You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
शहरों को ट्रैफ़िक संकट से उबार रही है केबल कार
- Author, लेन विलियम्स
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
दुनिया भर के शहरों में आबादी बढ़ती जा रही है. सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है. घंटों-घंटों जाम लगा रहता है. ऑड-इवेन से लेकर दूसरे तमाम फॉर्मूले आज़माए जा रहे हैं.
इसीलिए शहरों में परिवहन के लिए आजकल गोंदोला या केबल कारों का चलन बढ़ता जा रहा है.
2004 में लैटिन अमरीकी देश कोलंबिया का मेडेलिन शहर पूरी तरह से केबल कार और मेट्रो आधारित परिवहन वाला शहर बन गया था. शहर में मेट्रो सेवाएं पूरी तरह से केबल कारों से जुड़ गई थीं.
तब से दुनिया के तमाम शहर शहरी ट्रांसपोर्ट के लिए केबल कारों को बढ़ावा दे रहे हैं. ये गोंदोला पहले जहां मौज-मस्ती के लिए ही इस्तेमाल किए जाते थे. वहीं, अब इन्हें दूर-दराज़ के मुश्किल इलाक़ों को जोड़ने में काम लाया जा रहा है.
केबल कारें पर्यावरण के लिहाज़ से भी दूसरे साधनों से बेहतर हैं. इन्हें लगाने का ख़र्च भी कम है.
अपराध का गढ़ मेडेलिन शहर
सबसे पहले बात करते हैं मेडेलिन शहर की. ये कोलंबिया का दूसरा बड़ा शहर है. मेडेलिन कई दशकों तक हिंसक अपराधों के लिए बदनाम था. शहर के बाहरी और पहाड़ी इलाक़ों तक पहुंचना दूभर था.
बहुत से बाशिंदों के लिए रोज़गार हासिल करने के लिए मुख्य शहर तक आना मुसीबत लगता था.
लेकिन, 2004 के बाद शहर ने केबल कारों में भारी निवेश कर के पहाड़ी बस्तियों को शहर की मुख्य धारा से जोड़ा है.
मेडेलिन का मेट्रो-केबल सिस्टम दुनिया में अपनी तरह की अनूठी परिवहन व्यवस्था है. इससे मेडेलिन में जुर्म में भी काफ़ी कमी आई है.
मेडेलिन में मेट्रो-केबल की कामयाबी से उत्साहित होकर कई और देशों में भी इन पर आधारित ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित किया जा रहा है.
शहरों की प्लानिंग करने वालों के लिए ये सस्ता परिवहन माध्यम है, जो पहाड़ियों और नदियों की बाधा से पार पाने में मददगार होता है.
रूस और अमरीका में भी केबल कारों पर आधारित ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं.
केबल कारों के कई फ़ायदे हैं. ये शोर नहीं करतीं. इनसे वायु प्रदूषण नहीं होता. नई रेलवे लाइनें, सड़कें या पुल बनाने के मुक़ाबले केबल कारों की व्यवस्था का विकास सस्ता पड़ता है.
वायु प्रदूषण का ख़तरा भी कम
सबसे अच्छी बात ये है कि ये पहाड़ी इलाक़ों या दुर्गम बस्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने में बहुत मददगार होते हैं. जो शहर मेट्रो या रेलवे के ख़र्च का बोझ नहीं उठा सकते, उनके लिए केबल कारें बेहतर विकल्प हैं.
और इनमें सफ़र के दौरान नज़ारे देखने का अलग ही लुत्फ़ है.
विश्व बैंक की एक स्टडी बताती है कि केबल कारों से दूरी तय करने का विश्व का औसत क़रीब 2.7 किलोमीटर है. ऐसी लाइनों पर 800 मीटर की दूरी पर स्टेशन होते हैं. इनकी औसत स्पीड 10-20 किलोमीटर प्रति घंटे होती है. हर घंटे केबल कारों के माध्यम से क़रीब 2 हज़ार लोगों को एक जगह से दूसरे ठिकाने पर ले जाया जा सकता है.
