क़तर में भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों को मौत की सज़ा, भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

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- Author, दीपक मंडल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
क़तर में भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों की मौत की सज़ा ने भारत के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने इन लोगों को सुनाई गई सजा पर गहरी चिंता जताई है.
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार इस फैसले से स्तब्ध है लेकिन वह इस समस्या को सुलझाने के लिए सारे कानूनी रास्ते तलाशेगी.
क़तर की अदालत के इस फैसले को चुनौती देना और भारतीय नौसेना के इन पूर्व कर्मचारियों को मौत की सजा से बचाना भारत के लिए एक बड़ा डिप्लोमैटिक चैलेंज माना जा रहा है.
जिन आठ लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई है,वे भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं.
इनमें कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कैप्टन वीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुग्नाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और सेलर रागेश शामिल हैं. ये लोग एक डिफेंस सर्विसेज कंपनी के लिए काम कर रहे थे.
कंपनी के लिए काम करने वाले सभी लोग भारतीय नौसेना से रिटायर हो चुके हैं.
क़तर में इन लोगों को पिछले साल (2022) 30 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया था. तब से उन्हें तन्हाई कैद में रखा गया था. इन लोगों का मुकदमा इस साल 29 मार्च को शुरू हुआ था.
इन्हें लंबे समय तक कैद में रखने और मौत की सजा सुनाए जाने की कोई वजह सार्वजनिक नहीं की गई है.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत के इन पूर्व नौसैनिक अधिकारियों के परिवार वालों को भी उन आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, जिनके आधार पर इनके ख़िलाफ़ मामला चलाया गया.
मोदी सरकार पर बढ़ा दबाव

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भारत में मोदी सरकार पर इस मामले में हस्तक्षेप करने का दबाव बनने लगा है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है,"क़तर में भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों से संबंधित अत्यंत दुखद घटनाक्रम का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बेहद दुख, पीड़ा और अफ़सोस के साथ संज्ञान लिया है."
उन्होंने लिखा,''हम आशा और अपेक्षा करते हैं कि भारत सरकार कतर सरकार के साथ अपने राजनयिक और राजनीतिक प्रभाव का जितना अधिक से अधिक हो सके, उपयोग करेगी. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिकारियों को अपील करने में भरपूर सहारा मिले. साथ ही उन्हें जल्द से जल्द रिहा कराने के लिए भी हरसंभव प्रयास किए जाएं.''

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इस बीच, एआईएमआईएम के चीफ और सांसद असद्दुदीन ओवैसी ने एक्स पर लिखा,'' पीएम नरेंद्र मोदी को सभी पूर्व कर्मियों को वापस लाना चाहिए.अगस्त में मैंने कतर में फंसे नौसेना के पूर्व अधिकारियों का मुद्दा उठाया था. आज उन्हें मौत की सजा दी गई है. पीएम मोदी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं कि इस्लामिक मुल्क उनसे कितना प्यार करते हैं. उन्हें पूर्व अधिकारियों को वापस लाना चाहिए. ये बेहद ही दुर्भाग्य की बात है कि उन्हें मौत की सजा का सामना करना पड़ रहा है."

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वरिष्ठ पत्रकार शीला भट्ट ने लिखाृ,''जब भारत सरकार निजी कंपनी में काम करने वाले नौसेना के पूर्व अधिकारियों की मदद करने की कोशिश कर रही थी तो कतर झुकने को तैयार नहीं दिख रहा था क्योंकि वे इसके जरिये सौदेबाजी करना चाहते हैं. क़तर इस क्षेत्र में तुर्की और ईरान के साथ मिलकर बड़ा खेल खेल रहा है. इसे संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ भारत के स्थिर द्विपक्षीय संबंध पसंद नहीं हैं.''

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जिन भारतीयों को मौत की सज़ा सुनाई गई है वो एक डिफ़ेंस सर्विसेज प्रोवाइडर कंपनी अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजिज एंड कंस्लटेंसी सर्विसेज के लिए काम कर रहे थे.
ये कंपनी ओमानी नागरिक खमीस अल-आजमी की है. आजमी रॉयल ओमान एयर फोर्स के रिटायर्ड स्कवाड्रन लीडर हैं. उन्हें भी इन आठ भारतीयों के साथ गिरफ़्तार किया गया था. हालांकि उन्हें 2022 के नवंबर महीने में छोड़ दिया गया था.
कंपनी क्या करती है?
कंपनी की पुरानी वेबसाइट को अपडेट नहीं किया गया है. इसमें कहा गया है कि कंपनी ने कतरी अमीरी नेशनल फोर्स (क्यूईएनएफ) के लिए ट्रेनिंग,लॉजिस्टिक्स और मेंटनेंस सर्विसेज मुहैया कराया है.
नई वेबसाइट में कंपनी का नाम दहरा ग्लोबल है लेकिन कतरी अमीरी नेशनल फोर्स को दी जाने वाली इसकी सेवाओं का कोई ज़िक्र नहीं है.
और न ही उन गिरफ़्तार उन पूर्व नौसैनिक अधिकारियों का जिक्र है, जो इसमें नेतृत्वकारी भूमिका में थे.
कई मीडिया रिपोर्टों में ये दावा किया गया है कंपनी कतर सरकार को सैन्य पनडुब्बी खरीदने में मदद कर रही थी. हालांकि इसका अभी तक कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिला है.
कंपनी से कैसे जुड़े थे भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी

