पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टीम इंडिया की शानदार जीत किस लिए याद रखी जाएगी?

अश्विन

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    • Author, विधांशु कुमार
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

नागपुर में पहले टेस्ट मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पारी और 132 रनों से हरा दिया. ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 177 रन बनाए जिसके जवाब में भारतीय टीम ने 400 रनों की पारी खेली.

ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी महज़ 91 रनों में सिमट गई. भारत के इस बड़ी जीत के हीरो रहे रवींद्र जडेजा, रवि अश्विन और कप्तान रोहित शर्मा.

आईसीसी की रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया पहले और भारत दूसरे नंबर पर है, लेकिन जिस धौंस के साथ भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पटखनी दी उससे यही लगा की मैच ऑस्ट्रेलिया नहीं बल्कि कोई कमज़ोर टीम खेल रही थी.

पिच की पेंच में फंसे ऑस्ट्रेलियाई

इस मैच के शुरू होने से पहले ही पिच पर बात होनी शुरू हो गई थी. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर इयान हिली ने सोशल मीडिया पर बताया कि अगर भारत ख़राब पिच तैयार करता है तो उनके पास बढ़त होगी लेकिन अगर पिच न्यूट्रल हो तो ऑस्ट्रेलिया सिरीज़ जीत जाएगी.

टीम

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नागपुर पहुंचने के बाद से ही ऑस्ट्रेलियाई एक्सपर्ट्स और मीडिया ने पिच को कोसना शुरू कर दिया. ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ क्रिकेट पत्रकार रॉबर्ट कैडॉक ने लिखा कि पिच एक समान नहीं है और इसके अलग हिस्सों को अलग तरीके से तैयार किया गया है - सही मायने में ये पिच डॉक्टरिंग है.

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिग ने भी इस पिच को ऑस्ट्रेलिया के लिए नाइटमैयर या बहुत बड़ा सिरदर्द बताया.

लेकिन अगर ये पिच इतनी ख़राब थी तो भारतीय टीम ने कैसे इस पर अपनी पहली पारी में 400 रन बना लिए? वहीं ऑस्ट्रेलिया की टीम केवल 3 सत्र में दो बार आउट हो गई और दोनों पारी मिलाकर 300 रन भी नहीं बना सकी.

इसी मुद्दे पर वसीम जाफ़र ने अदद ट्वीट किया. उन्होंने लिखा की किसी पिच पर तब तक फैसला ना सुनाए जब तक दोनों ही टीमों ने उस पर बैटिंग ना कर ली हो. अगर दोनों ही टीमों को रन बनाने में मुश्किल हो तो पिच खराब है, लेकिन अगर एक ही टीम को मुश्किल हो तो उस टीम की बैटिंग में काबिलियत नहीं है.

जडेजा ने भारत को दिलाई बढ़त

टॉस जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करने का फैसला किया. ऑस्ट्रेलिया को टॉस का एडवांटेज मिल गया था और बढ़िया बैटिंग कर वो भारतीय टीम को दबाव में ला सकती थी. जब तीसरे विकेट के लिए मार्नस लाबुशेन और स्टीव स्मिथ एक अच्छी साझेदारी बना रहे थे तो उन्हें एक बड़े स्कोर की महक भी आने लगी थी. लेकिन उनके इस सपने पर टेस्ट मैच में वापसी कर रहे रवींद्र जडेजा ने पानी फेर दिया.

उन्होंने लाबुशेन को स्टंप आउट करवाया और फिर स्टीव स्मिथ को क्लीन बोल्ड कर दिया. जडेजा यहीं पर नहीं रूके और इसी स्पेल में उन्होंने रेनशॉ और हैंड्सकोम्ब को आउट कर ऑस्ट्रेलियाई बैटिंग की कमर तोड़ दी. इस पारी में उन्होंने 5 विकेट लिए जिसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया की टीम सिर्फ 177 रनों पर सिमट गई.

दूसरी पारी में भी उन्होंने दो महत्वपूर्ण विकेट लिए. चोट के बाद लगभग 8 महीने बाद वापसी कर रहे जडेजा ने बताया कि इस दौरान उन्होंने बेंगलुरु के नेशनल क्रिकेट एकेडमी में समय बिताया और जमकर अपने खेल पर प्रैक्टिस की. शायद यही वजह थी कि इतने अंतराल के बाद भी उनकी बोलिंग के पैनेपन में कोई कमी नहीं दिखी.

