जसप्रीत बुमराह टीम इंडिया के लिए इतने अहम क्यों हैं?

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- Author, सुरेश मेनन
- पदनाम, खेल पत्रकार
भारत के दो क्रिकेटरों ने एक साल के अंदर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रवेश किया था और जल्द ही ये दोनों भारत के सबसे रोमांचक क्रिकेटर्स में शुमार होने लगे.
अपने दुस्साहसी स्ट्रोक प्ले के कारण ऋषभ पंत दुनिया भर में क्रिकेट प्रेमियों के पसंदीदा प्लेयर बन गए, तो अपने ख़ास गेंदबाज़ी एक्शन, गति और नियंत्रण के कारण जसप्रीत बुमराह जल्द ही भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण के अगुआ बन गए.
जसप्रीत बुमराह की तो टीम में वापसी हो चुकी है, जबकि ऋषभ पंत भी वापसी की तैयारी में लगे हुए हैं.
पिछले साल दिसंबर में 25 वर्षीय ऋषभ पंत का भयानक एक्सीडेंट हुआ था.
बेंगलुरु के नेशनल क्रिकेट एकेडमी में वापसी की तैयारी में जुटे ऋषभ पंत ने हाल ही में बल्लेबाज़ी भी की और विकेटकीपिंग भी. एकेडमी में उन पर नज़र रख रहे लोगों का कहना है कि ऋषभ पंत की वापसी की तैयारी 'समय से आगे' चल रही है.

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कप्तान के रूप में टीम में वापसी
29 वर्षीय जसप्रीत बुमराह पीठ की चोट के कारण क़रीब एक साल क्रिकेट से दूर रहे. उन्होंने आयरलैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ में कप्तान के रूप में टीम में वापसी की.
ऐसा लग रहा है कि उन्होंने गेंदबाज़ी के लिए अपने रन अप को थोड़ा बढ़ाया है और वे अपनी सीमा में रहकर गेंदबाज़ी कर रहे हैं. आयरलैंड के ख़िलाफ़ भारत की टीम टी-20 मैचों की सिरीज़ खेल रही है.
अब उन्हें एशिया कप की टीम में भी जगह मिल गई है. वनडे क्रिकेट टीम में उनकी वापसी की उम्मीद जताई जा रही थी, क्योंकि भारत को पहले एशिया कप और फिर वर्ल्ड कप में खेलना है.
भारतीय क्रिकेट टीम का फ़ोकस इन दोनों प्रतियोगिताओं पर है. आप इन सब चीज़ों में जल्दबाज़ी नहीं कर सकते.
पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने एक बार ये कह दिया था कि टी-20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ बुमराह का खेलना थोड़ा जल्दबाज़ी थी. आख़िरकार चेतन शर्मा को अपना पद गँवाना पड़ा.

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आयरलैंड के ख़िलाफ़
लेकिन ये इस बात पर भी ज़ोर देता है कि चोट के बाद खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम और वापसी की तैयारी के लिए समय दिए जाने की ज़रूरत है.
साथ ही खिलाड़ियों के शरीर के बारे में भी सोचा जाना चाहिए क्योंकि इसकी भी काफ़ी अहमियत है. कई बार सीनियर क्रिकेटर्स को मेडिकल सलाह की अनदेखी करने दिया जाता है और ये काफ़ी महंगा साबित होता है.
आयरलैंड के ख़िलाफ़ बुमराह की वापसी नाटकीय थी. उन्होंने पहले ही ओवर में दो विकेट लिए. शुरुआत एंड्रयू बालबिर्नी के चौके से हुई. बुमराह एक टेढ़ी मुस्कान के साथ वापस गए और फिर एक बेहतरीन गेंद पर स्टम्प उखाड़ दिया.
इस गेंद की गति 129 किलोमीटर प्रति घंटे (80 मील प्रति घंटा) थी. लेकिन अगर आप इस तरह के नियंत्रण से गेंद कर सकते हो, तो गति मायने नहीं रखती.