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जिन भारतीयों को मौत की सजा सुनाई गई है उनमें से एक कमांडर पूर्णेंदु तिवारी इस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे.
भारत और क़तर के संबंधों को बेहतर बनाने में योगदान देने के लिए 2019 में उन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है.
उस समय उनका सम्मान क़तर में तत्कालीन भारतीय राजदूत और क़तर डिफेंस फोर्सेज के इंटरनेशनल मिलिट्री को-ऑपरेशन के पूर्व चीफ पी कुमारन ने किया था.
ये समारोह इंडियन कल्चरल सेंटर में आयोजित किया गया था. उस दौरान समारोह में भारतीय दूतावास के डिफेंस अताशे कैप्टन कौशिक भी मौजूद थे.
जिन भारतीयों को सजा सुनाई गई है वो गिरफ़्तारी से पहले दहरा में चार से छह साल तक नौकरी कर चुके थे.
कैसे और क्यों हुई गिरफ़्तारी?

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भारतीय नौसेना के जिन पूर्व नौसेना अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई है, उन्हें क़तर की ख़ुफिया एजेंसी स्टेट सिक्योरिटी ब्यूरो ने गिरफ़्तार किया था.
भारतीय दूतावास को पहली बार उनकी गिरफ़्तारी के बारे में पिछले साल ( 2022) सितंबर मध्य में पता चला.
30 सितंबर को इन लोगों को अपने परिवार वालों से थोड़े वक्त के लिए टेलीफोन पर बातचीत की इज़ाज़त दी गई.
हिरासत में लिए जाने एक महीन से ज्यादा समय के बाद पहली बार इन लोगों को कॉन्सुलर एक्सेस दी गई है. उस दौरान भारतीय दूतावास के एक अधिकारी ने इन लोगों से मुलाकात की थी
इस मुलाकात के बाद अगले कुछ महीनों तक गिरफ़्तार भारतीयों को हर सप्ताह अपने परिवार वालों से बात करने की इजाजत दी जाती थी.
इन लोगों पर लगाए गए आरोप सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भी इसकी पुष्टि की है.
उन्होंने कहा कि आरोप सुनवाई के तहत ही लगाए गए थे. न तो भारत और न ही क़तर की सरकार ने नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों पर लगे आरोपों को सार्वजनिक किया है.
परिवार वालों का क्या कहना है?

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पिछले साल गिरफ़्तारी के बाद एक भारतीय वेबसाइट ने गिरफ़्तार कमांडर पूर्णेंदु तिवारी की बहन डॉ. मीतू भार्गव और कैप्टन नवतेज सिंह गिल के भाई नवदीप गिल से बात की थी.
डॉ. मीतू भार्गव ने उस समय मोदी सरकार से इन लोगों को छुड़ाने की अपील थी. मीतू भार्गव ने कहा था कि उनके भाई सीनियर सिटीजन हैं और वो कई बीमारियों से जूझ रहा है.
63 साल की उम्र में उन्हें अलग कैद में रखा गया है. वो इस बात का अंदाजा नहीं लगा पा रही हैं वो किन तकलीफों से गुजर रहे हैं.
उन्होंने कहा था कि उनके भाई पूर्णेंदु तिवारी ने अपनी 83 साल की मां से जेल से बात की है. वो अपने बेटे की सुरक्षा लेकर बेहद चिंतित हैं.
कैप्टन नवतेज सिंह गिल के भाई नवदीप गिल ने बताया था कि उनके भाई ने जब छह सितंबर को अपने जन्मदिन पर भेजे गए वॉट्सऐप मैसेज का जवाब नहीं दिया तो उन्हें शक हुआ.
बाद में उनसे फोन से कॉन्टेक्ट बंद हो गया. जब उन्होंने कंपनी से संपर्क किया तो पता चला कि उन्हें कतर की सिक्योरिटी सर्विस ने गिरफ़्तार कर लिया है. नवदीप गिल का कहना था कि उनके भाई के साथ मेडिकल दिक्कतें हैं.
नवदीप का कहना था कि उनके भाई ने रिटायरमेंट तक भारतीय नौसेना की सेवा की.
अब सरकार कि जिम्मेदारी है कि वो उनके भाई को छुड़ा कर भारत ले आएं. पिछले साल दिसंबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था गिरफ़्तार भारतीयों वापस लाना सरकार की प्राथमिकता है.
भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती

