केरल: 15 साल के छात्र की मौत का मामला बना 'पहेली', पूरे राज्य में चर्चा क्यों है?

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
केरल में एक मशहूर स्कूल के 15 साल के छात्र की मौत ने राज्य को झकझोर कर रख दिया है.
लेकिन इस रैगिंग के मामले में चौंकाने वाली बात ये है कि स्कूल प्रबंधन और माता-पिता की बातों में गहरा विरोधाभास है.
जीपीएस इंटरनेशनल स्कूल में कैम्ब्रिज आईजीएसई के नौवीं कक्षा के छात्र मिहिर अहमद की 15 जनवरी को स्कूल से घर लौटने के तुरंत बाद मौत हो गई.
परिवार का कहना है कि मिहिर ने आत्महत्या की है.
इस संबंध में पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है.
स्कूल ने छात्र के स्कूल छोड़ने से पहले के व्यवहार के बारे में बताया कि "वो एक खुशमिजाज़ बच्चा था." मिहिर के मामा शरीफ़ ने बीबीसी हिंदी को बताया, "घर पर ऐसा कोई कारण नहीं था कि वो ऐसा क़दम उठाता."
(चेतावनीः ख़बर में कुछ विवरण विचलित कर सकते हैं.)

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आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.
सोशल मीडिया पोस्ट की 'पहेली'

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लेकिन ये मामला और गंभीर हो गया जब परिवार ने देखा कि मिहिर की मौत के अगले दिन ''जस्टिस फॉर मिहिर'' वाला एक सोशल मीडिया पोस्ट बनाया गया था, जिसे नौ दिन बाद अचानक हटा दिया गया.
ग्लोबल पब्लिक स्कूल के प्रवक्ता ने बीबीसी हिंदी को बताया, "इन सोशल मीडिया पोस्टों ने हमें भी उतना ही चौंका दिया है."
ये सोशल मीडिया पोस्ट मिहिर के माता-पिता के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज़ कराने का आधार बने.
इसके बाद छात्र की मां रजना पीएम ने भी सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिखा. ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई.
केरल के शिक्षा मंत्री के. शिवनकुट्टी ने बीबीसी हिंदी से कहा कि सरकार ने मिहिर की मौत से जुड़े पूरे मामले को गंभीरता से लिया है.
शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि स्कूल में जांच के लिए उन्होंने शिक्षा निदेशक को भेजा था और इस मामले में अगले कुछ दिनों में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है.
मिहिर के साथ क्या हुआ था?

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रजना ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि कैसे मिहिर के उस दिन दोपहर 2 बजकर 45 मिनट पर स्कूल से लौटने के ठीक एक घंटे बाद उनकी दुनिया उजड़ गई.
मौत के बाद रजना और उनके पति ने मिहिर के दोस्तों, स्कूल के साथियों से बात की और सोशल मीडिया पोस्ट की जांच की ताकि वो ये समझ सकें कि उनके बेटे ने इतना बड़ा क़दम क्यों उठाया.
उनकी पोस्ट में लिखा था, ''मिहिर के साथ स्कूल में और स्कूल बस में छात्रों के एक समूह ने बेरहमी से रैगिंग की, धमकाया और उस पर हमला किया.''
रजना ने अपने पोस्ट में लिखा, ''जो सबूत हमने जुटाए हैं, वो रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं. मिहिर को पीटा गया, गालियां दी गईं और ऐसे प्रताड़ित किया गया जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता, यहां तक कि उसके आख़िरी दिन भी."
उन्होंने आगे लिखा, "उसे ज़बरदस्ती वॉशरूम ले जाया गया, टॉयलेट सीट चाटने पर मजबूर किया गया और फिर उसका सिर टॉयलेट में डालकर फ्लश किया गया. इन बर्बर हरक़तों ने उसे अंदर से तोड़कर रख दिया, जिसे हम समझ भी नहीं सकते."
मिहिर की मां ने आगे लिखा, ''उसे उसके रंग की वजह से भी तंग किया जाता था. यहां तक कि उसकी मौत के बाद भी वो लोग अपनी क्रूरता से बाज नहीं आए."
"एक चौंकाने वाले चैट स्क्रीनशॉट से उनकी बर्बरता का पता चलता है. इस स्क्रीनशॉट में मौत के बाद भी मिहिर के रंग का मज़ाक बनाया गया था."
उन्होंने बताया कि 'मिहिर के दोस्तों ने इस घटना की ओर ध्यान खींचने के लिए "जस्टिस फॉर मिहिर" नाम का सोशल मीडिया पोस्ट बनाया था. लेकिन उन्हें संदेह है कि स्कूल, छात्रों को धमका रहा है ताकि सच्चाई दबाई जा सके, इसलिए वह पेज डिलीट कर दिया गया है.'
मिहिर के मामा शरीफ़ ने बताया कि मिहिर के दोस्तों से ये पता चला कि मिहिर नहीं चाहता था कि उसके माता-पिता को ये पता चले कि वो स्कूल में किन यातनाओं से गुज़र रहा था.
वो कहते हैं, ''हमें नहीं पता कि इसमें कितने लोग शामिल थे. हम सिर्फ़ इतना जानते हैं कि वे सभी प्लस वन और प्लस टू के छात्र थे. हमें जो भी नाम मिले, हमने पुलिस को दे दिए हैं."
"हमने ये जानने की कोशिश नहीं की कि वो दूसरे बच्चे कौन हैं. हमें इसकी परवाह भी नहीं हैं. हमें बस मिहिर के लिए न्याय चाहिए."
स्कूल का क्या है कहना?

