दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र की संदिग्ध मौत पर उठते सवाल, क्या-क्या मालूम है

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इमेज कैप्शन, 21 साल के दीपक मीणा ने अपने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी और दिल्ली में रहकर मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुटे थे.
    • Author, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, दौसा (राजस्थान) से लौटकर

चेहरे पर मासूम सी मुस्कुराहट और चमकती आंखों वाले एक 21 वर्षीय युवक की तस्वीर पर फूलों की माला चढ़ाई गई है और तस्वीर के सामने कुछ दूरी पर घूंघट ओढ़े महिलाओं की आंखों में आंसू हैं.

महिलाएं घूंघट से ही आंखों से बह रहे आंसुओं को पोछ रही हैं और इस दौरान एक दूसरे को सहारा देकर चुप कराने की कोशिश भी कर रही हैं.

इन्हीं महिलाओं में से 52 साल की एक महिला के आंसू सूख गए हैं. चांद बाई ने अपने 21 साल के बेटे को खो दिया है और उन्हें आख़िरी बार बेटे का चेहरा देखना भी नसीब नहीं हुआ.

दीपक के 58 साल के पिता चंदू लाल कभी अपने बेटे की तस्वीर को निहारते हैं, तो कभी आने वाले लोगों के साथ बैठ जाते थे.

ये माहौल जयपुर से क़रीब 150 किलोमीटर दूर दौसा ज़िले की महवा तहसील के बलीन गांव का था. यहां दीपक के अस्थि विर्सजन से पहले धार्मिक रीति-रिवाज निभाए जा रहे थे.

दिल्ली में नॉर्थ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी जीतेंद्र मीणा ने कहा है कि "दीपक की गूगल हिस्ट्री और यूट्यूब सर्च से पता चला है कि उन्होंने सुसाइड मैटेरियल सर्च किया था. मौके से शराब की बोतल मिली थी. सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि दीपक ने बोतल खुद खरीदी थी. बाकी बातों की जांच जारी है."

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इमेज कैप्शन, दीपक की मां का कहना है कि यकीन करना मुश्किल है कि उनका बेटा ख़ुदकुशी कर सकता है.

क्या है पूरा मामला

आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.

21 साल के दीपक कुमार मीणा ने इस साल अपने पहले प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा पास की थी.

दो महीने पहले 9 जुलाई को दीपक मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए पहली बार दिल्ली आए थे.

उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास की थी, इस आधार पर उनका चयन एक निजी कोचिंग के मुख्य परीक्षा की तैयारी कराने वाले मेंटरशिप प्रोग्राम के लिए हुआ था. इसके तहत उन्हें रहने के लिए नि:शुल्क व्यवस्था और तैयारी के लिए लाइब्रेरी समेत अन्य सुविधाएं दी जा रही थीं.

दीपक की मां चांद बाई बीबीसी से कहती हैं, “हम हर शाम दीपक से बात किया करते थे. दस तारीख की रात को भी दीपक से फोन पर मेरी बात हुई थी. वह बिल्कुल ठीक था.”

वो आगे बताती हैं, “अगले दिन सुबह दीपक के पापा ने मुझे बताया कि वह फ़ोन नहीं उठा रहा है. तब मुझे लगा कि पढ़ाई में व्यस्त होगा लेकिन उसने दो दिन तक फ़ोन नहीं उठाया और फिर 13 सितंबर की दोपहर में फ़ोन बंद हो गया.”

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इमेज कैप्शन, दीपक की मां चंदा बाई.

किसान पिता चंदूलाल बताते हैं, “13 तारीख़ को दीपक का फ़ोन बंद होने के बाद हम दिल्ली चले गए. 14 तारीख़ की सुबह हम उसके कोचिंग संस्थान पहुंचे. लेकिन, वहां से हमें कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिला.”

इसके बाद मुखर्जी नगर थाने में चंदू लाल ने दीपक की गुमशुदगी रिपोर्ट दी.

