वो सड़क हादसा जिसमें हुई एक क्रिकेटर की मौत, जो बचा वो बना दुनिया का सबसे उम्दा ऑलराउंडर

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- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत अब ख़तरे से बाहर हैं और यह ना केवल उनके जान पहचान, परिवार वालों बल्कि पूरी भारतीय क्रिकेट के लिए राहत की बात है.
दिल्ली से देहरादून जाते वक्त तड़के 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से कार चलाते वक्त एक पल की झपकी ने उनकी कार को टिन का डब्बा बना दिया, लेकिन खुशकिस्मती और समय पर मिली मदद के चलते वे ख़तरे से बाहर हैं.
किसी क्रिकेटर के लिए ऐसा हादसा कितना कुछ बदल सकता है, इसे समझना हो तो आपको 63 साल पहले हुए एक कार हादसे के बारे में जानना चाहिए.
ये एक ऐसा कार हादसा था, जिसने उस दौर के एक उभरते हुए ऑलराउंडर को हमेशा के लिए लील लिया. लेकिन उस कार को चला रहा और साथी क्रिकेटर की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार मानता रहा, क्रिकेटर, खेल की दुनिया में ऐसा रमा की दुनिया का सबसे बड़ा ऑलराउंडर बन गया.
6 सितंबर, 1959 को रेडक्लिफ से लंदन की ओर से आने वाली सड़क पर स्टाफोर्डशायर के पास ये हादसा हुआ था. उस कार में उस वक्त तीन इंटरनेशनल क्रिकेटर सवार थे, एक की मौत हो गई, दूसरा फिर कभी इंटरनेशनल क्रिकेट में नहीं दिखा लेकिन तीसरे ने वो सब कारनामे कर दिखाए, जिन्हें दोहराना आज भी किसी खिलाड़ी के लिए सपने से कम नहीं है.
उस हादसे के वक्त वेस्टइंडीज़ के तीन क्रिकेटर कार में सवार थे. तय प्रोग्राम के मुताबिक चार क्रिकेटरों को होना था, लेकिन चौथा तय समय पर नहीं पहुंचा.
ये तीन क्रिकेटर थे- कोली स्मिथ, टॉम ड्यूडनी और वो क्रिकेटर जो कार चला रहा था और बाद में क्रिकेट की दुनिया का सबसे बड़ा ऑलराउंडर बना.
कोली स्मिथ इस हादसे से पहले वेस्टइंडीज़ की ओर से 26 टेस्ट मैच खेल चुके थे. इन 26 टेस्ट मैचों में उन्होंने 1331 रन बनाए थे और बतौर स्पिन गेंदबाज़ 48 विकेट भी झटके थे.
इन आंकड़ों से वे कैसे क्रिकेटर थे, इसका अंदाज़ा नहीं होता. ऑस्ट्रेलिया की मज़बूत टीम के सामने डेब्यू करते हुए उन्होंने शतक जमाया था. करियर का दूसरा और तीसरा शतक उन्होंने इंग्लैंड की सीम गेंदबाज़ी की मदद करने वाली पिच पर जमाया था. इन पारियों में उनके बल्ले से 161 और 168 रन निकले थे.
करियर का चौथा शतक उन्होंने दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में स्पिन गेंदबाज़ों को सामने जड़ा था. इस लिहाज से देखें तो उस वक्त उन्हें वेस्टइंडीज़ क्रिकेट का ज़ोरदार खिलाड़ी माना जा रहा था. सोबर्स ने अपनी आत्मकथा में उनके बारे में लिखा है, "वह एक बेहतरीन ऑफ़ स्पिनर के तौर पर भी उभर रहे थे. मैं यह गंभीरता से कहता हूं कि उनमें टॉप क्लास ऑलराउंडर बनने की क्षमता थी, शायद दुनिया का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर."