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स्कूल के प्रवक्ता ने कहा, "हमारी जांच में फिलहाल ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया है. हमने दूसरे बच्चों और शिक्षकों से बातचीत की है, जो बच्चों के संपर्क में थे, जिनमें मिहिर भी शामिल था."
प्रवक्ता ने आगे कहा, "देखिए, मिहिर हमारे साथ केवल 39 दिनों तक रहा. इन दिनों में उसके साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. अगर उसे कोई परेशानी होती, तो उसकी शारीरिक भाषा और चेहरे के हावभाव से ये ज़ाहिर हो जाता. लेकिन हमें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला."
उन्होंने कहा, "हमारी जांच और निष्कर्षों के आधार पर, हम बस इतना जानते हैं कि वो हमारे साथ खुश था, हालांकि उसे अपने पिछले स्कूल से कुछ समस्याएं थी जिसके साथ वो यहां आया था."
उसके स्कूल आने के तुरंत बाद, ''स्कूल काउंसलर ने क्लास में एक गतिविधि करवाई थी, जिसमें मिहिर और उसके सभी साथ में पढ़ने वाले भी शामिल थे. इसके बाद वो सहज रूप से स्कूल के माहौल में ढल गया था. मूल रूप से, वो एक सामान्य बच्चा था.''
रैगिंग के आरोपों से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट्स का जिक्र करते हुए, प्रवक्ता ने स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था की ओर इशारा किया.
उन्होंने कहा, "अगर हम अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं को देखें, तो हमारे कक्षाओं में कैमरे लगे हैं, गलियारों में कैमरे हैं और हर वॉशरूम के बाहर केयरटेकर तैनात हैं. अंतरराष्ट्रीय ब्लॉक में लड़कों और लड़कियों के वॉशरूम अलग-अलग मंजिलों पर हैं, एक ही मंजिल पर नहीं हैं."
"जिस दिन मिहिर स्कूल से गया था, उसने सुबह अपने बास्केटबॉल कैंप में नियमित रूप से हिस्सा लिया था. इससे दो दिन पहले ही वह स्कूल की मॉडल यूनाइटेड नेशंस डेलीगेशन का हिस्सा था. उसने एक आईआईएम-यूएन सम्मेलन में भी भाग लिया था."
प्रवक्ता ने बताया, "लेकिन 14 जनवरी को स्कूल में एक घटना हुई थी, जिसमें मिहिर ने एक दूसरे लड़के को मज़ाक में किसी और को मुक्का मारने की चुनौती दी थी. ये लंच ब्रेक के दौरान हुआ था."
"उनके लिए ये एक मज़ाक था. लेकिन दुर्भाग्य से, जिस लड़के को मुक्का पड़ा, उसकी नाक से हल्का खून निकल आया. इसके बाद, दोनों लड़के खुद ही उसे मेडिकल रूम ले गए."
इस मामले में स्कूल ने तय मानकों के अनुसार कार्रवाई की. स्कूल हेड को सूचना दी गई और शिक्षक ने चारों बच्चों के माता-पिता को अगले दिन स्कूल बुलाने के लिए फ़ोन किया.
प्रवक्ता ने कहा, "मिहिर के पिता भी आए थे. शायद उन्होंने मिहिर से कहा कि ये तुम्हारे लिए दूसरा मौका है और तुम्हें ऐसी चीज़ों में नहीं पड़ना चाहिए. लेकिन स्कूल हेड ने पिता से कहा कि वो बीती बातें न करें. इसके बाद, मिहिर के पिता लगभग 10 मिनट बाद स्कूल से चले गए."
उन्होंने आगे बताया, "मिहिर ने अपनी अंग्रेज़ी की किताब भी स्कूल में ही छोड़ दी थी, जो अगले दिन होने वाले रिविज़न के लिए ज़रूरी थी. उसने शिक्षक से कहा था कि वह इसे कल ले जाएगा. स्कूल बस में बैठने से पहले उसने अपने सभी दोस्तों को अलविदा कहा. यहां तक कि कुछ बच्चे, जो उसी अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहते थे, उसके साथ उसी लिफ्ट में गए थे."
आखिर रैंगिग की घटनाएं बढ़ क्यों रही हैं?

