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मंगलवार, 13 जनवरी, 2009 को 12:07 GMT तक के समाचार
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भारत-पाक तनातनी का फ़ायदा श्रीलंका को

क्रिकेट
श्रीलंका तब तक यह फसल काटता रहेगा जब तक भारत-पाक संबंध सामान्य नहीं हो जाते
क्रिकेट जगत में सबसे चर्चित और लोकप्रिय श्रृंखला एशेज़ हुआ करती थी लेकिन पिछले दो दशक यह गौरव भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली श्रृंखला को मिल गया है.

कारण पहले तो भारत और पाकिस्तान एक दूसरे के देश का दौरा नहीं कर रहे थे.

अब फिर से स्थिति वही पुरानी वाली हो गई है जब भारत और पाकिस्तान के बीच जो राजनैतिक तनातनी चल रही है, खेल कूद उसके परवान चढ़ गया है.

भला क्रिकेट इससे कैसे बच पाता.पर साठ और सत्तर के दशक में जो कुछ घट रहा था अब स्थिति उससे बिलकुल अलग है.

मनमुटाव का फ़ायदा

उस ज़माने में श्रीलंका को टेस्ट खेलने वाले देशों में शामिल नहीं किया गया था. अब श्रीलंका अपने पड़ोस मे चल रहे मनमुटाव का भरपूर फ़ायदा उठाना चाहता है.

जैसे ही भारत ने पाकिस्तान का दौरा करने से साफ़ मना किया, तुरंत ही श्रीलंका ने वहाँ जाने की हामी भर दी. पर साथ ही श्रीलंका भारत को नाराज़ नहीं करना चाहता था. इस कारण से एक न्यौता भारत को भी भेज दिया गया.

क्रिकेट

श्रीलंका इस बात को भली भांति जानता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की तूती बोलती है और उसे नाराज़ करने से नुकसान ही होगा.

वैसे श्रीलंका के पूर्व कप्तान अर्जुन रणतुंगा भारत से बहुत नाराज़ थे. कारण सितंबर 2008 में जब आईसीसी चैंपियंस ट्राफ़ी सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान में आयोजित नहीं हो सकी थी तो श्रीलंका को पूरी उम्मीद थी कि उसे मेज़बानी करने का मौका मिलेगा.

पर भारत ने उसके इरादों पर पानी फेरते हुए प्रतियोगिता को सितंबर, 2009 तक स्थगित करने के हक में अपना मत डाला.

दोषी ठहराया

फिर जब अप्रैल, 2009 में श्रीलंका को इंग्लैंड का दौरा करने का निमंत्रण ठुकराना पड़ा तो रणतुंगा ने फिर से भारत को दोषी ठहराया.

कारण, श्रीलंका के चोटी के खिलाड़ी इंग्लैंड का दौरा करने से ज़्यादा रुचि भारत में होने वाली इंडियन प्रीमियर लीग़ (आईपीएल) में दिखा रहे थे. यही वजह थी कि भारत सरकार का फ़ैसला आने से पूर्व ही रणतुंगा श्रीलंका टीम के पाकिस्तान जाने की घोषणा कर बैठे.

 खिलाड़ियों की चिंता किसे है. जनवरी-फ़रवरी के महीने खाली न जाएं यह किसी को मंज़ूर नहीं. तभी तो ठीक बांग्लादेश दौरे के बाद श्रीलंका टीम एकदिवसीय श्रृंखला के लिए पाकिस्तान जाएगी

ज़ाहिर है श्रीलंका का पाकिस्तान की ओर इतने उतावलेपन से दोस्ती का हाथ बढ़ाना भारत को बिलकुल भी रास नहीं आया.

नतीजा, रणतुंगा को अपने पद से हाथ धोना पड़ा और क्रिकेट की बागडोर सीधे श्रीलंका के खेल मंत्री गामिनी लोकुगे के हाथों मे है.

