जी-20: बाइडन से मुलाक़ात पर बोले पीएम मोदी, भारत-अमेरिका दोस्ती से दुनिया का भला, साझा बयान में किन मुद्दों का ज़िक्र नहीं

मोदी और बाइडन

इमेज स्रोत, PA-EFE/REX/Shutterstock

    • Author, वात्सल्य राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"आपसे मिलकर अच्छा लगा, मिस्टर प्राइम मिनिस्टर "

"आज और पूरे जी20 के दौरान हम ज़ोर देकर कहेंगे कि इतिहास के किसी भी दौर के मुक़ाबले अमेरिका-भारत की साझेदारी मज़बूत, नज़दीक और गतिशील है."

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के एक्स (ट्विटर) हैंडल से शुक्रवार रात ठीक 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की तस्वीर के साथ ये इबारत पोस्ट की गई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके करीब पौने दो घंटे पहले अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के साथ मुलाक़ात की तस्वीरें पोस्ट कर चुके थे.

पीएम मोदी ने लिखा, "अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का 7, लोक कल्याण मार्ग पर स्वागत करके खुशी हुई. "

सात लोक कल्याण मार्ग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास का पता है.

इसके करीब पौन घंटे पहले यानी रात 8 बजकर 28 मिनट पर पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) के हैंडल से दोनों नेताओं के बीच 'भारत और अमेरिकी संंबधों को मज़बूत करने वाली वाली' चर्चा की जानकारी दी गई थी.

लगभग उसी वक्त समाचार एजेंसी एएनआई ने 1.06 मिनट का एक वीडियो पोस्ट किया. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का अपने सरकारी आवास पर स्वागत करते दिखे. वीडियो में दोनों नेता एक दूसरे का हाल-चाल लेते और फिर मीटिंग करते नज़र आए.

जो बाइडन और नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, ANI

मोदी के घर मेहमान बाइडन

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

बाइडन जी-20 में हिस्सा लेने आए तीसरे नेता थे, जिनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को द्विपक्षीय बातचीत की. इसके पहले पीएम मोदी मॉरिशस के पीएम प्रविंद जगन्नाथ और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना के साथ मुलाक़ात कर चुके थे.

लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ पीएम मोदी की मुलाक़ात को लेकर उत्सुकता सबसे ज़्यादा थी. भारत की अध्यक्षता में हो रहे जी20 सम्मेलन का 'टोन' यानी सुर इसी मुलाक़ात से तय होने की उम्मीद की जा रही थी.

बाइडन के साथ करीब 52 मिनट तक चली मुलाक़ात के बाद पीएम मोदी ने बताया, "हमारी मीटिंग फलदायी थी. हमने कई मुद्दों पर चर्चा की जो भारत और अमेरिका के आर्थिक और लोगों के बीच संपर्क को आगे ले जाएंगी. हमारे देशों के बीच दोस्ती दुनिया के भले के लिए अहम भूमिका निभाती रहेगी."

इस मुलाक़ात पर पूरी दुनिया की नज़र थी. देखने और परखने वाले सिर्फ़ बातचीत के मुद्दों को ही नहीं बल्कि दोनों नेताओं के हाव-भाव, गर्मजोशी और नज़दीकी को भी भांपने की कोशिश में लगे थे.

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह ने बीबीसी हिंदी से कहा, "अमेरिकी लोग (इस मुलाक़ात पर) बहुत कमेंट कर रहे हैं. उनका कहना है कि आमतौर पर स्टेट विजिट में मीटिंग ऑफ़िस में होती है. (अमेरिकी राष्ट्रपति को) घर पर बुलाया जा रहा है तो ये गर्मजोशी का इशारा है."

वो कहते हैं, "(अमेरिकी राष्ट्रपति) बाइडन का भी (प्लेन से) उतरते ही मीटिंग के लिए चले जाना, उनकी ओर से गर्मजोशी का इशारा है. ये दोनों नेता कई बार ऑन लाइन और ऑफ़ लाइन मिल चुके हैं, शायद 12 या 13 बार. इनके बीच निजी तालमेल है. (मुलाक़ात में) उसकी भी झलक मिलती है."

जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की स्टेट विजट पर गए थे और बाइडन ने उनकी मेज़बानी की थी.

दिल्ली एयरपोर्ट पर जो बाइडन

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, दिल्ली एयरपोर्ट पर जो बाइडन

बाइडन बोले- 'हेलो दिल्ली'

शुक्रवार को दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन का प्लेन एयरफ़ोर्स वन सात बजने से कुछ मिनट पहले उतरा. देश की राजधानी में सूरज उसके कुछ ही मिनट पहले ही ढला था लेकिन गर्मजोशी में कोई कमी नहीं थी.

