बैडमिंटन की नई सनसनी हैं शिवानी

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
लंबे समय से भारतीय बैडमिंटन में सायना नेहवाल की चमक कायम है. जब तब हैदराबाद की पीवी सिंधु उनको चुनौती देती नज़र आती हैं, लेकिन सायना जब अपनी लय में होती हैं तो कोई दूसरा उनके आसपास नहीं टिकता.
भारतीय बैडमिंटन में सायना नेहवाल और पीवी सिंधु की चमक के बीच एक नई स्टार ने अपनी चमक बिखेरनी शुरू कर दी है. ये सनसनी हैं जी. रुतविका शिवानी.
शिवानी ने 12वें दक्षिण एशियाई खेलों के फ़ाइनल में पीवी सिंधू को हराकर गोल्ड मेडल जीता. वर्ल्ड रैंकिंग में 12वीं पायदान पर मौजूद पीवी सिंधु को हराना किसी सनसनी से कम नहीं.
हार के बाद सिंधु ने भी माना है कि रुतविका शिवानी के शानदार प्रदर्शन के सामने उनकी एक नहीं चली.

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यह बात ठीक है कि शिवानी इस समय जूनियर वर्ग से सीनियर वर्ग में पहुँची हैं और सायना या सिंधु तक पहुँचने के लिए उन्हें लंबा सफ़र तय करना है, पर उन्होंने अपनी ओर से पहला क़दम तो बढ़ा ही दिया है.
शिवानी सिंधु के साथ ही गोपीचंद अकादमी में ट्रेनिंग करती हैं और दोनों एक-दूसरे के खेल से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं. ऐसे में शिवानी की जीत की अहमियत और भी बढ़ जाती है.
19 साल की शिवानी ने पांच साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू किया. सायना की तरह ही शिवानी के पिता ने अपनी बेटी को बैडमिंटन सिखाने की कोशिश शुरू की. 2002 में ये शुरुआत विजयवाड़ा के सीक्वल क्लब से शुरू हुई थी.

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दो साल में शिवानी के पिता उन्हें आंध्र स्पोर्ट्स अथॉरिटी की अकादमी लेकर पहुँचे और इसके बाद शिवानी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. इन दिनों वह हैदराबाद स्थित पुलेला गोपीचंद की अकादमी में ट्रेनिंग ले रही हैं.
गोपीचंद भी सायना और सिंधु के बाद एक और विश्वस्तरीय प्रतिभा को तराशने की कोशिश में जुटे हैं.
यही वजह है कि उनकी अकादमी में शिवानी की ट्रेनिंग सुबह साढ़े चार बजे से शुरू हो जाती है. रोज़ छह से सात घंटे तक शिवानी अभ्यास कर रही हैं. इस अभ्यास का उन्हें फ़ायदा भी हुआ है.
पिछले साल फ़रवरी में उन्होंने सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप का खिताब जीता. इस साल दक्षिण एशियाई खेलों में सिंधु को हराकर गोल्ड मेडल भी जीत लिया.
लेकिन शिवानी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी रैंकिंग सुधारने की है. इस समय उनकी रैंकिंग 131 है. जब तक वे दुनिया की शीर्ष 30 खिलाड़ियों में शामिल नहीं होतीं, तभी उन्हें दुनिया की सभी बड़े टूर्नामेंटों में खेलने का मौक़ा मिलेगा.
शिवानी को उम्मीद है कि वह इस लक्ष्य को साल भर में पा लेंगी. इसके अलावा उन्होंने दीर्घकालिक लक्ष्य रैंकिंग में टॉप पांच में पहुँचना निर्धारित किया है. इस लक्ष्य को पाने के लिए बैडमिंटन सर्किट में लगातार शानदार प्रदर्शन करके खिताबों की झड़ी लगानी होगी. इसके बिना यह लक्ष्य पाना संभव नज़र नहीं आता.

बैडमिंटन असल में कम खिलाड़ियों का खेल है. इसमें यदि आप विभिन्न ग्रां-प्री टूर्नामेंटों में दो-तीन राउंड ही जीतते रहें और खिताब से आपका नाता न भी जुड़े तो आप टॉप 30 खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं.
भारतीय खिलाड़ियों में गुरुसाई दत्त जैसे खिलाड़ी इसी तरह अपनी रैंकिंग को सुधारे हैं. पर शिवानी को रैंकिंग सुधारने का अभियान चलाने के लिए काफ़ी समय तक क्वालीफ़ाइंग दौर से गुज़रना होगा.
किसी भी खेल में क्वालीफ़ाइंग दौर से आगे बढ़ना खासी मशक्कत का काम है. तो शिवानी के सामने सायना बनने के लिए इस चुनौती से पार पाना होगा.
वैसे बेहतरीन खिलाड़ी होने के साथ शिवानी अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दे रही हैं. वे हैदराबाद के मेहदीपत्तनम स्थित महिलाओं के सेंट एन कॉलेज से बीकॉम की शिक्षा ले रही हैं. वहां वे द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं.
किसी भी खिलाड़ी के लिए खेलने के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं है, पर शिवानी कहती हैं कि आप के दिमाग़ में बहुत ही अच्छे नंबर लाना नहीं है तो खेलने के साथ-साथ पढ़ाई चल सकती है.
यह बात और है कि शिवानी भी आम खिलाड़ियों की तरह नियमित तौर पर क्लास नहीं कर पातीं. लेकिन इसका असर उनकी पढ़ाई पर नहीं पड़ा है.












