कुछ घंटे की नींद से ही पूरे दिन तरोताज़ा और सक्रिय रह सकते हैं?

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- Author, डेविड रॉबसन
- पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ
नींद की कमी पर अक्सर हम गर्व करते हैं और इसे व्यस्तता का पैमाना समझते हैं.
थॉमस एडिसन, मारग्रेट थैचर, मार्था स्टीवर्ट और डोनल्ड ट्रंप, इन सभी का दावा है कि वे रात में चार या पांच घंटे ही सोते हैं.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में 18 से 20 घंटे काम करने का दावा किया जाता है.
विशेषज्ञों की आम राय है कि वयस्कों को सात से नौ घंटे सोना चाहिए. लेकिन अमरीका के एक तिहाई वयस्कों को नियमित रूप से पर्याप्त नींद नहीं मिलती.
इसके कई दुष्प्रभाव हैं- याददाश्त घटना, फ़ैसले लेने की क्षमता कम होना, संक्रमण और मोटापा बढ़ना. इन ख़तरों को सभी जानते हैं, लेकिन नज़रअंदाज़ करते हैं.
जब भी हमें किसी काम के लिए अतिरिक्त समय की ज़रूरत होती है, पहली कुर्बानी नींद की ही होती है.
क्या होगा अगर हम नींद के अनुभव को बढ़ा सकें और कम समय में गहरी नींद के ज़्यादा फायदे उठा सकें?
नई स्लीप ऑप्टिमाइज़ेशन तकनीक से यह मुमकिन लगने लगा है.
दुनिया भर में हुए प्रयोगों ने साबित किया है कि गहरी नींद में जाने की रफ़्तार और रात में दिमाग की दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती है.

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धीमी तरंगें, गहरी नींद
सामान्य रातों में दिमाग नींद के कई चरण से गुजरता है. हर चरण में मस्तिष्क की तरंगों का एक ख़ास पैटर्न होता है, जिसमें न्यूरॉन्स एक साथ एक ताल पर सक्रिय होते हैं (जैसे कोई भीड़ एक साथ गा रही हो या एक साथ ढोल बजा रही हो).
रैपिड आई मूवमेंट (REM) के दौरान यह ताल काफी तेज़ होती है. इस समय सपने देखने की संभावना सबसे ज़्यादा रहती है.
एक बिंदु पर आकर हमारी आंखों की गति रुक जाती है, सपने ओझल हो जाते हैं और मस्तिष्क तरंगों की ताल एक बीट प्रति सेकेंड तक घट जाती है.
यही वह समय होता है जब हम गहरी नींद में जाते हैं. इस अचेत अवस्था को "स्लो-वेव" नींद कहते हैं.
यही वह चरण है जिसमें नींद के सर्वोत्तम उपयोग की संभावना तलाश रहे वैज्ञानिकों की दिलचस्पी है.
1980 के दशक से हो रहे रिसर्च से पता चला है कि स्लो-वेव नींद दिमाग के रखरखाव के लिए ज़रूरी है.
इसी समय दिमाग अल्पकालिक यादों को दीर्घकालिक भंडार में भेजता है, ताकि हमने जो सीखा है उसे भूल न जाएं.
जर्मनी की टूबिंगन यूनिवर्सिटी में मेडिकल साइकोलॉजी एंड बिहेवियरल न्यूरोबायोलॉजी विभाग के निदेशक जान बोर्न कहते हैं, "सूचनाओं का प्रसारण धीमी तरंगें करती हैं."
ये तरंगें मस्तिष्क में रक्त और मस्तिष्कमेरू द्रव (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) के प्रवाह को भी ट्रिगर कर सकती हैं, जिससे तंत्रिकाओं के लिए हानिकारक मलबे को बाहर किया जाता है.
ये तरंगें तनाव देने वाले कोर्टिसोल हार्मोन को कम करती हैं और प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) को ताक़तवर बनाने में मददगार होती हैं.
इस तरह के नतीजों ने वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मज़बूर किया है कि क्या हम इन छोटी तरंगों का उत्पादन बढ़ाकर नींद के फायदे बढ़ा सकते हैं.
ऐसा करने की सबसे भरोसेमंद तकनीक मस्तिष्क की सही लय को गिनने वाले मेट्रोनोम की तरह काम करती है.