प्लेन की सीढ़ी लगते ही अमेरिकी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए जुटे कलाकारों की प्रस्तुति में नया जोश आ गया. सात बजकर दो मिनट पर सीढ़ियों के आगे रेड कार्पेट बिछाया गया. सात बजकर आठ मिनट पर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन प्लेन से बाहर आए.

उनके स्वागत के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह और दूसरे भारतीय अधिकारी मौजूद थे.

बाइडन सबके साथ आत्मीयता से मिलते नज़र आए लेकिन वो सबसे ज़्यादा उत्साह में दिखे एयरपोर्ट पर स्वागत करने आईं एक छोटी बच्ची से मुलाक़ात के वक़्त.

ये बच्ची भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की बेटी माया थीं. अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन खिलखिलाते हुए उनसे मिले. लंबी यात्रा करके दिल्ली पहुंचे 80 बरस के बाइडन के चेहरे पर उस वक़्त थकान के कोई निशान नहीं दिखे.

जी 20 सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नहीं आए हैं.

बकौल प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह दिल्ली आए विदेशी मेहमानों में 'जो बाइडन इस वक़्त सबसे बड़े कद के नेता हैं.'

एयरपोर्ट से बाइडन सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास पहुंचे.

पीएम मोदी से मुलाक़ात की तस्वीर साझा करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति एक्स (ट्विटर) पर दिल्ली का अभिवादन कर चुके थे.

उन्होंने लिखा, "हेलो दिल्ली! इस साल के जी-20 के लिए भारत आकर अच्छा लग रहा है."

जो बाइडन और नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, ANI

व्हाइट हाउस ने जारी किया साझा बयान

पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच हुई बातचीत का ब्योरा देता साझा बयान व्हाइट हाउस ने जारी किया.

एक घंटे से आठ मिनट कम की इस मुलाक़ात की जानकारी देने वाले 29 पैराग्राफ़ के बयान की शुरुआत में बताया गया कि दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी की 'जून 23 में हुई वाशिंगटन यात्रा की अभूतपूर्व उपब्लधियों में हुई प्रगति की सराहना की.'

साझा बयान में बताया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए अपना समर्थन होने की बात दोहराई.

उन्होंने 2028-29 के लिए सुरक्षा परिषद की गैर स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का स्वागत भी किया.

नरेंद्र मोदी और जो बाइडन

इमेज स्रोत, ANI

साझा बयान में क्या दी गई जानकारी

बयान के मुताबिक बाइडन ने भारत के जी-20 की अध्यक्षता की सराहना की. दोनों नेताओं ने जी20 के प्रति प्रतिबद्धता ज़ाहिर की और भरोसा जताया कि शिखर सम्मेलन का नतीजा साझा लक्ष्यों को आगे ले जाएगा.

उनके बीच जी20 में भारत की अध्यक्षता, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग, 6जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी अहम और उभरती तकनीक के क्षेत्र में सहयोग और बहुआयामी डेवलपमेंट बैंकों को नया आकार देने के तरीकों पर चर्चा हुई

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रधानमंत्री मोदी को चंद्रयान-3 की चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग और सूर्य मिशन आदित्य एल-1 की कामयाबी के लिए बधाई दी. दोनों देशों ने इस साल के आखिर तक मानवीय अंतरिक्ष उड़ान के लिए रणनीतिक ढांचा तैयार करने को लेकर बातचीत शुरू कर दी है. भारतीय अंतरिक्ष यात्री को 2024 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर भेजने की योजना है.

बयान में बताया गया कि दोनों नेताओं की बातचीत में द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया.

व्हाइट हाउस की ओर से जारी संयुक्त बयान में बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिका की जनरल एटोमिक्स से 31 एमक्यू-9 बी एयरक्राफ्ट हासिल करने के लिए भारत के रक्षा मंत्रालय की ओर से दिए गए अनुरोध पत्र का स्वागत किया है.

संयुक्त बयान में बताया गया कि भारत में जीई एफ़-414 जेट इंजन बनाने के लिए जीई एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनाटिकल लिमिटेड (एचएएल) के बीच हुए कारोबारी समझौते के कांग्रेस से नोटिफिकिशन की प्रक्रिया पूरी होने का भी दोनों नेताओं ने स्वागत किया

बयान में उत्पादन में सहयोग और तकनीक ट्रांसफर प्रस्तावों के समर्थन में काम करने की प्रतिबद्धता दुहराई.

