शहरों से दूर ख़्वाबों के आशियाने कैसे बन रहे हैं?

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- Author, क्लेयर डाउडी
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
ब्रिटेन से लेकर कोस्टा रिका तक दुनिया भर के गांवों में घर बनाने के लिए पारंपरिक डिजाइन की जगह नये वास्तुशिल्प को अपनाया जा रहा है.
जहां तक डिजाइन की बात है तो देहाती इलाकों में बने घरों को शहरी इमारतों से कमतर होने की ज़रूरत नहीं है. सस्ती ज़मीन का मतलब है ज़्यादा जगह होना, पड़ोसियों से थोड़ी दूरी रखना या उनकी नज़र से भी दूर रहना, ताकि आर्किटेक्ट अपनी पूरी क्रिएटिविटी दिखा सकें.
बस एक जोख़िम है- देहाती इलाकों में बहुत ज़्यादा ख़र्च और फ़ैंसी डिजाइन वहां के लिए नुकसानदेह हो सकती है.
जैसा कि आर्किटेक्ट फ्रेडरिक लुडविग कहते हैं, "अगर कोई उड़नतश्तरी वहां के खेतों में गिर पड़े तो लोग यही सोचेंगे कि अमीर आदमी कोई दिखावा कर रहा है."
फिर भी कई नए आर्किटेक्ट यह साबित कर रहे हैं कि दूसरा रास्ता भी है. कोस्टा रिका तट से लेकर ब्रिटेन में केंट के ग्रामीण इलाकों तक ऐसे मकान बन रहे हैं तो जो स्थानीय निर्माण शैलियों, भवन सामग्रियों और स्थलाकृति के अनुकूल हैं मगर उनकी डिजाइन सबसे अलग हटकर है.
इमारतों की ख़ूबसूरती तब निखरकर आती है जब वास्तुकार आसपास की संरचनाओं और मकानों का आकलन कर लेते हैं.
देहाती क्षेत्र में करीब एक दर्जन नये घरों को डिजाइन कर चुके वास्तुकार रोरी हार्मर का कहना है कि इससे उनको उस जगह एक नई शैली विकसित करने में मदद मिलती है.

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केंट के नए भट्टी घर
इंग्लिश काउंटी केंट में पुराने भट्टी घरों की भरमार है. शंकु आकार की इन इमारतों में बियर बनाने से पहले हॉप को सुखाया जाता था. ख़ूबसूरत गांव मार्डेन में आर्किटेक्ट फर्म ACME ने बंपर्स ओस्ट को डिजाइन किया है. यह उन पुरानी संरचनाओं का 21वीं सदी वाला रूप है.
केंट के भट्टी घर की दीवारें आम तौर पर ईंट से और छत मिट्टी की पकी हुई टाइल्स से बनाई जाती थी. उसकी जगह बंपर्स ओस्ट के पांच टावर पांच रंग की टाइलों से ढंके गए हैं. सबसे नीचे गहरा मिट्टी का रंग और सबसे ऊपर धूसर रंग की टाइल.
ACME के डायरेक्टर लुडविग का कहना है कि इससे जगह खुलती है. बंपर्स ओस्ट की प्रोजेक्ट आर्किटेक्ट लुसी मोरोनी कहती हैं, "यह आज के समय के मुताबिक है. इसमें दो की जगह एक सामग्री लगी है."