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'पर्सन ऑफ़ द मैच'
140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार हमेशा नहीं हासिल होती.
लॉरकन टकर को कैच आउट कराने के बाद अपनी वापसी पर 'पर्सन ऑफ़ द मैच' का पुरस्कार हासिल करने के लिए बुमराह पर्याप्त गेंदबाज़ी कर चुके थे.
किसी ने उनसे नहीं पूछा कि आपकी स्क्रिप्ट किसने लिखा है, लेकिन ये एक ऐसा सवाल था, जो हवा में तैर रहा था.
पिछले साल टी-20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच में उनकी समय से पहले वापसी सबके दिमाग़ में ताज़ा है.
शीर्ष खिलाड़ी अक़्सर रिस्क लेने वाले होते हैं, क्योंकि उन्हें आराम करने की बजाए खेलना होता है.
ज़रूरी फ़िटनेस से कम पर प्रदर्शन करना खेल की दुनिया की सर्वाधिक रोमांटिक कहानियों में से एक होती हैं.

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ख़ास गेंदबाज़ी एक्शन
वर्ष 2001 में कोलकाता टेस्ट में वीवीएस लक्ष्मण ने उस समय 281 रनों की पारी खेली थी, जब इस टेस्ट के कुछ दिनों पहले ही उनकी पीठ में चोट लगी थी.
सुनील गावसकर ने वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ दोहरा शतक लगाया था, जब वे दाँत दर्द से काफ़ी परेशान थे.
ख़ास गेंदबाज़ी एक्शन के कारण बुमराह की पीठ पर दबाव बढ़ता है. आने वाले समय में हो सकता है कि बुमराह को इस एक्शन से समझौता करना पड़े.
हो सकता है कि आगे चलकर उन्हें अपनी गति कम करनी पड़े और उन्हें अपनी शैली पर भी काम करना पड़े. इसमें यॉर्कर, धीमी गति की गेंत, सीमर्स, कटर्स और ब्लाइंडर्स शामिल हैं.
विकेट लेने वाले बुमराह रन बनाने वाले बल्लेबाज़ों के मुक़ाबले भारतीय टीम के लिए ज़्यादा मूल्यवान हैं.
भारत के पास कई बल्लेबाज़ हैं, जो एक दूसरे की कमी पूरी कर सकते हैं. लेकिन गेंदबाज़ के रूप में बुमराह अद्वितीय हैं.

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भारतीय कप्तान
उनकी चोट की पृष्ठभूमि को देखते हुए और आयरलैंड में उत्साहजनक संदेश को देखते हुए बुमराह बल्लेबाज़ों को परेशान करने के लिए तैयार दिखते हैं.
लेकिन अब भी कई सवाल हैं. बुमराह को सावधानी से इस्तेमाल करने की ज़रूरत होगी, चयन के मामले में भी और मैदान पर कप्तान की ओर से भी.
उनसे ये उम्मीद नहीं जा सकती कि वे लगातार गेंदबाज़ी करते रहे. ऐसा देखा जाता है कि भारतीय कप्तान अपने मुख्य गेंदबाज़ का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं.
साथ ही उन्हें लगातार मैच खेलने के लिए दबाव नहीं डाला जाना चाहिए. क़ीमती प्रतिभा को संवेदनशीलता से इस्तेमाल करना चाहिए.

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वर्कलोड
वापसी की तैयारी के लिए बुमराह पर धीरे-धीरे वर्कलोड बढ़ाया गया.
उनकी तैयारी सिर्फ़ टी-20 मैचों के लिए नहीं थी.
जैसा कि उन्होंने कहा था, "मैं वर्ल्ड कप के लिए 10 ओवर फेंकने की तैयारी कर रहा था. मैं 10, 12 और 15 ओवर तक फेंक रहा हूँ. मैं ज़्यादा ओवर्स फेंक रहा था, ताकि जब आप इससे कम ओवर्स फेंके, तो ये आपने के लिए आसान हो जाए."
आयरलैंड मैच से पहले बुमराह ने कहा, "मैं कोई बोझ या उम्मीदों का दबाव लेकर नहीं चलता."
अपने इसी रुख़ के कारण शायद उनका आचरण शांत हो गया है और उनकी ख़ास मुस्कान तो है ही.
ये ऐसा रुख़ है, जो गेंदबाज़ और भारतीय क्रिकेट दोनों के लिए महत्वपूर्ण है.
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