क्रिकेट: बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ बनाम भारतीय टीम

वसीम अकरम

इमेज स्रोत, WILLIAM WEST/AFP via Getty Images

    • Author, शिवाकुमार उलगनाथन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

वह एक ओवर में छह गेंद फेंकता है और सभी अलग-अलग तरीकों से फेंकता है.बाकी बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाजों की तरह वह भी एक दुर्लभ और वास्तविक प्रतिभा है.- भारतीय क्रिकेट के जानेमाने खिलाड़ी नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज वसीम अकरम के लिए ये टिप्पणी की थी.

सालों से बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाजों को एक विशेष और दुर्लभ प्रतिभा के तौर पर देखा जाता है. इनमें से ज़्यादातर गेंदबाजों में गेंद को अच्छी लय में लाने और स्विंग के साथ बल्लेबाजों को छकाने की खास प्रतिभा होती है.

क्योंकि ज़्यादातर बल्लेबाज़ दाएं हाथ के होते हैं, इसलिए उनके लिए बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज की स्विंग, उछाल और पेस वैरिएसन्स को आकंना मुश्किल होता है.

अतीत और वर्तमान में कई बैटिंग लाइन-अप्स को बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ मुश्किलों का सामना करना पड़ा है.

जब मैदान में दूसरे छोर पर बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज काम कर रहे थे तो कई बार भारतीय बल्लेबाजों को परेशानी का सामना करना पड़ा.

वीडियो कैप्शन, गुजरात का ये क्रिकेट कैंप ख़ास है और ये महिलाएं मिसाल हैं

सेमी फ़ाइनल संकट

2015 के वनडे विश्व कप सेमीफ़ाइनल में एक बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने अच्छी शुरुआत की थी. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पास उनके लाइन-अप मिचेल जॉनसन और मिचेल स्टार्क में दो बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज थे.

दोनों ने उस मैच में वास्तविक गति से अच्छी गेंदबाज़ी की और दोनों ने दो-दो विकेट लिए. मिचेल जॉनसन ने कुछ गेंदें फेंकी और उस मैच में सबसे महत्वपूर्ण विराट कोहली का विकेट हासिल कर लिया.

मिचेल स्टार्क और न्यूजीलैंड के एक अन्य बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ ट्रेंट बोल्ट उस विश्व कप में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ थे. दोनों ने विश्व कप में 22-22 विकेट लिए थे.

लेकिन भारत का सेमीफ़ाइनल का कहर 2019 विश्व कप में भी जारी रहा. पहले बल्लेबाज़ी करते हुए न्यूजीलैंड ने थोड़े चुनौतीपूर्ण विकेट में 240 का मामूली स्कोर बनाया, फिर भी बाएं हाथ के एक और तेज़ गेंदबाज़ ने उस मैच में नुक़सान पहुंचाया था.

ट्रेंट बोल्ट ने विराट कोहली और रवींद्र जडेजा को आउट किया. वह सिर्फ दो विकेट ले सकते थे, लेकिन उन्होंने जो प्रभाव डाला और जडेजा को अच्छी तरह से सेट करने के तरीक़े ने उस टूर्नामेंट में भारतीय टीम के भाग्य को खटाई में डाल दिया.

पाकिस्तानी गेंदबाज

इमेज स्रोत, ANI

पाकिस्तान से दोहरी मुसीबत

2017 में चैंपियंस ट्रॉफी का फ़ाइनल का अहम मैच था. भारत बनाम पाकिस्तान फ़ाइनल में बराबरी और चुनौतीपूर्ण मुक़ाबले की उम्मीद थी. लेकिन ये एक ऐसा मैच था जिसे भारतीय क्रिकेट प्रशंसक भूल जाना चाहेंगे.

भले ही फ़ख़र ज़मान के शतक ने पाकिस्तान को एक बड़ा स्कोर खड़ा करने में मदद की, यह मोहम्मद आमिर की बाएं हाथ की तेज़ गेंदबाज़ी थी जिसने भारत की रही-सही संभावनाओं को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया.

उस मैच में शुरुआती वक्त में उन्होंने जो गेंदें फेंकी उनमें से ज़्यादातर अचूक थीं और उन्होंने रोहित शर्मा, शिखर धवन और विराट कोहली को आउट किया. उस मैच में मोहम्मद आमिर के स्पैल की लंबे समय तक तारीफ़ हुई थी.

फिर भी एक और पाकिस्तानी बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ ने 2021 आईसीसी टी20 विश्व कप में भारत की संभावनाओं को नष्ट कर दिया. शाहीन शाह अफ़रीदी ने 3 महत्वपूर्ण विकेट लिए और भारत उस मैच में ज़्यादा उबर नहीं सका.

वीडियो कैप्शन, भाविना पटेलः जो चुनौतियों से नहीं हारीं और जीतकर इतिहास रचा

चारों मौक़ों पर बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों ने न सिर्फ महत्वपूर्ण विकेट चटकाए बल्कि भारतीय बल्लेबाज़ों के मन में काफी शंकाएं भी पैदा कीं.

