मध्य प्रदेश: सौरभ शर्मा के कॉन्स्टेबल से करोड़ों की संपत्ति बनाने का मामला क्या है?

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- Author, विष्णुकांत तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, भोपाल
मध्य प्रदेश में पिछले चार दिनों से सौरभ शर्मा और चेतन सिंह गौर नाम के दो शख़्स सुर्खियों में हैं.
बीते गुरुवार 20 दिसंबर को शुरू हुई मध्य प्रदेश लोकायुक्त और फिर आयकर विभाग की कारवाई में 52 किलो सोना, 230 किलो चांदी और 17 करोड़ से अधिक की नक़दी जब्त की जा चुकी है.
आयकर विभाग ने चेतन सिंह से पूछताछ शुरू कर दी है, वहीं सौरभ शर्मा की तलाश जारी है.
सौरभ शर्मा 2016 में मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में आरक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे. उन्होंने कुछ सालों में ही करोड़ों की संपत्ति बना ली. कॉन्स्टेबल से करोड़पति बने सौरभ शर्मा की कहानी पहली नज़र में देखें तो फ़िल्मी लगती है.
मध्य प्रदेश लोकायुक्त निदेशक जयदीप प्रसाद ने बीबीसी को बताया कि 18 दिसंबर को सौरभ शर्मा के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद छापेमारी हुई.
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार रात 20 दिसंबर को शहर से सटे मेंडोरी-कुशालपुर इलाक़े के जंगल में एक लावारिस कार मिली थी. इस कार की सूचना आयकर विभाग को दी गई, जिसके बाद कार के अंदर से 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपए की नक़दी मिली.
कार की नंबर प्लेट से कार मालिक चेतन सिंह गौर का पता चला और फिर एक-एक करके चीज़ें सामने आने लगीं.

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कॉन्स्टेबल की नौकरी अनुकंपा पर
सौरभ शर्मा को आठ साल पहले मध्य प्रदेश के ग्वालियर में परिवहन विभाग में अनुकंपा नौकरी मिली थी.
कार से सोना और नक़दी मिलने के बाद सौरभ और उनके सहयोगी चेतन के ठिकानों से प्रदेश की लोकायुक्त की टीम 230 किलो से अधिक चांदी और करोड़ों की नक़दी भी जब्त की है.
लोकायुक्त निदेशक जयदीप प्रसाद ने बीबीसी से कहा, "हमारे पास सौरभ शर्मा की शिकायतें आ रही थीं. इन शिकायतों की पहले पुष्टि की गई और फिर अदालत से जांच वॉरंट लेकर सौरभ शर्मा के घर और उनके ऑफिस जो कि चेतन सिंह का आवास भी है, वहाँ छापेमारी की गई."
जयदीप प्रसाद ने बताया, "हमारा अंदेशा है कि इसी कार्रवाई के दौरान अभियुक्तों ने डर के कारण सोना और नक़दी कहीं छुपाकर रखने की कोशिश की, जो आयकर विभाग के अधिकारियों ने ज़ब्त किया.''
लोकायुक्त के अनुसार, फ़िलहाल शर्मा फरार हैं और उनकी खोजबीन की जा रही है.
मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे सौरभ शर्मा को पिता डॉक्टर आर के शर्मा की मौत के बाद ग्वालियर परिवहन विभाग में अक्टूबर 2016 में आरक्षक के पद पर नौकरी मिली थी.
मध्य प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सौरभ के पिता की मृत्यु के बाद सौरभ को यहीं नौकरी मिलनी थी लेकिन वहाँ कोई जगह ख़ाली नहीं थी.
इसके बाद शर्मा को परिवहन विभाग में आरक्षक के पद पर नियुक्ति मिली.
ग्वालियर परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मात्र सात सालों में सौरभ शर्मा ने परिवहन विभाग के लगभग दो दर्जन चेक पॉइंट्स पर ठेकेदारी का काम लेकर भारी संपत्ति अर्जित की.

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चेकपोस्ट से करोड़ों की कमाई
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा इसी साल जुलाई में सारे चेक पोस्ट बंद करने के फ़ैसले के वक़्त तक प्रदेश में कुल 47 चेक पोस्ट थे. कई लोगों का कहना है कि इनमें से आधे की ठेकेदारी सौरभ शर्मा के पास थी.
एक परिवहन अधिकारी ने बताया, "सौरभ को शुरुआत में ग्वालियर परिवहन ऑफिस में ही काम करने को मिला लेकिन साल भर के अंदर ही उन्होंने विभाग में अच्छी पैठ बना ली. उनका ट्रांसफर परिवहन नाकों से संबंधित विभाग में हो गया. उन्होंने इसी दौरान कई चेक पोस्ट पर अपनी ठेकेदारी जमा ली. चेक पोस्ट के माध्यम से बहुत जल्द सौरभ ने काफ़ी पैसा बनाया."
लोकायुक्त के अनुसार, इस छापेमारी में विभाग को 7.98 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति, जिनमें हीरे, 200 किलो चांदी, लग्ज़री कारें और नक़दी शामिल हैं. ये सारी संपत्तियां शर्मा के आवास और ऑफिस से बरामद हुई हैं.
लोकायुक्त के एक अन्य अधिकारी के अनुसार, शर्मा ने 2016 में नियुक्ति मिलने के बाद 2023 में वीआरएस ले ली थी और रीयल एस्टेट के साथ हॉस्पिटैलिटी के व्यवसाय में दस्तक दी.
अधिकारी ने यह भी बताया कि सौरभ और चेतन अच्छे दोस्त हैं.
उन्होंने बताया, ''सौरभ और चेतन अच्छे दोस्त हैं और दोनों ही चंबल अंचल के रहने वाले हैं. अब तक की पूछताछ में चेतन ने बताया कि उसे काम की ज़रूरत थी और सौरभ ने उसकी मदद की थी. चेतन का कहना है कि वह सौरभ के साथ कर्मचारी की हैसियत से काम करता था. जिस गाड़ी में 52 किलो सोना मिला है, वह भी चेतन के ही नाम पर थी लेकिन चेतन का कहना है कि उसका इस्तेमाल सौरभ ही करता है. पूछताछ में आगे और जानकारी मिलेगी".
वहीं इस मामले पर परिवहन विभाग के ग्वालियर दफ़्तर के लोग बात करने से बचते दिखे हैं. सौरभ के परिवार में उनकी माँ, पत्नी और भाई हैं.
सौरभ के भाई छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारी हैं. लोकायुक्त अधिकारी ने यह भी बताया कि "सौरभ के परिजनों के मुताबिक़ वह मुंबई में हैं.
ग्वालियर के एक परिवहन अधिकारी ने बताया कि सौरभ की ग्वालियर के रिहायशी इलाकों में भी कई संपत्तियां हैं और ये सब उन्होंने बीते कुछ सालों में ही बनाई है.
जहां एक तरफ सौरभ के ग्वालियर वाले घर में ताला लगा है, वहीं इस मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा और उनके सहयोगी चेतन सिंह गौर के ख़िलाफ़ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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