सैफ़ अली ख़ान या सरकार, किसे मिलेगी भोपाल रियासत की करोड़ों की संपत्ति?

फ्लैग स्टाफ़ हाउस

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इमेज कैप्शन, भोपाल नवाबों की संपत्ति का अहम हिस्सा फ्लैग स्टाफ़ हाउस, जहाँ फ़िल्म अभिनेता सैफ अली खान का बचपन बीता था.
    • Author, विष्णुकांत तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पटौदी ख़ानदान और भोपाल रियासत के वारिस फ़िल्म अभिनेता सैफ़ अली ख़ान और उनके परिवारजनों के हाथ 15 हज़ार करोड़ की संपत्ति आएगी या सरकार के पास चली जाएगी?

यह सवाल पिछले कुछ दिनों से चर्चा में है.

भोपाल का अहमदाबाद पैलेस, फ़्लैग स्टाफ़ हाउस, इसके आस-पास की हजारों एकड़ ज़मीन और ऐतिहासिक इमारतें आज एक बड़े विवाद का हिस्सा बन गई हैं.

सरकार ने इन संपत्तियों को 'शत्रु संपत्ति' घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. फ़्लैग स्टाफ़ हाउस वह इलाक़ा है, जहाँ सैफ़ अली ख़ान का बचपन बीता है.

दरअसल, कस्टोडियन ऑफ़ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया (सीईपीआई) के साल 2015 के एक दस्तावेज़ के मुताबिक, भोपाल के नवाब हमीदुल्ला ख़ान की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गई थीं.

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भोपाल का कोहे फ़िज़ा इलाका

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इमेज कैप्शन, भोपाल का कोहे फ़िज़ा इलाका जो पहले नवाब रियासत के आधिपत्य में था, वहाँ आज लाखों लोगों का घर बन चुका है.

केंद्र सरकार का दावा है कि आबिदा के पाकिस्तान जाने की वजह से भोपाल के नवाब की संपत्तियाँ, शत्रु संपत्ति अधिनियम के अधीन आती हैं.

आबिदा सुल्तान, सैफ़ अली ख़ान की दादी साजिदा सुल्तान की बड़ी बहन थीं. सरकार के इस दावे के ख़िलाफ़ सैफ़ अली ख़ान और उनके परिवार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी.

हाईकोर्ट ने 13 दिसंबर, 2024 में इस पर फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि 'शत्रु संपत्ति' से जुड़े विवादों के बारे में निर्णय के लिए अपीलीय प्राधिकरण का गठन किया गया है.

सैफ़ अली ख़ान और उनका परिवार भारत सरकार के दावे के ख़िलाफ़, इस प्राधिकरण के सामने याचिका दे सकता है.

जिलाधिकारी क्या कहते हैं?

भोपाल का ताज महल

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इमेज कैप्शन, तस्वीर में पीछे भोपाल का ताज महल दिख रहा है, जिसे भोपाल की बेगम शाहजहाँ ने 1871-1884 के दरमियान बनवाया था.

वहीं, इस पूरे मामले पर भोपाल के जिलाधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बीबीसी हिंदी को बताया, "मुझे हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी अभी मिली है. उसका परीक्षण करवाने के बाद विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी."

जब हमने भोपाल में 'शत्रु संपत्तियों' की मौजूदा स्थिति के बारे में जानना चाहा तो जिलाधिकारी ने कहा, "पहले एक सर्वे हुआ था, जिसमें शत्रु संपत्तियों का ब्योरा है. लेकिन, अगर आप ख़ास तौर पर इस मामले की बात कर रहे हैं, तो अभी जानकारी नहीं है. इस पर विभाग में एक बार जाँच करवानी पड़ेगी. तभी विस्तृत जानकारी दी जा सकेगी.''