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प्रयोग के प्रतिभागी एक हेड सेट पहनते हैं जो उनके दिमाग की गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है और पता लगाता है कि धीमी तरंगें कब बननी शुरू हुईं.
फिर यह उपकरण रात में नियमित अंतराल पर दिमाग की स्वाभाविक धीमी तरंगों की लय के साथ मिलती हुई मधुर ध्वनियां बजाता है.
ये ध्वनियां इतनी धीमी होती हैं कि नींद न खुले, लेकिन इतनी तेज़ ज़रूर होती हैं कि मस्तिष्क अवचेतन अवस्था में भी उनको रिकॉर्ड कर ले.
बोर्न ने ऐसे कई प्रयोगों का नेतृत्व किया है. उन्होंने पाया कि ये मीठी आवाज़ें मस्तिष्क की लय को सुदृढ़ करने के लिए पर्याप्त हैं. ये ध्वनियां स्लो-वेव नींद को गहरी करती हैं.
हेडसेट पहनने वाले प्रतिभागियों ने याददाश्त परीक्षण में बेहतर प्रदर्शन किया. उन्हें एक दिन पहले सुनी गई बातें भी याद रहीं.
उनके हार्मोन का संतुलन भी सुधर गया- कोर्टिसोल का स्तर घट गया और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में सुधार आ गया.
अब तक के परीक्षणों में प्रतिभागियों ने किसी अवांछित प्रतिक्रिया की सूचना नहीं दी है.
बोर्न कहते हैं, "हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो सकते, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट दुष्प्रभाव नहीं दिखा है."

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बेहतर नींद की मशीनें
गहरी नींद को बढ़ाने वाले ज़्यादातर प्रयोग युवा और स्वस्थ प्रतिभागियों के छोटे समूह पर किए गए हैं. इसके फायदों के बारे में पक्की राय बनाने से पहले विविध समूहों पर बड़े परीक्षणों की ज़रूरत है.
मौजूदा सबूतों के आधार पर इस तकनीक का इस्तेमाल करके रात में पहने जाने वाले कुछ हेडबैंड बनाए गए हैं.
फ़्रांसीसी स्टार्ट-अप कंपनी ड्रीम के हेडबैंड की कीमत करीब 400 यूरो या 330 पाउंड है. यह ध्वनि उत्तेजना का इस्तेमाल करके गहरी नींद को बढ़ाता है.
यह हेडबैंड एक ऐप से भी जुड़ता है जो नींद के पैटर्न का विश्लेषण करता है और अच्छी नींद के लिए व्यावहारिक सलाह देता है.
इनमें ध्यान और सांस का अभ्यास शामिल है जिससे आप ज़ल्दी सो जाएं और रात में नींद कम खुले. मकसद है कि पूरी रात अच्छी नींद आए.
फिलिप्स ने नींद की कमी के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए स्मार्ट स्लीप या डीप स्लीप हेडबैंड बनाया है.
फिलिप्स के चीफ़ साइंटिफ़िक ऑफिसर डेविड व्हाइट के मुताबिक उनका हेडबैंड उन लोगों के लिए हैं जिनको किसी भी वजह से भरपूर नींद नहीं मिल पा रही है.
ड्रीम के हेडबैंड की तरह फिलिप्स ने भी अपने हेडबैंड को पहले 2018 में लॉन्च किया था.
यह दिमाग की विद्युत गतिविधियों को महसूस करता है और नियमित अंतराल पर कुछ मीठी आवाज़ें निकालता है जिससे उसी तरह की तरंगें पैदा होती हैं जो गहरी नींद की विशेषता हैं.
यह एक स्मार्ट सॉफ़्टवेयर पर आधारित है जो अलग अलग लोगों के लिए आवाज़ की तीव्रता को बारीकी से नियंत्रित करता है. यह हेडबैंड अमरीका में 399 डॉलर में उपलब्ध है.
व्हाइट मानते हैं कि यह उपकरण रात की नींद का संपूर्ण विकल्प तो नहीं हो सकता, लेकिन नींद की कमी वाले लोगों को उनकी जीवनशैली बदलने के लिए कहना बेहद मुश्किल है तो उनको जितनी नींद मिल रही है उसी के फायदों को बढ़ाकर यह हेडबैंड रोजमर्रा की ज़िंदगी में उनकी मदद कर रहा है.