दिन भर में एक केबल कार सिस्टम से 20 हज़ार से ज़्यादा लोग सफ़र कर सकते हैं. एक और लैटिन अमरीकी देश बोलीविया की राजधानी ला पाज़ में केबल कारें 24 घंटे में 65 हज़ार लोगों को उनकी मंज़िलों तक पहुंचाती हैं.
शहरों में बिछाई गई ज़्यादातर केबल कारें खंबों पर तार खींच कर दौड़ाई जाती हैं.
एक ही खंबे पर दोनों तरफ़ के सफर के लिए तारों के ज़रिए केबल कारें या गोंदोला को दौड़ाया जा सकता है.
स्टेशन पर पहुंचकर ये ख़ुद को तार से अलग कर के मुसाफ़िरों को उतारती है. और फिर से तारों से जुड़कर आगे के सफ़र पर बढ़ जाती हैं.
वैसे, हर केबल कार सिस्टम कामयाब हो ये ज़रूरी नहीं. ब्राज़ील के रियो डि जेनेरियो शहर में बिछाया गया केबल कार का सिस्टम बहुत विरोध का शिकार हुआ. सरकार ने कहा कि उसने ये सिस्टम शहर के ग़रीबों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बिछाया.
लेकिन सभी को नहीं पसंद ये योजना
मगर, स्थानीय लोगों का कहना था कि केबल कारों में 5.4 करोड़ डॉलर ख़र्च करने के बजाय ये रक़म शहर की साफ़-सफ़ाई और स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने में की जानी चाहिए थी.
वैसे गोंदोला या केबल कारों का एक और भी फ़ायदा है. इनकी वजह से सैलानी भी आकर्षित होते हैं.
मेडेलिन या ला पाज़ जैसे शहरों में ये सैलानियों की बड़ी दिलचस्पी का केंद्र हैं. दुनिया का सबसे बड़ा केबल कार सिस्टम बोलीविया की राजधानी ला पाज़ में है, जो 16 किलोमीटर लंबा है. इस में 25 स्टेशन हैं. इसकी कामयाबी देखते हुए 2019 तक और चार लाइनें विकसित की जा रही हैं. बेहद कम क़ीमत में आप इनका लुत्फ़ उठा सकते हैं.
यूनेस्को की विश्व धरोहर
इसी तरह 2016 के वियतनाम का हा लॉन्ग बे केबल सिस्टम ख़ूब लोकप्रिय हो रहा है. ये समंदर किनारे की ख़ास चट्टानों के ऊपर से गुज़रता है, जिन्हें यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है.
केबल कार में बैठ कर हा लॉन्ग की खाड़ी का ख़ूबसूरत नज़ारा देखने का तजुर्बा ही अलग है.
यहां की क्वीन कार केबल सबसे ज़्यादा यात्रियों को ले जाने का विश्व रिकॉर्ड भी बना चुकी है. ये केबल कार डबल डेकर है और एक बार में 230 लोगों को ले जा सकती है.
इन गोंदोला की कामयाबी से उत्साहित होकर बहुत से शहर अपने यहां ट्रांसपोर्ट का ये माध्यम विकसित कर रहे हैं.
आज तस्मानिया, गोथेनबर्ग, येरुशलम, शिकागो और मोम्बासा में केबल कार सिस्टम बिछाए जा रहे हैं.
यूं तो केबल कारों से सफ़र लुत्फ़ भरा होता है. मगर कई ऐसी भी होती हैं, जो दिल की धड़कनें रोक दें.
दक्षिण कोरिया की यियोसू केबल कार में बैठने की सलाह कमज़ोर दिल वालों को नहीं दी जाती.
इसमें केबल कार का फ़र्श शीशे का बना होता है, जिसके आर-पार दिखता है. ऊंचाई पर बैठ कर नीचे देखना डराने वाला मंज़र भी हो सकता है.
(बीबीसी फ़्यूचर पर इस स्टोरी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी फ़्यूचर की बाकी ख़बरें यहां पढ़ सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)