भारत-न्यूज़ीलैंड टी-20: स्पिनिंग ट्रैक पर अपने ही जाल में फंसने से बाल-बाल बची टीम इंडिया

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- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
लखनऊ में भारत ने न्यूज़ीलैंड को छह विकेटों से हराकर तीन मैचों की सिरीज़ एक-एक से बराबर कर ली है. स्पिनरों के लिए मददगार रही इस पिच पर भारतीय बैटिंग भी लड़खड़ा सी गई और किसी तरह टीम इंडिया ने आख़िरी ओवर में जीत हासिल की.
मैच टीम इंडिया जीत तो गई, लेकिन जिस तरीके से एक छोटे स्कोर का पीछा करते हुए भी टीम फंस गई उससे कप्तान और कोच ज़रूर निराश हुए होंगे.
लखनऊ की इस पिच ने नब्बे के दशक की याद दिला दी जब किसी भारतीय पिच पर गेंद डालने भर से वो घूम जाती थी. पिच को तैयार ही इस तरह किया जाता था कि स्पिनर्स को ज़बर्दस्त मदद मिले.
इस सिरीज़ में औसत टर्न 3.6 डिग्री का रहा है जो कि श्रीलंका के ख़िलाफ़ लगभग 2.1 डिग्री की टर्न से बहुत ज़्यादा है.
लिहाज़ा ऐसी घूमती पिच पर भारत को एक अतिरिक्त स्पिनर खिलाने का फ़ायदा मिला. भारत की तरफ़ से कुलदीप यादव, युज़वेन्द्र चहल, वॉशिंग्टन सुंदर और दीपक हुड्डा ने मिलकर 13 ओवर डाले और और सभी को 1-1 सफलता मिली.

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स्पिनर्स का बोलबाला
न्यूज़ीलैंड की बैटिंग दूसरे गियर से आगे नहीं निकल पाई. उसकी बड़ी वजह थी भारतीय स्पिनर्स की बॉलिंग जिसने उनके बल्लेबाज़ों को बांधे रखा.
आख़िरकार कीवी टीम 20 ओवरों में 8 विकेट खोकर केवल 99 रन बना सकी जो भारत के ख़िलाफ़ टी20 में उनका सबसे कम स्कोर है.
जहां भारतीय स्पिनर्स से मदद मिलती पिच पर विपक्षी टीम के बल्लेबाज़ों को बाँधे रखने की उम्मीद जायज़ थी, वहीं न्यूज़ीलैंड के स्पिनर्स ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी.
न्यूज़ीलैंड ने भी चौतरफ़ा स्पिन अटैक की रणनीति अपनाई और पहले 10 ओवरों में सिर्फ़ पहला ओवर ही उनके तेज़ गेंदबाज़ को मिला.
इस पारी में कीवियों के लिए मिचेल सैंटनर के अलावा माइकल ब्रेसवेल, ग्लेन फ़िलिप्स, ईश सोढ़ी और चैपमैन ने फिरकी गेंदबाज़ी की अच्छी मिसाल दी.
पारी का दूसरा ओवर डालते हुए ब्रेसवेल ने गेंद को इतना घुमाया कि भारतीय बल्लेबाज़ों के मन में भी संशय पैदा हो गया कि घूमती गेंद को आगे बढ़कर खेलें या क्रीज़ में पैर जमाए रहें.

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शुभमन गिल भी हुए परेशान
शानदार फ़ॉर्म में चल रहे शुभमन गिल भी इसी दुविधा का शिकार बने और ब्रेसवेल को अधूरे मन से शॉर्ट पुल लगाते हुए वो कीपर को कैच थमा बैठे.
ईशान किशन को फ़िलिप्स ने अपनी ही बॉलिंग पर ज़बर्दस्त फ़ील्डिंग करते हुए रनआउट करवाया तो राहुल त्रिपाठी ईश सोढ़ी की गुगली को पढ़ नहीं पाए और बड़ा शॉट लगाने के चक्कर में मिड विकेट पर आसान-सा कैच थमा बैठै.
फ़िलिप्स की ख़ासियत देखिए कि वैसे तो वो विकेटकीपर बैट्समैन हैं, लेकिन इस सिरीज़ में बतौर बल्लेबाज़ खेल रहे हैं और इस मैच में उन्होंने चौथे स्पिनर की भूमिका भी बख़ूबी निभाई. उन्होंने 4 ओवरों में सिर्फ़ 17 रन ख़र्च किए और टी20 मैच में 4.25 की इकॉनमी से बॉलिंग की.
इस मैच में कुल 30 ओवरों की स्पिन बॉलिंग हुई जो 33 ओवर के रिकॉर्ड से थोड़ा ही पीछे रह गई. जहां भारत के लिए चार गेंदबाज़ों ने 13 ओवर स्पिन डाले वहीं कीवियों के लिए 5 बॉलर्स ने 17 ओवर्स की स्पिन बॉलिंग की.

