अमेरिका और मेक्सिको के बीच पानी के लिए बढ़ता जा रहा है विवाद

अमेरिका और मेक्सिको में पानी की कमी
इमेज कैप्शन, मेक्सिको के उत्तर में स्थित टोरंटो झील में पानी का स्तर काफ़ी घट गया है.
    • Author, विल ग्रांट
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

मेक्सिको के चिहुआहुआ राज्य में सैन फ्रांसिस्को डी कोंचोस में तीन महीने से बारिश नहीं हुई है. यही वजह है कि वहां के लोग प्रार्थना के लिए इकट्ठा होते हैं.

राज्य के सबसे अहम बांध 'ला बोकीया' के पीछे बनी टोरंटो झील के किनारे एक पादरी स्थानीय किसानों और उनके परिवारों को घोड़े पर बैठकर प्रार्थना में मार्गदर्शन कर रहे हैं.

उनके पैरों के नीचे की पथरीली ज़मीन कभी झील का हिस्सा थी, लेकिन अब पानी घटकर बेहद निचले स्तर पर पहुंच गया है.

प्रार्थना कर रहे लोगों में जिन लोगों ने सिर झुकाया है, उनमें राफे़ल बेटांस भी शामिल हैं, जो पिछले 35 सालों से स्वेच्छा से राज्य जल प्राधिकरण के लिए इस झील की निगरानी कर रहे हैं.

सूखी सफ़ेद चट्टानों की ओर इशारा करते हुए बेटांस ने कहा, "यह पूरा इलाक़ा पानी के नीचे होना चाहिए."

बेटांस ने याद करते हुए कहा, "आख़िरी बार यह डैम साल 2017 में भरा था और तब थोड़ा बहुत ओवरफ्लो भी हुआ था. इस वक़्त डैम उच्चतम जल स्तर से 26.52 मीटर नीचे है, जो इसकी कुल क्षमता का 14 फ़ीसदी से भी कम है."

इसमें हैरानी की बात नहीं कि स्थानीय लोग बारिश के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. फिर भी बहुत कम लोगों को उम्मीद है कि भयंकर सूखा और झुलसाने वाली 42 डिग्री सेल्सियस (107.6 फारेनहाइट) की गर्मी से कोई राहत मिलेगी.

अब इस सीमित जल संसाधन को लेकर टेक्सस के साथ लंबे समय से चल रहा विवाद तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है.

दोनों देशों के बीच क्या समझौता हुआ था?

  • अमेरिका और मेक्सिको के बीच साल 1944 में एक जल संधि हुई थी.
  • संधि के तहत, मेक्सिको को हर साल अमेरिका को 430 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी भेजना होता है.
  • बदले में अमेरिका हर साल क़रीब 1.85 अरब क्यूबिक मीटर पानी मेक्सिको को भेजता है.
मेक्सिको का डैम

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इमेज कैप्शन, जल संधि के तहत अमेरिका और मेक्सिको को एक दूसरे को पानी भेजना होता है
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साल 1944 में हुई जल संधि के तहत, मेक्सिको को हर साल रियो ग्रांडे नदी से अमेरिका को 430 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी भेजना होता है.

यह पानी सहायक नहरों के नेटवर्क के ज़रिए उन साझा बांधों में पहुंचाया जाता है, जिनका स्वामित्व और संचालन अंतरराष्ट्रीय सीमा और जल आयोग (आईबीडब्ल्यूसी) के पास है. यह आयोग मेक्सिको और अमेरिका के बीच जल बंटवारे की निगरानी करता है और नियम तय करता है.

इसके बदले में अमेरिका कोलोराडो नदी से हर साल क़रीब 1.85 अरब क्यूबिक मीटर पानी मेक्सिको की सीमा पर स्थित शहरों (तिजुआना और मेक्सिकेली) को भेजता है.

मेक्सिको इस समय बकाया भुगतान में फंसा हुआ है और 21वीं सदी के ज़्यादातर वर्षों में वह जल आपूर्ति जारी रखने में असफल रहा है.

टेक्सस में रिपब्लिकन सांसदों के दबाव के बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने मेक्सिको को चेतावनी दी थी कि अगर वह 81 साल पुराने समझौते के तहत अपने दायित्व नहीं निभाता, तो उसे कोलोराडो से पानी नहीं दिया जाएगा.

अप्रैल में, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मेक्सिको पर पानी "चोरी" करने का आरोप लगाया.

