क्या हम अपने दिमाग़ की उम्र को कम कर सकते हैं?

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- Author, लारा लेविंगटन
- पदनाम, बीबीसी क्लिक
सालों से हमें यह पता है कि हमारी जीवनशैली लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद कर सकती है.
अब वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि, क्या नई तकनीक इन बातों का रिकॉर्ड रखकर कि उम्र बढ़ने के साथ हमारे दिमाग़ के साथ क्या होता है, हमारे दिमाग़ के उम्र बढ़ने की क्रिया को घटाने में मदद कर सकती है या नहीं?
अब वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उम्र बढ़ने के साथ हमारे दिमाग़ के साथ क्या होता है. क्या आधुनिक तकनीक हमारे दिमाग़ की बढ़ती उम्र को कम करने में मदद कर सकती है या नहीं?
नीदरलैंड्स में जन्मीं 76 साल की महिला मगाइके और उनके पति टॉम अमेरिका में लॉस एंजिलिस से एक घंटे की दूरी पर लोमा लिंडा में रहते हैं. एक सुबह उन्होंने नाश्ता पर मेरा स्वागत किया.
नाश्ते में चिया सीड्स, ओटमील और बेरी दी गईं. कोई भी चीनी वाला प्रोसेस्ड फ़ूड और कॉफी नहीं परोसा गया. नाश्ता भी लोमा लिंडा की तरह शुद्ध था.

क्या कहते हैं डॉक्टर
लोमा लिंडा को दुनिया के तथाकथित ब्लू जोन्स जगहों में से एक के रूप में जाना जाता है, जहां लोगों की उम्र औसत जीवनकाल से अधिक होती है. इस मामले में शहर का सेवेंथ- डे एडवेंटिस्ट समुदाय है, जो लंबे समय तक ज़िंदा रहता है.
यह लोग आमतौर पर शराब और कैफ़ीन का सेवन नहीं करते हैं. शाकाहारी और वीगन चीज़े खाते हैं और अपने शरीर का ध्यान रखना एक धार्मिक कर्तव्य मानते हैं. इसे वह अपना "हेल्थ मैसेज" कहते हैं और इससे उन्हें पूरे शहर में पहचान मिली.
यह शहर लंबे समय से इस बात के लिए शोध का विषय बना हुआ है कि यहां के लोग लंबा जीवन कैसे जीते हैं.
लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी के प्रोफे़सर डॉ. गैरी फ्रैजर ने बताया कि सेवेंथ-डे एडवेंटिस्ट समुदाय के लोग न केवल लंबी उम्र की उम्मीद कर सकते हैं, बल्कि "स्वास्थ्य अवधि" में भी वृद्धि की उम्मीद करते हैं. महिलाएं चार से पांच साल और पुरुष सात साल तक अतिरिक्त स्वस्थ जीवन जीते हैं.
टॉम और मगाइके जीवन के आख़िरी समय में शहर में रहने आए थे लेकिन अब दोनों इस समुदाय में मज़बूती से शामिल हो गए हैं.
लोमा लिंडा कोई बड़ा रहस्य नहीं है, यहां के लोग सिर्फ स्वस्थ जीवन जी रहे हैं और वे उस समुदाय को महत्व दे रहे हैं जो उन्हें स्वस्थ्य रहने का धर्म प्रदान करता है. स्वस्थ जीवन, संगीत समारोह और व्यायाम को लेकर अक़्सर लोगों को जानकारी दी जाती है.
जूडी यहां एक इमारत में 112 लोगों के साथ रहती हैं. जूडी ने बीबीसी को बताया कि इमारत में हमेशा दिल और दिमाग़ को खोल देने वाली बातें होती रहती हैं.
जूडी ने कहा, "इस बात का मुझे एहसास नहीं कभी नहीं हुआ कि सामाजिक होना आपके दिमाग़ के लिए कितना ज़रूरी है. बिना इसके आपका दिमाग़ सिकुड़ जाता है."
विज्ञान ने बहुत पहले ही सामाजिक मेलजोल के फ़ायदों को पहचाना है. लेकिन अब यह पहचानना भी संभव है कि किसका दिमाग़ उम्मीद से अधिक तेज़ी से बूढ़ा हो रहा है ताकि इसे ट्रैक किया जा सके और भविष्य में उसका इलाज हो सके.
टेक्नोलॉजी की बदलती दुनिया में एआई और डेटा की मदद से मेडिकल के क्षेत्र में भी मदद मिलेगी.
दिमाग़ पर शोध कर रहे वैज्ञानिक क्या कहते हैं?