भोपालियों की आन, बान और शान

अब्दुल्ला ख़ान

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इमेज कैप्शन, अब्दुल्ला ख़ान बताते हैं कि जिन मकानों में आज उनका परिवार रहता है, वो कभी भोपाल रियासत का हिस्सा थे.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोहे फिज़ा इलाके के निवासी अब्दुल्ला ख़ान भोपाल नवाब और फ़िल्म अभिनेता सैफ़ अली खान की संपत्तियों को सरकार द्वारा शत्रु संपत्ति घोषित करने के मामले पर मुस्कुरा देते हैं.

वे कहते हैं, "मियाँ, भोपालियों की आन, बान और शान पर जब आ जाती है, तो भोपाली पीछे नहीं हटते."

अब्दुल्ला ख़ान और उनका परिवार आज जिन मकानों में रहता है, वे कभी भोपाल रियासत का हिस्सा और भोपाल नवाब की संपत्तियों में शामिल होती थीं.

अब्दुल्ला ख़ान बीबीसी से कहते हैं, "भोपाल रियासत का भारत के साथ विलय हुआ. इसके बाद हमीदुल्ला ख़ान की जो दूसरे नंबर की बेटी थीं, उनको भोपाल का नवाब बनाया गया.''

''बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान, अपने पिता के ज़िंदा रहते पाकिस्तान चली गई थीं. आबिदा सुल्तान के नाम यहाँ कोई संपत्ति नहीं है.''

भोपाल रियासत और हमीदुल्ला ख़ान की विरासत

अहमदाबाद पैलेस

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इमेज कैप्शन, भोपाल स्थित अहमदाबाद पैलेस, जो भोपाल नवाब हमीदुल्ला के अंतिम दिनों का आशियाना बताया जाता है.
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भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्ला ख़ान साल 1926 में गद्दी पर बैठे. दो बड़े भाइयों की मृत्यु के बाद यह ज़िम्मेदारी उनके कंधों पर आई.

हमीदुल्ला ख़ान का शासनकाल राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा.

उनकी तीन बेटियाँ थीं—आबिदा सुल्तान, साजिदा सुल्तान और राबिया सुल्तान. साल 1947 में भारत के विभाजन के बाद नवाब हमीदुल्ला ख़ान ने भारत में ही रहना चुना.

उनकी बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान उस वक़्त उनके उत्तराधिकारी के रूप में नामांकित थीं. लेकिन, साल 1950 में आबिदा सुल्तान अपने बेटे शहरयार ख़ान के साथ पाकिस्तान चली गईं.

यह वही शहरयार ख़ान हैं, जो आगे चलकर पाकिस्तान के विदेश सचिव और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष भी बने.

आबिदा सुल्तान के पाकिस्तान जाने के बाद, भारत सरकार ने जनवरी 1962 में हमीदुल्ला ख़ान की दूसरी बेटी साजिदा सुल्तान को भोपाल रियासत का उत्तराधिकारी घोषित किया.

भोपाल में नवाबों के कालखंड पर अध्ययन करने वाले इतिहासकार सिकंदर मलिक बताते हैं, "नवाब हमीदुल्ला ख़ान भोपाल के नवाब बने 1926 में. वह भी तब, जब उनके दो बड़े भाइयों की मृत्यु हो जाती है. तो उत्तराधिकारी को लेकर विवाद इस परिवार के लिए नया नहीं है."

भोपाल नवाब के वारिस

सुमेर ख़ान, भोपाल निवासी

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इमेज कैप्शन, सुमेर ख़ान का कहना है कि यह समझ से परे है कि सरकार इसे 'शत्रु संपत्ति' कैसे घोषित कर रही है.

साजिदा सुल्तान का विवाह पटौदी रियासत के नवाब इफ़्तिख़ार अली ख़ान से हुआ था. उनकी तीन संतान हुई- मंसूर अली ख़ान पटौदी, सालेहा सुल्तान और सबीहा सुल्तान.

साल 1995 में साजिदा सुल्तान के निधन के बाद उनकी संपत्तियाँ मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत उनकी संतानों में बाँट दी गईं.

मंसूर अली ख़ान पटौदी ने अपने हिस्से की संपत्तियाँ विरासत में अपनी संतानों, सैफ़ अली ख़ान, सोहा अली ख़ान और सबा अली ख़ान को दे दीं.