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भारत के लिए ये मामला कितनी बड़ी राजनीतिक चुनौती है? भारत इस मामले सुलझाने और अपनी नौसेना के पूर्व अधिकारियों को छुड़ाने के लिए क्या कर सकता है?
ये समझने के लिए बीबीसी हिंदी ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पश्चिम एशियाई अध्ययन केंद्र में एसोसिएट प्रोफेसर मुद्दसर क़मर से बात की.
उन्होंने कहा कि इस मामले में राजनयिक स्तर पर बातचीत नहीं होती है तब तक ये मामला क्या रुख लेगा कहना मुश्किल है. हां, लेकिन इससे भारत में पब्लिक ओपिनियन पर असर जरूर पड़ेगा.
न तो भारत और न ही क़तर ने नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों पर लगे आरोपों को सार्वजनिक किया है. आख़िर इसकी वजह क्या है?
क़मर कहते हैं,''ये संवेदनशील मामला है. जब इस तरह के संवेदनशील मामला हो तो दोस्ताना रिश्ते वाले देश काफी सावधानी बरतते हैं. दोनों देशों ने जिस तरह से कोई फौैरी प्रतिक्रिया नहीं दी है इससे ऐसा लग रहा है कि ये काफी संवेदनशील मामला है. चूंकि आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा है इसलिए भी इस बात की कम ही गुंजाइश है कि ये संवेदनशील मामला नहीं होगा. चूंकि मौत की सजा सुनाई गई है इसलिए ये तय है कि जिन लोगों को सजा सुनाई गई है, उन पर कोई बेहद गंभीर आरोप है. या फिर उन्होंने कोई गंभीर अपराध किया है.''

क्या भारत के लिए यह बड़ी राजनयिक चुनौती है?
मुद्दस्सर क़मर कहते हैं,’’ इसे डिप्लोमैटिक चैलेंज कहना मुश्किल होगा. क्योंकि जो लोग गए थे वो भारत की नेवी के पूर्व सैनिक हैं. लेकिन वो किसी सरकारी काम के लिए नहीं गए थे. वो निजी कंपनी के लिए काम कर रहे थे. इसलिए डिप्लोमैटिक चैलेंज कहना मुश्किल है. इसका कुछ राजनीतिक और राजयनिक असर हो सकता है लेकिन अभी ये भी कहना मुश्किल है.
क़मर कहते हैं,‘' चूंकि मामला अदालत में था और इस पर कोई सार्वजनिक सूचना साझा नहीं की गई है. इसलिए विदेश नीति के हिसाब से संयमित तरीके से ही इसे सुलझाने की कोशिश हो रही है. भारत सरकार को पहले पहले फैसले ब्योरा देना होगा. वो देखेगी कि इसमें अपील की संभावना है या नहीं. अगर क़तर में इसमें अपील की संभावना है तो देखना होगा इसका कितना अधिकतम लाभ लिया जा सकता है.''
'' ये भी देखना होगा कि मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले जाया जा सकता है या नहीं. इस मामले के कई सारे पहलू हैं जिन्हें देखना होगा. वो ये भी देखेगी कि दोनों सरकारें क्या बातचीत के जरिये इसे सुलझा सकती है.''
भारत- क़तर संबंध

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भारत और क़तर के मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं. लेकिन इस रिश्ते में पहली चुनौती जून 2022 में आई, जब बीजेपी प्रवक्ता नुपुर शर्मा ने एक टीवी शो में पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की.
उस दौरान क़तर पहला देश था जिसने भारत से ‘सार्वजनिक माफी’ की मांग की. कतर ने भारतीय राजदूत को बुलाकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी. इस्लामी दुनिया में गुस्सा न फैले इसके लिए बीजेपी ने तुरंत नुपुर शर्मा को बर्खास्त कर दिया था.
अब आठ पूर्व भारतीय नौसैनिकों की मौत की सजा को भारत क़तर रिश्तों को दूसरी बड़ी चुनौती माना जा रहा है. चूंकि क़तर में लगभग आठ-नौ लाख भारतीय काम करते हैं इसलिए भारत सरकार ऐसा कोई कदम उठाने से बचने की कोशिश करेगी जो वहां भारतीयों के हितों को नुकसान पहुंचाए.
भारत कतर से प्राकृतिक गैस भी आयात करता है. क़तर प्राकृतिक गैस निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश है.
ये मामला ऐसे वक्त में सामने आया है जब ग़ज़ा में इसराइल की बमबारी चल रही है और कतर इसराइल और फ़लीस्तीन के साथ मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी बंधकों को हमास की कैद से छुड़ाया जा सके.
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