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दो नैना और एक कहानी.... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क़रीब 29 साल बाद भारतीय क्रिकेट टीम में दो भाइयों इरफ़ान पठान और यूसुफ़ पठान को शामिल किया गया है. इससे पहले वर्ष 1978 में सुरिंदर अमरनाथ और मोहिंदर अमरनाथ भारत की ओर से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेले थे. उससे पहले नज़ीर अली-वज़ीर अली और किरपाल सिंह-मिल्खा सिंह की जोड़ियाँ भी भारत की नुमाइंदगी कर चुकी हैं. तो क्या दोनों के बीच मुक़ाबला है? उनकी अम्मी ऐसा नहीं मानती. उनका कहना है कि उनके दोनों बेटे उनकी दो आँखों की तरह हैं. वडोदरा के पठान भाइयों के पिता महबूब खाँ एक मस्जिद में अज़ान देने का काम करते हैं और माँ शमीम बानू आज तक बुर्क़े से बाहर नहीं निकली हैं. पेश है इरफ़ान और यूसुफ़ की अम्मी शमीम बानू के साथ हुई सूफ़िया शानी की बातचीत के प्रमुख अंश. इरफ़ान की टीम में वापसी हो गई और आपके बड़े बेटे यूसुफ़ भी टीम में आ गए है. तो दोनों बेटों को भारतीय क्रिकेट टीम में देखकर कैसा लग रहा है? बहुत ख़ुशी है. हमने बहुत दुआएँ मांगी थीं. बाक़ी सबकी दुआएँ भी काम आईं. इरफ़ान को कामयाबी बहुत पहले मिल गई. यूसुफ़ को देर से अवसर मिला. दोनों भाइयों के बीच मैदान में तो मुक़ाबला चलता ही है. तो क्या यह मुक़ाबला घर तक भी आता है? नहीं. उनके बीच कोई मुक़ाबला नहीं है. घर पर तो वे दोनों एक-दूसरे की ग़लतियाँ बताते हैं. तुमने आज ये ग़लती की और तुमने आज वो ग़लती की. नन्हें इरफ़ान में और आज के इरफ़ान में क्या फ़र्क़ लगता है आपको? उसमें कोई फ़र्क़ नहीं आया है. गुड्डू ( इरफ़ान) जैसा पहले मासूम था. वैसा ही आज भी है. बस अब वक़्त कम मिलता है उसे जब घर आता है तो सुबह प्रैक्टिस, शाम प्रैक्टिस. फ़ुर्सत के वक़्त घर में गपशप होती है. पुराने दोस्तों का आना-जाना चलता रहता है. इरफ़ान और यूसुफ़ की, बचपन की कोई शरारतें याद आती हैं आपको? शरारत दोनों करते थे. बस एक दूसरे से गुत्थम-गुत्था करते थे. ज़िद करते होंगे तो कान खिंचाई भी होती होगी? नहीं. ज़िद्दी नहीं थे. सीधे-सादे थे. कभी ज़िद भी करते थे लेकिन समझाने पर मान जाते थे. कभी-कभी हाथ भी उठ जाता था. कभी मेरा. कभी उनके अब्बा का. इरफ़ान और यूसुफ़ में अम्मी का 'राजा' बेटा कौन है? उनकी छोटी बहन शगुफ़्ता भी है. अगर दोनों बेटे दो आँखों की तरह हैं. तो उनके बीच बेटी नाक की तरह है. दो भाइयों के बीच एक छोटी बहन यानी भाई-बहन के बीच काफ़ी शरारत होती होगी? इरफ़ान तो ज़्यादा नहीं करता लेकिन यूसुफ़ और शगुफ़्ता के बीच काफ़ी हंसी-मज़ाक़ चलता रहता है. शगुफ़्ता को भी अपने भाइयों पर काफ़ी गर्व होता होगा... स्कूल मे भी उनके चर्चे होंगे ? चर्चे तो हैं लेकिन वह काफ़ी शर्मीली है. स्कूल में कोई नई टीचर उससे पूछती है- क्या सच में तुम इरफ़ान की बहन हो? तो वह कोई जवाब नहीं देती. उसकी सहेलियां जवाब देती हैं. हाँ सच मे यही इरफ़ान की बहन है.
मैदान पर तो इरफ़ान बाज़ी मार चुके हैं लेकिन पढाई में भी उनके यही जलवे थे? पढ़ाई में भी अच्छा रहा है. हमेशा अच्छे नंबर लाता था. क्रिकेट के अलावा और क्या शौक़ हैं उनके? अक्सर संगीत सुनता रहता है. उसे नए-पुराने सब तरह के गाने पसंद हैं. इरफ़ान के पास लड़कियों के फ़ोन आते हैं, ख़त आते हैं तो कैसा लगता है? अच्छा लगता है. ख़ुशी होती है कि अल्लाह ने उसे ऐसा बनाया कि लोग उसे पसंद करते हैं. कभी कोई बुरी चीज़ होती है तो बुरा भी लगता है. शादी के लिए रिश्ते भी आते होंगें? बहुत रिश्ते आते हैं लेकिन अभी वह छोटा है. इरफ़ान ख़ुद कहता है कि अभी उसे ज़िंदगी में बहुत कुछ हासिल करना है. लेकिन जब भी इरफ़ान की दुल्हन या आपकी बहू आएगी तो वह किसकी पसंद की होगी. आपकी या इरफ़ान की पसंद की. अगर मैं भी पसंद करूंगी तो वह भी इरफ़ान की पसंद के मुताबिक़ होगी क्योंकि ज़िंदगी तो उसे ही गुज़ारनी है. अगर इरफ़ान किसी को पसंद करता है तो वह भी सिर आँखों पर. अच्छा ये बताएँ कि इरफ़ान को खाने में क्या पसंद है? जब लंबे दौरे से वापस आते हैं तो आपके हाथ का बना क्या खाना चाहते हैं? मेथी की भाजी और आलू-बैंगन की सब्ज़ी. ख़ासतौर पर सर्दियों में. वैसे दोनों भाई बहुत सादा खाना खाते हैं. उन्हें सब कुछ पसंद है. आपको इरफ़ान का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन कौन सा लगता है? जब उसने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कराची में टेस्ट मैच की पहली तीन गेंदों पर तीन विकेट लिए थे. मुझे क्या उसका वह प्रदर्शन पूरे देश को हमेशा याद रहेगा. |
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