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अर्शदीप का आत्मविश्वास वापस आया
भारतीय टीम के लिए इस मैच में सबसे बड़ा पॉज़िटिव पहलू रहा अर्शदीप सिंह की विकेटों में वापसी. जसप्रीत बुमराह की चोट के बाद अर्शदीप सिंह और मोहम्मद सिराज भारतीय पेस अटैक की कमान संभाले हुए हैं.
लेकिन बांग्लादेश और श्रीलंका के ख़िलाफ़ हाल में ख़त्म हुई सिरीज़ों में अर्शदीप सिंह कुछ ख़ास नहीं कर पाए.
रविवार को लखनऊ में अर्शदीप सिंह ने कमाल की बॉलिंग की और न्यूज़ीलैंड के बैटर्स की ऑफ़ स्टंप के बाहर कड़ी परीक्षा ली.
स्पिनिंग ट्रैक पर उन्हें सिर्फ़ 2 ओवर डालने का मौका मिला लेकिन इसमें उन्होंने 7 रन देकर 2 विकेट लिए.
अर्शदीप के खाते में ईश सोढ़ी और लॉकी फ़र्ग्युसन के विकेट गए. वो कुछ इस तरह स्विंग करा रहे थे कि सुनील गावस्कर भी उनकी तारीफ़ करने से रह नहीं पाए.
उन्होंने कमेंट्री में कहा कि वो सफ़ेद गेंद से जितना स्विंग करवाते हैं, लाल गेंद से तो वो कमाल ही कर देंगे. एक तरह से गावस्कर ने अर्शदीप के लिए टेस्ट टीम में जगह की भी वकालत की.
वहीं, साथी कमेंटेटर रवि शास्त्री ने कहा कि अर्शदीप दिमाग़ से बॉलिंग करते हैं और बैट्समैन की कमज़ोरी का फ़ायदा उठाना जानते हैं.
अर्शदीप भारतीय इलेवन में एक अहम खिलाड़ी बन चुके हैं और इस तरह की बॉलिंग और उसकी तारीफ़ से उनका मनोबल ज़रूर बढ़ा होगा.

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छोटे टार्गेट में मिली रोमांचक जीत
इस मैच के आख़िरी ओवर तक तीनों नतीजे संभव थे - मैच भारत जीत सकता था, हार सकता था या फिर टाई हो सकता था. 99 के छोटे स्कोर का पीछा करते हुए भारत ने 4 विकेट गंवाए और आख़िरी ओवर की 5वीं गेंद पर जीत हासिल की.
आख़िर में कप्तान हार्दिक पंड्या और उपकप्तान सूर्यकुमार यादव की 30 रनों की साझेदारी ने भारत को जीत दिलाई. जहां इस मैच को भारत की रोमांचक जीत मानकर टीम के फ़ैंस को ख़ुशी मिल सकती है, वहीं उन्हें इस बात से निराशा भी होगी कि छोटे स्कोर के ख़िलाफ़ भी टीम कीवियों पर डॉमिनेट नहीं कर सकी.
गौतम गंभीर ने कहा कि भारतीय बल्लेबाज़ों ने स्पिन के ख़िलाफ़ स्ट्राइक को अच्छी तरह से रोटेट नहीं किया और जिस तरह से उन्होंने बैटिंग की उससे बहुत हिम्मत नहीं बढ़ती है.
अगर हाल के भारतीय प्रदर्शन को देखेंगे तो पाएंगे कि शुभमन गिल, विराट कोहली, ईशान किशन, रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव जैसे बैटर्स ने अच्छी बैटिंग तो की है, लेकिन टीम ने मिलकर बड़ा स्कोर नहीं किया.
शायद ही किसी पारी में 2 से ज़्यादा बल्लेबाज़ एक साथ चले हों. ये टीम इंडिया की एक मुख्य कमज़ोरी साबित हो रही है जिसका हल टीम को जल्दी ही ढूंढना होगा.
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चहल का रिकॉर्ड
इस मैच में स्पिनर युज़वेन्द्र चहल ने भी एक पर्सनल रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने न्यूज़ीलैंड के ओपनर फ़िन ऐलेन को 11 के स्कोर पर बोल्ड किया. अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों में ये चहल का 91वां विकेट था और उन्होंने भुवनेश्वर कुमार के 90 विकेट के भारतीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया.
तीसरे नंबर पर अश्विन हैं जिन्होंने 72वां विकेट अपने नाम किया है. एक स्पिनिंग ट्रैक पर चहल की शानदार बॉलिंग के बावजूद कप्तान हार्दिक पंड्या ने उन्हें सिर्फ़ 2 ओवर डालने को दिए जो किसी के भी समझ से बाहर रहा.
चहल को अगर पूरे 4 ओवर्स मिले होते तो शायद न्यूज़ीलैंड 99 का स्कोर भी नहीं बना पाती.
वहीं दूसरी ओर अगर न्यूजीलैंड ने 10-20 रन और बना लिए होते तो ये मैच जीतना भारत के लिए बेहद मुश्किल साबित हो सकता था. कुल मिलाकर जीत तो भारत को मिली, लेकिन वो दमदार प्रदर्शन देखने को नहीं मिला जिसकी टीम से उम्मीद थी.
न्यूज़ीलैंड को हराकर भारत ने राहत की सांस ली कि सिरीज़ अभी ज़िंदा है और अब अहमदाबाद के आख़िरी मैच में फ़ैसला होगा कि ट्रॉफ़ी किस टीम के नाम होगी.
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