ऑन स्क्रीन पढ़ना हमारे दिमाग़ पर कैसे असर डालता है?

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- Author, अंजलि दास
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि पढ़ने से उन्होंने ये सीखा कि वे कौन हैं और किसमें विश्वास करते हैं.
पढ़ने की आदत तनाव कम करती है, दिमाग़ को सक्रिय रखती है और आपकी संवेदना के स्तर को भी सुधारती है. साथ ही किताबों में दर्ज तमाम नई जानकारियां तो आपको मिलती ही हैं.
न्यूयॉर्क के दि न्यू स्कूल फ़ॉर सोशल रिसर्च के मुताबिक़ किताबें पढ़ने से व्यक्ति के सिद्धांतों में भी बदलाव हो सकता है.
पर आज कागज़ या किताब आधारित पढ़ाई से लोग धीरे-धीरे कंप्यूटर, टैबलेट, मोबाइल जैसे डिजिटल उपकरणों पर पढ़ने की ओर बढ़ रहे हैं. ख़ासकर कोविड महामारी के बाद इसमें बड़ा इज़ाफा भी देखा गया है.
ऑन स्क्रीन पढ़ाई के फायदे
स्मार्टफ़ोन पर छोटे न्यूज़ अपडेट आदि आराम से पढ़े जा सकते हैं. लेकिन अगर आप जज़्बातों से भरी और समझने में मुश्किल चीज़ स्मार्टफ़ोन पर पढ़ते हैं तो आपकी समझने की क्षमता कम होती है.
वैसे तो डिजिटल माध्यम के ज़रिए पढ़ने के अपने स्पष्ट फायदे भी हैं, जैसे कि कम कीमत पर वही किताब पढ़ना जिसकी हार्ड कवर कॉपी अधिक दाम पर मिलती है. पर कई शोध के मुताबिक़ इसके नुक़सान भी हैं.
बीबीसी रील पर छपी कहानी – ‘व्हाट डज़ रीडिंग ऑन स्क्रीन डू टू ऑर ब्रेन’ के मुताबिक़ डिजिटलीकरण के प्रभाव पर शोध के लिए 30 से अधिक देशों के स्कॉलर और वैज्ञानिकों को एक साथ लाया गया.
इस शोध में क्या पाया गया इसके बारे में नॉर्वे के स्टवान्गर यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर और लेखक ऐनी मैंगेन कहती हैं, "हमने पाया कि कई ऐसी चीज़ें हैं जो हम स्मार्टफ़ोन पर पढ़ सकते हैं जिसमें शॉर्ट न्यूज़ अपडेट जैसी चीज़ें भी शामिल हैं. पर इस शोध में हमने पाया कि काग़ज़ पर पढ़ने की तुलना में स्क्रीन पर पढ़े गए कॉन्टेंट की आसान समझ कम होती है."
अमेरिकी ग़ैर-सरकारी संस्था 'सेपियन लैब्स' की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ कम उम्र में बच्चों को स्मार्टफ़ोन देने के विपरीत असर उनके युवावस्था में दिखते हैं.
साइंटिफ़िक अमेरिकाना के मुताबिक़ काग़ज़ की तुलना में जब हम स्क्रीन पर पढ़ते हैं तो हमारा मस्तिष्क अधिक संसाधनों का इस्तेमाल करता है साथ ही जो कुछ भी स्क्रीन पर पढ़ते हैं उसे लंबे समय तक याद रखना कठिन होता है.
तो हम क्या और कितना पढ़ते हैं उससे अधिक ज़रूरी यह है कि हम उसे किस माध्यम के ज़रिए पढ़ते हैं. क्योंकि एक इंसानी दिमाग़ पर पढ़ाई करने से असर पड़ता है. यह आपके विजुअल रिज़न, लैंग्वेज रिज़न और सोच और इमोशन के रिज़न को एक नए संबंध के साथ जोड़ता है.
'बच्चे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के इस्तेमाल से बचें'

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अश्विका भट्टाचार्य 9वीं कक्षा की छात्रा हैं. अपनी कक्षा में हमेशा प्रथम आने वाली अश्विका जहां किताबें पढ़ती हैं वहीं उनका रुझान स्क्रीन पर पढ़ने की ओर बढ़ रहा है.
वैसे तो उनके माता-पिता ने उन्हें पढ़ने के लिए किंडल टैबलेट दिया है पर अब वो उसे वापस पूरी तरह से किताबों की ओर मोड़ना चाहते हैं.
अश्विका की मां आसीमा कहती हैं, "हम लगातार ये पढ़ रहे हैं कि गैजेट्स ज्यादा इस्तेमाल करने के आंखों पर कई तरह के दुष्प्रभाव हैं लिहाजा मैं अपनी बेटी को वापस किताबों की ओर मोड़ना चाहती हूं."
वहीं अश्विका की ही दोस्त आद्या कहती हैं कि आप रोज़ थोड़ा-थोड़ा कर के पढ़ सकते हैं.
वे सुझाव देती हैं, "आप अपने दोस्तों और टीचर से अच्छी किताबों के बारे में पूछें और अपनी रुचि के मुताबिक किताबें पढ़ें."
लाइब्रेरी से भी ले सकते हैं किताबें