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तिरुवनंतपुरम के सरकारी मेडिकल कॉलेज के एसएटी अस्पताल में पीडियाट्रिक्स और बाल मनोचिकित्सक के प्रोफेसर डॉ जयप्रकाश आर. ने कहा कि एक बात साफ़ है कि रैगिंग की बढ़ती घटनाएं एक वैश्विक समस्या हैं.
डॉ. जयप्रकाश ने बीबीसी हिंदी से कहा, "रैगिंग मूल रूप से एक छात्र की ओर से अपने जूनियर पर अपने दबदबे को साबित करने की कोशिश है. ये आक्रामक व्यवहार मनोवैज्ञानिक रूप से सामान्य है, लेकिन वीडियो गेम जैसे बाहरी कारणों की वजह से ये और बढ़ जाता है. इन खेलों की मूल थीम हिंसा और आक्रामकता होती है."
उन्होंने कहा, "लेकिन इस तरह के बच्चों के साथ ये समस्या है कि उन्हें कम्युनिकेशन या दूसरों को अपनी बात समझाने के लिए बातचीत करने में कठिनाई होती है. इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों के साथ अधिक समय बिताने की ज़रूरत है ताकि वे बातचीत करना सीख सकें."
उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह के कौशल से बच्चों को अपने माता-पिता या उनमें से किसी एक से अपने मन की बात साझा करने में मदद मिलती है.
उन्होंने कहा, "आमतौर पर 13 से 19 साल के बच्चे अपने मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी को माता-पिता या भाई-बहनों से साझा नहीं करते हैं. लेकिन अगर माता-पिता में से किसी एक या दोनों के साथ उनके संबंध गहरे होते है, तो वे अपनी समस्याओं को साझा करने के लिए तैयार होंगे."
डॉ जयप्रकाश ने कहा, "जब बच्चों को इनमें से कोई भी विकल्प नहीं मिलता तब वह आत्महत्या कर लेते हैं. और वो ये कदम बहुत ही आवेग में उठाते हैं. यह वयस्कों की तरह कोई सोची समझी चीज़ नहीं होती है."
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बच्चों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद करने के लिए माता-पिता और शिक्षकों को भी लाइफ़ स्किल ट्रेनिंग लेनी चाहिए.
हालांकि मिहिर की आत्महत्या के मामले में तीन अलग-अलग जांच चल रही हैं. सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है, जिसका नेतृत्व एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) कर रहे हैं.
शिक्षा निदेशक की ओर से भी एक जांच की जा रही है और दूसरी ओर केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए अपनी जांच शुरू की है.
जांच चलने तक जेम्स मॉडर्न एकेडमी के वाइस प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है.
मिहिर की मां ने शिकायत की थी उनके बेटे के सामाजिक बहिष्कार से उसका मानसिक उत्पीड़न हुआ था. एक छात्रा के साथ मिहिर की लड़ाई हो गई थी और सज़ा के तौर पर उसका सामाजिक बहिष्कार किया गया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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