मेटावर्स: क्यों है इस पर टिकी बॉलीवुड की नज़र?

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- Author, पराग छापेकर
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
वैसे तो एंटरटेनमेन्ट की दुनिया वास्तविकता की गहराई से लेकर कल्पना के आकाश तक कहीं भी जा सकती है. हालांकि दर्शकों तक अपनी बात पहुँचाने के लिए ह्यूमन प्रेज़ेन्स का होना ज़रूरी होता है, लेकिन अब एक आभासी दुनिया की कल्पना कर हर तरह के दृश्य को क्रिएट करना भी संभव हो रहा है और इसे बॉलीवुड हाथों हाथ लेने को तैयार है.
हम बात कर रहे हैं- मेटावर्स की. फ़िल्मी दुनिया अब तैयार है मेटावर्स के ज़रिए अपनी फ़िल्मों को एक ऐसी दुनिया में ले जाने के लिए जो शायद सपने से भी परे हो. बॉलीवुड के बड़े निर्माता इस मेटावर्स के सहारे मनोरंजन को एक अलग ही लेवल पर ले जा सकते हैं.
अनुमान है कि बस दो साल में भारत में मेटावर्स का मार्केट 800 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगा. शुरुआत भी जल्द होने वाली है जिसकी घोषणा 'बड़े मियां छोटे मियां' नाम की फ़िल्म के साथ हो चुकी है.
आगे बढ़ने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि आखिर ये मेटावर्स बला क्या है? मेटावर्स दो शब्दों से मिलकर बना है. मेटा यानी बियॉन्ड, अर्थात वो चीज़ जो अस्तित्व में ही न हो और सोच से भी परे हो. वर्स यानी यूनिवर्स जिसे देखा नहीं जा सकता. कुल मिलाकर एक आभासी दुनिया.
साल 1992 में जब नील स्टीफ़ेन्सन ने अपनी किताब 'स्नो क्रश' में इसकी कल्पना की थी तभी से ये समझ में आ गया था कि एक दिन इंसानी दिमाग़ इसे वास्तविक रूप देगा.
सरल शब्दों में कहें तो मेटावर्स का मतलब है एक ऐसी जगह जहां आप हैं ही नहीं या शायद होने की सोच भी नहीं सकते, वहां आप टेक्नोलॉजी के सहारे वर्चुअली अपनी मौजूदगी दर्ज करा दें.
कोई भी अपने घर पर बैठे अपने पसंद की दुनिया और अपनी पसंद की चीज़ के पास पहुंच पाएगा. मेटावर्स 3डी स्पेस में यूज़र्स को एक साथ काम करने, मिलने, गेम खेलने और सोशलाइज़ करने का मौका देगा.
मेटावर्स बनेगा फ़िल्मी दुनिया का हिस्सा?

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हाल के वर्षों में भारतीय फ़िल्मों में टेक्नोलॉजी के ज़रिए भव्यता लाने के कई प्रयोग किए गए हैं. वीएफ़एक्स और स्पेशल वर्चुअल इफ़ेक्ट्स तो कई फ़िल्मों या वेब सिरीज़ का हिस्सा बने हैं, लेकिन अब मेटावर्स को फ़िल्मों का हिस्सा बनाने की शुरुआत हो रही है.
एंटरटेनमेंट कंपनी पूजा एंटरटेनमेंट, मेटावर्स में फ़िल्म लाने वाली पहली प्रोडक्शन कंपनी होगी. कुछ दिनों पहले इस बैनर ने अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ को लेकर 'बड़े मियां छोटे मियां' की घोषणा की.
कंपनी ने इस वर्चुअल प्लेस को पूजावर्स का नाम दिया है. अगले साल क्रिसमस के मौके पर आने वाली ये फ़िल्म हिंदी के अलावा तेलुगू, तमिल, कन्नड़ और मलयालम में भी रिलीज़ की जाएगी.
जाने-माने निर्माता और पूजा एंटरटेनमेंट के प्रमुख वाशु भगनानी कहते हैं, "मेटावर्स दुनिया में एक नई चीज़ आई है और जब ऐसा कुछ होता है पूरी दुनिया को फ़ायदा होता है. बॉलीवुड को सबसे बड़ा फ़ायदा ये होगा कि उसे पूरी दुनिया देखने के लिए मिलेगी. सामान्यतः हमें टेरेटरी के ज़रिए चाइना या यूएस जाना पड़ता था, लेकिन अब उसकी ज़रूरत नहीं होगी. मैं चाह रहा हूं कि मैं इसके भीतर एक बड़ा शहर बनाऊं. इसके लिए मेरे पास प्लान है."
वाशु भगनानी के मुताबिक़ इससे बॉलीवुड को ज़्यादा काम मिलेगा और दुनिया में सम्मान भी बढ़ जाएगा. सलमान ख़ान, अक्षय कुमार, रितिक रोशन, टाइगर श्रॉफ़ वगै़रह को मेटावर्स से बहुत फ़ायदा होगा.
जाने-माने सितारे मेटावर्स पर आ रहे हैं
अजय देवगन 'रूद्र-द एज ऑफ़ डार्कनेस ' के ज़रिए वेब सिरीज़ की दुनिया में उतर चुके हैं और उन्होंने भी मेटावर्स को अपनाया है. इस मेटावर्स के लिए हंगामा डिजिटल के वेब3 वेंचर हेफ़्टी एंटरटेनमेंट के साथ टाई-अप किया गया है.
अजय देवगन बताते हैं कि "मेटावर्स का रोमांच एक नई दुनिया की ओर ले जाता है. रूद्र- द एज ऑफ़ डार्कनेस में मेरे अवतार के साथ, मेटावर्स एक अहम हिस्सा होगा. इस साइकोलॉजिकल क्राइम ड्रामा में अजय देवगन पुलिसवाले की भूमिका में हैं और साथ में इशा देओल और अतुल कुलकर्णी जैसे कलाकार भी हैं. बिट्रिश सिरीज़ 'लूथर' के इस इंडियन वर्ज़न को बीबीसी स्टूडियोज़ इंडिया भी प्रोड्यूस कर रहा है.