रिश्तेदारों के साथ मिलकर अपने स्तर पर दिल्ली में उन्होंने दीपक की खूब तलाश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली.

चंदू लाल कहते हैं, "20 सितंबर को दीपक की यूपीएससी सिविल सर्विस की मुख्य परीक्षा थी. सुबह ही हम लक्ष्मी बाई नगर के एक सरकारी स्कूल में बने परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े थे, इसी स्कूल में दीपक की भी परीक्षा होनी थी. हम उम्मीद लगाए हुए थे कि वह आएगा. लेकिन वह नहीं आया.”

जिस दिन सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा थी, उसी दिन दोपहर में पुलिस को दीपक की कोचिंग से लगभग 400 मीटर दूर जंगल में दीपक का शव मिला.

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इमेज कैप्शन, एक सितंबर को दिल्ली में पिता चंदू लाल के साथ दीपक कुमार मीणा.

परिवार को हत्या की आशंका

दीपक का परिवार और आस-पास के गांवों में जानने वाले लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि दीपक अपनी जान ले सकता है. परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है.

सोशल मीडिया से जुड़ी जो तस्वीर घूम रही है, उसके आधार पर लोग भी हत्या की आशंका जताते हुए कई सवाल पूछ रहे हैं.

शव की स्थिति देख कर दिल्ली पुलिस दावा कर रही है कि यह आठ से दस दिन पुराना हो सकता है. शव गल गया था, चेहरे की हड्डियां दिखाई दे रही थी.

दीपक की मां चंदा बाई कहती हैं, “मैं यही जानना चाहती हूं कि वो कौन दुश्मन है जिसने मेरे बच्चे को मारा है. यही मांग है मेरी कि उसको भी ऐसी ही सजा मिले.”

दीपक को ट्रेस करते हुए पुलिस जंगल में उसके शव तक पहुंची. दीपक के फूफा का दावा है कि वो इस दौरान पुलिस के साथ थे.

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रामकेश मीणा बीबीसी से कहते हैं, “शव झाड़ियों में अंदर था. वहां बहुत गंदगी और जंगल जैसा इलाका था. हमारा बच्चा वहां जा ही नहीं सकता. हमें ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उस पर तेजाब जैसा कुछ पदार्थ डाला हो. चेहरे पर कुछ नज़र आ रहा था. हमने बैग से उसे पहचाना था.”

परिवार के परिचित सुनील कहते हैं, “एक सितंबर को ही हम दीपक से मिलने दिल्ली गए थे. वह बेहद खु़श था. सब कुछ सामान्य था. आठ सितंबर को भी हमारी बात हुई थी वह कह रहा था कि सब ठीक है. वह अपनी जान नहीं ले सकता.”

दीपक के बड़े भाई दौलत कहते हैं, “दीपक अपनी जान नहीं ले सकता, वह पढ़ाई में अच्छा था, अपनी इच्छा से दिल्ली गया था. 21 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में प्री निकाल लिया था और मेंस के लिए भी पूरा कॉन्फीडेंट था. उसके 'मॉक टेस्ट' अच्छे जा रहे थे. घर से कोई प्रेशर नहीं था तो क्यों करेगा सुसाइड?”

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इमेज कैप्शन, दीपक की अस्थि विसर्जन से पहले धार्मिक क्रियाकलाप करते परिजन.

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दीपक का परिवार पुलिस की कार्यशैली और अब तक हुई जांच से फ़िलहाल संतुष्ट नज़र आ रहा है.

परिवार दिल्ली पुलिस पर विश्वास जताते हुए कहता है कि हम यही चाहते हैं कि सच्चाई सामने आनी चाहिए जिससे किसी अन्य बच्चे के साथ ऐसा न हो.

दिल्ली में नॉर्थ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी जीतेंद्र मीणा बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, “हमने सर्च कर ट्रेस किया कि शव कहां है. मौक़े पर हमने फॉरेंसिक एक्सपर्ट और साइंटिफ़िक टीम बुला कर साक्ष्य जुटाए गए हैं.”