पूर्व ऑस्ट्रेलयाई क्रिकेटर मार्क वॉ ने कमेंट्री में जडेजा की तारीफ़ करते हुए कहा, "उनकी गेंदबाज़ी का प्लान बहुत सिंपल है. वो एक अच्छी स्पीड में गेंद डालते हैं, उनकी हर गेंद स्टंप्स को निशाना बनाती है जिससे बल्लेबाज़ों को खेलना ही पड़ता है और जडेजा बोलिंग में गलती ना के बराबर करते हैं, बाकी का काम पिच कर देती है."

जडेजा

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हिटमैन रोहित शर्मा की कप्तानी पारी

इस मैच में रोहित शर्मा ने बतौर कप्तान अपना पहला टेस्ट शतक लगाया. जिस पिच पर ऑस्ट्रेलिया के बैट्समैन नानी याद कर रहे थे, उसी पिच पर उन्होंने इतनी कलात्मकता के साथ बैटिंग की मानो वो किसी दूसरी पिच पर खेल रहे थे.

उनकी बैटिंग की बारी पहले दिन ही गई थी और उस दिन वो थोड़ा अग्रेसिव होकर खेले और शॉट्स लगाए. मैच के दूसरे दिन वो संभल कर खेलने लगे और कलाईयों को बेहतरीन इस्तेमाल कर गैप्स में लगातार रन लेते रहे.

रोहित शर्मा

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एक आंकड़े के अनुसार अपने ही घर में रन बनाने में रोहित शर्मा सर डॉन ब्रैडमैन के बाद दूसरे नंबर पर आ गए. कम से कम 20 पारियों को खेले हुए प्लेयर्स को देखा जाए तो अपने घर में ब्रैडमैन का औसत 98 है जबकि रोहित शर्मा लगभग 76 की औसत के साथ दूसरे नंबर पर आ गए हैं.

मॉंटी पनेसर ने ट्वीट कर कहा कि रोहित शर्मा अपने घर में आज के डॉन ब्रैडमैन हैं.

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इस टेस्ट मैच में शतक लगाने के बाद रोहित शर्मा टेस्ट, वनडे और टी20 - तीनों फॉरमैट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए.

रवि शास्त्री ने इस पिच पर रोहित की सफलता का राज बताते हुए कहा, "ये उनके फुटवर्क, मानसिकता और कौशल का मिला-जुला रिज़ल्ट है. उन्होंने अपनी कलाईयों का इस्तेमाल किया, लेट खेला और कभी भी गेंद को तेज़ से मारने का प्रयास नहीं किया. जिस तरह वो हल्के हाथ से खेले वो इस पिच पर बैटिंग करने की मास्टरक्लास थी."

जडेजा

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अक्षर पटेल और जडेजा की पारी मैच का टर्निंग प्वाइंट

जब रोहित शर्मा 120 रन बनाकर आउट हुए तो ऑस्ट्रेलिया को मैच में वापसी करने का एक मौका मिला. भारत के पास 50 रनों की बढ़त थी और यहां ऑस्ट्रेलिया अच्छी बॉलिंग कर पूरी टीम को जल्दी आउट कर सकता था.

उन्हें भारत के रूप में छठा विकेट भी जल्दी मिल गया लेकिन इसके बाद रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल ने मैच जिताऊ पार्टनरशिप की. दोनों ने मिलकर आठवें विकेट के लिए 88 रन जोड़े.

70 रन पर जडेजा के आउट होने के बाद भी पटेल ने हार नहीं मानी और आखिरी दो विकेटों के साथ मिलकर 72 रन और जोड़े. पटेल 174 गेंद खेलकर 84 रन बनाकर आउट हुए और इस टीम में अपनी उपयोगिता साबित कर दी.

भारतीय टीम को 50-60 की नहीं बल्कि 233 रनों की बड़ी लीड मिली. अपनी दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई टीम इस लीड के दबाव में इतना आ गई कि एक सेशन भी बैटिंग पूरी ना कर सकी.

