अमेरिका में पीएम मोदी अल्पसंख्यकों से भेदभाव के सवाल पर क्या बोले?

बैठक के दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

इमेज स्रोत, @PMOIndia

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने गुरुवार को करीब दो घंटे चली बातचीत के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.

नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद ये पहला मौका था जब उन्होंने किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों में पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए.

इससे पहले मोदी साल 2019 में लोकसभा चुनावों के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे लेकिन उन्होंने किसी के सवालों का जवाब नहीं दिया था. नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन से दो सवाल किए गए.

पीएम मोदी से पहला सवाल

पीएम मोदी से सवाल - भारत हमेशा से खुद को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहता रहा है लेकिन कई मानवाधिकार संगठन कहते हैं कि आपकी सरकार ने धार्मिक रूप से अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव किया है. आप आज व्हाइट हाउस में खड़े हैं जहां दुनिया के कई नेताओं ने लोकतंत्र की सुरक्षा के वादे किए हैं. आप और आपकी सरकार मुस्लिमों और दूसरे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए और अभिव्यक्ति की आज़ादी की रक्षा के लिए क्या कदम उठाएगी.

पीएम मोदी का जवाब - मुझे आश्चर्य है कि आप कह रहे हैं कि लोग कहते हैं.

लोग कहते हैं नहीं बल्कि भारत लोकतांत्रिक है. जैसा कि राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा भारत और अमेरिका दोनों के DNA में लोकतंत्र है.

लोकतंत्र हमारी रगो में है, लोकतंत्र को हम जीते हैं.

हमारे पूर्वजों ने उसे शब्दों में ढाला है- हमारे संविधान के रूप में और हमारी सरकार लोकतंत्र के मूल्यों के आधार पर बने संविधान के आधार पर चलती है.

हमने सिद्ध किया है कि डेमोक्रेसी कैन डिलीवर. जब मैं डिलीवरी कहता हूं तब जाति, पंथ, धर्म किसी भी तरह के भेदभाव की वहां पर जगह नहीं होती है.

जब आप लोकतंत्र की बात करते हैं तो अगर ह्यूमन वैल्यू नहीं है, ह्यूमैनिटी नहीं है, मानवाधिकार नहीं है, तो वो लोकतंत्र है ही नहीं और अगर लोकतंत्र को आप स्वीकार करते हैं, लोकतंत्र को लेकर जीते हैं, तो पक्षपात का कोई सवाल ही नहीं उठता है.

इसलिए भारत सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, उन मूलभूत सिद्धांतो को लेकर चलता है.

भारत में सरकार के जो बेनिफिट हैं, वो उन सभी को मिलते हैं जो उनके हकदार है, इसलिए भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों में कोई भेदभाव नहीं है, न धर्म के आधार के पर, न जाति के आधार पर, न उम्र के आधार पर, न भू-भाग के आधार पर.

बाइडन ने इस सवाल पर क्या कहा?

बाइडन से पूछा गया कि उनके पार्टी के कई नेता मानते हैं कि मोदी के राज में अल्पसंख्यकों और विरोधियों पर भारत में हो रही कार्रवाई को वो नज़रअंदाज़ कर रहे हैं.

बाइडन ने कहा कि पीएम मोदी के साथ रिश्ते ऐसे हैं कि वो खुलकर बात करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों पर उनकी चर्चा होती है, और दोनों देश एक दूसरे की इज्जत करते हैं.

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पीएम मोदी से दूसरा सवाल

पीएम मोदी से सवाल - क्लाइमेट चेंज के बारे में बहुत बातें की गई हैं, लेकिन माना जाता है कि टार्गेट जो सेट किए जाते हैं वो पूरे नहीं होते, साथ की तकनीक का ट्रांसफ़र भी विकसित देशों से विकासशील देशों को नहीं किया जाता. आप दोनों देश इस मुद्दे को कैसे देखते हैं.

पीएम मोदी का जवाब- क्लाइमेट यह हमारे सांस्कृतिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. हम एक्सप्लोइटेशन ऑफ नेचर में हम विश्वास नहीं करते हैं.