परिवार का कहना है कि दीपक के ऊपर तेजाब या कुछ ज्वलनशील पदार्थ भी डाला गया है. परिवार के इस आरोप पर डीसीपी जितेंद्र कहते हैं, “अभी तक की जांच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया है. शव को क़रीब 8-9 दिन हो गए थे. फॉरेंसिक टीम बुलाई गई थी, अगर कोई ऐसी बात सामने आती है तो जांच में शामिल करेंगे.”

वह कहते हैं कि, “मेडिकल बोर्ड से पॉस्टमॉर्टम करवाया गया है और अभी रिपोर्ट नहीं आई है.”

दीपक के परिजन इसे हत्या बता रहे हैं, इस पर डीसीपी मीणा कहते हैं, “अभी तक की सभी जांच परिवार को भरोसे में साथ लेकर की गई है. सारी सीसीटीवी फुटेज़ देखी गई हैं. अब तक की जांच में कहीं कोई हत्या की बात सामने नहीं आई है.”

वो कहते हैं, “अभी कुछ भी कह पाना मुश्किल है, फिर भी हम सभी एंगल को सामने रख कर जांच कर रहे हैं. लेकिन हमारे पास कुछ ऐसे महत्वपूर्ण एविडेंस हैं जो सुसाइड की ओर इशारा कर रहे हैं.”

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इमेज कैप्शन, 11 सितंबर की सीसीटीवी फ़ुटेज जिसमें दीपक को आख़िरी बार देखा गया था.

कोचिंग संस्थान से परिवार के सवाल

दीपक का परिवार और परिचित कोचिंग संस्थान पर दीपक की तलाश में मदद न करने का आरोप लगा रहे हैं.

परिवार के परिचित सुनील कहते हैं कि, “फ़ोन बंद होने के बाद जब हमने कोचिंग से संपर्क करने का प्रयास किया तो उसके कई घंटे बाद कोचिंग ने हमें फ़ोन कर बताया कि बच्चा पीजी (हॉस्टल) में नहीं है और उन्होंने हमसे पूछा कि बच्चा घर तो नहीं आ गया.”

वो कहते हैं, “जब हम दिल्ली गए तो दृष्टि कोचिंग संस्थान की ओर से बच्चे को तलाशने और अन्य किसी तरह की मदद नहीं की गई.”

दृष्टि कोचिंग

इमेज स्रोत, www.drishtiias.com

इमेज कैप्शन, कोचिंग संस्थान की तरफ़ से जारी प्रेस रिलीज़

दृष्टि कोचिंग की तरफ़ से घटना पर 24 सितंबर को एक प्रेस रिलीज़ जारी की गई है.

प्रेस रिलीज़ में बताया गया, ''11 सितंबर के बाद से दीपक लापता थे. सूचना मिलते ही हमारी टीम कोऑर्डिनेटर ने दीपक के नंबर पर कई बार फ़ोन किया किंतु फ़ोन नहीं उठा. इसके तुरंत बाद हमारी टीम ने दीपक के परिवार को सूचना दी.''

''14 सितंबर से इस मामले की जाँच दिल्ली पुलिस के हाथ में है. 15 सितंबर को दीपक के परिवार की उपस्थिति में हमारी टीम ने पुलिस को लाइब्रेरी की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराई.''

कोचिंग संस्थान का कहना है कि दीपक ने कभी भी किसी तरह के तनाव या दबाव की शिकायत अपने मेंटर्स से नहीं की.

साथ ही संस्थान की तरफ़ से कहा गया है कि हमारे प्रबंध निदेशक विकास दिव्यकीर्ति सहित कई लोग लगातार दिल्ली पुलिस के संपर्क में हैं और फ़िलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है.

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इमेज स्रोत, Dr Jitendera Meena

इमेज कैप्शन, न्याय की मांग करते हुए दिल्ली के मुखर्जी नगर में जुटी छात्रों की भीड़.