इस तरह सैफ़ और उनकी बहनें भोपाल रियासत की संपत्तियों की वारिस बनीं.

भोपाल नवाब की संपत्तियों में भोपाल का फ़्लैग स्टाफ़ हाउस, अहमदाबाद पैलेस, नूर-उस-सबा पैलेस और लगभग 5,800 एकड़ भूमि शामिल हैं.

साथ ही, इन संपत्तियों के अलावा सीहोर और रायसेन जिलों में करीब 1,400 एकड़ ज़मीन भी है.

भोपाल के एक स्थानीय निवासी हैं, सुमेर ख़ान. इनके पुरखे भोपाल रियासत से जुड़े थे.

वे कहते हैं, "भोपाल नवाब की बड़ी बेटी के पाकिस्तान जाने के बाद भी नवाब साहब ज़िंदा थे. उनकी मृत्यु के बाद उनकी छोटी बेटी साजिदा सुल्तान, उनके बाद मंसूर अली ख़ान और फिर उनकी मृत्यु के बाद सैफ़ अली ख़ान को भोपाल नवाब घोषित किया गया.''

''अब ये समझ से परे है कि सरकार कैसे इसे 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर रही है."

'शत्रु संपत्ति' विवाद की शुरुआत

कोहे फ़िज़ा प्रॉपर्टीज

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इमेज कैप्शन, कोहे फ़िज़ा प्रॉपर्टीज, जहाँ अब ऊँची-ऊँची इमारतों का बसेरा है, वो कभी भोपाल नवाब की रियासत का केंद्र बिंदु रहा है.

साल 1968 में भारत सरकार ने 'शत्रु संपत्ति अधिनियम' लागू किया. इसके तहत जिन लोगों ने पाकिस्तान या चीन की नागरिकता ले ली थी, उनकी भारत स्थित संपत्तियों को 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर दिया गया.

'शत्रु संपत्ति' का विवाद भारत में नया नहीं है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में महमूदाबाद रियासत का मामला भी चर्चा में रहा है.

साल 1975 में राजा मोहम्मद आमिर अहमद ख़ान ने पाकिस्तान की नागरिकता ले ली. इसके बाद उनकी संपत्तियों को भी 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर दिया गया था.

हालाँकि, साल 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने यह फ़ैसला सुनाया कि 'शत्रु संपत्ति' का स्वामित्व परिवार के पास ही रहेगा. बाद में सरकार ने एक अध्यादेश के ज़रिए इस फ़ैसले को पलट दिया.

साल 2015 में भारत सरकार के कस्टोडियन ऑफ़ एनेमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया ने यह दावा किया कि भोपाल रियासत की सभी संपत्तियाँ आबिदा सुल्तान की थीं.

चूँकि, आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गई थीं, इसलिए ये संपत्तियाँ अब 'शत्रु संपत्ति' के दायरे में आती हैं.

इसके बाद सैफ़ अली ख़ान और उनके परिवार ने सरकार के इस दावे को चुनौती दी. उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की.

कोर्ट ने इस मामले को 'शत्रु संपत्ति' के मामलों के निपटारे के लिए बनी अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष भेजने का निर्देश दिया.

आबिदा सुल्तान का पाकिस्तान जाने का फ़ैसला

इतिहासकार सिकंदर मलिक

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इमेज कैप्शन, इतिहासकार सिकंदर मलिक कहते हैं कि इस फ़ैसले का असर भोपालवासियों पर भी पड़ेगा.

आबिदा सुल्तान का जीवन भोपाल रियासत की राजनीति और संस्कृति का एक अहम हिस्सा है.

इतिहासकार बताते हैं कि साल 1928 तक वह आधिकारिक उत्तराधिकारी थीं. यही वजह है कि वह अपने पिता के साथ प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेती थीं.

साल 1926 में आबिदा सुल्तान की शादी कुरवाई के नवाब सरवर अली ख़ान से हुई.