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लकड़ी के कॉटेज
ब्रिटेन के हर्टफोर्डशायर में आर्किटेक्ट टेट हार्मर ने लकड़ी के कॉटेज जैसे घर बनाए हैं. इसके बारे में उनका दावा है कि इनकी जड़ें इस क्षेत्र के कृषि इतिहास में हैं.
हार्मर की कंपनी ने बंगले की जगह कम ऊर्जा खपत वाला एक पारिवारिक घर तैयार किया है. इसकी प्रेरणा पास के खेतों में बनी इमारतों और फूस की झोपड़ियों से ली गई.
इसमें कम ऊंचाई के छज्जे हैं. छत में खिड़कियां हैं और छत के कोने में आगे की ओर निकला छोटा सा चबूतरा है. छत बनाने के लिए पारंपरिक टाइलों की जगह उन्होंने पूरी इमारत को लकड़ी के आवरण में लपेट दिया है.
लकड़ी के ऊपर रबर की एक झिल्ली चढ़ाकर उसे पानी से सुरक्षित बना दिया गया है. हार्मर कहते हैं, "निर्माण सामग्रियों की टेक्नोलॉजी बदल गई है. यह छत वैसे ही काम करेगी जैसे टाइलें करती हैं."

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देहात में डिजाइन की संभावनाएं
ऐसा लगता है कि इलाका जितना ग्रामीण हो संभावनाएं उतनी ही ज़्यादा होती हैं. न्यूवो लियोन के मैक्सिकन क्षेत्र में पहाड़ों के बीच बनाया गया नरिगुआ हाउस मुख्य ढांचे से तीन ओर निकला हुआ है.
स्थानीय कंपनी पी प्लस ओ के वास्तुकार डेविड पेड्रोज़ा कैस्टेनेडा इसे देवदार के पुराने पेड़ों के बीच वाली ज़मीन पर पत्थर का काम बताते हैं. "यह अविश्वसनीय परिदृश्य है जहां घर के अंदर से अविश्वसनीय दृश्य दिखते हैं."
कैस्टेनेडा का कहना है कि दूरदराज के इलाकों में कभी-कभी बहुत कम नियम-क़ायदे होते हैं, जिससे वास्तुकारों को बहुत आज़ादी मिलती है. लेकिन वहां टेक्नोलॉजी नहीं होती और निर्माण सामग्रियां मिलने में दिक्कत होती है.
अमरीकी आर्किटेक्ट ओल्सन कुंडिंग ने इन सीमाओं का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया. कुंडिंग ने सैंटा टेरेसा का कोस्टा रिका क्षेत्र में ट्री हाउस बनाया है.
प्रशांत महासागर के तटीय इलाके में अर्ध-उष्णकटिबंधीय वन में स्थानीय इमारती लकड़ियों के इस्तेमाल से उन्होंने तीन मंजिला आयताकार घर बनाया है.
ऊपर से नीचे तक पूरी इमारत, इसकी हर मंजिल खुली हुई है ताकि सूरज की रोशनी और हवा-पानी आसानी से आ सके. टॉम कुंडिंग का कहना है कि इस क्षेत्र में छुट्टी बिताने के लिए दो शैलियों के घर बन रहे हैं.
वो कहते हैं,"जो लोग पश्चिमी वास्तुशिल्प से प्रभावित हैं वे अपने लिए वातानुकूलित और पूरी तरह से बंद घर पसंद करते हैं ताकि बारिश और गर्मी का असर न हो. इसके उलट ट्री हाउस की तरह कुछ दुर्लभ घर हैं जो पर्यावरण और जलवायु को पूरी तरह अपनाते हैं."

