कोहली हैं सचिन से बड़े 'मैच विनर'?

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- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कोलकाता से
बात 2011 क्रिकेट विश्व कप फ़ाइनल की है. भारत ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को हराया था और जश्न जारी था.
सचिन तेंदुलकर को कंधों पर उठाए भारतीय खिलाड़ी स्टेडियम का चक्कर लगा रहे थे. इनमें विराट कोहली भी थे.
पूछने पर कोहली ने कहा था, "इस खिलाडी ने पूरे देश की उम्मीदें 20 साल से भी ज़्यादा अपने कंधों पर उठा रखी थीं. अब समय है उस बोझ को दूसरे उठाएं."

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सचिन को सम्मान देने का यह कोहली का अपना अंदाज़ था. लेकिन उसके ठीक पांच साल बाद अब अकेले कोहली पर करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदें हैं.
शनिवार को ईडन गार्डंस में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ निर्णायक पारी खेलने के बाद ड्रेसिंग रूम जाते समय कोहली ने पैवेलियन की बग़ल में बैठे सचिन को झुककर सम्मान भी दिया.
उम्र के लिहाज़ से सचिन से बहुत देर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शुरू करने वाले कोहली 27 की उम्र में ही 36 शतक जड़ चुके हैं.
इत्तेफ़ाक़ है कि कोहली को एक विख्यात जर्मन कंपनी की कारें उसकी मज़बूती और पावर के चलते पसंद हैं. ऐसा ही कुछ उनकी बल्लेबाज़ी औसत में भी झलकने लगा है.

टी-20 जैसे ताबड़तोड़, तमाशाई क्रिकेट में भी कोहली का बैटिंग एवरेज 53 रन प्रति मैच का है. यह विपक्षी टीमों की नींद उड़ाने के लिए काफ़ी है.
वन-डे क्रिकेट में तो कोहली ने उन सभी को पीछे छोड़ दिया है, जिनसे खेल के गुर लेकर वे विराट 'मैच विनर' कोहली बने.
अभी तक खेले 171 वन-डे मैचों में विराट 25 शतक लगा चुके हैं. तुलना हमेशा सटीक नहीं होती, लेकिन 15 वर्ष और 311 मैचों के करियर में सौरभ गांगुली ने 22 शतक ही लगाए थे.
गांगुली ने कुछ दिन पहले कहा था, "मौजूदा समय में कोहली दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ हैं."

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वन-डे क्रिकेट में सबसे तेज़ 6,000 रनों तक पहुँचने का रिकॉर्ड भी अब कोहली की झोली में है. कोहली कहते रहे हैं कि उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में ही बैटिंग करने में मज़ा आता है.
सवाल उठने लाज़मी हैं कि क्या कोहली भारत के लिए अब तक के सबसे बेहतरीन 'मैचविनर' हैं?
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क से जब कोहली की बैटिंग पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा था, "कोहली को खेलते देख तेंदुलकर की याद ताज़ा हो जाती है."

इसमें दो राय नहीं कि अपनी बल्लेबाज़ी से मैच जिताने के मामले में कोहली का औसत तेंदुलकर से बेहतर है.
लेकिन हक़ीक़त यह भी है कि मास्टर-ब्लास्टर सचिन के कुछ रिकॉर्डों तक पहुँचने में कोहली को काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना होगा.
तेंदुलकर को तेंदुलकर बनने में जितना समय लगा, कोहली ने अब तक उसका क़रीब आधा क्रिकेट ही खेला है.

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लेकिन जिस रफ़्तार, भरोसे और एकाग्रता से कोहली भारतीय क्रिकेट का परचम लहराते जा रहे हैं, नामुमकिन कुछ भी नहीं लगता.
महीनों पहले टेस्ट कप्तान बनने के बाद उनमें आए फ़र्क़ पर कोहली बोल बैठे, "सिर्फ़ एक चीज़ बदली है. मेरी दाढ़ी के कई बाल सफ़ेद हो गए हैं."
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