संयुक्त बयान में कहा गया है कि न्यूक्लियर ऊर्जा को ज़रूरी स्रोत के तौर पर महत्व देते हुए राष्ट्रपति बाइडन और प्रधानमंत्री मोदी ने अगली पीढ़ी के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर की तकनीक की साझेदारी को साझा स्तर पर विकसित करने समेत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के अवसर बढ़ाने का स्वागत किया. बयान में कहा गया कि अमेरिका न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की सदस्यता के लिए अपने समर्थक को दोहराता है.

दोनों नेताओं ने हिंद प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और समावेशी बनाए रखने के लिए क्वाड की अहमियत पर भी ज़ोर दिया

दोनों नेताओं ने कहा कि उनकी सरकारें भारत-अमेरिकी रणनीतिक साझेदारी के सभी आयामों को बेहतर बनाने के लिए काम करती रहेंगी. उन्होंने वैश्विक स्तर पर सेमीकंडटर की सप्लाई चेन तैयार करने पर ज़ोर दिया.

मोदी और बाइडन ने ज़ोर देकर कहा कि आज़ादी, लोकतंत्र, मानवाधिकार, समावेशीपन, बहुलतावाद और सभी नागरिकों के लिए समान अवसरों जैसे साझा मूल्य हमारे देश की कामयाबी के लिए अहम हैं और ये मूल्य हमारी साझेदारी को मज़बूती देते हैं.

नरेंद्र मोदी और जो बाइडन

इमेज स्रोत, Getty Images

वीज़ा का पायलट प्रोजेक्ट कब?

भारत और अमेरिका के रिश्तों पर करीबी नज़र रखने वाले एक्सपर्ट की राय में पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के बीच बातचीत के बाद जो बयान जारी किया है, उनमें ज़्यादातर बातें वहीं हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच पहले ही सहमति बन चुकी हैं.

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, "जून में ये सबकुछ हो चुका है, उसी को दोहराया गया है."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता को लेकर अमेरिका के समर्थन को भी वो नई बात नहीं मानते.

वो कहते हैं, "अमेरिका इसका हमेशा से समर्थन करता रहा है. 2010 में ओबामा आए थे, तभी वो खुलकर कह गए थे कि उनकी इच्छा है कि भारत को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए. स्थाई और गैर स्थाई सदस्यों की संख्या बढ़नी चाहिए."

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं कि दोनों नेताओं की बातचीत के बाद एक नई पहल सामने आई है.

वो कहते हैं, "(बयान में) स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर की बात नई है. पहले न्यूक्लियर कॉपरेशन की बात हो रही थी. छह न्यूक्लियर रिएक्टर लगाए जाने थे गुजरात में वो नहीं लग पाए थे. स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर में एक्सीडेंट होने की स्थिति में नुक़सान कम होगा."

वो कहते हैं, "भारत के परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम 2010 के प्रावधान अमेरिकी कंपनियों को पसंद नहीं थे. उसे भारत ने नहीं बदला है लेकिन अब अमेरिका साझेदारी बढ़ाने के लिए कोशिश करने जा रहा है. "

उनके मुताबिक कुछ ऐसे मुद्दे भी हैं जिन पर दोनों देशों के बीच सहमति बनने की उम्मीद लगाई गई थी लेकिन वो बयान से 'मिसिंग' हैं.

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, "एक चीज़ जो शायद भारत चाहता था और एक अमेरिका चाहता था, लेकिन उनका ज़िक्र नहीं है."

वो याद दिलाते हैं, "भारत चाहता था कि भारतीयों के लिए वीजा की शर्तें आसान की जाएं. उसका एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करना था कि वीज़ा की अवधि ख़त्म होने पर उन्हें भारत न लौटना पड़े, वहीं से वो लोग अपना वीज़ा रिन्यू करा पाएं. इसकी बात जून में हुई थी, तब लिखा गया कि इस साल के आखिर में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा."

"इस मुलाक़ात में उसका ज़िक्र नहीं है तो वो कब शुरू होगा, अभी नहीं मालूम. भारत की तरफ से वो एक अहम मुद्दा है, जिसका इसमें ज़िक्र नहीं है."

वो कहते हैं, "भारतीयों की उम्मीद थी कि वीज़ा को लेकर जो पायलट प्रोजेक्ट शुरू होना है, इसमें (बयान में) वो आ जाना चाहिए था."