खेल मंत्री बड़ी सफ़ाई से सभी पत्तों को मिला कर चल रहे हैं. भले ही श्रीलंका के खिलाड़ियों को इससे ख़ासी परेशानी का सामना करना पड़े.

पर खिलाड़ियों की चिंता किसे है. जनवरी-फ़रवरी के महीने खाली न जाएं यह किसी को मंज़ूर नहीं. तभी तो ठीक बांग्लादेश दौरे के बाद श्रीलंका टीम एकदिवसीय श्रृंखला के लिए पाकिस्तान जाएगी.

नुकसान

तीन मैचों की इस श्रृंखला के बाद भारत को श्रीलंका का दौरा करना है, पाँच मैचों के लिए जिसके बाद श्रीलंका टीम दोबारा पाकिस्तान जाएगी टेस्ट मैचों के लिए. पहले जो समय खाली रहता था अब वह सबसे व्यस्त कार्यक्रम होगा श्रीलंका क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए.

भारत भी इस बात को मना नहीं कर सकता. उसे भी 2008-09 सत्र में पूरे 120 करोड़ रुपयों का नुकसान झेलना पड़ा है.

क्रिकेट

आईसीसी चैंपियंस ट्राफ़ी के बाद इंग्लैंड के साथ दो एक दिवसीय मैच रद्द हुए, टेस्ट मैचों के स्थान बदले गए और ट्वेंटी-ट्वेंटी चैंपियंस लीग़ को एक साल के लिए टालना पड़ा.

फिर जब पाकिस्तान का दौरा रद्द हो गया तो भारत के पास श्रीलंका के साथ समझौता करने के अलावा और कोई चारा भी तो नहीं था.

आख़िर पाँच एक दिवसीय मैचों की श्रृंखला से कुछ आमदनी हो जाएगी और साथ ही श्रीलंका के साथ मैत्री का सीधा असर पड़ेगा उसके पाकिस्तान क्रिकेट अधिकारियों के संबंधों पर.

अभी तो हर छोटी छोटी बात पर पाकिस्तान अधिकारी इंडियन क्रिकेट लीग़ (आईसीएल) के खिलाड़ियों पर लगा प्रतिबंध हटाने की बात करते हैं.

पर अब पाकिस्तान को भी ऐसा करने से रोकने के लिए भारतीय अधिकारी श्रीलंका की मदद लेने में बिलकुल भी नहीं हिचकिचा रहे हैं.

बढ़िया मौक़ा

यानी कि भारत-पाकिस्तान के बीच बिगड़ते संबंधों का सीधा सीधा फ़ायदा श्रीलंका को हो रहा है. सिर्फ़ पैसों का ही नहीं, बीच बचाव करके अपनी साख बढ़ाने का भी इससे बढ़िया मौक़ा और क्या हो सकता है.

क्रिकेट

श्रीलंका तब तक यह फसल काटता रहेगा जब तक एक बार फिर से भारत और पाकिस्तान के संबंध सामान्य नहीं हो जाते.

फ़िलहाल तो ऐसा होता दिख नहीं रहा है- और अगर कुछ साल तक यह तनातनी चलती रही (जिसके साफ़ आसार हैं) तो फिर से भारत पाकिस्तान क्रिकेट श्रृंखला के भाव बाज़ार में बढ़ जाएंगे.

पिछली बार जब ऐसा हुआ था तो उसका फ़ायदा उठाया था शारजाह ने. पर इस बार ऐसा नहीं हो सका क्योंकि शारजाह पर से मैच फ़िक्सिंग का दाग़ अभी तक पूरी तरह धुला नहीं है. भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघ (आईसीसी) का नया मुख्यालय दुबई में है.

बस, श्रीलंका की अब चाँदी है. उसे बस भारत और पाकिस्तान दोनों को खुश रखना है और देखते ही देखते उसकी आमदनी दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती जाएगी.

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