You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बिल्ली म्याऊं-म्याऊं क्यों करती है?
- Author, स्टीफ़न डाउलिंग
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
बिल्ली म्याऊं-म्याऊं क्यों करती है? हम सब को लगता है कि इस सवाल का जवाब हमें पता है.
जब भी बिल्लियां अच्छा महसूस करती हैं और हम उन्हें प्यार से सहलाते हैं, तो वो म्याऊं करके अपनी तसल्ली का इज़हार करती हैं.
पर, बिल्ली की म्याऊं की ये पूरी कहानी नहीं है. उसकी म्याऊं के पीछे लंबी-चौड़ी दास्तान है. यहां तक कि बिल्ली का गुर्राना भी लंबे वक़्त तक परिचर्चा का विषय रहा.
पहले तो लोगों को लगता था कि बिल्ली के दिल के दाहिने हिस्से में बिना ऑक्सीजन वाला ख़ून पहुंचाने वाली शिरा से इसका ताल्लुक़ है. लेकिन, बाद की रिसर्च से पता चला कि ये आवाज़ बिल्ली के कंठ से निकलती है.
जब भी कोई बिल्ली सांस लेती है या छोड़ती है, तो आवाज़ निकलती है.
क्या म्याऊं भी इसी का नतीजा है?
विज्ञान की तरक़्क़ी से हमें ये तो पता है कि कंठ से हवा गुज़रने के चलते बिल्ली के मुंह से ये आवाज़ निकलती है. लेकिन, ये आवाज़ बिल्ली निकालती क्यों है?
वैज्ञानिक कहते हैं कि इसका सीधा ताल्लुक़ बिल्ली के दिमाग़ के एक हिस्से न्यूरल ऑसिलेटर से है. यूं तो इस न्यूरल ऑसिलेटर का कोई और काम नहीं है. तो, क्या जब बिल्ली को गुदगुदाया जाता है, तो वो ये एहसास अपने दिमाग़ के इसी हिस्से यानी न्यूरल ऑसिलेटर में महसूस करती है.
कभी-कभार ऐसा भी होता है. मगर, ये कभी-कभार ही होता है.
ब्रिटेन की रहने वाली मारजान डेबेवेयर बिल्लियों की फोटोग्राफर हैं. उन्होंने चार बिल्लियां पाल भी रखी हैं. इन दिनों मारजान बिल्लियों का मनोविज्ञान समझने की कोशिश कर रही हैं.
बिल्ली सिर्फ़ खुशी से म्याऊं नहीं करती
बिल्ली के म्याऊं से जुड़ा एक रहस्य ये भी है कि हम उनकी म्याऊं को उस वक़्त महसूस करते हैं, जब हम उन्हें उनकी पसंदीदा जगह पर गुदगुदाते हैं. पर, कई बार बिल्लियां तब भी म्याऊं करती हैं, जब लोग उनके आस-पास नहीं होते.
मारजान कहती हैं कि बिल्लियों के म्याऊं करने में भी बहुत फ़र्क़ होता है. कुछ बिल्कुल भी नहीं करतीं और कुछ को म्याऊं करना कुछ ज़्यादा ही सुहाता है. मारजान की चार बिल्लियों में से एक लुइगी है, जो आवारा बिल्ली थी. वो बहुत कम म्याऊं बोलती है. वहीं एक पालतू बिल्ली आर्ची कुछ ज़्यादा ही म्याऊं करती है.
मारजान डेबेवेयर कहती हैं कि उन्होंने 3 हज़ार से ज़्यादा बिल्लियों की तस्वीरें ली हैं. इनमें से कई तो मरते वक़्त भी म्याऊं की आवाज़ निकाल रही थीं. कई बार जब उन्हें सुलाया जाता है, तब भी बिल्लियां म्याऊं की आवाज़ निकालती हैं.
साफ़ है कि बिल्ली हमेशा ख़ुशी या तसल्ली के एहसास को म्याऊं से ज़ाहिर नहीं करतीं.
कुत्तों के मुक़ाबले बिल्लियों के मिज़ाज और बर्ताव पर बहुत कम रिसर्च हुई है. जबकि बिल्लियों को खाने-पीने से कुत्तों के मुक़ाबले ज़्यादा आसानी से रिझाया जा सकता है.
वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया है
अमरीका के सैन डिएगो में बिल्लियों के एक्सपर्ट गैरी वीत्ज़मैन कहते हैं कि, 'म्याऊं से बिल्लियां अपनी ख़ुशी का इज़हार भी करती हैं. और कई बार वो नर्वस होने पर, तनाव या डर की स्थिति में भी ऐसी आवाज़ निकालती हैं. अच्छी बात ये है कि आम तौर पर बिल्लियां ख़ुशी से ही म्याऊं बोलती हैं.'
पहले यही माना जाता था कि म्याऊं के ज़रिए बिल्लियां अपनी बात कहती हैं. इक्कीसवीं सदी की शुरुआत में ये माना जाता था कि बिल्लियां म्याऊं के ज़रिए सिर्फ़ ख़ुशी नहीं जतातीं. इसके और भी मक़सद होते हैं.
वीत्ज़मैन कहते हैं कि म्याऊं कहकर बिल्लियां दूसरी भावनाओं का भी इज़हार करती हैं. बिल्लियों के बच्चे पैदा होने के कुछ दिन बाद से ही म्याऊं की आवाज़ निकालने लगते हैं. इस आवाज़ की मदद से उनकी मां उन्हें तलाशकर दूध पिलाती है.
कई बिल्लियों में बचपन की ये आदत बड़े होने पर भी बनी रहती है. वो जब खाती हैं, तो ये आवाज़ निकालती हैं या फिर म्याऊं की आवाज़ निकालकर इंसानों को भूखे होने का संकेत देती हैं.
कई बिल्लियां नए माहौल की पड़ताल के दौरान भी म्याऊं-म्याऊं करती हैं. कई बार वो घबराहट या तनाव में भी ये आवाज़ निकालती हैं. जैसे कि कुत्ते उनका पीछा करते हैं, तब भी बिल्लियां म्याऊं करती देखी जाती हैं.
अब वैज्ञानिकों ने ये भी पता लगा लिया है कि जब बिल्लियां खाना मांगती हैं, तो, उनकी म्याऊं दूसरी होती है और जब दूसरे संकेत देती हैं, तो ये आवाज़ बदल जाती है.
बिल्लियां यूं मिटाती हैं अपनी थकान
जानवरों के जानकार ब्रिटेन के सैम वाटसन कहते हैं कि जंगली बिल्लियों की आवाज़ें निकालने का क्या मतलब होता है, ये बात अब भी हमारी समझ से परे है. वो कई बार एक-दूसरे को खुजलाते हुए भी ये आवाज़ निकालती हैं.
सैम वाटसन कहते हैं कि बिल्लियों के संवाद को लेकर और रिसर्च की जानी चाहिए, ताकि उनके प्रति हमारी समझ बढ़े.
कुछ लोग मानते हैं कि म्याऊं की आवाज़ से असल में बिल्ली ख़ुद को सहलाती है. अपनी दिमाग़ी मालिश करती है. 25 से 100 हर्त्ज़ तक की आवाज़ से हड्डियों को सहलाए जाने का एहसास होता है.
यही वजह है कि झपकी लेते वक़्त भी कुछ बिल्लियां गुर्राती सुनाई देती हैं. जानकार मानते हैं कि ऐसी आवाज़ें निकालकर बिल्लियां अपनी थकान मिटाती हैं.
बिल्ली की म्याऊं सेहत के लिए अच्छी
एक्सपर्ट कहते हैं कि बिल्लियों को पालना, तनाव दूर भगाने का बहुत अच्छा ज़रिया है. इससे दिल की बीमारी का ख़तरा एक तिहाई तक घट जाता है. ऐसे में बिल्ली की म्याऊं हमारी अपनी सेहत के लिए अच्छी मानी जा सकती है.
वीत्ज़मैन कहते हैं कि इसके कई फ़ायदे हैं. म्याऊं की आवाज़ से हमें भी अच्छा एहसास होता है.
कई बार पालतू बिल्लियां यहां-वहां से आवाज़ लगाते हुए अपने मालिक के पैरों के पास आ खड़ी होती हैं, जैसे खाना मांग रही हों. ये एहसास भी सुखद होता है.
इसी तरह सुबह के वक़्त बिल्ली को सहलाते या थपकाते हुए अगर वो आवाज़ निकालती है, तो फिर लोग उसे ख़ुद से पहले खाना देते हैं.
बिल्ली की गुर्राहट हो या म्याऊं की आवाज़. हम इन्हें जितना बेहतर समझेंगे, हमारे लिए उतना ही भले की बात होगी. इससे बिल्ली और उसके मालिक के बीच रिश्ता और मज़बूत होगा.
(बीबीसी फ़्यूचर पर इस स्टोरी को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी फ़्यूचर कोफ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)