जो बाइडन

इमेज स्रोत, ANI

यूक्रेन मामला

यूक्रेन मुद्दे को भी वो ऐसा मामला बताते हैं जिस पर बात होने की उम्मीद की जा रही थी.

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, "अमेरिका की तरफ से कोशिश थी कि इस बार ऐसा समझौता किया जाए कि भारत और अमेरिका यूक्रेन को संयुक्त सहायता भेजेंगे. उससे भी शायद भारत बचा है. इसमें उसका ज़िक्र नहीं है.

वो कहते हैं, "ख़ासकर रूस और चीन के नेता (व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग) नहीं हैं यहां तो ऐसी उम्मीद बन रही थी कि भारत थोड़ा और झुकेगा."

वो कहते हैं कि यूक्रेन को लेकर भारत की नीति में बदलाव आने के संकेत पढ़े जा रहे थे.

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, "देखिए, (यूक्रेन और रूस को लेकर) भारत के तटस्थ रुख में धीरे धीरे बदलाव आया है. पहले (पीएम मोदी ने) ये कहा कि ये ‘युद्ध का युग नहीं है.’ (मई में पीएम मोदी) हिरोशिमा (जापान) गए तो कहा कि क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना चाहिए. ये सब देशों की ज़िम्मेदारी है. तब धीरे धीरे लगने लगा था कि (भारत का) रुझान हल्का सा अमेरिका की तरफ हो रहा है. इसीलिए कुछ अटकलें थीं कि अमेरिका यहां कुछ कोशिश करेगा और भारत को मानना पड़ेगा."

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह 'मिसिंग बातों' का ज़िक्र करने के साथ ये भी कहते हैं कि एक छोटी मुलाक़ात में बहुत सी बातों पर सहमति बनाना आसान नहीं होता.

वो कहते हैं, "ऐसे माहौल में चीजों को दुहरा देने की भी अहमियत होती है कि आप वहां से पीछे नहीं हटे हैं."

वो कहते हैं, "इसमें (साझा बयान में) जिसका ज़िक्र नहीं है लेकिन उस पर शायद बात हुई हो कि अमेरिका में एपेक (एशिया पैसेफिक इकोनॉमिक कॉपरेशन) सम्मेलन हो रहा है अमेरिका में उसमें मोदी जाएंगे, अगले साल भारत मेज़बान है क्वाड का, उसमें बाइडन आएँगे, इस पर बातचीत हुई होगी."

मोदी ने बाइडन को क्वाड सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है. जून में बाइडन ने मोदी को एपेक में आने का न्योता दिया था.

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह मानते हैं कि अगली मुलाकात में बाकी मुद्दों पर सहमति हो सकती है.

नरेंद्र मोदी और जो बाइडन

इमेज स्रोत, Getty Images

साझेदारी में भारत भारी या अमेरिका?

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह मानते हैं कि आने वाले वक़्त में भारत को इस साझेदारी से और भी फ़ायदा हो सकता है. वो कहते हैं कि दोनों देशों की साझेदारी में भारत अमेरिका को कोई 'छूट देता' नहीं दिखता.

वो कहते हैं, " आपसी रिश्तों की बात करें तो भारत अमेरिका की कई बातें नहीं मानता है."

ऐसी बातों को गिनाते हुए प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, "वो क्वाड का सैन्यीकरण नहीं होने देता. यूक्रेन पर रूस की निंदा नहीं करता. मानवाधिकार पर अमेरिका की बात को नकार देता है. चीन पर अमेरिका का मुखौटा नहीं बनना चाहता है. उसके बाद भी (अमेरिका के) लगातार तीन राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में हैं."

बाइडन के पहले पीएम मोदी के कार्यकाल में बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप भी भारत का दौरा कर चुके हैं.

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, "ये जटिल बात है, इसे कौन बड़ा और कौन छोटा में नहीं देखना चाहिए, लेकिन फिर भी अगर जवाब देना ज़रूरी हो तो मुझे लगता है कि अमेरिका को भारत की ज़्यादा ज़रूरत है. भारत उभरती हुई शक्ति है. चीन सबसे बड़ी चुनौती है अमेरिका के लिए. ऐसे में उसके लिए भारत को जोड़ना जरूरी है."

वो कहते हैं, "भारत के लिए भी साझेदारी ज़रूरी है. भारत को तकनीक चाहिए. निवेश चाहिए. एक बड़ी ताक़त का आशीर्वाद चाहिए. मैं हमेशा कहता हूं कि अमेरिका से दोस्ती पैकेज डील है, अमेरिका से दोस्ती हो तो 24-25 देश आपके दोस्त बन जाते हैं. "

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)