अक्षर पटेल

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अश्विन ने किया मैच फ़िनिश

कहते हैं कि फास्ट बॉलर्स जोड़ी में शिकार करते हैं. हम स्पिनर्स के बारे में भी ऐसा कह सकते हैं, कम से कम जब अश्विन और जडेजा साथ-साथ गेंदबाज़ी कर रहे हों तो.

पहली पारी में जडेजा ने 5 विकेट लिए और अश्विन ने 3 विकेट लेकर उनका साथ दिया तो दूसरी पारी में अश्विन के खाते में 5 विकेट आए जबकि जडेजा ने 2 शिकार किए. मैच से पहले और उसके दौरान भी ऑस्ट्रेलियाई एक्सपर्ट्स पिच के बैटिंग क्रीज़ के आसपास के रफ़ पैच पर चर्चा कर रहे थे कि कैसे ये गेंद को टर्न करने में मदद करेगी. लेकिन अश्विन और जडेजा दोनों ने रफ़ पैच के बजाए ज्यादातर गेंद पिच के सेंटर से ही टर्न कराए और विकेट्स हासिल किए.

दूसरी पारी में अश्विन ने 37 रन देकर 5 विकेट लिए और 31वीं बार 5-विकेट हॉल हासिल किया. उन्होंने ऐलेक्स कैरी के विकेट के साथ टेस्ट में 450वां विकेट भी लिया.

अश्विन की कलाकारी ऑस्ट्रेलिया के कौशल से बाहर थी और दूसरी पारी सिर्फ 91 रनों पर सिमट गई. भारत को पारी और 132 रनों की बड़ी जीत मिली.

बल्लेबाज़ी

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ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग की हुई खिंचाई

इस पिच पर ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग की जमकर खिंचाई हो रही है. ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ बल्लेबाज़ स्टीव स्मिथ ने भी माना की पहली पारी में खराब बैटिंग इस हार का कारण बनी.

उन्होंने कहा, "पिच में वैसा कोई शैतान नहीं बैठा था जिससे हम डर रहे थे. पहली पारी में ये पिच ज़रूर तीसरे दिन से बढ़िया खेल रही थी. हमने सिर्फ 177 रन बनाकर मैच हाथ से जाने दिया. हालांकि उसके बाद भारत ने ज़बरदस्त खेल दिखाया, खासकर बोलिंग में जडेजा और अश्विन और बैटिंग में रोहित शर्मा का बड़ा योदगान रहा."

टॉड मर्फी का ड्रीम डेब्यू

इस पूरे मैच में ऑस्ट्रेलिया के लिए एक ही पॉजिटिव बात रही और वो थी युवा स्पिनर टॉड मर्फ़ी की गेंदबाज़ी.

सिर्फ दो साल पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखने वाले मर्फी ने इस मैच में एक ही पारी में 7 विकेट लिए. उन्हें नेथन लॉयन के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है और उन्होंने अपने डेब्यू मैच में निराश नहीं किया.

उन्होंने पारी में लॉयन से भी ज्यादा गेंदबाजी की और उनसे ज्यादा विकेट भी लिए.

टॉड मर्फ़ी और लॉयन

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जडेजा पर आईसीसी ने लगाया जुर्माना

मैच में कुल 7 विकेट और 70 रन बनाने के लिए जडेजा को प्लेयर ऑफ द मैच खिताब मिला. हालांकि मैच के बाद आईसीसी ने उनकी मैच फीस पर 25 फीसदी का जुर्माना भी लगा दिया क्योंकि उन्होंने बिना अंपायर को बताए अपनी उंगली पर क्रीम लगाई थी.

उन्हें आईसीसी के लेवल 1 का दोषी पाया गया और उन्हें एक डीमेरिट अंक भी मिला है.

पहले टेस्ट में इस बड़ी जीत के बाद क्रिकेट का काफिला दिल्ली की ओर बढ़ चला है जहां दूसरा टेस्ट मैच खेला जाएगा.

वर्ल्ड टेस्ट सिरीज़ के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने के लिए भारत को 4 मैचों की सिरीज़ में 3 टेस्ट जीतना होगा. रोहित शर्मा की टीम ने पहला मैच जीतकर इसकी शुरुआत कर ली है.

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