क़तर में क़ैद पूर्व नौसैनिकों के मामले में भारत को मिली ये सफलता

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क़तर की जेल में बंद भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों से चार दिन पहले भारतीय राजदूत ने मुलाकात की है.
यह जानकारी गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने दी है.
ये आठ भारतीय अधिकारी पिछले साल अगस्त से ही क़तर की जेल में हैं. 26 अक्टूबर को क़तर की एक अदालत ने इन आठ भारतीय अधिकारियों को फांसी की सजा सुनाई थी.
तब विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत सरकार इस फैसले से स्तब्ध है और वह इसे सुलझाने के लिए सारे कानूनी रास्ते तलाशेगी.
नौसेना के पूर्व अधिकारियों के परिवारों ने मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ क़तर की अदालत में अपील दायर की थी.
जब गुरुवार को यह प्रश्न विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में पूछा गया तो प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं कि हमने एक अपील दायर की है, जो परिवार और बंदियों की तरफ से है. तब से अब तक दो सुनवाई हो चुकी है. मुझे लगता है कि एक सुनवाई 30 नवंबर को और दूसरी 23 नवंबर को हुई है.”
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि अगली सुनवाई जल्द होने वाली है. हम मामले पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और सभी कानूनी और कांसुलर सहायता दे रहे हैं. इस बीच 3 दिसंबर को जेल में बंद सभी आठ लोगों से मिलने के लिए हमारे राजदूत को काउंसलर एक्सेस मिल गई है.”
न्यूज वेबसाइट द टेलीग्राफ के मुताबिक इससे पहले भी भारतीय दूतावास के अधिकारी को काउंसलर एक्सेस मिला था.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बागची से पत्रकारों ने पूछा कि क्या पीएम मोदी ने पिछले हफ्ते दुबई में COP28 शिखर सम्मेलन के समय क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाकात के दौरान इस मामले को उठाया था?
बागची ने इसका सीधा जवाब न देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट का हवाला दिया.
इस पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा है, “द्विपक्षीय साझेदारी की संभावना और क़तर में भारतीय समुदाय को लेकर हमारी अच्छी बातचीत हुई.”

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क्या है पूरा मामला?
सितंबर 2022 में क़तर सरकार ने 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को गिरफ़्तार किया था. मार्च में इन पर जासूसी के आरोप तय किए गए थे.
गिरफ़्तार किए गए आठ भारतीय नागरिक नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं और क़तर की ज़ाहिरा अल आलमी नाम की कंपनी में काम करते थे.
ये कंपनी सबमरीन प्रोग्राम में क़तर की नौसेना के लिए काम कर रही थी. इस प्रोग्राम का मक़सद रडार से बचने वाले हाईटेक इतालवी तकनीक पर आधारित सबमरीन हासिल करना था.
कंपनी में 75 भारतीय नागरिक कर्मचारी थे. इनमें से अधिकांश भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी थे. मई में कंपनी ने कहा था कि वो 31 मई 2022 से कंपनी बंद करने जा रही है.
कंपनी की वेबसाइट पर उसे क़तर के रक्षा मंत्रालय, सुरक्षा और दूसरी सरकारी एजेंसियों का स्थानीय व्यापारिक पार्टनर बताया गया है.
ये प्राइवेट कंपनी क़तर की सशत्र सेना को ट्रेनिंग और सर्विस मुहैया कराती थी.
कंपनी ने ख़ुद को रक्षा उपकरणों को चलाने और उनकी मरम्मत और देखभाल करने का विशेषज्ञ बताया है.
इस वेबसाइट पर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों और उनके पद की पूरी जानकारी दी गई है. उनमें कई भारतीय भी शामिल हैं.
कंपनी के लिंक्डइन पेज पर लिखा है, "यह रक्षा उपकरणों को चलाने और लोगों को प्रशिक्षण देने के मामले में क़तर में सबसे आगे है."
आगे लिखा है, "अल ज़ाहिरा कंपनी सुरक्षा और ऐरोस्पेस के मामले में क़तर में विशेष हैसियत रखती है."
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, कंपनी के प्रमुख खमीस अल अजामी और गिरफ़्तार किए गए 8 भारतीयों के ख़िलाफ़ कुछ आरोप सामान्य हैं जबकि कुछ ख़ास क़िस्म के हैं.
जासूसी के आरोप में गिरफ़्तार आठ कर्मचारियों को पहले ही बर्ख़ास्त कर दिया गया और उनके वेतन का हिसाब-किताब भी कर दिया गया.
बीते मई में क़तर ने कंपनी को बंद करने का आदेश दिया और इसके लगभग 70 कर्मचारियों को मई 2023 के अंत तक देश छोड़ने का निर्देश दिया.

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जासूसी के आरोप?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, गिरफ़्तार किए गए कर्मचारियों ने संवेदनशील जानकारी इसराइल को दी थी.
भारतीय मीडिया और अन्य ग्लोबल मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़, इन पूर्व नौसैनिकों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर अति उन्नत इतालवी पनडुब्बी को ख़रीदने से संबंधित क़तर के ख़ुफ़िया कार्यक्रम के बारे में इसराइल को जानकारी दी थी. यानी इन नौसैनिकों पर इसराइल के लिए जासूसी करने के आरोप भी लगाए जा सकते हैं.
क़तर की ख़ुफ़िया एजेंसी का दावा है कि उसके पास इस कथित जासूसी के बारे में इलेक्ट्रॉनिक सबूत मौजूद हैं.
क़तर की निजी सुरक्षा कंपनी ज़ाहिरा अल आलमी के लिए काम करने वाले भारतीय नौसेना के ये पूर्व अधिकारी क़तर की नौसेना को कई तरह के प्रशिक्षण देते थे.
इन्हें भारत और क़तर के बीच एक समझौते के तहत नियुक्त किया गया था.

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भारत- क़तर संबंध
भारत और क़तर के मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं. लेकिन इस रिश्ते में पहली चुनौती जून 2022 में आई, जब बीजेपी प्रवक्ता नुपुर शर्मा ने एक टीवी शो में पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की.
उस दौरान क़तर पहला देश था जिसने भारत से ‘सार्वजनिक माफी’ की मांग की. कतर ने भारतीय राजदूत को बुलाकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी. इस्लामी दुनिया में गुस्सा न फैले इसके लिए बीजेपी ने तुरंत नुपुर शर्मा को बर्खास्त कर दिया था.
अब आठ पूर्व भारतीय नौसैनिकों की मौत की सजा को भारत क़तर रिश्तों को दूसरी बड़ी चुनौती माना जा रहा है. चूंकि क़तर में लगभग आठ-नौ लाख भारतीय काम करते हैं इसलिए भारत सरकार ऐसा कोई कदम उठाने से बचने की कोशिश करेगी जो वहां भारतीयों के हितों को नुकसान पहुंचाए.
भारत क़तर से प्राकृतिक गैस भी आयात करता है. क़तर प्राकृतिक गैस निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश है.
ये मामला ऐसे वक्त में सामने आया है जब ग़ज़ा में इसराइल की बमबारी चल रही है और क़तर इसराइल और फ़लीस्तीन के साथ मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी बंधकों को हमास की कैद से छुड़ाया जा सके.
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