नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने पटना से की पहली गिरफ्तारी, नहीं थम रहा विरोध प्रदर्शन

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गुरुवार को केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले में दो लोगों को पटना में गिरफ्तार किया है. ये सीबीआई की ओर से इस केस में की गई पहली गिरफ़्तारी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि गिरफ़्तार किए गए अभियुक्तों मनीष कुमार और आशुतोष कुमार ने कथित तौर पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा के अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया, जहां उन्हें लीक हुए पेपर और जवाब की कुंजी दी गई.
दोनों को पटना के स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. अब सीबीआई उनकी रिमांड मांगेगी ताकि पूछताछ की जा सके.
उन्होंने बताया कि आशुतोष कुमार ने कथित तौर पर पटना में 'लर्न ब्वॉयज हॉस्टल एंड प्ले स्कूल' किराए पर लिया था, जहां से बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने नीट के आधे जले हुए पेपर बरामद किए थे.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़, मनीष कुमार ने कथित तौर पर उन अभ्यर्थियों से सौदा किया था जो पेपर पहले ही पाने लिए पैसे देने को तैयार थे. इसके बाद वह इन अभ्यर्थियों को हॉस्टल में ले आए, जहां उन्हें प्रश्न पत्र और उत्तर कुंजी उपलब्ध कराई गई.

इन छात्रओं को इसी हॉस्टल में रखा गया और पांच मई के सीधे परीक्षा सेंटर पर ले जाया गया.
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीट पेपर लीक केस में बिहार से हो रही एक के बाद एक गिरफ्तारी पर कहा, "इस पर कार्रवाई चल रही है हम कानून ला रहे हैं और भारत सरकार ने भी कानून का प्रावधान किया है, 10 साल की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है हम अगले सत्र तक इस पर भी कानून लाएंगे और सख्त कार्रवाई करके और स्पीडी ट्रायल चलाकर 3-6 महीने में आरोपियो को सजा दिलाने का काम करेंगे."
सीबीआई ने नीट पेपर लीक मामले में छह एफ़आईआर दर्ज की है.
देश भर के सरकारी और निजी संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य मेडिकल से जुड़े पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) नीट-यूजी परीक्षा आयोजित करती है.
नीट के ऑफ़िस में एनएसयूआई का प्रदर्शन

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इस पेपर लीक के साथ ही एनटीए पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
आज दिल्ली में कांग्रेस की यूथ विंग एनएसयूआई ने एनटीए के दफ्तर में विरोध प्रदर्शन किया और इस एजेंसी पर बैन लगाने की मांग की.
एनएसयूआई के सदस्य ओखला स्थित एनटीए के कार्यालय में घुस गए और "एनटीए बंद करो" के नारे लगाने लगे.
केंद्र सरकार इस मामले में बढ़ते विरोध और एक के बाद एक परीक्षाओं के रद्द होने को लेकर एनटीए के प्रमुख सुबोध कुमार सिंह को पद से हटा चुकी है.
सांसदों के बीच भी आज ये मुद्दा गर्म रहा. डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "आज हमारे पास अल्पमत वाली बीजेपी सरकार है. अब उन्हें एहसास हो गया है कि उन्हें संविधान का पालन करना होगा. विपक्ष यह सुनिश्चित करेगा कि संविधान का पालन हो. नीट सबसे बड़ा फ्रॉड है. तमिलनाडु में हम कह रहे हैं कि हमें नीट की ज़रूरत नहीं है. आप हमारे छात्रों को क्यों सज़ा दे रहे हैं? कोटा में इतने सारे छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?"
डीएमके की ही सांसद कनिमोझी ने नीट पर कहा कि "तमिलनाडु तो पहले से नीट का विरोध करता रहा है और अब ये साबित हो गया है कि नीट निष्पक्ष परीक्षा है ही नहीं, इससे छात्रों का बहुत नुकसान हो रहा है."
सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से ओएमआर शीट को लेकर मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एनटीए से पूछा कि क्या नीट-यूजी परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को दी गई ओएमआर शीट को लेकर शिकायत करने की कोई समय सीमा है?
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस एसवीएन भट्टी की अवकाश पीठ ने एक निजी कोचिंग सेंटर और कुछ नीट अभ्यर्थियों की नई याचिका पर एनटीए को नोटिस जारी किया. मामले को आठ जुलाई को सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है.
कोचिंग संस्थान और अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने दलील दी कि कुछ छात्र जो नीट परीक्षा में शामिल हुए उन्हें ओएमआर शीट नहीं दी गई है. वहीं, एनटीए की ओर से पेश वकील ने कहा कि ओएमआर शीट वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है और उम्मीदवारों को दे दी गई है.
पीठ ने उनसे पूछा कि क्या ओएमआर शीट की शिकायत उठाने के लिए कोई समय सीमा है? एनटीए के वकील ने कहा कि उन्हें एनटीए से पूछना होगा और उन्होंने लंबित मामलों के साथ इस याचिका को लिस्ट करने की मांग की.
उन्होंने कहा कि हम इस पर जवाब जल्द फाइल करेंगे.

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नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बढ़ते आक्रोश के बीच सुप्रीम कोर्ट अदालत ने 20 जून को केंद्र और एनटीए से उन याचिकाओं पर जवाब मांगा था, जिनमें नीट-यूजी 2024 को रद्द करने और अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली याचिकाएं शामिल हैं.
18 जून को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर परीक्षा के आयोजन में किसी की ओर से "0.001 प्रतिशत लापरवाही" भी हुई है, तो उससे पूरी तरह निपटा जाना चाहिए. उसने सभी याचिकाओं को 8 जुलाई को सुनवाई के लिए लिस्ट किया.
5 मई को 571 शहरों के 4,750 सेंटर पर नीट यूजी आयोजित की गई थी, जिनमें 14 विदेशी के सेंटर भी शामिल थे, इस परीक्षा में 23 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे.
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