रोहित शर्मा के आउट होने के बाद किसी से रन क्यों नहीं बने, पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटरों ने बताया

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आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप की मेज़बानी कर रहा भारत अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फ़ाइनल मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया से छह विकेट से हार गया.
इस जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने छठी बार वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया.
ऑस्ट्रेलिया ने स्टेडियम में मौजूद एक लाख से ज़्यादा भारतीय समर्थकों को अपनी जीत से शांत कर दिया और पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही टीम इंडिया को आसानी से पटखनी दे दी.
भारत पूरे टूर्नामेंट में जीत के लिए पसंदीदा टीम रही थी लेकिन फ़ाइनल में चारों खाने चित हो गई.
भारत की इस हार और ऑस्ट्रेलिया की जीत पर पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर और कप्तान कई बातें कह रहे हैं.
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के महान क्रिकेटर रहे और पूर्व कप्तान वसीम अकरम ने पाकिस्तानी टीवी चैनल एआरवाई ग्रुप के द पविलियन शो में कहा, ''ऑस्ट्रेलिया जब ग्रुप मैच में साउथ अफ़्रीका और भारत से हारा तो हम उसकी आलोचना कर रहे थे. हम कह रहे थे कि उनकी प्लेइंग इलेवन ठीक नहीं है. स्पिनर ठीक नहीं हैं. अतिरिक्त स्पिनर नहीं हैं. लेकिन आख़िरकार फाइनल में सब कुछ ठीक हो गया और एकतरफ़ा मैच हुआ.''
ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस की तारीफ़ करते हुए वसीम अकरम ने कहा, ''हम इस टूर्नामेंट के पहले कह रहे थे कि पैट कमिंस ने इस वर्ल्ड कप के पहले केवल चार एकदिवसीय मैचों में कप्तानी की है. सवाल उठ रहा था कि क्या कमिंस कप्तानी के लिए ठीक हैं?''
''तब मैंने कहा था कि उसने टेस्ट चैंपियनशिप में साबित कर दिया है तो वनडे की कप्तानी भी वैसी ही है. टी-20 से आता तो ये सवाल ज़्यादा वाजिब होता. फ़ाइनल मुकाबले में कमिंस ने यह साबित भी कर दिया."
अकरम ने कहा, "कमिंस ने पूरी तरह से मोर्चा संभाल रखा था. उसने 10 ओवर में 34 रन देकर दो विकेट लिए. बहुत ही मुश्किल घड़ी में उसने विकेट गिराए हैं. मिचेल स्टार्क को कमिंस 41वें ओवर में लाया और केएल राहुल का विकेट मिला. किस गेंदबाज़ को कब लाना है, इसमें उसने बहुत ही समझदारी दिखाई है.''


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टॉस का कितना फ़र्क़ पड़ा?
वसीम अकरम ने इसी शो में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मिस्बाह-उल हक़ से पूछा- वर्ल्ड कप फ़ाइनल और नॉकआउट गेम, टॉस ने तो फ़र्क़ डाला है. आप इसे तो मानेंगे?
इसके जवाब में मिस्बाह ने कहा, ''फ़र्क़ तो डाला है लेकिन रोहित शर्मा ने तो कहा कि वह टॉस जीतते, तब भी बैटिंग ही करते. ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को इसका श्रेय देना चाहिए कि उन्होंने पिच की कंडीशन को बेहतर समझा, या फिर इस प्रेशर को लिया कि कोई बात नहीं, अगर पिच की कंडीशन पहले बैटिंग के पक्ष में है, तब भी हम बल्लेबाज़ी बाद में करेंगे."
"ऑस्ट्रेलिया ने सोचा कि पहले गेंदबाज़ी करेंगे तो रिवर्स स्विंग मिलेगी. फिर गेंद पुरानी होगी तो स्कोर बनाना आसान नहीं होगा. बाद में ओस गिरेगी तो भारत के स्पिनर बहुत प्रभावी नहीं रहेंगे. ऐसे में क्रेडिट तो पैट कमिंस को जाता है, जिन्होंने माकूल फ़ैसला लिया. ऑस्ट्रेलिया की इसी अप्रोच को जीत मिली है.''
सभी खेलों में टॉस है, लेकिन क्रिकेट जितना अहम नहीं है. इसका कुछ तो उपाय होना चाहिए. मैच दिन में ही होना चाहिए.
मिस्बाह ने कहा, ''पैट कमिंस एकदम क्लियरकट थे. उनके मन में कोई दुविधा नहीं थी. मैच के बाद कमिंस ने कहा भी कि भारत का स्कोर उनके अंदाज़ से कम था और उन्हें लग रहा था कि भारत 300 से ज़्यादा रन बनाएगा. ऑस्ट्रेलियाई टीम की यही ख़ूबी है कि जितना बड़ा मैच हो, वो फ्री होकर खेलते हैं.''
पिच के हिसाब से मैच जीतने के लिए टॉस जीतना इतना अहम क्यों है, इस सवाल के जवाब में वसीम अकरम ने कहा, ''ये सवाल मैं ख़ुद कई लोगों से पूछता हूँ. दोनों टीमें अच्छी हैं, लेकिन टॉस मैटर कर जाता है."
वसीम ने कहा, "सभी खेलों में टॉस है, लेकिन क्रिकेट जितना अहम नहीं है. इसका कुछ तो उपाय होना चाहिए. ऐसे में मैच दिन में ही होना चाहिए. ऑस्ट्रेलिया में रात को गेंद स्विंग होने लगती है, वहीं हमारे यहां ओस के कारण बैटिंग आसान हो जाती है."
मोईन खान कहते हैं कि फ़र्क नहीं पड़ा क्योंकि जो बैटिंग करना चाहते थे, उन्हें बैटिंग मिली.