कैलिफ़ोर्निया में बीबीसी ने दिमाग़ के स्वास्थ्य पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से मुलाक़ात की. ये लोग इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दिमाग़ की उम्र बढ़ने की क्रिया को हम बदल सकते हैं या नहीं.
दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में जेरोन्टोलॉजी और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी के एसोसिएट प्रोफे़सर आंद्रेई इरिमिया ने ऐसे कंप्यूटर मॉडल दिखाए जो हमारे दिमाग़ की उम्र का आकलन करते हैं और उनकी गिरावट की भविष्यवाणी करते हैं.
उन्होंने इसे एमआरआई स्कैन, 15 हज़ार दिमाग़ों के डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से तैयार किया था. ताकि स्वस्थ रूप से बूढ़े हो रहे दिमाग़ और डिमेंशिया जैसी बीमारी की प्रक्रिया से ग्रसित दिमाग़ों को समझा जा सके.
उन्होंने कहा कि यह उन पैटर्न को देखने का अच्छा तरीका है जिनके बारे में हम एक इंसान के रूप में नहीं जानते हैं लेकिन एआई उन्हें पकड़ने में सक्षम है.
कैलिफ़ोर्निया पहुंचने से पहले मैंने अपना एक एमआरआई स्कैन करवाया था. उसका विश्लेषण करने के बाद, प्रोफेसर इरिमिया ने मुझे बताया कि मेरे दिमाग़ की उम्र मेरी उम्र से आठ महीने ज़्यादा है. हालांकि, प्रोफ़ेसर इरिमिया ने सुझाव दिया कि नतीजे दो साल तक ऊपर-नीचे हो सकते हैं.
निजी कंपनियां कर रहीं है तकनीक का व्यवसायीकरण

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निजी कंपनिया भी इस तकनीक का व्यवसायीकरण करने में लगी हैं. एक निजी कंपनी ब्रेनकी दुनिया की अलग-अलग क्लिनिकों में यह सेवाएं दे रही है.
कंपनी के संस्थापक ओवेन फिलिप्स ने बताया कि भविष्य में लोगों के लिए एमआरआई करवाना आसान हो जाएगा.
उन्होंने कहा, "लोगों के लिए एमआरआई करवाना आसान होता जा रहा है और इससे आने वाली तस्वीरें बहुत बेहतर होती जा रही हैं."
"मैं बाहर बेवकूफ़ नहीं बनना चाहता हूं, लेकिन तकनीक उस जगह पर पहुंच रही है जहां हम पहले की तुलना में चीज़ों को समय से काफ़ी पहले देख पा रहे हैं और इसका मतलब यह है कि एआई के साथ हम समझ सकते हैं कि किसी मरीज़ के दिमाग़ में क्या हो रहा है. हम इसका समर्थन कर सकते हैं."
मेरे एआरआई स्कैन के आधार पर प्रोफ़ेसर इरिमिया ने मुझे जो बताया था, उसके उलट ब्रेनकी ने मेरे दिमाग़ की उम्र मेरी आयु से एक साल कम कर दी. मुझे इसका एक 3डी मॉडल भी दिखाया गया, जो दिखने में काफ़ी बड़ा था. मुझे विश्वास दिलाया गया कि यह दिमाग़ का वास्तविक आकार है.
पिछले 200 सालों में बढ़ी हैं बीमारियां