साथ ही उन्होंने धमकी दी कि जब तक मेक्सिको टेक्सस को उसका बकाया पानी नहीं चुकाता, तब तक वे "टैरिफ़ और शायद प्रतिबंध" भी लगाते रहेंगे. हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की.

वहीं दूसरी तरफ़, मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबाम ने जल आपूर्ति में कमी स्वीकार की, लेकिन ज़्यादा समझौतावादी लहजे में प्रतिक्रिया दी.

तब से, मेक्सिको ने अमेरिका को सीमा पर स्थित उनके साझा बांध 'अमिस्टाड' के ज़रिए शुरुआती तौर पर 75 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी भेजा है. हालांकि यह, मेक्सिको के कुल बकाया क़रीब 1.5 अरब क्यूबिक मीटर के मुकाबले एक छोटा हिस्सा है.

टेक्सस और चिहुआहुआ के लोगों का क्या कहना है

स्थानीय विशेषज्ञ राफेल बेटांस
इमेज कैप्शन, स्थानीय विशेषज्ञ राफ़ेल बेटांस

सीमा पार जल बंटवारे को लेकर भावनाएं ख़तरनाक रूप से उभर सकती हैं. सितंबर 2020 में, जब किसान पानी को दूसरी ओर मोड़े जाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे, तब ला बोकीया डैम के गेट पर नेशनल गार्ड से झड़प के दौरान दो मेक्सिकन लोगों की मौत हो गई थी.

स्थानीय विशेषज्ञ राफ़ेल बेटांस का कहना है कि भीषण सूखे के बीच, चिहुआहुआ में लोगों की आम राय यही है कि जहां कुछ है ही नहीं, वहां से कैसे कुछ लिया जा सकता है?

वहीं दूसरी ओर, टेक्सस की रियो ग्रांडे घाटी में चौथी पीढ़ी के किसान ब्रायन जोन्स बीते तीन सालों से अपने खेत के सिर्फ़ आधे हिस्से में ही फसल उगा पा रहे हैं, क्योंकि उनके पास सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं है.

ब्रायन जोन्स

वह कहते हैं, "हम मेक्सिको से इसलिए जूझ रहे हैं क्योंकि वह समझौते के अपने हिस्से का पालन नहीं कर रहे हैं. हम बस वही मांग रहे हैं जो संधि के तहत हमारा हक़ है, कुछ भी ज़्यादा नहीं."

जोन्स चिहुआहुआ में स्थिति की गंभीरता को भी चुनौती देते हैं. उनका मानना है कि अक्तूबर 2022 में राज्य को पर्याप्त से भी ज़्यादा पानी मिला था, लेकिन अमेरिका को "बिलकुल भी" पानी नहीं दिया गया.

उन्होंने पड़ोसी देश मेक्सिको पर आरोप लगाया कि वह "पानी जमा कर रहे हैं और उसे फसल उगाने में इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि हमारे साथ मुक़ाबला कर सकें."

उनका कहना है कि यह समझौता तभी पानी अमेरिका भेजने के लिए बाध्य करता है जब मेक्सिको अपनी ज़रूरतें पूरी कर सके. उनका तर्क है कि चिहुआहुआ में जारी सूखे की वजह से फ़िलहाल अतिरिक्त पानी उपलब्ध ही नहीं है.

पानी के अलावा ये भी परेशानी

अखरोट का खेत
इमेज कैप्शन, मेक्सिको के कई अखरोट उत्पादक अपने खेतों में सिंचाई का पानी भर देते हैं

पानी की कमी के अलावा, कृषि दक्षता पर भी बहस चल रही है.

अखरोट के पेड़ और अल्फाल्फा चिहुआहुआ की रियो कोंचोस घाटी की दो मुख्य फसलें हैं. इन दोनों को ही बहुत ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है. अखरोट के पेड़ों को औसतन 250 लीटर प्रतिदिन पानी की ज़रूरत होती है.

परंपरागत रूप से, मेक्सिकन किसान अपने खेतों में सिंचाई के लिए नहर का पानी भरते रहे हैं.

तस्वीरों में आसानी से देखा जा सकता है कि अखरोट के पेड़ उथले पानी में खड़े हैं, जिसमें खुली पाइप से लगातार पानी बह रहा है.

टेक्सस की शिकायत बिल्कुल साफ़ है कि यह तरीक़ा पानी की भारी बर्बादी करता है, जिसे ज़िम्मेदार और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर आसानी से रोका जा सकता है.