कार में सवार दूसरे क्रिकेटर थे टॉम ड्यूडनी. दाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ ड्यूडनी वेस्टइंडीज़ की ओर से नौ टेस्ट मैचों में 21 विकेट चटका चुके थे. जो चौथा क्रिकेटर समय पर नहीं पहुंचा, उसका नाम था रॉय गिलक्रिस्ट. गिलक्रिस्ट वेस्टइंडीज़ के दाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ थे और उन्होंने 13 टेस्ट मैचों में 57 विकेट लिए थे.
ज़ाहिर है ऐसे में आप सबकी दिलचस्पी तीसरे क्रिकेटर में बढ़ गई होगी कि आख़िर वो कौन था. दरअसल तीसरे क्रिकेटर का नाम था गैरी सोबर्स.
जी हां, क्रिकेट के दुनिया महानतम ऑलराउंडरों में एक गैरी सोबर्स. जो हादसे के वक्त तक वेस्टइंडीज़ की ओर से क्रिकेट के मैदान में कमाल दिखा चुके थे. वे टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी पारियों में एक नाबाद 365 रन की पारी खेल चुके थे. 27 टेस्ट मैचों में वे छह शतकों की मदद से दो हज़ार से ज़्यादा रन बना चुके थे.
लंदन आते वक्त हुआ था हादसा
इस हादसे के बारे में गैरी सोबर्स ने अपनी ऑटोबायोग्राफ़ी में विस्तार से लिखा है.
उन्होंने लिखा है, "हमें अगले दिन चैरिटी मैच में हिस्सा लेने के लिए लंदन जाना था. हम चारों को निकलना था. रॉय गिलक्रिस्ट का हमलोगों ने एक घंटे से ज़्यादा इंतज़ार किया था. इसके बाद हम तीनों ने लंदन की ओर निकलने का फ़ैसला किया था. काश कि हमने थोड़ा और इंतज़ार किया होता या फिर हम तय समय पर ही निकलते तो क्या पता कुछ और भाग्य होता. लेकिन आप बीते हुए समय को वापस तो नहीं कर सकते."
गैरी सोबर्स की आत्मकथा के हादसे के जिक्र वाले पन्नों से गुजरते हुए पता चलता है कि यात्रा के दौरान तीनों ठीक उसी तरह से चल रहे थे जैसे कि यार दोस्तों के साथ लोग यात्राएं करते वक्त होते हैं. तीनों इस बात से ख़ुश थे कि एक घंटे के इंतज़ार से जो देरी हुई है, उससे अब लंदन में मिलने वाला ट्रैफिक जाम नहीं मिलेगा.

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'टकराने की आवाज़'
तीनों के बीच बारी-बारी से कार चलाने की बात भी हुई. नॉटिंघम शायर के रेडक्लिफ इलाके से लंदन की दूरी में करीब चार घंटे का वक्त लगता था और सबसे पहले कार कोली स्मिथ ने चलाई और कुछ दूरी के बाद उन्होंने कार टॉम को चलाने के लिए दे दी. जब गैरी सोबर्स की बारी आयी तब टॉम बगल वाली सीट पर बैठे और कोली पीछे वाली सीट पर सोने चले गए थे.
गैरी सोबर्स ने उन पलों के बारे में लिखा है, "हमलोग स्टाफोर्डशायर में ए34 नंबर स्टोन के पास थे, यही कोई तड़के 4.45 का समय था, रास्ते में आगे मोड़ था. मुझे आगे से दो चमकदार लाइट्स आती दिखीं और मेरे पास कुछ भी करने का वक्त नहीं था. मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया था."
"मुझे केवल इतना याद है कि टकराने की आवाज़ हुई थी. बाद में मुझे पता चला था कि 10 टन तक मवेशियों को ढोने वाले ट्रक से मेरी कार सीधी जाकर टकरा गई थी. कुछ पल के लिए मैं बेहोश भी हो गया था."
"कुछ पलों के बाद जब होश आया तो मैंने देखा कि टॉम ज़ोरों से चिल्ला रहा था. ऐसा लग रहा था कि वो बहुत दर्द में है. कोली ज़मीन पर लेटा हुआ था. मैंने घबराते हुए पूछा लिटिल मैन, हाउ आर यू."