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रोहित का शॉट और केएल राहुल की धीमी पारी
रोहित शर्मा के बाद टीम इंडिया की बल्लेबाज़ी में कोई दम क्यों नहीं बचा?
इस सवाल के जवाब में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोईन ख़ान ने कहा, ''फ़ाइनल में काउंटर अटैक भारत की तरफ़ से बिल्कुल नहीं दिखा. रोहित के आउट होने के बाद तो भारतीय खिलाड़ी थम से गए.''
''रोहित के बाद किसी ने अटैक की हिम्मत नहीं जुटाई. इसका सीधा सा जवाब यही है कि बेहतरीन गेंदबाज़ी, शानदार फ़ील्ड सेटिंग और लाजवाब फील्डिंग. फील्डिंग से ऐसा प्रेशर बनाया कि भारत के बल्लेबाज़ मारने वाली गेंद को भी रोकने लगे. कमिंस ने बेहतरीन गेंदबाज़ी बदली.''
इसी कार्यक्रम में पाकिस्तान के पूर्व कप्तान में शोएब मलिक ने कहा, ''केएल राहुल ने बहुत धीमा खेला. साफ़ दिख रहा था कि वह कितने प्रेशर में हैं. उनकी कोशिश थी कि वह किसी तरह 50 ओवर खेल लें. फ़ाइनल में ऐसा गेम आप नहीं खेल सकते हैं.''
''अगर आप टफ़ कंडीशन में बैटिंग कर रहे हैं, तो स्ट्राइक रोटेट होनी चाहिए. केएल राहुल स्पिन को बहुत अच्छा खेलते हैं, लेकिन फ़ाइनल में ऐसा बिल्कुल नहीं दिखा. केएल राहुल सोचते रहे कि बाद में चीज़ें मैनेज कर लेंगे, लेकिन तब मुक़ाबला हाथ से निकल चुका था.''
पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर रमीज़ राजा ने भी सुनो न्यूज़ के कार्यक्रम वर्ल्ड कप मस्तियां में रोहित शर्मा के शॉट और केएल राहुल की धीमी बल्लेबाज़ी का ज़िक्र किया.

रमीज़ का कहना है कि भारत कम स्कोर इसलिए बना पाया क्योंकि रोहित शर्मा के 'ख़राब' शॉट (जिसमें वह आउट हुए) के बाद पारी लड़खड़ा गई. उन्होंने कहा, "वरना यह कहीं से भी 240 की पिच नहीं थी, 300 रन बनने चाहिए थे. कम से कम भारत को 270-80 रन बनाने चाहिए थी. केएल राहुल को जो स्पीड पकड़नी चाहिए थी, वह नहीं पकड़ी."
उन्होंने कहा, "भारत की शुरुआत अच्छी थी, मगर रोहित शर्मा ग़लत समय आउट हुए. वह हावी थे, मगर उनके बाद केएल राहुल और विराट कोहली पार्टनरशिप बनाने में लग गए. पार्टनरशिप तो लाबुशेन और हेड के बीच भी हुई, मगर उनकी स्पीड को देखिए. भारतीय बल्लेबाज़ फंस गए थे कि हम शॉट मारेंगे तो कहीं आउट न हो जाएं. ऑस्ट्रेलिया का माइंडसेट बहुत अलग था."
रमीज़ राजा ने कहा, "केएल राहुल ने मैच बनाया भी और फंसाया भी. अगर आप 100 बॉलों में 60 रन बनाते हैं तो आप आउट नहीं हो रहे होते (धीमा खेलकर रनरेट कम कर देते हैं). इसी तरह, विराट कोहली भी दुविधा में थे. जब वह आउट हुए तो दो मन में थे कि पुल करूं या सिंगल लूं."