जब सैन फ्रांसिस्को डी कोंचोस के पूर्व मेयर जैमे रामिरेज़ अपने अखरोट के बाग़ों से गुज़र रहे थे, तो मुझे दिखाते हैं कि उनका आधुनिक स्प्रिंकलर सिस्टम किस तरह पूरे साल बिना पानी की बर्बादी किए उनके अखरोट के पेड़ों को ठीक से पानी देता है.

उन्होंने कहा, "स्प्रिंकलर के ज़रिए, हम खेतों में पानी भरने की तुलना में लगभग 60 फ़ीसदी कम पानी का इस्तेमाल करते हैं."

इस सिस्टम का एक फ़ायदा यह भी है कि पेड़ों को कम बार पानी देना पड़ता है, जो उस समय खास तौर पर फायदेमंद होता है जब रियो कोंचोस का जलस्तर इतना कम हो जाता है कि स्थानीय सिंचाई संभव नहीं रहती.

हालांकि रामिरेज़ इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनके कुछ पड़ोसी इतने ईमानदार नहीं हैं. पूर्व स्थानीय महापौर होने के नाते, वह समझदारी से काम लेने की सलाह देते हैं.

वह कहते हैं कि कुछ लोगों ने स्प्रिंकलर को इसलिए नहीं अपनाया क्योंकि इसे लगाने में बहुत ख़र्च आता है. उन्होंने दूसरे किसानों को यह समझाने की कोशिश की है कि यह लंबे समय के लिए सस्ता पड़ता है और ऊर्जा व पानी की लागत भी बचाता है.

लेकिन साथ ही रामिरेज़ ने यह भी कहा कि टेक्सस के किसानों को यह भी समझना होगा कि चिहुआहुआ के लोगों को अस्तित्व के ख़तरे का सामना करना पड़ रहा है.

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "यह एक रेगिस्तानी इलाक़ा है और बारिश नहीं हुई है. अगर इस साल फिर से बारिश नहीं हुई, तो अगले साल यहां खेती-बाड़ी के लिए कोई चारा नहीं बचेगा. बचा हुआ पानी लोगों के लिए पीने के पानी के तौर पर जमा करना होगा."

उत्तरी मेक्सिको में कई लोगों का मानना है कि 1944 का जल संधि अब मौजूदा हालात के लिए उपयुक्त नहीं है.

फ्रांसिस्को डी कोंचोस के पूर्व मेयर और अखरोट किसान जैमे रामिरेज़
इमेज कैप्शन, फ्रांसिस्को डी कोंचोस के पूर्व मेयर और अखरोट किसान जैमे रामिरेज़

रामिरेज़ का मानना है कि यह समझौता आठ दशक पहले की परिस्थितियों के लिए तो ठीक था, लेकिन यह समय के साथ बदलते हालात, जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के असर को सही तरह से ध्यान में नहीं रख पाया.

सीमा की दूसरी तरफ़, टेक्सस के किसान ब्रायन जोन्स का कहना है कि समझौता समय की कसौटी पर खरा उतरा है और इसका अभी भी सम्मान किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, "यह संधि समझौता तब किया गया जब मेरे दादा खेती करते थे."

वह कहते हैं, "अब हम देख रहे हैं कि मेक्सिको इसका पालन नहीं कर रहा है. यह बहुत ही निराशाजनक है कि मेरे पास एक ऐसा खेत है जहां मैं केवल आधी ज़मीन पर ही फसल उगा पा रहा हूँ क्योंकि मेरे पास सिंचाई के लिए पानी नहीं है."

उनके मुताबिक़ ट्रंप के कड़े रुख़ के बाद स्थानीय किसानों को एक उम्मीद मिली है.

सूखे ने सिर्फ़ चिहुआहुआ में खेती को ही नुक़सान नहीं पहुंचाया है.

बेटांस कहते हैं कि टोरंटो झील का जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि अब जलाशय में बचा हुआ पानी असामान्य तेज़ी से गर्म हो रहा है. इसका नतीजा यह हो सकता है कि वहां के जलीय जीव-जंतुओं के लिए संकट पैदा हो जाए, जो कभी फलती-फूलती पर्यटन इंडस्ट्री का आधार थे.

बेटांस कहते हैं कि उन्होंने जितने साल झील के उतार-चढ़ाव को रिकॉर्ड करते हुए बिताए हैं, उनमें घाटी की स्थिति कभी इतनी ख़राब नहीं रही. वह सोचते हुए कहते हैं, "अब तो बस बारिश की दुआ ही एकमात्र सहारा बचा है."

एंजेलिका कैसस की ओर से अतिरिक्त रिपोर्टिंग.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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