2030 तक भारत की रेलवे का नेट जीरो का लक्ष्य रखा है.

भारत की रेलवे कहने का अर्थ यह है कि हर दिन हमारे यहां रेल के डिब्बे में पूरा ऑस्ट्रेलिया होता है, इतना बड़ा हमारा देश है.

दुनिया के लिए हमने इंटरनेशनल सोलर एलायंस शुरू किया है और कई देश इसमें हमारे साथ हैं.

साथ ही पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों से निबटने के लिए उठाए गए कदमों का ज़िक्र किया.

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इससे पहले दोनों नेताओं ने एक बयान साझा जारी किया. पढ़िए इस साझे बयान की मुख्य बातें -

  • दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक अर्थव्यवल्था के लिए ज़रूरी है.
  • व्यापार से जुड़े लंबित मुद्दों को खत्म कर नई शरुआती की गई है.
  • एआई, सेमीकन्डकर क्वान्टम , टेलीकॉम क्षेत्रों में साधेझारी बढ़ा रहे हैं.
  • अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापार पार्टनर है.
  • दोनों सहमत हैं कि हमारी स्ट्रैटेजी टेक पार्टरनशिप को लेकर है.
  • क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन को लेकर अहम फैसले लिए गए.
  • टेक्नॉलॉजी ट्रांसफर को लेकर अहम बातचीत हुई.
  • दोनों देशों में रक्षा सौदा को लेकर बातचीत हुई
  • दोनों देशों में रोजगार से अवसर खुलेगें
  • बेंगलुरू और अहमदाबाद में अमेरिका का कांसुलेट खुलेगा
  • सीएटल में भारत का नया कांसुलेट खुलेगा
  • यूक्रेन युद्ध पर शांति के पक्षधर हैं
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'स्काई इज़ नॉट द लिमिट'

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कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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साझा बयान के अंत में पीएम मोदी ने अमेरिका और भारत के रिश्ते को लेकर कहा- स्काई इज़ नॉट द लिमिट.

इससे पहले व्हाइट हाउस में बाइडन से मुलाक़ात करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन दशकों पहले की बात याद की.

उन्होंने कहा, "मैं तीन दशक पहले एक सामान्य भारतीय की तरह यहां आया हूं लेकिन उस वक्त मैंने बाहर से व्हाइट हाउस को देखा था. लेकिन आज पहली बार इतनी तादाद में भारतीय मूल के लोगों के लिए व्हाइट हाउस के दरवाज़े खुले हैं."

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों गणतंत्र में यकीन करते हैं और दोनों का संविधान भी इन्हीं शब्दों से शुरु होता है, "वी द पीपल."

मोदी ने कहा कि मौजूदा वक्त में दोनों मुल्कों को अपनी अनेकता में एकता पर गर्व है.

उन्होंने कहा, "कोविड के कालखंड में वर्ल्ड ऑर्डर एक नया रूप ले रहा है और इस दौर में भारत और अमेरिका की दोस्ती पूरे विश्व के सामर्थ्य को बढ़ाने में पूरक होगी. वैश्विक हित के लिए वैश्विक शांति और स्थिरता ज़रूरी है इस दिशा में दोनों मुल्क मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं."

"अब से थोड़ी देर बाद हम दोनों दोनों मुल्कों के बीच के मुद्दों के आलावा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बात करेंगे. मुझे उम्मीद है कि ये बातचीत बेहद सकारात्मक रहेगी."

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बाइडन ने मोदी के स्वागत में क्या कहा?

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच का रिश्ता 21वीं सदी के परिभाषित रिश्तों में से एक है.

व्हाइट हाउस में मोदी का स्वागत करते हुए बाइडन ने कहा, "दोनों मुल्कों के संविधान में शुरुआत में तीन शब्द हैं, ' वी द पीपल' जो हमारी साझा प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं."

उन्होंने कहा, "दोनों के रिश्तों में स्पष्टवादिता, आपसी भरोसा है जो हमारे रिश्तों को परिभाषित करता है."

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