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ब्रिटिश काउंसिल के लाइब्रेरी की सदस्य आद्या कहती हैं, "ज़रूरी नहीं है कि हर किताब ख़रीद कर ही पढ़ी जाए. आप स्कूल या आपके आस-पास की लाइब्रेरी के सदस्य भी बन सकते हैं."
इन्फ़ोसिस समूह की डायरेक्टर और लेखक सुधा मूर्ति भी कहती हैं कि बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.
वो कहती हैं, "आज बच्चों के सामने ध्यान भटकाने के लिए कई चीज़ें मौजूद हैं, जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट. मैं चाहूंगी की बच्चे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से आंखों को होने वाले नुकसान से बचें."
पद्मश्री सुधा मूर्ति ने जयपुर साहित्य महोत्सव के दौरान कहा था, "बच्चों को कम से कम 14 साल की उम्र तक किताबें पढ़ने पर ज़ोर दें. इस दौरान माता-पिता अपने बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से पूरी तरह से दूर रखने की कोशिश करें. जब बच्चे 16 साल के हो जाएं तो फिर आप उन पर ये छोड़ सकते हैं कि आगे वो किताबें पढ़ना जारी रखना चाहते हैं या नहीं."
पढ़ने से आपको तीन फायदे होते हैं. ये आपको क्रिएटिव और इंटेलिजेंट बनाने के साथ ही दूसरों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है.
पढ़ने के तीन चमत्कारी फायदे
बीबीसी के सहयोगी डेनियल निल्स रॉबर्टस के रील ‘व्हाट डज़ रीडिंग ऑन स्क्रीन डू टू ऑर ब्रेन’ में ब्रिटिश लेखक और इलस्ट्रेटर क्रेसिडा कॉवेल कहती हैं, पढ़ने से तीन चमत्कारी गुण आते हैं- रचनात्मकता, ज्ञान और सहानुभूति.
वे कहती हैं, "किसी बच्चे को पढ़ना अच्छा लगता है तो उसके दो फायदे हैं. एक तो उसके ज्ञान का दायरा बढ़ रहा है और दूसरा भविष्य में वो आर्थिक रूप से भी सफल हो सकता है."
पढ़ने के चमत्कारी गुण
- रचनात्मकता, ज्ञान और सहानुभूति बढ़ती है.
- दिमाग़ में विजुअल, लैंग्वेज, इमोशन रिज़न में नए संबंध बनते हैं.
- पढ़ने से ज्ञान और आर्थिक दायरा बढ़ता है.
- किताबें पढ़ने से आपका दिमाग़ शांत होता है, तनाव घटता है.
- स्क्रीन पर पढ़ी गई चीज़ें लंबे समय तक याद रखना कठिन होता है.

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पढ़ने की शुरुआत हुई कब?
‘व्हाट डज़ रीडिंग ऑन स्क्रीन डू टू ऑर ब्रेन’ नामक इस बीबीसी रील में इसके बारे में रिसर्च स्कॉलर मैरिएन वुल्फ़ कहती हैं कि पढ़ना एक कला है जिसकी शुरुआत कुछ छह हज़ार साल पहले हुई थी.
वे बताती हैं, "इसकी शुरुआत कुछ इस तरह की गिनती से हुई थी कि जैसे हमारे पास शराब की कितने बर्तन या भेड़ें हैं. जब वर्णमाला बनाई गईं तो उसके ज़रिए इंसानों ने किसी चीज़ को पढ़ कर याद रखने और जानकारियां हासिल करने की कला सीखी.”
किताबें क्यों पढ़नी चाहिए?

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आर्ट्स और ह्यूमैनिटी के एसोसिएट डायरेक्टर अकादमिक सलाहकार डॉ. एमिलि बुलॉक और क्रिएटिव राइटिंग के लेक्चरर डॉ. जोआन रियरडन के साथ मिलकर बनाए गए बीबीसी रील ‘व्हाट डज़ रीडिंग ऑन स्क्रीन डू टू ऑर ब्रेन’ में ब्लैक गर्ल्स बुक क्लब की फाउंडर नताली कार्टर कहती हैं कि हर किसी को किताबें पढ़नी चाहिए.
वे कहती हैं, "किताबें हमारे जीवन को अनुभव देती हैं. ये जानकारियों से भरपूर होती हैं. ये हमारे समाज के बारे में बताती हैं.
नताली कहती हैं, "मुझे लगता है कि भविष्य में हम छोटी कहानियों के संग्रह ज़्यादा देखेंगे, साथ ही किताबों के आकार और भी छोटे हो जाएंगे. अगर किताबें न हों तो हम मर जाएंगे, ज़िंदगी बहुत उबाऊ होगी."
बिब्लियोथेरेपिस्ट एला बर्थोड कहती हैं, "किताबें नहीं होतीं तो आज हम जिस तरह के इंसान हैं वैसे नहीं होते. इंसानी जीवन में 'आग पैदा करने की ताक़त' और 'पढ़ने का हुनर' आने से सबसे बड़ा बदलाव हुआ."
बिब्लियोथेरेपी (Bibliotherapy) के ज़रिए एक इंसान के मनः स्थिति का उपचार किया जाता है. इसमें अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ किताब पढ़ना शामिल होता है.
एला बर्थोड कहती हैं, "एक शानदार कहानी पढ़ना मनोरंजन से भी कहीं अधिक बढ़िया है. पढ़ने का एक तरह से चिकित्सकीय उपचार जैसा फायदा है."
एला उदाहरण देती हैं, "किसी बन्द जगह मे घुटन जैसा महसूस करना, थकावट और क्रोध जैसी चीज़ों के लिए 'ज़ोरबा द ग्रीक' पढ़ने की सलाह दी जाती है."
वे कहती हैं, "इसमें आपका दिमाग़ ध्यान की स्थिति में चला जाता है. यह वो प्रक्रिया है जो दिल की धड़कन को संतुलित करता है, इससे आप शांत हो जाते हैं और यह आपके दिमाग़ में चल रही चिंता को घटा देता है."
(इस कहानी को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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