अभी तक जो उदाहरण दिए गए हैं वो अंतरराष्ट्रीय मैचों के हैं और जिन मैचों की बात की गई है उनमें पिच ने गेंदबाज़ों की काफी मदद की थी. लेकिन पिछले हफ्ते विशाखापट्टनम की एक सामान्य और कम ख़तरनाक पिच पर भी एक बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ ने बल्लेबाज़ को करारा झटका दिया था.

मिचेल स्टार्क ने इस एकदिवसीय मैच में अच्छी गेंदबाज़ी की और जिस तरह से उन्होंने कुछ भारतीय बल्लेबाज़ों को आउट किया, उसने अचानक भारतीय बल्लेबाजी क्रम कि आंखें खोल दीं. उन्होंने पांच विकेट लिए और भारत केवल एक छोटा-सा स्कोर ही बना सका. पिछले मैच में भी, उन्होंने तीन विकेट लिए थे और ऐसा लग रहा था कि वह भारत की जीत के रास्ते में रोड़ा बनेंगे.

वनडे विश्व कप अब बेहद नज़दीक है और भारत के पास बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों से निपटने के लिए बहुत कम समय है. महत्वपूर्ण नॉकआउट मैच में बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ विरोधी किसी भी तरह कि कमज़ोरी या पिछले इतिहास का बेहद ही आसानी से उपयोग करेंगे.

गेंदबाज

इमेज स्रोत, ANI

तेज़ गेंदबाज़ भारत ही नहीं दूसरी टीमों के लिए भी ख़तरा होते हैं

भारतीय बल्लेबाज़ी क्रम को ढहाने वाले बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों के ख़तरे के बारे में वरिष्ठ खेल पत्रकार शंकर कहते हैं, "मामला यह है कि बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ हमेशा से केवल भारत के लिए ही नहीं, दूसरी देशो की टीमों के लिए भी ख़तरा होते हैं. उनकी विविधता और उछाल को आंकना आसान नहीं है."

"इसके अलावा, किसी को घरेलू मैच में में बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों को खेलने का ज़्यादा मौक़ा खिलाड़ियों को नहीं मिलेगा."

"देर से सही, लेकिन भारत ने निश्चित रूप से बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ संघर्ष किया है. वह भी महत्वपूर्ण नॉकआउट मैचों में. दिन और रात के मैचों के दौरान, बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है."

यह पूछे जाने पर कि क्या महत्वपूर्ण मैचों में विराट कोहली का बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों से अक्सर मात खा जाना एक चिंता का विषय था, शंकर कहते हैं, "विराट कोहली एक महान बल्लेबाज़ हैं. भले ही वह कुछ मौक़ों पर इन गेंदबाज़ों के हाथों आउट हो गए, लेकिन अपनी क्षमता के साथ वह सही समय पर इसका सामना करेंगे. लेकिन इस क्षण भारतीय लाइन-अप अचानक कुछ मैचों में नाजु़क दिख रहा है और काबिल तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ निर्णय लेने का समय बहुत कम है."

शंकर कहते हैं, "यहां तक ​​कि अगर कोई कमज़ोरी है, तो यह उनकी प्रतिभा से संबंधित नहीं है. हो सकता है कि पिछली असफलताओं के कारण यह उनकी मानसिकता से संबंधित हो. बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों का सामना करना सिर्फ एक मुद्दा है. जब टीम अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू करेगी, तो बाएं हाथ की तेज़ गेंदबाज़ी ज़्यादा ख़तरनाक साबित नहीं होगी. इसका मुक़ाबला करने का एक तरीक़ा ये है कि नेट में नियमित रूप से बाएं तेज़ गेंदबाज़ों का सामना किया जाए. उन्हें इकट्ठा कर सभी शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ों को गेंदबाज़ी करना कठिन नहीं होगा."

वीडियो कैप्शन, प्रीतम सिवाचः हॉकी में द्रोणाचार्य अवॉर्ड पाने वाली पहली महिला कोच से मिलिए

एकदिवसीय विश्व कप के सिर्फ छह महीने बचे हैं. ऐसे में ये देखना होगा कि बाएं हाथ की तेज़ गेंदबाज़ी भारत की जीत के रास्ते का कांटा बनेगी या नहीं. साथ ही टीम के पास बहुत कम बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ हैं.

अर्शदीप सिंह युवा हैं और अभी खेल सीख रहे हैं. जयदेव उनादकट ने बहुत कम मैच खेले हैं, उनका अनुभव कम है. नटराजन ने कुछ समय पहले खेला था. ऐसे में चेतन सकारिया और ख़लील अहमद के नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन वो भी नियमित रूप से नहीं हो रहा.

ऐसे में भारत के सामने दोहरी चुनौती है. पहला ये कि उसे बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों से निपटना है और दूसरा ये कि बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों को टीम में तैयार करना.

महीने के अंत तक आईपीएल शुरू होने वाला है, लेकिन ये एक अलग प्रारूप का खेल होगा और बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ चिंताओं पर कुछ समय के लिए चर्चा नहीं होगी. लेकिन ये बात सच है कि विश्व कप की तैयारी के लिए भारत के पास अब समय कम है.

ये भी पढ़ें

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)