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कमल हासन भी मेटावर्स में आ रहे हैं. वो फ़्रैंटिको के साथ मिलकर अपने नए डिजिटल अवतार यानी डिजिटल रियलिटी स्पेस को लॉन्च करने जा रहे हैं.
फ्रैंटिको एक गेम आधारित मेटावर्स है जिसमें कमल हासन की अपनी एक अलग वर्चुअल दुनिया होगी. ये एक डिजिटल रियलिटी स्पेस होगा जिसके ज़रिए पूरी दुनिया में मौजूद उनके फ़ैन्स उनकी दुनिया से जुड़ेंगे, उनका डिजिटल अवतार देखेंगे और मर्चेन्डाइज़ भी ख़रीद सकेंगे.
कमल हासन ने अपने एक बयान में कहा है कि "मैं इस उभरती हुई डिजिटल और फ़िजिकल दुनिया को जानने के लिये बेहद उत्सुक हूं जिसे अब मेटावर्स के नाम से जाना जा रहा है. छह दशकों से भी ज़्यादा के जीवन के मेरे सफ़र ने मेरे पर्सनल और प्रोफ़ेशनल जीवन के उस अंतर को मिटा दिया है."
वैसे शायद आपको पता हो कि जस्टिन बीबर, मार्शमेलो, ट्रैविस स्कॉट सहित कई इंटरनेशनल सिंगर्स पहले ही मेटावर्स में कॉन्सर्ट कर चुके हैं और सिंगर दलेर मेहंदी मेटावर्स में परफ़ॉर्म करने वाले पहले भारतीय कलाकार बने हैं. पिछले दिनों गणतंत्र दिवस के मौके पर उन्होंने मेटावर्स परफ़ॉर्मेंस किया. उन्होंने पार्टी नाइट के नाम से एक म्यूज़िकल किया.

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भारत में कई मेटावर्स स्टार्टअप आने से मेटावर्स स्पेस बढ़ने लगा है. म्यूज़िक कंपनी टी-सिरीज़ ने हंगामा टीवी के साथ ज्वाइंट वेंचर में मेटावर्स में आने की घोषणा की है. टी-सिरीज़ के सर्वेसर्वा भूषण कुमार ने बताया है कि उन्होंने अपने साथी 'हंगामा' के साथ बॉलिंग रोलिंग सेट की है जो एनएफ़टी यानी डिजिटल कलेक्टेबल्स और 'मनी कैन नॉट बाय' का अनुभव बनाएगा और विशाल कैटलॉग से स्पेशल मूवमेन्ट्स को अनलॉक करेगा.
अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने की ताक़त
इससे भारतीय भाषाओं में दो लाख गाने और 65,000 संगीत वीडियो और 150+ फ़िल्में दर्शकों तक पहुंचेंगी. उन्होंने बताया कि ये दुनिया भर के यूज़र्स को इन डिजिटल कलेक्टेबल्स को ख़रीदने और व्यापार करने में सक्षम बनाएगा और यही कमाई का ज़रिया बनेगा.
भूषण कुमार के अनुसार, ''फ़िलहाल, मेटावर्स गेमिंग की ओर अधिक केंद्रित है. हम शुरुआती चरण में हैं, लेकिन अवसरों का एक विशाल पूल देखते हैं. अब हमारे लिए, एम एंड ई उद्योग के लिए मेटावर्स की अवधारणा को अपनाने और विस्तार करने का समय है. मेटावर्स में मनोरंजन लाने से नए दर्शकों के लिए जगह मिलेगी.''

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टी सिरीज़ प्रमुख विस्तार से बताते हैं, "उदाहरण के लिए आज के समय में यदि कोई कार्यक्रम या संगीत कार्यक्रम है जिसे हम होस्ट कर रहे हैं, तो इसे लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर करने के बजाय, हम मेटावर्स तरीका अपना सकते हैं और दर्शकों को दुनिया से बाहर का अनुभव प्रदान कर सकते हैं. मुझे लगता है कि ये मनोरंजन की दुनिया में योगदान दे सकता है, बशर्ते हम सभी अपने पत्ते सही तरीक़े से खेलें और लीक से हटकर सोचें."
भूषण कुमार कहते हैं कि मेटावर्स कई पहलुओं में मदद करेगा. ये अर्थव्यवस्था में भी बदलाव लाएगा. ये माना जा रहा है कि वर्ष 2024 के अंत तक मेटावर्स का अनुमानित बाज़ार मूल्य 800 बिलियन डॉलर होगा. मेटावर्स गेमिंग की दुनिया में अनुभव अच्छी तरह से आ गया है, लेकिन हमें मनोरंजन उद्योग में अपना पैर जमाने की ज़रूरत है.
भारत मेटावर्स क्रांति के लिए तैयार लगता है. लगभग 2.7 बिलियन वर्ल्डवाइड गेमर्स बेस का 16 फ़ीसदी भारत में है. देश में क़रीब 100 करोड़ स्मार्टफ़ोन हो चुके हैं और डाउनलोडिंग में भी इंडिया काफ़ी बेहतर रहा है तो ऐसे में मेटावर्स, कल्पना की दुनिया में ऊंची उड़ान का ज़रिया बनेगा.
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