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भविष्य के घर
पोलैंड में आर्किटेक्ट फ़र्म केडब्लूके प्रोम्स के रॉबर्ट कोनिएज़्नी ने विस्टुला नदी के किनारे बाय द वे हाउस बनाया है. वो कहते हैं, "निश्चित रूप से इस घर का विचार एक बड़े क्षेत्र के लिए उपयुक्त है जो आम तौर पर शहरों में नहीं मिलता."
इस घर की डिजाइन कंक्रीट की एक पट्टी से बनी सड़क के इर्द-गिर्द तैयार की गई है जो ऊपर की ओर बढ़ते हुए इमारत की छत और दीवारों में तब्दील हो जाती है और आख़िर में नदी के किनारे तक जाने वाले फुटब्रिज में बदल जाती है.
बड़ी ज़मीन होने का मतलब है कि वास्तुकार अपने ले-आउट के साथ खेल सकते हैं जो शहरों की तंग जगह में मुमकिन नहीं होता.
ऑस्ट्रेलिया के नीले पहाड़ की ढलान पर कटुम्बा में पैट्रिक कीन का यही तजुर्बा है. उन्होंने वहां की पहाड़ी पर स्टील फ्रेम वाले मॉड्यूलर घर बनाए हैं.
कीन कहते हैं, "सूरज की किरणों के कोण जैसे चीजें प्राथमिकता देने वाली हैं, फिर भी ले-आउट में कई तरह की आज़ादी है. ग्रामीण परिप्रेक्ष्य में, नये विचारों को परखा जा सकता है या जिन विचारों पर काम नहीं किया जा सका उनको भी आजमाया जा सकता है. जगह होने पर इमारतों में असामान्य अनुपात को अपनाया जा सकता है. स्थानीय संस्कृति और क्षेत्रीय थीम को भी शामिल किया जा सकता है."
कीन अब थाईलैंड के समुद्र तट पर बीच हाउस बना रहे हैं जो असामान्य रूप से घुमावदार होगा.
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अपवाद हैं ये घर
लंदन के वास्तुकार सैम सेलेंकी इन साहसिक परियोजोनाओं को अपवाद कहते हैं. कम से कम ब्रिटेन में आम घर ऐसे नहीं बनते.इन विशेष घरों को बनाने के लिए ग्राहक ऐसे वास्तुकार को काम पर लगाते हैं जो जगह के हिसाब से परियोजना की डिजाइन तैयार कर सके.
सेलेंकी ने ऑक्सफोर्डशायर में टेम्स नदी के किनारे रिवर हाउस बनाए हैं जो इस पर खरा उतरता है. वो मानते हैं कि ग्रामीण घरों के लिए नई डिजाइन वाले नज़रिये को अपनाने से रोमांचक परियोजनाएं बन रही हैं.
लुडविग के लिए, यह नज़रिया वास्तुकार की नई सोच से बनता है. वो कहते हैं "स्थानीय नहीं होने पर हम उन चीजों को पकड़ सकते हैं जो स्थानीय लोगों को आम लगती हैं और वे उस पर ध्यान नहीं देते.हम कुछ वैसा बनाने की कोशिश करते हैं जो बीच का हो. जो एकदम से अलग भी न हो और हूबहू स्थानीय भी न हो."
लेकिन इंग्लैंड के देहात में बड़े पैमाने पर बनने वाले घरों की कहानी अलग है. सेलेंकी के मुताबिक वे घर अब भी बिल्डर के मानक नक्शे पर बन रहे हैं और उनमें रहने वालों को कुछ भी विशेष या असामान्य अनुभव नहीं होता.
शायद यही वह जगह है जहां वास्तुकारों को ध्यान देना चाहिए. लेखक टॉम फ़ोर्ट ऐसा ही सोचते हैं.
अपनी किताब "द विलेज न्यूज़- द ट्रूथ बिहाइंड इंग्लैंड्स रूरल आइडिल" में वो पाठकों से उस स्थिति की कल्पना करने को कहते हैं जब फ़ोर्ट को देहाती ज़िंदगी की देखरेख का प्रभार दिया गया है.
वो लिखते हैं, "गांव को बचाने के प्रभारी के रूप में मैं इमारतों की एकरूपता को ख़त्म कर दूंगा क्योंकि वो मकान ऊबाऊ और नीरस हैं." वो ऐसे डिजाइनर और वास्तुकार नियुक्त करना चाहते हैं जो साहसी सोच वाला हो.
क्या नये ग्रामीण वास्तुशिल्प आंदोलन में किसी दिन इस तरह की चीज होगी?
(बीबीसी कल्चर पर प्रकाशित यह मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
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