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पिछले 200 सालों में जीवन प्रत्याशा में प्रभावशाली बढ़ोतरी ने उम्र से जुड़ीं कई बीमारियों को जन्म दिया है. मुझे आश्चर्य हुआ कि अगर हम सभी लंबे समय तक जीवित रहे, तो क्या डिमेंशिया हमारे सभी दरवाजों पर दस्तक दे सकता है.
प्रोफ़ेसर इरिमिया ने कहा कि यह एक ऐसा सिद्धांत है जिसकी कई लोगों ने जांच-पड़ताल की है, हालांकि यह साबित नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि इसका मक़सद डिमेंशिया को जीवन प्रत्याशा से बाद की उम्र तक टालने का तरीक़ा खोजना था.
यह सब हमें उसी जगह पर वापस ले जाता है जो हर वैज्ञानिक और डॉक्टर, साथ ही ब्लू ज़ोनर्स भी कहते हैं कि जीवनशैली महत्वपूर्ण है.
अच्छा आहार, शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहना और ख़ुश रहना हमारे ब्रेन की उम्र बढ़ाने के लिए ज़रूरी है.
कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में तंत्रिका विज्ञान और मनोविज्ञान के प्रोफेसर मैथ्यू वॉकर के मुताबिक़, इन सबके अलावा एक और महत्वपूर्ण कारक नींद भी है.
उन्होंने कहा, "नींद आपके मस्तिष्क और शरीर के स्वास्थ्य को फिर से ठीक करने के लिए दिन की सबसे प्रभावी चीज़ है."
"आपके दिमाग़ का कोई भी ऐसा काम नहीं है जो नींद आने पर बेहतर न हो, या जब आपको पर्याप्त नींद न मिले तो ख़राब न हो."
सोने के पैटर्न में बदलाव करना भी डिमेंशिया से जुड़ा हुआ है.
नींद पर क्या है एक्सपर्ट की राय

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प्रोफ़ेसर वॉकर ने बताया, "इसे सिर्फ़ 60 या 70 की उम्र में ही नहीं देखते हैं बल्कि यह 30 की उम्र में भी शुरू हो सकता है. इसलिए, नींद की ट्रैकिंग के ज़रिए उन बदलावों की पहचान कर सकते हैं, जो संभावित रूप से बेहतर स्वास्थ्य का मॉडल बन सकते हैं."
सैन फ्रांसिस्को के बाहरी इलाक़े में स्थित बायोटेक कंपनी फॉना बायो, सर्दियों में गहरी नींद के दौरान और उसके बाद गिलहरियों का डेटा इकट्ठा कर रही है.
इस स्थिति में गिलहरियों के शरीर का तापमान गिर जाता है और उनकी मेटाबॉलिज्म की दर सामान्य से केवल एक फ़ीसद कम हो जाती है.
इस समय के दौरान ऐसा पाया गया है कि गिलहरियां न्यूरान्स को फिर से बनाती हैं और अपने दिमाग़ से टूटे हुए कनेक्शन को फिर से स्थापित करती हैं. कंपनी का मक़सद एक ऐसी दवा बनाना है जिसके जरिए वह इस क्रिया की इंसानों में दोहरा सकें.
क्या इलाज और डिप्रेशन से भी बढ़ता है डिमेंशिया का ख़तरा

इलाज होने पर डिप्रेशन भी डिमेंशिया के ख़तरे को बढ़ाता है.
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफे़सर लीन विलियम्स ने एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल करके दिमाग़ पर डिप्रेशन के कुछ रूपों को समझने के एक तरीके की पहचान की है.
यह डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियों को समझने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकता है. साथ ही यह बताने का तरीका भी दे सकता है कि मरीज का इलाज कैसा चल रहा है.
ब्रायन जॉनसन जैसे लोग बहुत कम हैं जो लंबी उम्र पाने के लिए विज्ञान पर भरोसा कर रहे हैं. ब्रायन जॉनसन एक बिजनेसमैन हैं जो अपनी जैविक उम्र को बदलने की कोशिश में लाखों ख़र्च कर रहे हैं.
दर्जनों सप्लीमेंट, दिन में 19 घंटे तक उपवास, अलग तरह से वर्कआउट और है और कई तरह के (कभी-कभी विवादास्पद) इलाज, जिनसे उन्हें उम्मीद है कि वे अपनी उम्र को कम कर देंगे.
लेकिन लोमा लिंडा में रहने वाले 103 वर्षीय बुजुर्ग मिल्ड्रेड ज़ोरदार ढंग से कहती हैं, "आपको अपने आहार को लेकर बहुत सावधान रहने की ज़रूरत है."
वे आगे कहती हैं कि मैं यहा मानती हूं कि हमें यह ज़रूर ही करना चाहिए. मैं यह सोचती हूं कि ये ज़्यादा बेहतर है कि हम थोड़ा जियें और सच तो यह है कि हमें ये पता होना चाहिए और इसका सामना करना चाहिए.



















