेकिन उनके अनुसार राष्ट्रपति रईसी के हेलिकॉप्टर के साथ ऐसा करने का सोचा भी नहीं जा सकता.
हेलिकॉप्टर हादसे के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए बेल कंपनी के प्रमुख रीड एंडरसन का कहना था, "हम बस यह कह सकते हैं कि हमारे ईरान के साथ व्यापारिक संबंध नहीं हैं और ना हम उनके हेलिकॉप्टरों की सर्विस करते हैं. जो हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ उसके बारे में हमारे पास कोई जानकारी नहीं है."
बीबीसी ने बेल कंपनी के प्रवक्ता से यह जानने के लिए संपर्क किया कि ईरान को आख़िरी बार हेलिकॉप्टर कब बेचा गया था लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया.
हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाने की ज़िम्मेदारी किसकी?

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ईरान में महत्वपूर्ण व्यक्तियों की हवाई यात्रा पर सिविल एविएशन ऑर्गनाइज़ेशन के नियम लागू नहीं होते. अंसार अल मेहदी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स का हिस्सा हैं और राष्ट्रपति, मंत्रियों और दूसरे बड़े सरकारी अधिकारियों की ज़िम्मेदारी भी उनकी ही है.
महत्वपूर्ण सरकारी व्यक्तियों की हवाई यात्रा के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार पहले हेलिकॉप्टर में सुरक्षा अधिकारी थे और उनके पीछे दूसरे हेलिकॉप्टर में राष्ट्रपति व मंत्री जबकि तीसरे हेलिकॉप्टर में दूसरे सरकारी अधिकारी मौजूद थे.
यात्रा के दौरान ईरान के संचार मंत्री राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के साथ नहीं बल्कि सुरक्षा अधिकारियों के साथ दूसरे हेलिकॉप्टर में सवार थे. इस बात पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि यात्रा के दौरान संचार मंत्री राष्ट्रपति रईसी को छोड़कर दूसरे हेलिकॉप्टर में क्यों सवार हुए.
यह तीनों हेलिकॉप्टर एक साथ उड़ रहे थे और फिर बीच में मौजूद राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का हेलिकॉप्टर ग़ायब हो गया. साथ उड़ रहे हेलिकॉप्टरों को इस बात का पता भी नहीं चल सका.
राष्ट्रपति रईसी के हेलिकॉप्टर को तलाश करने वाले एक बचाव अधिकारी का कहना है कि उन्हें एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि उन्हें राष्ट्रपति रईसी के हेलिकॉप्टर के लापता होने की जानकारी उस समय हुई जब उन्हें हेलिकॉप्टर की आवाज़ आना बंद हो गई.
आमतौर पर ईरान में शीर्ष पदाधिकारियों की देश के अंदर और विदेश की हवाई यात्रा के दौरान विशेष व्यवस्था की जाती है.
सिद्दिक़ियान के अनुसार, "बतौर पायलट हमें दो काम करने होते हैं. पहला यह देखना कि बॉडीगार्ड समेत किसी के पास भी कोई पिस्टल ना हो और दूसरा यह कि रेडियो या फ़ोन के ज़रिए यात्रा के दौरान किसी सरकारी स्टेशन से हर समय संपर्क में रहा जाए."

वह कहते हैं कि 1950 के दशक में ईरान के शाही जहाज़ में पायलट के पास एक सैटेलाइट फ़ोन भी हुआ करता था.
लेकिन बड़े पदाधिकारी अक्सर सैटेलाइट फ़ोन इस्तेमाल करने से हिचकिचाहते हैं क्योंकि यह फ़ोन सुरक्षित नहीं होता और दूसरे देश भी उनकी बातचीत को सुन सकते हैं.
ईरान में बड़े पदाधिकारियों के हेलिकॉप्टरों के एक पायलट ने नाम ना बताने की शर्त पर बीबीसी से कहा कि हेलिकॉप्टर या जहाज़ के अंदर बॉडीगार्ड्स को भी लोडेड हथियार रखने की इजाज़त नहीं दी जाती और उन्हें कहा जाता है कि वह अपने हथियारों से मैगज़ीन निकाल दें.
"लेकिन ऐसा कई बार हुआ है कि वह अपने हथियार पायलट से छिपा कर रखते हैं."
तंज़ानिया में मशहूर लोगों के चार्टर्ड फ़्लाइट और हेलिकॉप्टर के पायलट क़ादरी कहते हैं कि सफ़र शुरू होने से पहले एक विशेष टीम कुत्तों की मदद से जहाज़ों या हेलिकॉप्टरों की चेकिंग करती है.
क़ादरी एक बार ब्रितानी सम्राट चार्ल्स तृतीय के भी पायलट रह चुके हैं. उनका कहना है कि सम्राट चार्ल्स के साथ सफ़र के दौरान उन्हें मोबाइल फ़ोन की तरह दिखने वाले दो डिवाइसेज़ दी गई थीं और उनमें से एक डिवाइस हमेशा पायलट के पास होती थी.
वह कहते हैं कि उस डिवाइस की निगरानी सिक्योरिटी टीम कर रही होती है और अगर पायलट यह डिवाइस बंद कर दे तब भी सिक्योरिटी टीम उसे ख़ुद खोल सकती है.
तंज़ानिया के पायलट कहते हैं कि इस डिवाइस से ज़मीन पर मौजूद सिक्योरिटी टीम को पता होता है कि किस समय जहाज़ या हेलिकॉप्टर कहां मौजूद है और उसके ज़रिए उन्हें किसी हादसे की जानकारी भी तुरंत मिल जाती है.
हेलीकॉप्टर इतने घंटों आंखों से ओझल क्यों रहा?

शीर्ष सरकारी पदाधिकारियों के साथ हवाई यात्रा पर जाने वाले पायलट्स कहते हैं उनके लिए यह बात ‘अविश्वसनीय’ और ‘अजीब’ है कि घंटों गुज़रने के बावजूद अधिकारियों को राष्ट्रपति रईसी के हेलिकॉप्टर के बारे में कोई ख़बर ना मिल सकी थी.
क़ादरी कहते हैं कि शायद सुरक्षा कारणों से हेलिकॉप्टर के ट्रांसपोंडर्स बंद कर दिए गए हों लेकिन उसके बावजूद यह अविश्वसनीय बात है कि 16 घंटे गुज़र जाने के बाद भी ईरानी अधिकारी किसी भी डिवाइस के ज़रिए राष्ट्रपति रईसी के हेलीकॉप्टर का पता नहीं लगा सके.
“मैं यह बात मानने को तैयार नहीं के राष्ट्रपति बिना ट्रैकिंग डिवाइस वाले हेलिकॉप्टर में सवार थे. वहां निश्चित रूप से कोई ट्रैकिंग डिवाइस होगी, अगर ऐसा था तो हेलीकॉप्टर अचानक रडार से ग़ायब कैसे हो गया?”
हमें नहीं मालूम कि ईरानी सुरक्षा बल राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के हेलिकॉप्टर के गिरने के स्थान से परिचित थे या नहीं. ऐसा भी हो सकता है कि वह किसी वजह से राष्ट्रपति की मौत का ऐलान करने में देरी की हो.
ऐसे बहुत सारे सवाल हैं जिनका जवाब हमें नहीं मिल सका है और नई जानकारी मिलने तक शायद राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के हेलिकॉप्टर हादसे में मौत एक पहेली ही बनी रहे.
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