गैरी सोबर्स ने लिखा है, "कोली ने मुझसे कहा कि मैं पूरी तरह ठीक हूं, तुम टॉम को देखो. मैं टॉम के पास गया और उसकी मदद करने लगा. जब तक एंबुलेंस नहीं आयी, तब तक मैं टॉम को दिलासा देता रहा. हालांकि मेरी कलाई की हड्डी टूट चुकी थी, आंखों के पास कट के निशान थे और बाएं हाथ में चोट था."
अस्पताल में तीनों क्रिकेटर को अलग अलग कमरों में रखा गया. सोबर्स की जब आंख खुली तो उन्होंने सबसे पहले कोली के बारे में ही पूछा, टॉम के बारे में नहीं.
इसकी संभवत एक वजह यह रही होगी कि सोबर्स और कोली 1957 के इंग्लैंड दौरे के वक्त से ही रूम पार्टनर भी थे. सोबर्स ने कोली स्मिथ के बारे में लिखा है, "1957 में पाकिस्तान के दौरे पर उसकी सलाह से मुझे फ़ायदा हुआ था, मुझे ख़राब अंपायरिंग का सामना करना पड़ रहा था और उसकी बातों से मुझे उस मनस्थिति से उबरने में मदद मिली. वह बहुत धार्मिक तबियत का आदमी था, उसे चर्च में लेसन पढ़ने पसंद था. तो हमलोग उसे टीम का उपदेशक भी कहते थे."
जब सोबर्स ने कोली के बारे में पूछा तो डॉक्टरों ने बताया कि कोली अचेतावस्था में है और उसका स्पाइनल कॉर्ड क्षतिग्रस्त हो चुका है. यह सुनकर सोबर्स को यक़ीन ही नहीं हुआ. तीन दिनों तक डॉक्टरों की तमाम कोशिशें भी कोली स्मिथ को बचा नहीं सकीं. नौ सितंबर को कोली स्मिथ महज 26 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए. उसके निधन पर वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष जे.एफ. डायरे ने कहा था, "वे उस तरह के खिलाड़ी थे जो खेल को खेल के लिए खेलते थे और उनका शानदार भविष्य सामने था."

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विज़डन क्रिकेट पत्रिका के मुताबिक उस वक्त मेलबर्न क्रिकेट क्लब के असिस्टेंट सेक्रेटरी एस.सी. ग्रिफिथ ने कहा था, "यह बहुत दुखद है, कोली के दिल में भविष्य का क्रिकेट था."
बहरहाल, सोबर्स पर सावधानी से कार नहीं चलाने का जुर्माना लगा जो 10 पाउंड का था. इस हादसे ने सोबर्स को भी दहला दिया था. उन्हें इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ में हिस्सा लेने के लिए वेस्टइंडीज़ जाना था, इस सिरीज़ में स्मिथ को भी शामिल होना था. लेकिन स्मिथ की मौत हो गई थी और सोबर्स मानसिक रूप से खेलने की स्थिति में नहीं थे. वे वेस्टइंडीज़ भी नहीं लौटे.
स्मिथ की मौत का सोबर्स पर ऐसा असर हुआ कि उन्होंने खुद को शराब में डुबो लिया. सोबर्स ने खुद लिखा है, "जब हम साथ खेलते थे, तो बहुत ज़्यादा नहीं पीते थे. उसके नहीं रहने से मैंने पीना ज़्यादा कर दिया था. मैं भाग्यशाली रहा कि इसका बहुत असर मेरे खेल पर नहीं पड़ा लेकिन मैं रात रात भर जगकर पीता रहता था. मैं सारी रात जगकर पीता था."
सोबर्स ने लिखा है, "मेरे दिमाग़ में जो तूफ़ान चल रहा था, उसका तनाव इतना ज़्यादा था कि मैं जो भी पीता था, उसका कोई असर नहीं हो रहा था. चाहे वो स्कॉच हो या फिर ब्रैंडी."
