बॉबी देओल ने सुनाई अपने करियर की कहानी, बोले- मैं ख़ुद पर तरस खाने लगा था

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साल 1995 में आई फ़िल्म 'बरसात' से बतौर लीड एक्टर अपना करियर शुरू करने वाले बॉबी देओल को फ़िल्म इंडस्ट्री में 25 साल से ज़्यादा हो गए हैं.
इस दौरान उन्होंने अलग-अलग दौर देखे. उन्होंने स्टारडम का वो दौर देखा जब युवाओं के बीच उनके लंबे बाल और सनग्लासेज़ का क्रेज़ था, और वो बुरा दौर भी जब उनकी फ़िल्में आना क़रीब-क़रीब बंद ही हो गई थीं.
फिलहाल, बॉबी देओल बड़े पर्दे और ओटीटी दोनों पर सक्रिय हैं.
बीबीसी हिंदी से बातचीत में बॉबी देओल अपने करियर के हर दौर के बारे में बता रहे हैं. वो ये भी बता रहे हैं कि कैसे एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें खुद पर तरस आने लगा था.
बॉबी देओल कहते हैं, "शुरुआत के सात-आठ साल मेरा करियर बेहतर तरीके से चला. पहले मैं चीज़ों को फेस वैल्यू पर लिया करता था. मुझे नहीं मालूम था कि लोग पीछे से जाकर आपका काम छीन लेंगे. इसलिए मैंने काफी प्रोजेक्ट गंवाए. फिर धीरे-धीरे आप गलत फिल्में चुनने लगते हैं. आप ये नहीं समझ पाते हैं कि लोग आपके साथ काम क्यों नहीं कर चाहते? अचानक आप हार मानने लगते हैं."
बॉबी अपने मुश्किल दौर को याद करते हुए कहते हैं, "मैं खुद पर तरस करने लगा था. ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए. जब भी मैं बाहर जाता था, मेरे फैन्स मुझसे मिलते थे. वो कहते थे कि सर हम आपको स्क्रीन पर देखने के लिए तरस रहे हैं. फिर मुझे लगता था कि अगर मेरे फैन्स मुझे देखना चाहते हैं तब मुझे काम क्यों नहीं मिल रहा?"
'पापा आप घर बैठे रहते हैं, काम पर नहीं जाते'
बॉबी देओल का कहना है कि वो कभी भी बड़ा स्टार या सुपरस्टार बनने के चक्कर में नहीं पड़े, उन्हें लोगों के दिल में जगह बनाना पसंद था. लेकिन एक के बाद एक कई फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रहने के बाद लोग उनके साथ काम करने से बचने लगे.
वो कहते हैं कि एक दौर ऐसा भी आया जब वो हार मानने लगे. वो कहते हैं, "मेरे बेटे बहुत छोटे थे. वो मुझसे कहते थे कि पापा आप घर पर बैठे रहते हैं काम पर नहीं जाते हैं. मम्मी काम पर जाती हैं. तब मुझे ये अहसास हुआ कि आख़िर मैं कर क्या रहा हूं."
वो कहते हैं, "मुझे ये अहसास हुआ कि मुझे हार नहीं माननी है. मेरे बच्चे देख रहे हैं कि मैं घर पर बैठा हूं और मेरी पत्नी काम कर रही है. मैंने तय कर लिया कि मुझे अपने बच्चों के लिए एक अच्छा उदाहरण बनना है. अगर मैं लूज़र बन गया तो मेरे बच्चे कैसे आगे बढ़ेंगे. फिर मैंने खुद पर मेहनत करनी शुरू की और सेहत का ख़याल रखना शुरू किया."

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बुरे दौर में सलमान ने दी सलाह
बॉबी देओल अपने बुरे दौर के बारे में बताते हुए सलमान ख़ान की सलाह का भी ज़िक्र करते हैं. वो कहते हैं कि इस दौरान उन्होंने दाढ़ी बढ़ा ली थी.
वो कहते हैं, "सलमान जब भी मुझसे मिलते, कहते कि ये क्या दाढ़ी उगा ली है तुमने. मैं उनको प्यार से मामू बोलता हूं, मैं उनसे कहता था कि कोई काम तो देता नहीं है. इस पर वो कहते थे कि जब मेरा (सलमान) ख़राब दौर चल रहा था तो मैं संजय दत्त की पीठ पर चढ़ गया था. इस पर मैं कहता कि मामू अब मुझे आप अपनी पीठ पर चढ़ने दो. मुझे भी काम दिलवाओ. फिर मुझे रेस-3 मिली."

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शेखर कपूर करने वाले थे बॉबी देओल को लॉन्च
बीबीसी से बातचीत में बॉबी देओल अपने करियर के शुरुआती दिनों के बारे में भी खुलकर बात की. अपने पिता धर्मेंद्र की 'धर्मवीर' फ़िल्म में उन्होंने बतौर बाल कलाकार काम किया था. इसका एक किस्सा सुनाते हुए बॉबी कहते हैं, "मैं जब 6 साल का था, तब पापा ने आकर मुझसे पूछा कि मेरे बचपन का रोल करोगे. मैंने कहा क्यों नहीं? उस वक्त एक ही रात में मेरे कपड़े बनाए गए."
बॉबी देओल बताते हैं कि उनकी पहली फ़िल्म शेखर कपूर डायरेक्ट करने वाले थे और इसकी शूटिंग 27 दिन तक चली भी थी. लेकिन शेखर कपूर को हॉलीवुड से ऑफ़र आ गया, जिसकी वजह से फ़िल्म पूरी नहीं हो सकी.
बॉबी देओल बताते हैं, "अचानक से उन्हें हॉलीवुड से किसी और फ़िल्म का ऑफ़र आ गया तो मेरे पापा ने उनसे कहा कि ये मेरे बेटे की पहली फ़िल्म है, पहले तय कर लो कि ये फ़िल्म करनी है या वो हॉलीवुड की करनी है. शेखर कपूर दूसरी फ़िल्म करने चले गए."
बॉबी देओल कहते हैं, "उस वक्त राजकुमार संतोषी 'घायल' फ़िल्म बना चुके थे, भईया की उनकी अच्छी दोस्ती थी. संतोषी भी एक्साइटेड थे. फिर से शूटिंग शुरू हुई. क़रीब 2 साल लग गए. फिर 1995 में पहली फ़िल्म रिलीज हुई. मेरे सनग्लासेज और लंबे बाल ट्रेंड बन जाएंगे, मुझे इसका भरोसा नहीं था."
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