आबिदा सुल्तान की आत्मकथा के अनुसार 29 अप्रैल, 1934 को उनके इकलौते बेटे शहरयार मोहम्मद ख़ान का जन्म हुआ.

हालाँकि, आबिदा सुल्तान और नवाब सरवर अली ख़ान की शादी ज़्यादा दिनों तक नहीं चल सकी. वो भोपाल लौट आईं.

इतिहासकार सिकंदर मलिक कहते हैं, "देश के विभाजन और आज़ादी के दौर में बहुत कुछ बदल रहा था. राजनीतिक बदलाव के अलावा नवाब साहब (हमीदुल्ला ख़ान) के जीवन में भी काफ़ी उथल-पुथल मची हुई थी. 1946 में हमीदुल्ला ख़ान ने दूसरी शादी की. इससे घर में कलह और बढ़ गया.''

''इस बीच, आबिदा सुल्तान ने देखा कि भारत की राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल रही हैं. घर पर भी परिस्थितियाँ उनके हक़ में नहीं हैं. इसलिए, उन्होंने अपने 16 साल के बेटे के साथ पाकिस्तान चले जाना उचित समझा.''

भोपाल नवाब की संपत्तियों को 'शत्रु संपत्ति' घोषित करने से भोपाल पर पड़ेगा प्रभाव?

अगर भोपाल नवाब की संपत्तियाँ 'शत्रु संपत्ति' घोषित होती हैं, तो इसका असर केवल सैफ़ अली ख़ान के परिवार पर ही नहीं बल्कि भोपाल के लाखों निवासियों पर पड़ेगा.

इन संपत्तियों में से कई में स्थानीय लोग बसे हुए हैं. भोपाल के एक निवासी सुमेर ख़ान का कहना है, "अगर इन संपत्तियों को जब्त किया गया, तो 10-15 लाख लोग प्रभावित होंगे."

वहीं, भोपाल के खानूगाँव इलाके में रहने वाले मोहम्मद नसीम कहते हैं, "हमारे बाप-दादा भोपाल के नवाबों के यहाँ नौकरियाँ करते थे. आज हम जहाँ रहते हैं, यह संपत्तियाँ नवाब हमीदुल्ला ख़ान ने हमारे पूर्वजों को रहने और खेती के लिए दी थीं."

भोपाल की रियासतकालीन संपत्तियों में अब लाखों लोगों की बसाहट और कई बाज़ार हैं.

इसमें कोहे फ़िज़ा प्रॉपर्टी का इलाक़ा, मोटर्स गैराज, न्यू कॉलोनी क्वार्टर्स, कॉटेज नाइन, डेरी फ़ार्म क्वार्टर्स, फॉरेस्ट स्टोर, पुलिस गार्ड रूम समेत अन्य संपत्तियाँ शामिल हैं.

अब आगे क्या होगा?

भोपाल का गौहर महल

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इमेज कैप्शन, भोपाल का गौहर महल भी नवाबी इतिहास का गवाह है, अब उसके एक हिस्से में एक रेस्टोरेंट बन गया है.

अब सैफ़ अली ख़ान और उनके परिवार ने जनवरी 2025 में गृह मंत्रालय में अपील दायर की है.

परिवार का दावा है कि आबिदा सुल्तान ने अपने पिता के जीते जी ही भोपाल रियासत पर अपने अधिकार छोड़ दिए थे. इसलिए ये जायदाद, 'शत्रु संपत्ति' के दायरे में नहीं आतीं.

दिलचस्प है, पहले सरकार ने भोपाल के नवाब हमीदुल्ला ख़ान की दूसरी बेटी को नवाब माना था. इसके बाद उनके परिवार के सदस्यों को भी यह पदवी मिली.

अब सरकार भोपाल तत्कालीन नवाब की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान को आधिकारिक उत्तराधिकारी मान रही है. इस लिहाज़ से भोपाल नवाब से जुड़ी संपत्तियों को 'शत्रु संपत्ति' मान रही है.

अब देखना है, संपत्ति का फ़ैसला क्या होता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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