सोबर्स जब ऐसे दौर से गुजर रहे थे तब इंग्लैंड में रह रहे वेस्टइंडीज़ के कुछ पुराने क्रिकेटरों ने उनको पटरी पर लाने में मदद की.
अपने सीनियरों के योगदान के बारे में सोबर्स ने लिखा है कि वेस्टइंडीज़ के पूर्व लेग स्पिनर और डॉ. सीबी बेर्टी क्लार्क ने मेरे ऊपर काम करना शुरू किया और जैमका के आल्फ गोवर और स्टेनली गुडरिच ने मिडिलसेक्स के नेट्स पर मुझे अभ्यास कराया.
कुछ समय बाद सोबर्स को एहसास हुआ कि वेस्टइंडीज़ क्रिकेट ने कोली स्मिथ को खो दिया है और उनके शराब में डूबने से दोहरा नुकसान हो जाएगा. सोबर्स ने अपनी आत्मकथा में उन पलों के बारे में लिखा है, "मुझे यह भी एहसास हो गया था कि अब मुझे गारफील्ड सोबर्स के लिए नहीं खेलना होगा बल्कि मुझे दो लोगों की ज़िम्मेदारी निभानी होगी-कोली और मेरी खुद की. इस एक फ़ैसले ने मेरे जीवन को बदला और मेरे कंधों पर हमेशा ज़िम्मेदारियों का बोझ डाल दिया."
हादसे तीन महीने बाद सोबर्स वेस्टइंडीज़ पहुंचे और इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहला टेस्ट मैच खेला जाना था. सोबर्स ने इस मैच के बारे में लिखा है, "मुझे क्रीज पर उतरते ही ध्यान था कि मुझे दो लोगों के लिए खेलना है, उतना योगदान करना है. मैं हर रन के साथ कोली को याद करता रहा. जब फ्रेड ट्रूमैन ने मुझे क्लीन बोल्ड किया तब तक मैं 226 रन बना चुका था. कुछ सप्ताह के बाद मैंने कोली के होम ग्राउंड पर 147 रनों की पारी खेली. उसके बाद वह हमेशा मेरे साथ रहा."

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सोबर्स की बातों में दम लगता है क्योंकि उन्होंने उसके बाद लंबे समय तक क्रिकेट खेला अपने औसत को बेहतर बनाया. 93 टेस्ट मैचों में आठ हज़ार से ज़्यादा रन बनाए और हादसे के बाद टेस्ट क्रिकेट में 200 से ज़्यादा टेस्ट विकेट चटकाए. कुल 235 विकेट उनके नाम हैं. और उनकी गिनती टेस्ट क्रिकेट के महान ऑलराउंडरों में होती है.
सोबर्स 87 साल के हो चुके हैं और क्रिकेट के तमाम आयोजनों में दिखते रहे हैं जबकि टॉम ड्यूडनी भी 89 साल की उम्र में जीवित हैं.
दूसरी ओर जब कोली स्मिथ का शव जब जमैका पहुंचा तो विजडन और ईएसपीएन क्रिकइंफो के मुताबिक उनके अंतिम संस्कार में 60 हज़ार लोग जमा हो गए थे. यह दर्शाता है कि कोली की क्षमता को लेकर कितना भरोसा था.
उनको लेकर जमैका के पत्रकार कैन चैपलिन ने 'द हैप्पी वारियर' नाम से किताब भी लिखी. जमैका के पेन मेरी कब्रगाह में जहां कोली को दफ़नाया गया वहां लिखा गया, "कीन क्रिकेटर, अनसेल्फिश फ्रेंड, वर्थी हीरो, लॉयल डिस्पिल एंड हैप्पी वारियर." उनकी याद में कोली के घरेलू इलाके में एक सड़क का नाम रखा गया - कोली स्मिथ रोड.
सोबर्स हमेशा कोली स्मिथ को याद करके खेलते रहे, जबकि दुनिया कोली स्मिथ को याद करने के लिए कहती रही- द अदर सोबर्स दैट वेस्टइंडीज़ लॉस्ट.
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