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क्या पिच ने धोखा दिया?
इस मैच में पिच भी काफ़ी चर्चा में रही. इसे लेकर वसीम अकरम ने कहा, ''पूरे टूर्नामेंट में इस तरह की पिच कहीं नहीं दिखी. भारत का अंदाज़ बिल्कुल ग़लत रहा. कम स्कोर की वजह से भारतीय गेंदबाज़ प्रेशर में थे. शुरू के दो ओवर में ही ऑस्ट्रेलिया ने 30 रन बना लिए थे."
"पिच बहुत ड्राई थी, लेकिन 50 ओवर के बाद स्लो हो जाती है. ऑस्ट्रेलिया ने जो गेंदबाज़ी की, वो पूरी तरह से रणनीति के मुताबिक़ थी. जहाँ गेंद जाती थी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी मौजूद रहते थे. बैटिंग में टैलेंट चाहिए, बॉलिंग में टैलेंट चाहिए लेकिन फील्डिंग फ़िटनेस होती है और ऑस्ट्रेलियाई का फ़िटनेस में कोई ज़ोर नहीं है.''
वसीम अकरम ने कहा कि पिच दोनों टीमों के लिए सेम थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया का आकलन ज़्यादा प्रभावी रहा.
उन्होंने कहा, ''अगर बैटिंग पिच होती तो यह इंडिया के फ़ेवर में होता. पिच से फ़र्क़ तो पड़ता है. कम स्कोर की वजह से भारत के गेंदबाज़ों ने खुलकर बॉलिंग भी नहीं की. पहले ही ओवर में वॉर्नर ने ठोकना शुरू कर दिया. पहली-दूसरी गेंद पर ही बाउंड्री लगाना शुरू कर दिया.''
पूर्व क्रिकेटर शोएब अख़्तर ने पिच को लेकर भी सवाल किए. उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर डाले वीडियो में कहा, "यहां तक भारत खेलकर पहुंचा था, न कि क़िस्मत से. मगर मुझे विकेट देखकर अफ़सोस हुआ. भारत को अच्छी पिच बनानी चाहिए थी, संकुचित सोच नहीं रखनी थी. पिच तेज़ और बाउंस वाली होनी चाहिए थी. लाल मिट्टी की पिच बना सकते थे आप."


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हार के बाद अब आगे क्या?
शोएब मलिक ने कहा कि इस हार से निकलना रोहित शर्मा के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि हार के बाद सारी चीज़ें याद आती हैं. मलिक ने कहा कि हार के बाद नींद नहीं आती है और बिल्कुल अकेला रहने का मन करता है.
रमीज़ राजा ने कहा कि भारत को सोचना होगा कि क्यों वह फ़ाइनल की बाधा को पार नहीं कर पा रहे. उन्होंने कहा, "जिस हिसाब से वो खेल रहे थे, मुझे लगता था कि अगर वे उससे 20 फ़ीसदी कम स्तर पर भी खेलें तो भी किसी भी टीम को हरा सकते हैं. लेकिन कोई मानसिक बाधा ज़रूर है, जैसा कि हम साउथ अफ़्रीका के लिए कहते हैं कि वे चोकर्स हैं. वैसा ही भारत कर रहा है."
उन्होंने कहा, "भारत को इसलिए भी अफ़सोस होगा क्योंकि फंड, इन्फ्रास्ट्रक्चर, फ़ैन...सबकुछ उनके पक्ष में है लेकिन मनोदशा का जो मसला है, उसे सुलझाना होगा. अब पता नहीं यह कैसे ठीक होगा, डीएनए से होगा कि अगली जेनरेशन को हम स्ट्रॉन्ग मानते हैं जिसमें यह ठीक होगा या फिर सिस्टम को दुरुस्त करना पड़ेगा."
पूर्व क्रिकेटर शोएब अख़्तर ने भी इसी बात का ज़िक्र किया. अपने यूट्यूब वीडियो में वह कहते हैं, "हिंदुस्तान को फ़ाइनल खेलने के लिए मुबारकबाद, यह कोई आसान काम नहीं है. वे ट्रॉफ़ी के पास पहुंचते हैं, मगर मिल नहीं पाती. टीम बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी से लेकर फ़ील्डिंग तक शानदार प्रदर्शन कर रही है मगर क़िस्मत शायद आपके साथ नहीं है."
मुझे यह कहने में कोई हर्ज़ नहीं है कि हिंदुस्तान एक बहुत अच्छी टीम है. दिलेरी से फ़ाइनल में पहुंचे, मारते हुए पहुंचे. काश ऐसी दिलेरी ये फ़ाइनल में भी दिखाते, यही एक गिला रह गया.
अख़्तर ने कहा, "ऑस्ट्रेलिया की फ़ील्ड प्लानिंग कमाल थी. उन्होंने प्लान के हिसाब से बोलिंग भी की. उनकी परवरिश हमसे बहुत अलग होती है. वे शांत और एकाग्र रहते हैं. उनके दिमाग़ में साफ़ रहता है कि हमने ये करना है, फिर वे नुक़सान की चिंता नहीं करते."
"मुझे यह कहने में कोई हर्ज़ नहीं है कि हिंदुस्तान एक बहुत अच्छी टीम है. दिलेरी से फ़ाइनल में पहुंचे, मारते हुए पहुंचे. काश ऐसी दिलेरी ये फ़ाइनल में भी दिखाते, यही एक गिला रह गया. रोहित ही अगर 20 ओवर खेल जाते तो कहानी कुछ और होती. पंड्या अगर फ़िट होते तो भी कहानी शायद अलग होती. लेकिन सोचा तो काफ़ी कुछ जा सकता है. जीतना और हारना खेल का हिस्सा है."

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