न्याय की मांग के लिए कैंडल मार्च

दिल्ली के मुखर्जी नगर में सोमवार शाम को दीपक मीणा के मौत से जुड़े मामले में कैंडल मार्च निकाला गया.

कैंडल मार्च में यूपीएससी मुखर्जी नगर के स्टूडेंट्स, दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग शामिल हुए.

मार्च में शामिल रहे दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफे़सर डॉ मनीष मीणा ने बीबीसी से कहा, "यह कैंडल मार्च दीपक की आत्मा की शांति के लिए और उसको न्याय दिलाने के लिए किया गया है. परिवार की उम्मीदों से इतर उनके लिए यह एक बड़ा सदमा है.''

वो कहते हैं, ''बेसमेंट में पानी भरने से कई स्टूडेंट्स की मौत, बिजली का करंट लगने से मौत और अब दीपक मीणा की मौत. इन घटनाओं को सीरियसली एग्जामिन करने की ज़रूरत है. कोचिंग सेंटर्स के लिए नियम क़ानून बनाने की ज़रूरत है जो उनकी जिम्मेदारी तय करें."

डॉ मीणा का कहना है कि बच्चे की तस्वीर भी बता रही है कि उसको जलाया गया है, बाल ग़ायब हैं यह संदेह है कि उसके साथ ग़लत हुआ है.

वो कहते हैं कि जैसे ही दीपक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आएगी, उसके बाद परिवार के साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी.

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इमेज कैप्शन, दीपक को विश्वास था कि वो पहले प्रयास में ही यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर लेंगे.

'बनूंगा तो आईएएस ही'

दीपक के परिवार से लेकर गांव के लोग और कोचिंग संस्थान से जुड़े लोगों का भी कहना है कि दीपक पढ़ाई में अच्छे थे.

दीपक के बड़े भाई दौलत कहते हैं, "दीपक ने बारहवीं तक की पढ़ाई महवा में ही मौजूद अलग-अलग स्कूलों से की हैं. जबकि, महवा के ही महात्मा गांधी कॉलेज से बीएससी (फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स) ग्रेजुएट थे."

"वह हमेशा पढ़ाई में अच्छा रहा है. दसवीं में 80 फ़ीसदी अंक हैं, बारहवीं में 87 प्रतिशत और ग्रेजुएशन में 84 फ़ीसदी अंक हैं."

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दौलत आगे बताते हैं, "वह ग्रेजुएशन के बाद दिसंबर 2021 से जून 2024 तक जयपुर में रहा था. इस साल दो महीने पहले ही 9 जुलाई को दिल्ली की कोचिंग में गया था. ग्रेजुएशन के बाद उसने एसएससी की सीजीएल परीक्षा दी."

"महज़ चार महीने की तैयारी में प्री पास किया और फिर उसने ख़ुद फ़ैसला करते हुए सीजीएल की मेंस परीक्षा नहीं देकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की."

ये सब बताते हुए उनका गला भर जाता है. वो कहते है कि हमें भी उम्मीद थी और दीपक को खु़द यकीन था कि वह पहले ही प्रयास में यूपीएससी में सफल होगा, लेकिन इससे पहले ही इस दुनिया से चला गया.

दीपक की मां कहती हैं, "मेरा बच्चा पढ़ाई में अच्छा था, हमेशा कहता था कि बनूंगा तो आईएएस ही. वो बनता भी आईएएस ही. क़रीब तीन से चार बोरियों में उसकी किताबें भरी हुई हैं. इतनी ही किताबें जयपुर में रखी हैं और एक बैग भर कर दिल्ली ले गया था."

महत्वपूर्ण जानकारी

यदि आपको आत्महत्या के विचार आ रहे हैं या आपकी जानकारी में किसी और के साथ ऐसा होता है, तो आप भारत में आसरा वेबसाइट या वैश्विक स्तर पर बीफ्रेंडर्स वर्ल्डवाइड के ज़रिए सहयोग ले सकते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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