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याददाश्त घटने के दुष्प्रभाव को भी कम करता
नींद की कमी से जूझ रहे लोगों में यह याददाश्त घटने जैसे दुष्प्रभावों को भी कम करता है.
मॉन्ट्रियल की कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी की अरोर पेराल्ट ने रॉकिंग बेड का परीक्षण किया है जो हर 4 सेकेंड में हौले-हौले आगे-पीछे झूलता है.
यह तकनीक उनके एक सहकर्मी के नवजात बच्चे को सुलाने के तरीके से प्रेरित है. उनकी टीम हैरान थी कि क्या वास्तव में वयस्कों को भी हौले-हौले झूलने से फायदा हो सकता है.
उन्होंने पाया कि प्रतिभागी ज़ल्दी गहरी नींद में चले गए और ज़्यादा देर तक उस अवस्था में रहे क्योंकि दिमाग की तरंगों का बाहरी गति से मेल हो रहा था.
रात भर सोने के बाद वे अधिक तनाव-मुक्त महसूस कर रहे थे. इससे उनकी याददाश्त और सीखने की क्षमता पर भी अच्छा प्रभाव पड़ा.
यदि इस तरह का खाट बाज़ार में आता है तो वह ध्वनि-उत्तेजक हेडबैंड जैसे मकसद को ही पूरा करेगा.
पेराल्ट की दिलचस्पी इसमें है कि क्या यह बूढ़े लोगों के लिए मददगार हो सकता है.
बढ़ती उम्र के साथ गहरी नींद की मात्रा घटती जाती है जिससे याददाश्त पर भी असर पड़ता है. पेराल्ट को उम्मीद है कि झूलने वाला खाट उससे निपटने का एक तरीका हो सकता है.

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फिर भी, कुछ नींद लीजिए
यह क्षेत्र अभी शुरुआती अवस्था में है, लेकिन इन अध्ययनों से लगता है कि हमारी नींद बढ़ाने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है.
पेराल्ट और बोर्न दोनों ध्वनि की उत्तेजना का इस्तेमाल करके धीमी तरंगों को पैदा करने वाले वाणिज्यिक उत्पादों को लेकर आशावादी हैं.
पेराल्ट को लगता है कि प्रयोगशाला से बाहर की परिस्थितियों में इस पर और परीक्षण की ज़रूरत है.
भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस तरह की नींद से लंबी अवधि के फायदे भी मिल सकते हैं.
लंबे वक़्त तक नींद की कमी हो तो डायबिटीज़ और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के जोखिम बढ़ जाते हैं, लेकिन अभी तक यह साफ़ नहीं हो पाया है कि क्या नई तकनीक उन जोखिमों को कम करने में मदद करेगी.
अभी तक दीर्घकालिक और अल्पकालिक- सभी तरह के फायदे पाने का एक ही गारंटीशुदा तरीका है और वह है भरपूर नींद लेना.
आप इन उपकरणों को ख़रीदें या न ख़रीदें, आपको रात में ज़ल्दी सोने, शराब, कैफीन का सेवन कम करने और सोने से पहले स्क्रीन से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए.
हमारा दिमाग रिचार्ज के बिना काम नहीं कर सकता. खुशहाल, सेहतमंद, उपयोगी ज़िंदगी जीने की चाहत रखने वाले सभी लोगों को यह बात समझ लेनी चाहिए.
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